मई का महीना,चिलचिलाती गर्मी, तापमान 45 डिग्री से ऊपर! घर का हर सदस्य गर्मी से त्राहि-त्राहि कर रहा!कूलर पंखे एसी में भी किसी को चैन नहीं मिल रहा! सब बार-बार देख रहे कही ए. सी.खराब तो नहीं हो गया!इस समय किसी की भी इतनी हिम्मत नहीं जो इन सब के आगे से एक क्षण को भी उठ जाये!
उधर घर की गृह लक्ष्मी प्रचंड गर्मी में रसोई में अपने घरवालों की पसंद का खाना बना रही थी! गर्मी में किसी को खाना भाता भी नहीं है इसलिए वो पूरा जतन कर रही कि सबकी पसंद का ऐसा खाना बनाएं जो सब खुश होकर खा ले! पसीने की बूंदे उसके माथे पर चू रही थी! कमर,गर्दन शरीर का कोई हिस्सा नहीं बचा होगा जहां से पसीना छलक ना रहा हो! वो बार बार अपना पसीना पोंछते हुए सबकी पसंद का ध्यान रखते हुए पूरे मन से खाना तैयार कर रही! सब्जी चावल दाल सब बना लिया बस अब रोटी सेकने की बारी थी!
मुश्किल से दो रोटी भी नहीं सेंकी होंगी की उसके मोबाइल पर बेटे का फ़ोन आ गया मैग्गी की फरमाइश थी पर गरमी में उठ कर आने की हिम्मत नहीं थी इसलिए घर की घर में फ़ोन कर दिया! सौम्या ने गैस बंद कर पहले बेटे के लिए मैग्गी बनायीं! इधर उसने दो चार रोटी और सेंकी की याद आया एक बार गरमी में सबके लिए शिकंजी बना दू, गैस बंद कर शिकंजी बनायीं, तभी छाछ की फरमाइश आ गयी! सबको शिकंजी छाछ देकर फिर वो रोटी सेकने लगी!
अब गरमी से वो भी बेहाल हो रही! उसने फूलके गिने,सबके हिसाब से पूरे हो गए! बस अब आखिर की उसकी दो रोटी सेकनी बची थी!अब तक वो भी गरमी से निढाल हो चुकी थी! पूरा खाना मन से बनाया पर आखिर की वो दो रोटी उसको किसी पहाड़ पर चढ़ने से कम नहीं लग रहा था!उसने बेमन से रोटी बनायीं, ना उसके आकार पर ध्यान दिया ना उसकी सिकाई पर! बस कैसे भी करके उसने वो दो रोटी सेक कर गैस बंद कर दी! अगर कोई भी इन दो रोटी और बाकी की रोटी पर नजर डालता तो यकीन ना करता की ये सारी रोटी एक ही बंदे ने बनाई है!आखिर सौम्या ने अपनी वह कच्ची पक्की दो रोटी सेक कर गैस बंद करी और उन आखिर की दो रोटी को मोड़ कर रखा दिया ताकि गलती से भी किसी को ना दे दे इ! अब उसको ऐसा लग रहा जैसे उसने कोई गढ़ जीत लिया हो!