कैसे भूल सकती मैं तेरी वो पहली मुस्कान,
जिस पर कुर्बान थे, मेरे ये दोनों जहान !
याद हैँ तेरी वो मीठी सी हसीं,
जिसमे मेरी सारी दुनिया थी बसी !
जब तू चलने लगी डगमग डगमग नन्हे इन कदमो से,
हटा दी मैंने तेरी राह की सारी अडचन,
तुझे संभल कर पग भरने के लिए !
तेरी वो मुँह से निकलती जरा सी भी आह,
छीन लेती मेरा चैन, और लूट लेती जैसे मेरा सारा जहाँ !
जिस चीज पर भी तू रख देती हाथ,
जब तक ना दे दू तुझे, नहीं छोड़ती तेरा वो साथ !
फिर आज जब तू बड़ी होने लगी,
और मुझसे कही ज्यादा इस दुनिया को तेरी विदाई की चिंता होने लगी !
पर ये मेरा वादा हैँ तुझसे, ढूंढूंगी तेरे लिए कोई ऐसा वर,
जो तेरे सारे दुख, मुसीबत, एक चुटकी में लेगा बस हर !
एक बार नहीं, सौ बार मैं सोचूंगी,
ऐसे ही नहीं बस तेरा हाथ किसी को भी मैं सौपूंगी !
बचपन में तेरी गुड़िया के लिए भी जब ढूंढ़ती थी मैं गुड्डा,
तेरे सुकून के लिए ठोक बजा कर उसे भी मैं परखती !
फिर अब तो हैँ मेरी इस गुड़िया की बारी, 😘😘
जिस पर जाऊ मैं बलिहारी, 🤗🤗
जिसके लिए मैं सारी दुनिया ही हारी,
ले लू उसकी सौ सौ बलाये, और जाऊ मैं वारी,
बस अब कर ली तुझे तेरे सपनो के राजकुमार से मिलवाने की तैयारी !👫