उदाहरण 1
'ऐसा क्यों सोचते हो तुम कुछ नहीं कर सकते!मुझे देखो मैंने जिंदगी में क्या नहीं किया, कितना नाम है मेरा,शोहरत है,रुतबा है फिर तुम्हारा क्यों नहीं हो सकता!अरे कुछ करोगे नहीं तो कहां से सफलता मिलेगी,सफलता के लिए कुछ करना पड़ता है!बैठे-बैठे कोई मुंह में निवाला नहीं दे देगा!मैंने देखो कितना संघर्ष किया तब जाकर जिंदगी के इस मोड़ पर खड़ा हूं '!
उदाहरण -2
'ऐसा क्यों सोचते हो कि तुम कुछ नहीं कर सकते तुम कभी सफल नहीं हो सकते!जरा ढंग से देखो तुम्हारे अंदर कितना टैलेंट है एक बार बिना झिझक के अपना टैलेंट निकाल कर तो देखो!अपनी परिस्थितियों के अनुसार और अपनी योग्यता के अनुसार काम करो! हर कोई एक सामान नहीं होता सबके गुण अलग अलग होते हैँ, बस अपने उस गुण को पहचानो फिर देखना दुनिया में तुम्हारा भी नाम होगा और तुम भी सफल होंगे '!
ऊपर के दोनों उदाहरण में क्या फर्क है, दोनों कोई मोटिवेशनल स्पीकर के हैं!दोनों लोगों को जागरुक कर रहे हैं पर पहले उदाहरण में लोगों को लग रहा है जैसे कि वह हमें समझा नहीं रहा हमें प्रेरित नहीं कर रहा बल्कि उपदेश दे रहा है, भाषण दें रहा हैँ !आज खुद प्रसिद्ध हो गया तो जरूरी तो नहीं हम भी हो जाए सब की योग्यता और परिस्थितियां अलग अलग होती हैं!
पर दूसरे उदाहरण में वह कोई उपदेश नहीं दे रहा वो भाषण नहीं लग रहा वो अपने गुण बताने की बजाय हमारे गुण बता रहा हैँ!वह हम पर विश्वास कर रहा है उसको हम पर यकीन है!हमारे अंदर भी गुणों की खान है बस हमें उसे निकालना है हमारी परिस्थितियों और हमारी योग्यता के अनुसार!
तो अगर आप भी किसी को समझाना चाहते हैं तो केवल उपदेशक नहीं बनना होगा उसके सहायक बनिए उसके हमराज बनिए! यकीन मानिए वह आपसे प्रभावित होगा खुद प्रेरित होगा!उपदेशक तो कोई भी बन सकता है जरूरी नही कोई सर्वगुन्न संपन्न या बहुत ही सफल आदमी ही उपदेशक बने! हर व्यक्ति जिंदगी के हर मोड़ पर अपने साथ रहने वाले को प्रेरित करते हैं उसका मोटीवेटर बनता हैँ!
पर उसको भाषण मत दीजिए! अपने गुण बताने की बजाय उसके गुणगान कीजिये! यकीन मानिये आप भी किसी प्रेरक से कम नहीं हो सकते! तो हैँ तैयार आप अपनों के प्रेरक बनने के लिए!