2021 भी आ गया और आज उसका दूसरा दिन है, सच समय कैसे निकल जाता है पता ही नहीं चलता,वैसे भी इस बार 2021 का इंतजार जिस बेसब्री से किया शायद ही कभी किसी साल का किया हो, 2020 ने हम सबको जो मंजर दिखाया शायद ही कभी किसी ने सपने में सोचा होगा, बच्चे से लेकर बड़े तक बस भगवान से प्रार्थना कर रहे,यह मुसीबत कैसे भी करके कम हो जाये, पूरे संसार में सब एक ही मुसीबत से परेशान,ऐसा तो सदियों में नहीं हुआ I
हम सबने और सालों की तरह 2020 का स्वागत भी बहुत धूमधाम से किया, किसको पता था हम किस आपदा के पास आ रहे हैँ Iफरवरी-मार्च से कोरोना धीरे-धीरे देश में भी पैर पसारने लगा, हमको लगा शायद हम पर इतना असर नहीं होगा हम कोरोना को भी बड़ी आसानी से हरा देंगे I
जब सबसे पहले जनता कर्फ्यू लगा तो लोगों को एक नया अनुभव लगा,इतना सन्नाटा....पक्षियों की आवाज दिन में भी साफ सुनाई दे रही,बाहर जो भी निकल रहा पुलिस के डंडे से उसका स्वागत हो रहा! फिर 3 दिन का लॉक डाउन, फिर 21 दिन का, सब ने पहली बार खुद से कामवाली बाइयों को काम पर आने से मना कर दिया, घर में सबके काम बांट दिए गए, किसी को जिम्मा झाड़ू का, तो किसी को पोंछे का,तो किसी के जिम्मे बर्तन, किसी के जिम्मे खाना , पहली बार सबको पता लगा कि जो गृहणी सबकी नजरो मे दिन भर करती ही क्या थी, वो वाकई कितना कुछ करती हैँ और उफ्फ भी नहीं करती I
बाजार से सामान आता तो जैसे कोई विस्फोटक सामग्री खुद ही घर में ले आए हैं, लाने वाला फटाफट से सबसे पहले नहाने जाता साबुन से हाथ धोता, सब्जियों को नमक और सोडे से ना जाने कब तक धोते, किराने के सामान को तो तीन-चार दिन तक हाथ नहीं लगाते,हर घर में शेफ पैदा होने लगे,किसी के घर जलेबी तो किसी के घेवर, कही गोलगप्पे के चटखारे, तो कहीं समोसे कचोरी, सब अपने-अपने वीडियो शेयर कर रहे!
शुरू में सब को बहुत मजा आ रहा, ना बच्चों को स्कूल की टेंशन, ना बड़ो को ऑफिस दुकान की टेंशन,ना सुबह का पता ना शाम का! लूडो कैरम, चैस जो धूल खा रहे, जगमगाने लगे I
जो बुजुर्ग अकेले बैठे बुढ़ापा काट रहे, उनके चेहरे पर रौनक आ गई, छोटे से लेकर बड़े जिनको दिन भर सांस लेने की फुर्सत नहीं, एक घर में रहकर भी दर्शन नहीं होते अब दिन भर उनसे घिरे रहते, महाभारत, रामायन हर घर में देखते, दूरदर्शन जिसको सब भूल गए, वापस उसकी मांग बढ़ गयी I
जिन बच्चों को मोबाइल से दूर रखते, अब माता-पिता खुद उनके हाथों में मोबाइल देने लगे, क्यूंकि स्कूल मोबाइल में सिमट गया I
फिर एक नजारा सबने देखा, गरीब मजदूर, नंगे पैर, कड़ी धूप में अपने घर के लिए पैदल रवाना हो गए, उनकी बेबसी देख शायद सबका दिल ही पसीजा होगा, बहुत से लोगों ने भूखों के लिए अपने घर के द्वार खोल दिए, जिसकी जितनी सामर्थ्य उतनी मदद कर रहे I
पुलिस, डॉक्टर को भगवान का दर्जा मिलने लगा,वैसे भी मंदिर, मस्जिद सब बंद थे, पर वो अपने घर में भी अकेले हो गए, उनके घरवाले ही उनके पास जाने से कतराने लगे,अपनों से मिले उनको महीने हो जाते,उनकी और उनके अपने की बेबसी बस महसूस ही कर पाए I
रोज मोबाइल में केस देखते कितने केस आ रहे,जिस कॉलोनी में कोरोना पॉजिटिव मिलता वो जैसे मौत का मंजर दिखती, लोग वहां जाने से भी कतराते,पहली बार पॉजिटिव शब्द इतना नेगेटिव रहा!
भरी गर्मी में जब कुल्फी आइसक्रीम सब की जान होती,उसको हटाकर सब काढ़ा, गरम पानी का सेवन कर रहे,बार-बार ऑक्सीजन का लेवल नाप रहे!
सबने मिलकर ताली बजाई, थाली बजाई, गो कोरोना गो जैसे राष्ट्रगीत हो गया, दिए जलाए, फिर लगा गर्मी में तापमान वृद्धि से कोरोना अपने आप दम तोड़ देगा, जिस गंगा को साफ करने के लिए करोड़ों का बजट बनाया वह अपने आप ऐसी साफ हुई जिसकी कभी किसी ने कल्पना भी नहीं करी होगी,प्रदूषण का नामो निशान मिट गया, सड़कों पर जानवर बेखौफ घूम रहे और हम इंसान पिंजरे में डर कर कैदी बने हुए!
फिर धीरे-धीरे लॉकडाउन खुलने लगा और लोग पूरी एहतियात से बाहर निकलने लगे, धीरे-धीरे लोग छोटे-छोटे शादी और समारोह भी करने लगे,मेहमानों की संख्या सीमित कर दी, शादियों के ऐसे नजारे की किसी ने कल्पना नहीं करी होगी,जहा दूल्हा दुल्हन भी मुखोटे में होंगे, जिस घर में शादी का कार्ड आने पर खुशी होती, अब माथे पर पसीना छलक आता!
अब जैसे ही सब थोड़ा बेफिक्र होने लगे तो एक नये स्ट्रैन ने सबकी नींद उड़ा दी, वैसे भारत की नई वैक्सीन आ गयी, आओ मिलकर दुआ करें कभी भी 2020 जैसा साल वापस ना देखना पड़े,ये साल सबके लिए हर तरीके से अच्छा हो, एक साथ इतने हाथ उठेंगे तो शायद कोरोना की वैक्सीन ये दुआएं बन जाये 🙏🙏🙏🙏
2020 ki sari yaade taza kr di ....ek naya anubhav tha hum sabke liye ...bahut khub !!!! well written risha
ReplyDeleteThanku dear, and wish you a very happy new year🙏🙏🙏🙏🙏🙏😍😍😍
ReplyDeletevery nice and heart touching di you described all the memories of 2020 step by step. Marvelous di👌👌👌👌Happy new year di and hope next year will be best for us
ReplyDeleteThanku ankita 🙏🙏🙏🙏, same to you, and hope for the best👍👍👍
ReplyDeleteजिंदगी न केवल पटरी पर लौटेगी, बल्कि रफ्तार भी पकड़ेगी। अब तक के शगुन भी कुछ ऐसा ही इशारा कर रहे हैं, उम्मीदों की किरणें चारों ओर से निकल रही हैं। अब इनके चमकने का इंतजार है। सब दो कदम आगे बढ़ा रहे है। हमें बस इस 2 में अपना 1 कदम जोड़कर इसे 21 बनाना है ।
ReplyDeleteबिलकुल सही कहा, hope for the best👍👍👍👍👍🙏🙏🙏🙏
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