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Sunday, 19 January 2020

कम्फर्ट जोन (comfort zone)

कम्फर्ट जोन (comfort zone )
 कंफर्ट- आराम,  सुकून....जोन - दायरा,  क्षेत्र.
 आप सोच रहे होंगे कि मैं क्या इनका मीनिंग बता रही हूं... यह तो हम सबको मालूम है.... मुझे मालूम है फ्रेंड्स...  आप सब बहुत इंटेलिजेंट है... और सब इसका मतलब जानते हैं.😉
यहाँ मैं  बात कर रही हूँ  कंफर्ट जोन की... जो हर आदमी अपनी जिंदगी में बनाकर रखता है और नेचुरल हैं की वो अपने बनाये हुए कम्फर्ट  जोन  में बहुत सुरक्षित,  बहुत सुकून महसूस करता है और  करना भी चाहिए आखिर ये कम्फर्ट जोन उसका ही बनाया हुआ है और हर किसी का कम्फर्ट जोन होना भी चाहिए क्यूंकि आदमी अपने बनाये हुए कम्फर्ट जोन में बहुत खुश भी रहता हैं और खुशी से बढ़कर क्या चीज है.
हर किसी का कंफर्ट जोन अलग अलग होता है... स्टूडेंट्स,  बच्चे अपने बनाए हुए फ्रेंड्स,  स्कूल, अपने घर को कंफर्ट जोन कहते हैं... जैसे ही उनको यहां से हटा कर कहीं अलग भेजा जाता है या कुछ अलग पढ़ाया जाता है वह घबरा जाते हैं.... बड़े लोग अपने जमे जमाये बिजनेस, सर्विस को कम्फर्ट जोन   कहते हैं.... लेडीज अपने घर, अपनी किचन,  अपनी फैमिली,  अपनी सोसाइटी में कंफर्ट जोन में रहती हैं.
जब भी कोई इनसे कहता हैं  इससे कुछ अलग करो, कोई नया बिजनेस करो,  कोई  नया जॉब, अपनी हॉबी ट्राई करो तो हम घबरा जाते हैं...uneasy   हो जाते हैं और मना कर देते हैं.... giveup कर देते हैं.
 पर अगर हम हमारे आस पास बहुत से लोगो को  देखे ... जैसे कि मैरीकॉम,  सानिया मिर्जा उन्होंने शादी, बच्चे होने के बाद भी giveup नहीं किया...  अपने कंफर्ट जोन से बाहर आयी  और आज पूरी दुनिया में अपना नाम किया और हम सब आज उनकी और प्रशंसा से देख रहे हैं... पर आपने सोचा कि यह भी मना कर देती अपने कंफर्ट जोन  से  बाहर आने को तो क्या हम उनकी ऐसे ही प्रशंसा करते.
नितेश तिवारी डायरेक्टर ऑफ दंगल,  छिछोरे और भी बहुत सी मूवीज के डायरेक्टर... जानते हैं इन्होंने आईआईटी मुंबई से इंजीनियरिंग करी... पर इनका बहुत मन था इस फील्ड में आने का... उन्होंने  हिम्मत करके अपने कंफर्ट जोन से बाहर आकर इधर हाथ आजमाया और आज हम सभी इनकी  मूवीस के दीवाने हैं. सुशांत सिंह राजपूत, कृति सेनन, दिशा पाटनी ये  सब इंजीनियरिंग कर रहे थे पर इन्होंने भी हिम्मत करके अपना लक दूसरे फील्ड में आजमाया.
मार्क  जुकरबर्ग, जेफ़ बेजोस और भी बहुत बड़े बड़े बिजनेसमैन,इंडस्ट्रियलिस्ट सबने अपना आराम का दायरा छोड़कर अपना एक अलग मुकाम बनाया और पूरी दुनिया ने इनका लोहा माना.
इसलिए मेरा मानना है कि अगर हमें कुछ अलग करना है... दुनिया में हमारा नाम करना है... अपना हुनर., अपनी कला,  अपना टैलेंट सब के सामने लाना है तो हम सबको अपने कंफर्ट जोन से बाहर आना ही पड़ेगा.... हां मुश्किल जरूर है पर उसका जो फल होगा वह उतना ही मीठा होगा और उसकी मिठास का अपने को अंदाजा भी नहीं होगा.
वैसे  ये भी जरूरी नहीं कि हम कम्फर्ट जोन  से बाहर आकर सक्सेस ही होंगे ,  पूरी दुनिया में हमारा नाम ही होगा.. पर एटलीस्ट हम कोशिश तो कर रहे हैं...और इससे हमें  कुछ सीखने को ही मिलेगा तो क्या आप तैयार हैं अपने अपने कम्फर्ट जोन  से बाहर आने के लिए पर हां  पहले आप अपने को सिक्योर कर ले फिर ही  इससे बाहर आए.
 कई लोग अपने बनाए कंफर्ट जोन में   इसलिए भी  रहते  हैं कि वह डरते हैं कि दुनिया क्या कहेगी, बात बनाएगी, हसेगी...  तो दोस्तों मेरा मानना हैं की वो तो वैसे  भी बात बनाएंगी... अगर आप कम्फर्ट जोन में हो तब भी और कुछ अलग करते हो तब भी.. तो मेरी तो सलाह हैं    एक बार बाहर आकर तो देखो कम से कम आपको  यह मलाल  तो नहीं रहेगा कि देखो हमने try ही नहीं किया... औरों के लिए नहीं अपने लिए.... एक बार  बाहर आकर तो देखो. 🤗🤗

10 comments:

  1. Very true di.sabko apne apne comfort Jones se bahar ana chahiye kuchh alag aur naya kar dikhane ke liye.nicely described post by you

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  2. Thanku soooo much ankita 🙏🙏🤗🤗

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  3. Leaving our comfort zone ultimately helps us to deal with change and making change in a much better way..

    Very well said Di... 😊😊👍👍

    Aapne bhi blogs likhne ki shuruwat karke apne comfort zone ka daayara badhaya hai. Jinhe ab world wide follow bhi kiya ja raha hai.😉

    Keep it up..👍👍😊😊

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  4. 😀😀😀🤣🤣🤣🙈🙈🙈🙏🙏

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  5. Superb thoughts di👌
    Well written
    Hum bhi try karenge apne comfort zone se bahar nikal kar kuch naya karein

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