Jindagi ek unsuljhi paheli

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Thursday, 7 January 2021

हाउस वाइफ /सैलरी (मुआवजा )

 इन दिनों दो खबर चल रही हैं,जिस पर रह रहकर ध्यान जा रहा है, कमल हासन ने कहा,' अगर मैं चुनाव जीत गया तो गृहणियों   को भी हर महीने सैलरी मिलेगी', सुनकर अच्छा लगा चलो हमें हमारे काम का मेहनताना मिलेगा, फिर  अगले ही पल दिमाग में आया, मेहनताना निश्चित कैसे होगा, किस किस काम का मेहनताना देंगे,चलो खाना बनाना, घर संभालना,सफाई इन सब का तो दे देंगे,पर वह काम जो किसी को दिखते  भी नहीं,उनका  कैसे मिलेगा,जैसे कि रात को जैसे ही बिस्तर पर लेटी नहीं तभी दिमाग में आया दूध में जामन नहीं लगाया, छोले नहीं भिगोए,सुबह खाना बन गया तो शाम के खाने की चिंता, घर का कोई सदस्य बीमार ना हो, दिन रात उनकी सेहत के  ख्याल में अपनी सेहत से खिलवाड़,अपने से पहले अपनों के लिए सोचना, खुद को सब के बाद में रखना और उसके बाद में भी जब सब उसको अनदेखा करते, उसकी भावनाओं की परवाह नहीं करते, जरा सी गलती होने पर उस को कटघरे में खड़ा कर देते जैसे कोई घोर अपराधी  हो,और इन सबके बावजूद कोई पूछता है कि करती क्या है तो सब बोलते कुछ नहीं एक गृहणी  है, दिन भर करती ही क्या हो तुम, खुद भी यही कहती कि मैं कुछ नहीं करती, तो कितनी सैलरी निश्चित करोगे!अगर करोगे तो अफॉर्ड  नहीं कर पाओगे, बहुत महंगी पड़ेंगी हम, हां फिर भी देना ही चाहते हो तो हमारे काम के महत्व को  समझो, हम को तवज्जो दो, हमारा सम्मान करो, दो पल हमसे प्यार से बोलो, समझो हम घर के केंद्र बिंदु हैं, हमारे बिना तुम्हारा वजूद नहीं, कभी-कभी हमें सॉरी  और थैंक यू बोल दो,बस मिल गई हमें हमारी सैलरी, माना यह देने में आपको थोड़ी झिझक होगी, और आपके अहम को  भी ठेस लग सकती है,पर अगर देना ही  चाहते तो बस इतना सा दे दो, पैसे तो तुम तुम्हारे पास ही रख लो!

एक दूसरी खबर ने ध्यान आकर्षित किया,हाईकोर्ट ने एक दंपति की मोटरसाइकिल दुर्घटना में मौत के बाद औरत के परिजनों को कम  मुआवजा दिया और कहा ये एक आम गृहणी थी, कुछ नहीं करती थी, तब  सुप्रीम कोर्ट ने कहा, औरत को भी बराबर का मुआवजा  मिलेगा, वो सिर्फ एक गृहणी  नहीं पूरी घर की अर्थव्यवस्था संभालती, घर संभालती उसका महत्व आदमी से बिल्कुल कम नहीं!

सच  इस खबर ने इतनी खुशी दी, आज मुझे मेरे गृहणी होने पर गर्व है, उसको महज़  मुआवजा नहीं मिला, हमारे काम का सम्मान मिला, हमारी  भावना, हमारे वजूद को पहचान मिली, भले उसके परिजनों को  मुआवजा मिला, पर  और बाकी सारी हाउस वाइफ को सम्मान मिला, पहचान मिली, सच इससे  बेहतर मुआवजा क्या हो सकता है!

Saturday, 2 January 2021

दुआओ की वैक्सीन

2021 भी आ गया और आज उसका दूसरा दिन है, सच समय कैसे निकल जाता है पता ही नहीं चलता,वैसे भी इस बार 2021 का इंतजार जिस बेसब्री से किया शायद ही कभी किसी साल का किया हो, 2020 ने हम सबको जो मंजर दिखाया शायद ही कभी किसी ने सपने में सोचा होगा, बच्चे से लेकर बड़े तक बस भगवान से प्रार्थना कर रहे,यह मुसीबत कैसे भी करके कम हो जाये, पूरे संसार में सब एक ही मुसीबत से परेशान,ऐसा तो सदियों में नहीं हुआ I

हम सबने और सालों की तरह 2020 का स्वागत भी बहुत धूमधाम से किया, किसको पता  था हम किस आपदा के पास आ रहे हैँ Iफरवरी-मार्च से कोरोना धीरे-धीरे देश में भी पैर पसारने लगा, हमको लगा शायद हम पर इतना असर नहीं होगा हम कोरोना को भी  बड़ी आसानी से हरा देंगे I

 जब सबसे पहले जनता कर्फ्यू लगा तो लोगों को एक नया अनुभव लगा,इतना सन्नाटा....पक्षियों की आवाज दिन में भी साफ सुनाई दे रही,बाहर जो भी निकल रहा पुलिस के डंडे से उसका स्वागत हो रहा! फिर 3 दिन का लॉक डाउन, फिर 21 दिन का, सब ने पहली बार खुद से कामवाली बाइयों को काम पर आने से मना कर दिया, घर में सबके काम बांट दिए गए, किसी को जिम्मा झाड़ू का, तो किसी को पोंछे का,तो किसी के जिम्मे बर्तन,  किसी के जिम्मे खाना , पहली बार सबको पता लगा कि जो  गृहणी सबकी नजरो मे दिन भर  करती ही क्या थी, वो वाकई कितना कुछ करती हैँ और उफ्फ भी नहीं करती I

बाजार से सामान आता तो  जैसे कोई विस्फोटक सामग्री खुद ही घर में ले आए हैं, लाने वाला फटाफट से सबसे पहले नहाने जाता साबुन से हाथ धोता, सब्जियों को नमक और सोडे  से ना जाने कब तक धोते, किराने के सामान को तो तीन-चार दिन तक हाथ नहीं लगाते,हर घर में शेफ  पैदा होने लगे,किसी के घर जलेबी तो किसी के घेवर, कही  गोलगप्पे के चटखारे,  तो कहीं समोसे कचोरी, सब अपने-अपने वीडियो शेयर कर रहे!

शुरू में सब को बहुत मजा आ रहा, ना बच्चों को स्कूल की टेंशन, ना बड़ो को  ऑफिस दुकान की टेंशन,ना सुबह का पता ना शाम का! लूडो कैरम, चैस जो धूल  खा रहे, जगमगाने लगे I

जो बुजुर्ग  अकेले बैठे बुढ़ापा काट रहे, उनके चेहरे पर रौनक आ गई, छोटे से लेकर बड़े जिनको दिन भर  सांस लेने की फुर्सत नहीं, एक  घर में रहकर  भी  दर्शन नहीं होते अब दिन भर उनसे घिरे रहते, महाभारत, रामायन हर घर में देखते, दूरदर्शन जिसको सब भूल गए, वापस उसकी मांग बढ़ गयी I

जिन  बच्चों को मोबाइल से दूर रखते, अब माता-पिता खुद उनके हाथों में मोबाइल देने  लगे, क्यूंकि  स्कूल मोबाइल में सिमट  गया I

फिर एक नजारा सबने देखा, गरीब मजदूर, नंगे पैर, कड़ी धूप में  अपने घर के लिए पैदल रवाना हो गए, उनकी बेबसी देख शायद सबका दिल ही पसीजा होगा,  बहुत से लोगों ने भूखों के लिए अपने घर के द्वार खोल दिए, जिसकी जितनी सामर्थ्य उतनी मदद कर रहे I

पुलिस, डॉक्टर  को भगवान का दर्जा मिलने लगा,वैसे भी मंदिर, मस्जिद सब बंद थे, पर वो अपने घर में भी अकेले हो गए,  उनके घरवाले ही उनके  पास जाने से  कतराने  लगे,अपनों से मिले उनको महीने हो जाते,उनकी और उनके  अपने की बेबसी बस महसूस ही  कर पाए I

रोज मोबाइल में केस देखते कितने केस  आ रहे,जिस कॉलोनी में कोरोना पॉजिटिव मिलता वो जैसे मौत का मंजर दिखती, लोग वहां जाने से भी कतराते,पहली बार पॉजिटिव शब्द इतना नेगेटिव रहा!

भरी गर्मी में जब कुल्फी आइसक्रीम सब  की जान होती,उसको   हटाकर सब काढ़ा, गरम पानी का  सेवन कर रहे,बार-बार ऑक्सीजन का लेवल नाप रहे!

सबने मिलकर  ताली बजाई, थाली बजाई, गो कोरोना गो जैसे राष्ट्रगीत हो गया, दिए जलाए, फिर लगा गर्मी में तापमान वृद्धि से कोरोना  अपने आप दम तोड़ देगा,  जिस गंगा को साफ करने के लिए करोड़ों का बजट बनाया वह अपने आप ऐसी साफ हुई जिसकी कभी किसी ने कल्पना भी नहीं करी होगी,प्रदूषण का नामो निशान मिट गया, सड़कों पर जानवर बेखौफ घूम रहे और हम इंसान पिंजरे में डर कर कैदी बने हुए!

फिर धीरे-धीरे लॉकडाउन खुलने लगा और लोग पूरी एहतियात से बाहर निकलने लगे, धीरे-धीरे लोग छोटे-छोटे शादी और समारोह भी करने लगे,मेहमानों की संख्या सीमित कर दी, शादियों के ऐसे नजारे की  किसी ने कल्पना नहीं करी होगी,जहा दूल्हा दुल्हन भी  मुखोटे में होंगे, जिस घर में शादी का कार्ड आने पर खुशी होती, अब माथे पर पसीना छलक आता!

अब जैसे ही सब थोड़ा बेफिक्र होने लगे तो एक नये स्ट्रैन ने सबकी  नींद उड़ा दी, वैसे भारत की नई वैक्सीन आ गयी, आओ  मिलकर दुआ करें कभी भी 2020 जैसा साल वापस ना देखना पड़े,ये साल सबके लिए हर   तरीके से अच्छा हो, एक साथ इतने हाथ उठेंगे तो शायद कोरोना की वैक्सीन ये दुआएं बन जाये 🙏🙏🙏🙏