Jindagi ek unsuljhi paheli

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Friday, 28 February 2020

देखो इंसानियत जल रही है 😔😔

देखो इंसानियत जल रही है..
यहाँ अमित मरा तो कही फिरदौस भी मरा है..
कही राधा विधवा हुई तो उधर सलमा भी बेवा हुई है...
कही चिराग अपने पापा को ढूंढ रहा है तो  सलीम भी अपने अब्बू को याद कर रो रहा है
गर रीमा अपने भाई की कलाई पर राखी नहीं बांध पायेगी तो सायरा भी ईद पर ईदी किससे लेगी.
खुशियाँ और दुख हिन्दू मुसलमान पूछ कर नहीं आते...
ये तो वो है जो इंसान का इंसान से भाईचारा नहीं देख पाते
अब वक्त नहीं है चुप बैठने का
उठो और देखो कौन हमें लड़ा रहा है
कौन इस आग में घी डाल रहा है
अब उठो.. अब बैठने का वक्त नहीं है
अगर अब भी नहीं उठे तो शायद कभी नहीं उठ पाओगे
अभी  तो दिल्ली ही जला है
पता नहीं और कितने शहर जलते देखते रह जाओगे.  🙏🙏😔😔

Tuesday, 25 February 2020

हैप्पीनेस क्लासेस 😊🤗

हैप्पीनेस क्लासेज 😊🤗
 आज से 20 से 25 साल पहले हम सोच सकते थे कि बच्चों के लिए स्कूल में हैप्पीनेस क्लासेज की जरूरत पड़ेगी... उनको खुश रहने का तरीका बताया जाएगा... नहीं... क्यों.... क्योंकि तब बच्चे वैसे ही खुश रहते थे... उनको खुश रखने के लिए कोई हैप्पीनेस क्लासेज की जरूरत ही नहीं थी.
वैसे तब उनके पास ना कोई मॉडर्न गेजेट्स थे... ना आज की तरह सारी फैसिलिटी थी... पर तब भी वह खुश रहते थे... क्योंकि तब बच्चों के ऊपर इतना प्रेशर नहीं होता था जितना अब  है... बच्चे तब भी पढ़ते थे...पर आज  की तरह कंपटीशन रेस में नहीं थे... उनके ऊपर  मार्क्स का, टीचर्स का, पेरेंट्स का,  स्कूल रिकॉर्ड का प्रेशर नहीं होता था.. बच्चे  बेफिक्र होकर पढ़ते थे...बेफिक्र होकर खेलते थे .
 आज जब  अमेरिका की फर्स्ट लेडी melenia trump दिल्ली के गवर्मेंट स्कूल की हैप्पीनेस क्लासेज में आई... तब पता चला उन क्लासेज का जो  सच में आज की जरूरत है.
आज बच्चों के पास  मॉडर्न गेजेट्स है, बेस्ट फैसिलिटीज, बेस्ट ट्यूटर है... पर अगर कुछ नहीं  है तो वह है 'खुशी '...pateince, satisfaction..और इसलिए सब कुछ होते हुए भी वो खुश नहीं है.. कही ना कही अकेले है, असंतुष्ट है... वो अच्छे मार्क्स जरूर ला रहे है... पर अच्छे नागरिक नहीं बन पा रहे... सही गलत का अंतर नहीं समझ पा रहे.. क्योंकी कोई समझ नहीं रहा कि बच्चों को मार्क्स और करियर के  अलावा  जिस चीज की जरूरत है वह है खुशी.. जब तक वह खुश नहीं रहेंगे... कहां से खुद के लिए और समाज के लिए बेहतर कर पाएंगे.
 और मैं तो कहती हूं यह हैप्पीनेस  क्लासेज की  जरूरत स्कूल में ही नहीं घरों में भी  है... पेरेंट्स को चाहिए कि वह बच्चों को आर्टिफिशियल  चीजें नहीं  नेचुरल  खुशी दे.. ऐसा एनवायरनमेंट दे ताकि   वह खुलकर अपनी बात कह सके.. खुल कर जी सके.
याद है पहले स्कूल्स में नैतिक शिक्षा की किताबें होती थी... जिसमें बच्चों को सही गलत की बातें बताई जाती थी... आज भी  बहुत जरूरत है उसी  नैतिक शिक्षा की. 🙏

Tuesday, 18 February 2020

लाफिंग बुद्धा, टर्टल =खुशियाँ, पैसा, पॉजिटिव एनर्जी 🤔🤔

लाफिंग बुद्धा, टर्टल =खुशियाँ, पैसा, पॉजिटिव एनर्जी 🤔

आजा बेटा खाना खा ले.... सुबह का गया हुआ है... भूख लग आयी  होगी... रामू की मां ने रामू से बोला तो वो  गुस्से में बोला... मां मुझे भूख नहीं है... मैं नहीं खाऊंगा खाना... क्यों बेटा.. क्या हुआ... क्यों नहीं खाएगा खाना... और इतना गुस्से में क्यों है...बापू से लड़ाई हुई है  क्या... मां आप और बापू  हमेशा मुझे कहते हो कि झूठ नहीं बोला कर... सच बोला कर... पर बापू खुद तो दिन भर  झूठ बोलते हैं और मुझसे भी झूठ बुलवाते है... अरे ये क्या कह रहा है बेटा ... तेरे बापू  तो कभी झूठ नहीं बोलते... और तुझसे क्यों झूठ बुलवाएंगे.... क्या कुछ भी बोले जा रहा है.... तो माँ बापू हर किसी से कहते हैं ये लाफिंग बुद्धा लेकर जाओ... आपके घर में खुशियां आएंगी... कोई दुख नहीं रहेगा.... यह फेंगशुई  लेकर जाओ... आपके घर में पॉजिटिव एनर्जी आएगी... और ये कछुआ लेकर जाओ आपके घर में पैसा आएगा... हाँ  तो सही तो कहते हैं बापू... इसमें गलत क्या है... क्यों माँ... क्यों गलत नहीं है... अपने घर में तो कितने सारे लाफिंग बुद्धा हैं, टर्टल है,  फेंगशुई है.... पर कहां है खुशियां... कहां है पैसा.... दो टाइम का खाना भी सही से नहीं मिलता... आधे टाइम तो तू भूखी रहती है.
 रामू की मां उसको प्यार से खाना खिलाते हुए बोली... बेटा यह सब तो अमीरों के लिए है.... उनके घरों  में रखने से उनके पास में पैसा आता है... खुशियां आती  हैं.... हमें तो इनको बेचने से कैसे तैसे दो  टाइम का खाना मिल जाता है.... क्या यह हमारे लिए खुशियां और पॉजिटिव एनर्जी नहीं है....ले देख आज मैंने तेरे लिए थोड़ी सी खीर बनाई है ... खा कर बता कैसी है ..कल एक बड़ी गाड़ी वालीे मेमसाहब आयी थी और बहुत सारे कछुए ले गई थी...   और ले ये 2 rs आज टॉफ़ी भी ले आना .... रामू अपनी मां के हाथ से खाना खाते हुए सोच रहा  था... शायद माँ  सही कह रही है.... इनको  बेचने से तो मैं खाना खा पा रहा हूं... और आज तो टॉफ़ी भी लाऊँगा... सही तो है... यही तो है खुशियां और रामू भागकर पड़ोस में टॉफी लेने चला गया और रामू की मां देख रही थी की रामू  के बापू के लिए खाना बचा है या नहीं... वह तो आज भी  पानी पी कर ही पेट भर लेगी. 

Thursday, 13 February 2020

हैप्पी वैलेंटाइन डे 🤩🤩

हैप्पी वैलेंटाइन डे (बस इतनी सी ख्वाहिश है )🤩🤩
नहीं चाहती... तुम मुझे फूलो का गुलदस्ता दो .💐💐.. बस अपने लम्बे और इम्पोर्टेन्ट फ़ोन कॉल्स📱📱 में बिजी होते हुए भी मुझे देख कर हल्का सा मुस्कुरा दो 😉...
नहीं चाहिए मुझे कोई डायमंड सेट.. बस जब घर के काम में बिजी रहू😥😥....तो इतना सा ही बोल दो. कितना काम करती हो.. थक गई होंगी....
नहीं चाहती दिन में 10 बार बोलो.... I LOVE YOU.🤩🤩....बस कभी खुद भी कॉल करके पूछो .. क्या कर रही हो....खाना खाया..
नहीं चाहती कैंडल लाइट डिनर पर लेकर चलो.. बस जब खाना बनाऊ... तो किचन में आकर थोड़ा सा मेरा हाथ ही बटा  दो ....
नहीं चाहती लॉन्ग ड्राइव पर चले..बस जब थक कर रूम में आउ तो रिमोट और मोबाइल छोड़ कर मुझसे पूछो... कैसा रहा आज का दिन.
बस इतनी सी ख्वाहिश है. 🤗🤗🤩🤩
Happy valentine day to all 😍😍

Tuesday, 11 February 2020

रफ़ कॉपी 📖📖

रफ़ कॉपी 📖📖
कुछ दिन पहले पेपर में आर्टिकल आया..  रफ कॉपी ... पढ़कर दिल को छू गया... रफ़ कॉपी  की कीमत.... उसकी हालत हम सब जानते हैं... अपनी  स्कूल लाइफ में हर किसी के बैग में एक रफ कॉपी होती हैं.... हम हमारा सारा काम पहले उसमें उतारते हैं... फिर फेयर कॉपी में... कभी सोचा ऐसा क्यों.. ताकि हमारी फेयर कॉपी सुंदर देखें.. उसमें कोई overwriting,wrong work  नहीं दिखे..  इसका मतलब रफ कॉपी जो दिखने में बदसूरत  है... पर  उसी की वजह से फेयर कॉपी सुंदर है...मतलब  रफ कॉपी की कीमत ऐसी है जिसे  कोई नहीं समझ सकता... उसने सब का बोझ अपने ऊपर ले लिया... अपने  को बदसूरत बना कर दूसरे को  सुंदर बनाया तो मतलब उसकी सुंदरता का कोई अंदाजा  नहीं लगा सकता.
 घर में रफ़ कॉपी कौन हुआ...  हमारे बड़े... हमारे पेरेंट्स...वो अपनी हर इच्छा...हर  तमन्ना को दफन कर देते हैं... ताकि उनके बच्चों को अच्छा और सुंदर जीवन दे सकें... अपने बच्चों का  भविष्य और वर्तमान सुंदर बनाने के लिए खुद तप कर बदसूरत  हो जाते हैं... वह तो ये तक भूल जाते हैं कि उनकी भी कोई इच्छाएं हैं.
और जैसे कि हम सब  रफ कॉपी की कोई वैल्यू नहीं समझते.. उस पर ना कवर करते ना  उसको सही से रखते...  वैसे ही हम भी हमारे पेरेंट्स की  ना फीलिंग की कदर करते...  ना  उनके साथ  valuable टाइम स्पेंड करते...यह भी नहीं देखते कि हमारी इच्छाओं के लिए उन्होंने अपनी इच्छा को दफन कर दिया.
रोजाना हम सब की रफ़ कॉपी बैग के किसी कोने में पड़ी रहती है... हम उसकी  कोई कदर नहीं करते... पर  कभी जब जरुरत होने पर रफ़ कॉपी नहीं मिलती तो  आप परेशान हो  जाते है.. ठीक वैसे ही रोज की जिंदगी में आप अपने पेरेंट्स की परवाह नहीं करते... पर जरुरत होने पर वो आपके पास नहीं होते तो आप परेशान हो जाते है.
तो मेरी सभी से रिक्वेस्ट है.. जैसे तुम रफ कॉपी को भर जाने पर  पर  उसको अपने बैग से निकाल देते हो ..पर  प्लीज अपने घर की रफ कॉपी मतलब अपने पेरेंट्स को ऐसे कभी अपनी जिंदगी से मत निकालना ...  उनकी कदर करना... उनकी फीलिंग्स  का सम्मान करना.. ताकि उनको लगे  की चाहे वो रफ़ हुए हो पर तब भी उनको अपनी रफनेस पर गर्व हो की आखिर उन्होंने तप कर ना केवल तुम्हारा वर्तमान और  भविष्य को सुंदर बनाया... बल्कि तुम्हारे मन को भी  सुंदर बनाया.
सो प्लीज रिक्वेस्ट टू आल... रेस्पेक्ट योर रफ़ कॉपी... रेस्पेक्ट योर पेरेंट्स. 🙏🙏

Saturday, 8 February 2020

आखिर कब तक 🤷‍♀️

आखिर कब तक...🤷‍♀️
आज से 20 साल पहले... वो सहमी सी लड़की..🙇‍♀️🙇‍♀️

आज फिर वह पीछे-पीछे आ रहा है... बहुत डर लग रहा है.... अगर उसने रोक लिया तो... कुछ बोला तो... क्या करूंगी मैं... और दिल जोर-जोर से धड़कने लगा... जल्दी-जल्दी तेज कदम भरती  हुई घर की और लगभग भागने सी लगी...घर पहुंच कर ऐसे लगा जैसे  कोई सुरक्षा चक्र में आ गई  हो...  पर घर आकर भी एक अपराध बोध से ग्रस्त.... सबसे नजर चुराते हुए.. जैसे अपराध उसने किया है... शाम को टेरेस पर आई तो देखा वो नीचे खड़ा है... और एक टुक  उसे देख  है... फिर से वह घबराकर भाग गई... दिल जोर-जोर से धड़कने लगा... अब क्या करेगी  सब  क्या कहेंगे...वो डरपोक  बहुत ज्यादा डर गई... कल   फिर से  स्कूल और फिर उस लड़के का पीछा... घर पर तो किसी को बता नहीं पाई...पर जब स्कूल में अपने फ्रेंड्स को बताया तो सब ने कहा.. तू  इतना सज धज कर आती है ना इसलिए... तो घबरा कर वह बालों में तेल लगाने लगी और तेल लगाकर ही स्कूल जाती... पर फिर भी उसने पीछा नहीं छोड़ा... कल जो उसकी फ्रेंड उसके साथ स्कूल जाती थी... वह स्कूल नहीं जाएगी... अब क्या करें... वह अकेली कैसे स्कूल जाएगी... नहीं नहीं मैं भी नहीं जाऊंगी... उसने घर पर कहा कि कल मैं स्कूल नहीं जाऊंगी तो सब डांटने लगे.. कोई  बहाना बनाने की जरूरत नहीं है... चुपचाप स्कूल जाना..
बेचारी रात भर सो नहीं पाई... अकेली कैसे जाएगी... कैसे तैसे  स्कूल के लिए रवाना और फिर उसका पीछा  शुरू... लड़की को आज तो लगा जैसे दिल निकल कर बाहर आ जाएगा... जैसे तैसे स्कूल पहुंची... रोज रोज का ड्रामा.. अब तो वो लेटर भी देने लगा और फोर्स करता पढ़ने के लिए... लड़की का बेचारा बुरा हाल... आखिर में उसके भाइयों को पता चला तो सब ने मिलकर उस लड़के की इतनी धुनाई करी  और अब वह लड़की अकेले स्कूल नहीं जाती थी... उसके बॉडीगार्ड भाई उसके साथ जाते थे... पर इतना कुछ होने पर भी उस लड़की को हमेशा यही लगा कि शायद उसकी ही गलती थी जो वो लड़का उसका पीछा करता था.

आज की मॉडर्न लड़की...🏃‍♀️🏃‍♀️
लड़की की कार का एक लड़का कंटिन्यू पीछा कर रहा था..एक दिन लड़की ने  पूछ लिया... प्रॉब्लम क्या है.. लड़के ने  भी सीधे फ्रेंडशिप का ऑफर दिया... लड़की ने भी साफ शब्दों में मना कर दिया... लड़के ने पीछा नहीं छोड़ा... कहीं से उसका मोबाइल नंबर पता चला और मैसेज,  कॉल... उसको परेशान कर दिया... उसने अपने पेरेंट्स को बताया.. पेरेंट्स ने लड़के को समझा दिया... आइंदा से किया तो देखना पर  लड़का दूसरे तरीके से लड़की को परेशान करने लगा... लड़की के  पेरेंट्स ने लड़की को अकेले आने जाने से मना कर दिया.. उसके फोन पर ध्यान रखने लगे... रात को भी टाइम से घर आने की हिदायत...  लड़की ने पूछा मैंने क्या किया... मेरी क्या  गलती है... लड़की के  पेरेंट्स ने बोला.. तुम जो ये  दिन भर डोलती  रहती हो... हर लड़के से बात करती हो.. यह उसी का नतीजा है.
 आखिर में लड़की को लगा सच में शायद मैं ही गलत थी और उसने भी अपने आप को समेट लिया.. क्योंकि शायद उसकी नजर में वो ही  गलत थी.
आप लोग सोच रहे होंगे... मैं क्या कहना चाहती हूं... मैंने आपको आज से 20 साल पहले और आज की लड़की की हालत बताई... कहने को हम बहुत मॉडर्न हो गए... लड़का लड़की कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे है... लड़की  हर फील्ड में लड़कों के बराबर है... पर गलत आज भी लड़की ही है.... ऐसा क्यों🤔... कभी सोचा🤷‍♀️... क्यूंकि  हमारा सामाजिक ताना-बाना ही ऐसा है कि कोई भी गलत हरकत करता है तो दोष  लड़की को दिया जाता है... लड़के को नहीं.... इसी कारण  लड़की सहमी रहती है और लड़के  बे खौफ अपराध करते है ... प्लीज अपनी मेंटालिटी को बदलो... और ऐसे अपराधी को समाज से बाहर कर दो तभी हालात सुधरेंगे नहीं तो फिर एक लड़की बिना कारण अपने को दोषी समझेगी और फिर कोई लड़का बेखौफ उसका पीछा करेगा. 

Monday, 3 February 2020

खुल कर खेलने तो दो 🤸‍♂️🤸‍♀️🤼‍♂️🤾‍♂️🤾‍♀️

खुल कर खेलने तो दो🤸‍♂️🤸‍♀️🤼‍♂️🤾‍♂️🤾‍♀️
आजा अतुल खेलने चलें... नहीं मेरी तो टेनिस क्लास है... अरे अपना क्रिकेट मैच है  दूसरी गली के बच्चों के साथ... एक दिन मत जा  टेनिस क्लास.... नहीं मम्मी डाँटेंगी... फीस जाती है... और कहेंगी  क्या आवारा बच्चों की जैसी खेलते हो....
आजा प्रिया घर घर खेले... नहीं मेरी तो डांस क्लास है... अरे आजा बड़ा मजा आएगा... मेरी और फ्रैंड्स भी आ रही है... मम्मी प्लीज् आज  मैं घर घर खेल लू.. No..go to your dance class... dont waste your time in such stupid games.
 ऊपर जो मैंने लिखा आज ये आम बात है....हर घर में  यही हाल है... बच्चों की कभी कौन सी क्लास... कभी कौन सी...  और अगर हॉबी क्लास   नहीं हुई तो ट्यूशन क्लास.. बच्चों को हमने मशीन बना दिया... सुबह  स्कूल... आते से ही ट्यूशन... फिर हॉबी क्लासेस... बच्चे अपने मन से अपने बनाये खेल तो खेलते ही नहीं है.. खेलने की  भी  क्लासेस....वो भी हमारी पसंद के खेल.
 पर कभी सोचा इन क्लासेस में बच्चे अपने मन से खेल सकते हैं... नहीं... वहां उनको अपने कोच के इंस्ट्रक्शंस,  रूल फॉलो करने होते हैं... उनके अकॉर्डिंग खेलना... उनके डिसीजन मानना...  याद कीजिए हम लोग जब खेलते थे.. हॉबी क्लासेस में नहीं... अपने  फ्रेंड्स  के साथ... घर में, गलियों में, पार्क में तो वहां रूल्स भी हमारे...इंस्ट्रक्शंस भी हमारे.. और लड़ाई होने पर solution भी  हमारे... इससे  हम लोगों में डिसीजन पावर, सेल्फ डिपेंड और ना जाने क्या क्या  सीखने को मिलता  था... और उस खेल में जो मजा होता था... क्यूंकि वहां कोई कोच नहीं होता  था हमें इंस्ट्रक्शंस देने वाला.. हम हमारे गेम्स बनाते.. और खेलते.. उसका मजा ही अलग था...क्यूंकि नियम भी हमारे.. खेल भी हमारे.. और खिलाने वाले भी हम..और एक बात यहाँ समय की कोई सीमा नहीं.. जब मन तब खेलो.. कितनी भी देर खेलो... घर तब जाना जब लगे  की अब घर पर डांट पड़ेगी.
 पर आज बच्चों को हमने एक कठपुतली बना दिया... वह हर जगह दूसरों को फॉलो करते हैं...
तो कहां से बनाएंगे वह खुद के रूल्स... कहां से लेंगे खुद के decisions.. उनको एक बार खुलकर खेलने तो दो अपनी गली में... अपने घर में... देखना उनके चेहरे पर  जो  खिलखिलाहट दिखेगी... जो मस्ती, बेपरवाही दिखेगी... वह कोई हॉबी क्लासेस में दिख जाए तो बता देना...वहां तो वो  रोबोट के जैसे होते है.. जो कोच के रूल्स फॉलो करते है.
माना  आज  कम्पटीशन का टाइम है  पर अगर weekdays  में नहीं तो  वीकेंड पर तो  उनको खेलने दो... उसका कितना मजा बच्चों को आएगा... और उनके चेहरे पर जो सुकून आएगा...  वह सुकून आपके चेहरे पर भी देखने को मिलेगा... पर एक बार इसके लिए उनको खुल कर खेलने तो दो. 🙏

Saturday, 1 February 2020

लत 🥂🚭

लत 🥂🚭
मयंक हॉस्पिटल के बिस्तर पर लेटा हुआ था.... चारों ओर मशीन से घिरा  हुआ... वह आधी बेहोशी में था पर डॉक्टर की  बातें उसके कानों में साफ-साफ आ रही थी.... डॉक्टर उसकी पत्नी को बोल रहे थे...इनको  कितनी बार समझाया... अपनी सिगरेट, गुटखे की लत को हटाओ.. नहीं तो स्थिति   बहुत खतरनाक हो जाएगी... पर इन्होने  बिल्कुल ध्यान नहीं दिया.. और आज इनकी   यह हालत है... यह तो शुक्र है जो ये  टाइम पर यहां आ गए.. पर अगर अब भी इन्होने  अपने आप पर काबू नहीं पाया तो फिर हमारे हाथ में कुछ भी नहीं है.
 मयंक की पत्नी रोये जा रही थी... प्लीज  डॉक्टर इनको  सही कर दो... मेरा आपसे वादा है... अब कभी इन चीजों के  हाथ नहीं लगाएंगे.. मयंक के बच्चे भी रो रहे थे और मम्मी से कह रहे थे मम्मी चुप हो जाओ...  हम सब मिलकर पापा की इस लत को छुड़ाएंगे... मम्मी... पापा हमसे प्यार नहीं करते क्या... मयंक की  छोटी बच्ची ने अपनी मम्मी से  सवाल किया तो उसकी पत्नी रोते हुए बोली... नहीं बेटा... पापा तो अपन सब से बहुत प्यार करते हैं... नहीं मम्मी... आप झूठ बोलती हो... अगर पापा अपने से  प्यार करते तो कभी इन गन्दी चीजों के  हाथ नहीं लगाते... पापा को हमसे ज्यादा ये गन्दी चीज  प्यारी है...मयंक की पत्नी को समझ ही नहीं आया इस बात का  क्या जवाब दें.
उधर आधी बेहोशी में मयंक ने ये सब  बातें सुनी तो उसको इतना रोना आया और वह आत्मग्लानि से भर गया.... उसको अपने  ऊपर धिक्कार  होने लगा... ऐसा नहीं है वो एकदम से बीमार हो गया...उसकी  इन लतो   की वजह से वह बहुत सी  बीमारीयों  की चपेट में आ गया था ... सबने उसे बहुत समझाया पर उसे फर्क नहीं पड़ा... सबके सामने वह वादा करता पर अगले दिन से सब चालू.... वास्तव में उसने इन सब चीजों को कभी सीरियसली नहीं लिया...वो  तो समझता था सब उसे यू ही कहते हैं और इन सब चीजों से कुछ फर्क नहीं पड़ेगा.
कुछ प्रॉब्लम होने पर डॉक्टर के पास जाता... दवाइयां लेता पर  जो समस्या की जड़... मूल वजह थी... उसकी लते... वह उसने कभी  छोड़ी ही नहीं... वो तो   पूरी तरह से इसकी गिरफ्त में आ चुका था.
 इसकी  वजह से उसकी पत्नी से बहुत लड़ाई होती... पर वो अपनी दलीले देकर मना लेता.. पत्नी भी बेचारी हारकर हथियार डाल देती.... उसके शुभचिंतकों ने उसे बहुत समझाया... पर वह अपने ऊपर कंट्रोल ही नहीं कर पाया और आज उसकी ये  हालत है कि वह अपनी लत  तो क्या ... नॉर्मल खाना भी नहीं खा पा रहा... अभी तो सिर्फ ड्रीप  के सहारे ही है.
पर आज अपनी बच्ची के मुंह से ये सब  सुनकर शर्म से पानी-पानी हो गया  और अपने आप से वादा कर रहा है  कि अब अपनी लत  को छुड़ाकर रहूंगा... अब कभी उसके पास नहीं जाऊंगा.... मुझे बस अब मेरी फैमिली के पास जाना है.... अब जैसे डॉक्टर्स कहेँगे... और जो मेरे स्वास्थ्य के लिए अच्छा होगा... वही करूंगा... तभी नर्स ने उसको नींद  का इंजेक्शन लगा दिया.. और वो नींद के आगोश में चला गया....पर एक नयी सुबह बाहे खोल कर  उसके  इंतजार में बैठी थी...जहाँ ये लते नहीं होंगी... होंगी तो उसकी अच्छी आदते... उसका हसता खेलता परिवार... और हां सबसे जरुरी उसका अच्छा स्वास्थय. 🙏🙏🙏