Jindagi ek unsuljhi paheli

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Thursday, 30 January 2020

जान है तो जहान है

जान है तो जहान है
  इस  इस समय मैं हॉस्पिटल में बैठी हूं.... मेरी मम्मी एडमिट है आईसीयू में... वह अपने होश में नहीं है.. उनको ऐसे देखकर दिल कितना रो रहा है.. बता  नहीं सकती
एक मां जिसको हमेशा होश में देखा... अपने बच्चों की परवाह करते  देखा... आज उनको अपने बच्चों का जाने दो... खुद का ही होश  नहीं है.
एक बात देखी हम पूरी जिंदगी भागते हैं... पैसे कमाने... ऐशो आराम की चीज जुटाने.... अपनी मस्ती में रहना... दूसरों की परवाह करना... समाज की परवाह करना.... जो वक्त आने पर पता नहीं तुम्हारा साथ भी देंगे या नहीं... और जो तुम्हारा साथ देगा... तुम्हारा शरीर... उसको सबसे एंड में रख देना... कहां की समझदारी है.
 यहां आकर पता चला हेल्थ है तो सब कुछ है... नहीं तो कितना  कमा लो.. जब शरीर ही  साथ नहीं देगा तो उन चीजों को कहां से भोगोगे...  मेरी सभी से रिक्वेस्ट है..🙏🙏🙏 प्लीज सबकी छोड़ कर अपनी  परवाह सबसे  पहले करो🙏🙏🙏🙏... तुम हेल्दी रहोगे तभी तो दूसरों का ध्यान रख पाओगे... इसलिए अगर तुम्हें अपने लोगों की परवाह है... तो पहले खुद की परवाह करना सीखो... तभी तुम सबका ध्यान रख पाओगे... इसलिए आज से... नहीं अभी से प्रॉमिस करो अपने आप से की अपनी परवाह सबसे पहले करो.. खासकर औरते... जो हमेशा अपने आप को सबसे बाद में देखती है.
हेल्थ है तो सब कुछ है वरना तो बस  मशीन्स के सहारे ही रह  जाओगे. 

Wednesday, 29 January 2020

कल आज और कल👵👴👩👨👩‍💼👨‍💼

 कल आज और कल👵👴👩👨👩‍💼👨‍💼
20 से 25 साल पहले पेरेंट्स और बच्चे...
बेटा...  बोला ना  आज खाने में आलू की सव्जी  और पराठे है.... मम्मी मुझे नहीं खाना... कुछ और बनाओ ...देख बेटा खाना तो यही है... खाना है तो खा नहीं तो हवा खा...  कल ही तो पकोड़ी  बनायीं थी....  मम्मी आज टिफ़िन  में क्या है... अचार  और परांठा... कल ही तो सब्जी रखी थी... रोज-रोज के नाटक मत किया करो... मैं भी इंसान हूं... मम्मी मैं स्कूल से आ गया.. ठीक है रसोई में  खाना रखा है लगा लो... मम्मी मैं क्रिकेट खेलने जा रहा हूँ ... . आने दो पापा को  तुम्हारी शिकायत नहीं करी तो... पढ़ाई को तो आग लगा रखी हैँ तुम लोग  ने .... तुम्हारी बहन को देखो... सुबह से अपनी सहेलियों के  साथ घर -घर खेल रही हैं...दिन भर धुप में डोलते रहो....  हां आप तो हर बात पापा को बोला करो.. . जुबान चलाता हैं... शर्म नहीं आती... चला लो जुबान जब तुम पेरेंट्स बनोगे तब पता चलेगा.

 आज वही बच्चे जो अब  पेरेंट्स बन गए...
दिन भर मोबाइल या टीवी... कुछ और काम है... पढ़ाई तो होती नहीं तुमसे... इस मोबाइल ने  तो बर्बाद कर दिया... मम्मी आज खाने में फिर वो ही  डोसा,  पावभाजी.... मुझे नहीं खाना मैं pizzaऑर्डर कर रहा हूं... करके देख... खाना कौन खाएगा..वेस्ट नहीं होगा...  पैसे का तो दर्द ही नहीं है तुम लोग को....
 पापा आज मैं लेट आऊंगा...फ्रेंड्स  के साथ मूवी  देखने जाऊँगा फिर डिनर...नो बेटा... टाइम खराब है.... टाइम से घर आ जाना... पापा आप लोग ही मना करते  हो... मेरे फ्रेंड्स के  मम्मी पापा तो नहीं करते... हर चीज आप से पूछ कर करो... कुछ फ्रीडम  तो हैं ही नहीं...  वी वांट स्पेस... कह लो बेटा जब पेरेंट्स बनोगे  तब पता चलेगा.

आज से 10 से 15 साल बाद जब  ये ही बच्चे पेरेंट्स बनेंगे....
बेटा खाने में कैप्सूल खाया और अपना ऑक्सीजन मास्क तो लगाओ..बाहर बहुत पॉलुशन है ...  मन नहीं है मम्मी... और ये क्या tab और गैजेट्स फैला रखे हैं.. तुम लोग की कॉपी किताबें नहीं होती क्या पढ़ने के लिए...  अरे  मम्मी जस्ट चिल...we are new generation...  हम इसी पर पढ़ाई करते हैं... आपके जैसे पेन पेंसिल से नहीं... मम्मी मैं  गेम ज़ोन जाऊंगा... दो-तीन घंटे लग जाएंगे... खाना भी वही खाऊंगा... बेटा थोड़ा तो हेल्थ का ध्यान रखो... बिलकुल नहीं सुनते.... .मम्मी मुझे पता हैँ मुझे कैसे रहना हैँ.. मैं  पागल नहीं हूँ... कैसे बदतमीज बच्चे हो... जब तुम पेरेंट्स बनोगे तब पता चलेगा.
 क्या हुआ किस सोच में पड़ गये🤔🤔 ... पड़ा कुछ फर्क पेरेंट्स और बच्चों के रिलेशन में🤷‍♀️🤷‍♀️ ... नहीं ना... जमाना कोई भी हो.... पेरेंट्स और बच्चों का रिश्ता ऐसा ही रहेगा ... पेरेंट्स समझते हैं की बच्चे उनकी सुनते नहीं..  परवाह नहीं करते..और बच्चे  ये ही सोचेंगे कि यह हमको नहीं समझते... हमें कुछ करने नहीं देते... सो एंजॉय.... डोंट टेक स्ट्रेस.... जस्ट चिल. 🤗😇बट इतना भी चिल मत करना की पेरेंट्स बच्चों को समझाना छोड़ दे और बच्चे पेरेंट्स को समझना 😉

Tuesday, 28 January 2020

मैं (I)😎💃/🕺

मैं (I)😎💃/🕺
आज मैं नहीं होता तो   तुम एक कदम नहीं चल सकते थे... यह घर मुझसे चल रहा है... मैं नहीं होता तो तुम्हें इस दुनिया में कोई नहीं पूछता... मैं, मैं, मैं... ये एक शब्द हर आदमी के अंदर होता है... कोई इस मैं  में ही जिंदगी गुजार देता है और सामने वाले को ऐसे जताता  है की जैसे वो ही उसकी जिंदगी का मालिक है... वो ही  उसका कर्ता धर्ता है.
पर क्या सच में ऐसा ही है... हम सब देखते आये हैं... कितना भी बड़ा आदमी हो... उसके होने पर हम सोचते हैं कि उसके बिना हम कदम नहीं चल सकते...we can't survive without him... पर  ऐसा नहीं होता.. अगर वह किसी वजह से वहां नहीं है तो भी दुनिया चलती  है...  हां  कुछ देर के लिए ठिठकती हैँ, अटकती हैँ पर चलना सीख ही लेती हैं.  तो फिर क्यों हम इस मैं मे  जीते हैं.... क्यों ना हम  इस मैं को हम बना ले और सामने वाले को बताएं की you are also important in your place....   तुम्हारा भी अस्तित्व है... उसके विचारों की, भावनाओं की उतनी ही कदर है... फिर देखना अगर तुम उस जगह नहीं भी हुए तो तुम्हे मिस किया जाएगा... तुम्हारी इम्पोर्टेंस समझी जाएगी
पर अगर  हम इस मैं में ही जीते रहे तो एक टाइम के बाद उस जगह पर सब घुटन महसूस करेंगे... वहां से निकलने को झटपटायेंगे.. एंड उसके ना होने पर आजाद महसूस करेंगे. इसलिए अगर हमें किसी की दुनिया में जगह बनानी है तो हम बनकर बनानी होगी मैं बन कर नहीं. 

Sunday, 26 January 2020

मेरी डायरी मुझसे गुस्सा हैँ 📖📖😔😔

मेरी डायरी मुझसे गुस्सा हैँ...📖📖😔😔
  आज बहुत दिन बाद ..... दिन क्या शायद हफ्तों गुजर गये....  सोचा डायरी लिखती हूं.... अपनी डायरी को ढूंढा तो पहले तो वह मिली नहीं.... बड़ी मुश्किल से मिली तो  देखा उस पर धूल की परत जम रही थी.... एक बार देखकर दिल दुखा की अरे ये इसकी क्या हालत हो रही है... पहले कितनी चमकती रहती थी .... फिर भी धूल झाड कर  जैसे ही खोला तो डायरी क्या खोली .... देखा तो वह तो सिसकियां ले रही हैँ... लगातार रोये जा रही हैँ.. मैंने घबरा  कर कारण पूछा    तो आप मानोगे नहीं वह मुझसे बात करने को तैयार ही नहीं हुई...  मैंने उसे बहुत समझाया तो उसका रोना तो बंद हो गया पर उसकी जो शिकायते, गुस्सा शुरू हुआ तो रुकने का नाम ही नहीं लिया... वह तो अपनी भड़ास, गुस्सा जो  इतने दिन से उसने  भर रखा था... बोलती गई.. और मै  सुनती....
 वो बोली... आज तुमको मेरी याद कैसे आ गई.... मैंने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी की अब  तुम मेरे पास आओगी भी.... तुमको तो अपने दिल की बातें कहने को  नये दोस्त, नये  लोग मिल गए... अब मेरे पास आ कर क्या करोगी.... जाओ अपने दोस्तों के पास.... मैंने कहा ऐसा नहीं है.... मैं मानती हूं कि मुझे तुम्हारे पास आये  बहुत टाइम हो गया.... पर क्या करती... मुझे टाइम ही नहीं मिलता था   तो डायरी गुस्से में  बोली... हां क्यों मिलेगा  टाइम... 😏...एक टाइम ऐसा  भी था  की  तुम मेरे पास कैसे भी टाइम निकाल कर आती थी.... अपने  दिन की... जिंदगी की... छोटी-छोटी बातें मुझसे शेयर  करती थी.. जब तक तुम मुझे बता नहीं देती थी तुम्हें चैन नहीं पड़ता था.... खाना हजम नहीं होता था... तुम अपनी छोटी से छोटी बात.... अपनी खुशियां 🙂, अपना गम😔, अपनी फ्रस्ट्रेशन😣, अपना गुस्सा 😤... सब मेरे को बताती थी...  पता है जब तुम मुझसे अपनी खुशियां शेयर  करती थी तो मैं भी उतनी ही खुश होती तो जितनी की तुम...  जब तुम  बहुत दुखी होती थी तो मैं भी बहुत दुखी होती थी  और तुम्हें समझाती थी... और पता हैँ जब  तुम अपना गुस्सा मुझ पर उतारती   थी तो मैं चुपचाप सुनती रहती थी.... फिर बाद में तुम को प्यार से समझाती थी.
 मालूम हैँ... मैं बहुत खुश थी की  तुम मुझे अपना सच्चा दोस्त मानती हो... तभी तो खुशी ही नहीं... अपना दुख, अपना  गुस्सा... सब मुझसे शेयर करती हो.... और मैं बहुत प्राउड फील करती थी कि कम से कम मैं तुम्हारी सच्ची हमदर्द हूं... तुम मुझे अपना समझती हो... तब ही तो  जब कोई तुम्हारी नहीं सुनता  था... तुम्हें मेरी जरूरत होती थी... तुम भाग कर मेरे पास आती थी...  पर शायद मैं गलत थी... जिंदगी में हर कोई अपने मतलब के लिए ही साथी ढूंढता है... जब तुम अकेली थी तो मेरे पास आती थी...  क्योंकि तुम्हारे पास  शेयर करने को कोई नहीं था... पर अब.... और डायरी चुप हो गई.
थोड़ी देर हम दोनों  के  बीच  सन्नाटा पसरा   रहा... मुझे समझ ही नहीं आया मैं क्या बोलू...क्यूंकि वो गलत  नहीं थी... गलती मेरी ही थी... पर मैं बहुत सरप्राइज़ हुई  की गॉड  इतना गुस्सा भर रहा है इसमें....मुझे कभी अहसास ही नहीं हुआ...  फिर  मैंने बोलना शुरू किया... तुम ठीक कह रही हो... और सच में गलती मेरी है जो मैंने इतने दिन तक तुम्हें याद नहीं किया.... पर एक बात बताऊ...  चाहे मुझे कितने  भी दोस्त मिल जाये... पर मैं जो बात तुमसे कह सकती हूं.... तुमसे शेयर कर सकती हू ...  हर किसी से कभी नहीं....तुमसे बात करते हुए मुझे कभी भी सोचना नहीं पड़ता ... जो मन आया बोल दिया.... पर दुसरो के साथ मैं ऐसे थोड़े ना बात कर सकती हूँ... दुसरो के साथ बात करते हुए दस  बार सोचना पड़ता हैँ.. किसी को बुरा ना लगे.... किसी की फीलिंग्स हर्ट ना हो...   वैसे भी आदमी दिन भर कहीं भी जाएं... किधर भी रहे... आखिर में थक कर  अपने घर ही आता है ना.... और तुम  मेरा घर  ही हो.... यहां आकर मुझे सुकून... मुझे राहत मिलती है... मैं तुम्हारे पास आकर बिलकुल हलकी हो जाती हू ... पर आज से मैं तुमसे प्रॉमिस करती हूं... मैं कहीं भी जाऊं.... मैं रोज तुम्हारे पास आऊँगी.... तुमसे बातें करूंगी... अब कभी तुमको अकेला नहीं छोडूंगी.... प्रॉमिस.... पक्का वाला प्रॉमिस.🤝 🤝
डायरी थोड़े गुस्से मैं और थोड़ी  हंसी में मेरे गले लग गई... और मैंने भी अपनी डायरी को अपने गले लगा लिया.... फिर पता नहीं कितनी देर तक हम बात करते रहे.... समय का पता ही नहीं चला.🤗🤗

फंडा ये हैँ.... की नये दोस्त बनाओ... पर अपने  सच्चे और असली दोस्तों, अपने पुराने साथियों को  कभी मत छोड़ना. 👬👭👫

वक्त

वक्त
"मेरा पानी उतरते देख किनारे पर घर मत बना लेना, मैं समुन्दर हूँ लौट कर जरूर आऊंगा "
कल मैंने ये लाइन न्यूज़ पेपर में पड़ी जी की अमित शाह ने  जो की  सेंटर में होम मिनिस्टर हैं... उस टाइम कही  थे जब कांग्रेस गवर्मेंट में वह एक केस से बाहर निकल कर आए थे... उस टाइम पी. चिदंबरम होम मिनिस्टर थे. अब जैसा आपको पता ही है कि अब पी चिदंबरम सीबीआई कस्टडी में है और  उसी बिल्डिंग में लाए गए जिसका उन्होंने मिनिस्टर रहते इनॉगरेशन किया था.
आप सोच रहे होंगे मैं आज शायद पॉलिटिक्स से रिलेटेड कुछ लिख रही हूं... तो नहीं ऐसा कुछ नहीं है. मैं आपको ध्यान दिलाना  चाहती हूं कि यहां अमित शाह ने जो 'मैं' यूज़ किया... वहां उनका मतलब खुद से नहीं बल्कि टाइम से,  समय से है. जी हां दोस्तों वक्त बहुत ही मजबूत होता है... अगर इंसान का वक्त सही नहीं है  तो वह कितना भी कोशिश कर ले उस की हर चाल उलटी होती हैँ... उसको सही होने पर भी गलत ही समझा जाता है..बट  अगर इंसान का वक्त सही है तो समझो सब सही है... उसकी बात पत्थर की लकीर होती है.. दुनिया में उसकी तूती बोलती है और सब उसको फॉलो करना चाहते हैं... इन स्पाइट वो गलत ही  हो. हम सुनते भी आए हैं कि वक्त बहुत बड़ा मरहम होता है जो हर जख्म को भर देता है और पुराने से पुराने घाव को हरा कर देता है. एक सॉन्ग भी है कि...
 "वक्त इंसान का ऐसा भी कभी आता है
 राह में छोड़ कर साया भी चला जाता है... दिन भी निकलेगा कभी रात के आने पर ना जा ".
अगर वक्त सही नहीं हैँ तो दुनिया तो दूर की बात  अपने भी साथ नहीं देते. पर ऐसा नहीं है रात के बाद सुबह भी आती है... इसलिए हमें अगर वक्त सही नहीं है तो ऐसा नहीं कि हम मेहनत ना करें क्योंकि जैसा हम सब जानते हैं काम करते रहो क्योंकि "अपना टाइम आयेगा"..बस हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि जब वक्त हमारा हो तो हमें अकड़ नहीं दिखानी चाहिए... हम में घमंड नहीं आना चाहिए क्यूंकि  पता नहीं ऊँट कब किस करवट बैठेगा और जो दुनिया आज हमको सर आंखों पर बैठा रही है वह  हमें पटक भी सकती है. इसलिए  दोस्तों हमें वक्त के साथ चलना चाहिए और सही टाइम का वेट करना चाहिए और अपने काम से दुनिया को जवाब देना चाहिए ना की अपनी अकड़ से. 

जिंदगी एक अनसुलझी पहेली

जिंदगी एक अनसुलझी पहेली
 प्लीज... प्लीज गॉड बस इस प्रॉब्लम से निकाल  दे.. 🙏बस मुझे सर्विस मे प्रमोशन मिल जाये फिर कोई प्रॉब्लम ही नहीं है.. गॉड बोर्ड एक्साम्स में अच्छे मार्क्स आ जाये 🙏 फिर सब ठीक है.... आप सोच रहे होंगे मैं यह सब क्या लिख रही हूं... बट इतना तो है कि हम सब लाइफ में इस सिचुएशन को हर टाइम फेस  करते हैं... एक प्रॉब्लम से पीछा छुड़ाते हैं... फिर कोई दूसरी प्रॉब्लम... तो आज मैं अपनी सबकी इस मन की उलझन को अपने स्टाइल से कहने की कोशिश कर रही हूं....
 जिंदगी एक अनसुलझी पहेली... 😇

एक उलझन सुलझी तो दूसरी उलझी...
 उलझने सुलझाते सुलझाते हम खुद ही उलझ गए...
ढूंढ़ते रहे उस डोर का छोर 🤔
 पर सारे धागे अपने आप में उलझ गए...
कब तक.. कब तक ये धागे उलझते रहेंगे..
पता नहीं इन सवालों को सुलझाते  हुए मैं खुद ही उलझ गई..
जिंदगी की गणित में मैं इतना उलझ गई...
 पता ही नहीं चला इस गणित  में मैं कब फेल हो गई....
जिंदगी मुझे पता था तू मुश्किल है...
पर इतनी.... 🤔🤔...कभी नहीं सोचा था...🤷‍♀️
 ए जिंदगी तेरे से एक छोटे सी  गुजारिश है...🙏
तू  थोड़ा सा सरल हो जा...
और मुझको अपने गले लगा ले 🤗🤗

हिम्मत /मंजिल

हिम्मत /मंजिल
'संपर्क टूटा है हौसला नहीं
 विक्रम रुका है
इसरो  नहीं '
कल रात पूरा देश उस  ऐतिहासिक पल का गवाह बनना चाहता था... सबको लग रहा था कि बस मंजिल मिल ही गई .. सारे वर्ल्ड में में हमारा नाम होगा... पर एन्ड मोमेंट पर हम सबके सपने  टूट गया... हम हमारी मंजिल से कुछ कदम दूर रह गए... एक पल को सब हताश हो गए,  निराश हो गए. पर अगले ही पर लगा...  कोई नहीं अभी  मंजिल और हैं ,  रास्ते नये बनाएंगे... मंजिल तक पहुंचेंगे... हिम्मत नहीं हारेंगे.
ऐसा ही हम सब के साथ जिंदगी के किसी ना किसी मोड़ पर  होता है... हमें लगता है कि हम  हमारी मंजिल तक पहुंच ही गए... हम बहुत एक्साइटेड हो जाते  हैं... बड़े-बड़े सपने देखने लगते हैं.... कल्पनाओं के संसार में चले जाते हैं... पर जैसे ही मंजिल से   भटकते हैं.... हम निराश हो जाते हैं, डिप्रेशन में चले जाते हैं... एक पल को ऐसा लगता है कि सब कुछ खत्म हो गया... . ऐसा लगता है कि जिंदगी में कुछ भी नहीं बचा.
 पर मैं ऐसे उन सभी लोगों से कहना चाहूंगी.... 'मंजिल खोयी  है
 रास्ते नहीं
सपने टूटे हैं
हिम्मत नहीं '
और जैसा की आज सारा देश इसरो पर गर्व कर रहा हैं... उनके प्रयासों को, उनकी कोशिशों की सराहना कर रहा.... उनकी तारीफ कर रहा है.... उनकी और उम्मीदों से देख रहा हैं...  कि हां हम होंगे 'कामयाब एक दिन '
ऐसा ही हम सब के साथ होता है... अगर हम कभी फेल भी होते  हैं... पर हमने कोशिश करी है तो  लोगों को भी उम्मीद होती है कि हम जरूर कुछ अच्छा करेंगे,  सक्सेज होंगे. वैसे भी हम पढ़ते आए हैं कि..
'लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती...
 कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती'. 

डबल स्टैण्डर्ड (दोहरी मानसिकता )A short story🤷‍♀️🤔

डबल स्टैण्डर्ड (दोहरी मानसिकता )A short story🤷‍♀️🤔
रोज की तरह सुमन  अपनी सास के लिए चाय ले  कर गई... उसकी  सास  फोन पर  अपनी किसी रिश्तेदार से बात कर रही  थी... जिसके  बेटे की वाइफ की कुछ टाइम पहले मौत  हुई थी...  उसके 15 साल की  एक बच्ची थी...  बेटे   कि माँ चाहती थी कि बेटा दूसरी शादी करले ... पर बेटा इस बात के लिए राजी नहीं था...सुमन की सास उसे  समझा रही थी... कि क्यों नहीं मान रहा तेरा बेटा.... अरे अभी उसकी उम्र ही क्या है और जब उसकी बेटी शादी करके दूसरे घर चली जाएगी तो वह किसके सहारे रहेगा... उसे सहारा देने वाला भी तो कोई चाहिए ना... तू चिंता मत कर मैं आकर उसको समझाउंगी... अरे सारी जिंदगी पड़ी है उसके सामने.
जैसे ही  सुमन की सास ने  फोन रखा...सुमन  ने अपनी सास को चाय का कप पकड़ाते हुए कहा...मम्मी मेरी फ्रेंड की भी ये ही  स्टोरी है... उसके हस्बैंड की  भी  कुछ  टाइम पहले  मौत हो गयी... उसका एक  बेटा  हैं जो 10th क्लास में पढ़ता हैं...में भी उसको दूसरी शादी के लिए समझाती हूँ .
 इतना सुनते ही सुमन की सास बोली अरे अब इस उम्र में दूसरी शादी करके क्या करेंगी ...  अपने बच्चे को पढाये, उसे बड़ा करें...  अब इन सब चीजों में ही उसको अपना मन लगाना चाहिए. इतना सुनते ही सुमन का मुंह खुला का खुला रह गया... लगा कि जैसे वो सुन्न हो गयी...  उसकी सास कुछ देर पहले इसी सिचुएशन में कुछ और कह रही थी और अब कुछ और...  क्यों... क्यूंकि फर्क सिर्फ इतना हैं की उधर एक आदमी है और इधर  एक औरत.
 सुमन बिना कुछ कहे चाय  के खाली कप लेकर किचन की ओर बढ़ गयी...  पर उसका दिमाग उन कप्स की तरह खाली नहीं था जिसमे भरे हुए थे सवाल... सवाल अपनी सास के या कह लो इस समाज के डबल स्टैण्डर्ड को लेकर.. जिनका उसके पास कोई जवाब नहीं था. 

रिश्ते (दिल♥️ /दिमाग़ 🤔

रिश्ते (दिल♥️ /दिमाग़🤔 )
'आपका दिल बहुत कीमती है
कोशिश करें इसमें वही रहे
जो रहने के काबिल हो'
कितनी सही लाइन्स हैं और   शायद कोई बहुत दिमाग वाले पर्सन ने लिखी होंगी.  पर क्या सच में  हमें ऐसा करना चाहिए... रिश्ते निभाते हुए कैलकुलेशन करें की क्या हमारे लिए सही है और क्या गलत है... किस रिश्ते से हमें   फायदा होगा और किस से नुकसान... हां यह बात शायद उनके लिए सही है जो रिश्ते निभाते हुए दिमाग का यूज करते हैं और अपने मतलब के लिए  रिश्ते निभाते हैं.
पर जो रिश्ते दिल से निभाते हैं... वह बस रिश्ते निभाने में यकीन रखते हैं और  पूरी शिद्दत से रिश्ते निभाते में यकीन रखते हैं फिर  चाहे इसमें उनका ईगो हर्ट हो... उनकी self-respect को चोट पहुंचे... वो परवाह नहीं करते... वो सब कुछ लुटा कर बस  पूरे दिल से रिश्ते निभाते में यकीन रखते हैं... और इसे निभाते हुए  चाहे वह खाली हाथ रह जाए... वह परवाह नहीं करते.
 वैसे आजकल जो लोग दिमाग से रिश्ते निभाते हैं वह ज्यादा खुश रहते हैं. पर पता नहीं क्यों मुझे  ऐसा लगता कि रिश्ते निभाओ  तो दिल से निभाओ.. दिमाग से तो व्यापार ही निभा लो.😌..  देखना अगर  दिल से रिश्ता निभाओगे तो  दिल से ही खुशी  भी मिलेगी.
प्लीज आप लोग कमेंट के साथ जरूर  बताइए की रिश्ते  कैसे निभाने चाहिए... दिल से या दिमाग़ से. 

एक लड़की के मन की व्यथा (दर्द )👩🙇‍♀️

एक लड़की के मन की व्यथा (दर्द )🙇‍♀️👩
मां-बाप का घर
 तुम तो पराया धन हो
आज या कल तुम्हें तुम्हारे घर जाना ही है...
 ससुराल
 ये  तो पराए घर से आयी हैं ये क्या इस घर को अपना समझेगी ....
लड़की
एक कोने में आंखों में आंसू और मन में ढेरों सवाल🤔
मेरा घर कौन सा है...
 मैं किस घर को अपना समझ कर
 अपना घोंसला बनाऊं...🏘🏡
 एक ऐसा घोंसला जहां कोई मुझे पराया नहीं कह सके. 😌

हम बदलेंगे.... सिस्टम बदलेगा

हम बदलेंगे.... सिस्टम बदलेगा
कुछ दिन पहले अख़बार में न्यूज़  आयी की हमारी कोई भी यूनिवर्सिटी वर्ल्ड के टॉप 300 में भी स्टैंड नहीं करती... पढ़कर ही इतनी शर्म आई कि हम इतने पीछे हैं... इंडिया के बच्चे बाहर जाकर इतना नाम कर रहे हैं और हमारे देश में इनको सही एजुकेशन भी नहीं मिल रही.
जबकि ये  वही इंडिया है जहां का नालंदा विश्वविद्यालय सारे वर्ल्ड  में फेमस था.... पूरे वर्ल्ड से  यहां एजुकेशन लेने बच्चे आते थे.. क्योंकि तब हम बच्चों को एजुकेट करते थे... मोरल वैल्यूज देते थे... अब तो स्कूल कॉलेज बिजनेस बन गए... हमारा सिस्टम ही ऐसा है कि हम बच्चों को 5 स्टार होटल की सुविधाएं देते हैं पर एजुकेशन का ध्यान नहीं रखते... अपने इंस्टिट्यूट का रिजल्ट 100% जाये उसके लिए हर तरीका अपनाने को तैयार रहते हैं पर  बच्चों को क्या चाहिए... उसका क्या इंटरेस्ट हैं....किसी को परवाह नहीं.
टीचर बच्चों को स्कूल में कहते हैं... मेरी ट्यूशन क्लास ज्वाइन करो... क्यों..  तुम उन्हें  स्कूल में क्यों नहीं सही से पढ़ाते  हो... क्यों नहीं  हम उन बच्चों की एक्स्ट्रा क्लासेज arrange करते जिसको इसकी नीड हैं.... बट अगर ऐसा करेंगे तो ट्यूशन के नाम पर उनको जो बिजनेस है उसका क्या होगा.
आज कॉलेज में एडमिशन के लिए कटऑफ 90% जाती है...इसका मतलब जिनकी 80% आयी वो  बेकार है... तुम कटऑफ इतनी  हाई रखते  हो... व्हाट  अबाउट योर एजुकेशन स्टैंडर्ड... उसकी कटऑफ कौन डिसाइड करेगा.
तो क्या हम यह समझे कि सारा दोष सिस्टम का है नहीं इसमें हमारा...  हम पेरेंट्स का दोष ज्यादा है.... हमने बच्चों को मार्क्स की, परसेंटेज की फैक्ट्री बना दिया...  जहां  90% से नीचे तो एक्सेप्ट ही नहीं करते हैं... और बच्चों के मार्क्स के हिसाब  से  हम  हमारा  स्टैंडर्ड सोसाइटी में देखते हैं... चाहे इस मार्क्स की रेस में   उनका बचपन पीछे रह जाये....  वी डोंट केयर.
क्या हम लोग भी बचपन में 90% लेकर आए थे... चुप क्यों हो गए.. याद कीजिए... और वैसे भी क्या ये  मार्क्स  ही उनका फ्यूचर  डिसाइड करेंगे.
 हमने कभी सोचा कि हम उन्हें educate तो कर ही नहीं रहे  बस  उन्हें  मार्क्स  की रेस में दौड़  लगवा रहे हैं.
 प्लीज मेरी सभी पेरेंट्स  से रिक्वेस्ट है🙏.. अपने बच्चों को समझो... उनका इंटरेस्ट देखो... हर  बच्चा पढ़ाई में अच्छा हो... जरूरी नहीं...वो एवरेज  भी हो सकता है.. उसका कुछ और इंटरेस्ट हो सकता है... हमें वही देखना है.... हम नहीं देखेंगे तो कौन देखेगा.
हमें  हमारी एजुकेशन  पालिसी हर बच्चे को ध्यान में रखकर बनानी होगी और तभी हमारा देश भी वर्ल्ड में अपना  नाम करेगा और एजुकेशन सिस्टम ही सुधार जाये तो हमारी यूनिवर्सिटीज भी वर्ल्ड रैंक में आएंगी.

आज का अकेलापन

आज का अकेलापन
भाभी ये  आप डायरी में क्या लिखती रहती  हो... महीने का हिसाब.... कामवाली बाई ने कविता से पूछा तो वह हंसकर बोली महीने का नहीं जिंदगी का हिसाब लिखती हूं.... बाई नीचे जमीन पर बैठ गयी और  सवालिया नज़रों से कविता को देखने लगी... भाभी महीने का हिसाब मतलब🤔... कविता थोड़ी हंसी और फिर बोली ...मेरे साथ दिन भर क्या होता है... मैं क्या करती हूं.... मुझे किस बात पर गुस्सा आता है... कब मैं खुश होती हूं.... यह सब मैं इस डायरी में लिखती हूं... बाई चकित होकर बोली तो फिर आप भैया को और बच्चों को क्यों नहीं बताती हो यह सब.
कविता थोड़ी रुकी और  गहरी सांस भर कर बोली तेरे भैया को और बच्चों को मेरे लिए टाइम ही कहां है... बेटा अपने फ्रेंड्स  के साथ चैटिंग... बेटी  फेसबुक फ्रेंड्स... और तेरे साहब वह दिनभर बिजनेस की टेंशन में रहते हैं..कहते हैं आते ही  चिकचिक शुरू.... let me live my time... और वह अपने मोबाइल में बिजी....  पर हां इस डायरी के पास मेरे लिए टाइम ही टाइम है...ये मेरी सारी शिकायतें, गुस्सा,  तकलीफ सब तसल्ली से सुनती है... इसके पास  बहुत टाइम है मुझे समझने का... बाई कुछ समझी कुछ नहीं और अपने काम में लग गई.
अगले सब अपने अपने काम की भागदौड़ में बिजी थे और कविता सब की जरूरत के अकॉर्डिंग काम कर रही थी कि तभी वह चक्कर खाकर गिर गयी और बेहोश हो गई... सब घबरा गये और उसे डॉक्टर  के लेकर भागे. डॉक्टर ने कहा कविता डिप्रेशन में है.... ट्रीटमेंट लंबा चलेगा... सबको बड़ा ताज्जुब हुआ कि किस बात का डिप्रेशन  था... हमको तो पता ही नहीं चला.
 तभी पीछे से बाई की आवाज आई... साहब आपको  पता हो ना हो पर भाभी की डायरी को सब पता  होगा... आप लोग के पास टाइम ही कहा था भाभी के लिए.... आप लोगों ने तो अपनी एक  अलग ही दुनिया बना ली थी अपना अकेलापन दूर करने के लिए.
सबने एकदम से पीछे मुड़कर  बाई को देखा कि ये क्या कह रही है और इसको इतना कुछ कैसे पता है.... जो हमको भी नहीं पता. सब बाई  की बात सुनकर एक आत्मग्लानि से भर गए. इस टाइम सब कविता से बात करना चाहते थे पर कविता चुपचाप सो रही थी.
बाई  सब को अचरज भरी नजरों से देख रही थी कि इस टाइम सब भाभी से बात करके अपना अकेलापन दूर करना चाहते हैं🤔....भाभी  तो कब से यही चाहती थी. 

छोटी सी शुरआत (A new begininig )A thanks note

छोटी सी शुरुआत (A new begining )A thanks note

कैसे करूं.... करूं या ना करूं.... एक डर सा लग रहा है... सब क्या कहेंगे.... कोई हंसा तो.... रहने दो... नहीं शुरु करती... मन में अजीब सा लग रहा है.

कोई नहीं स्टार्ट करती तो हूं... जो होगा देखा जाएगा... कहीं से तो शुरू करना ही पड़ेगा... ऐसे ही कुछ हजारों सवाल मेरे मन में थे.... जब मैंने ब्लॉग लिखना स्टार्ट किया था.
एक डर, एक हिचक.... लोग क्या कहेंगे.... पर ऐसे ही ना ना करते मैंने आज मेरे 10 ब्लॉग्स पब्लिश कर दिए😊.... और ये सब  आपके सपोर्ट के  बिना पॉसिबल ही नहीं था... आप सबके कमैंट्स  एंड व्यूज ने मुझे मोटिवेट किया कुछ करने  को.... और अब मेरी रिस्पांसिबिलिटी और ज्यादा बढ़ गई है... कुछ अच्छा करने की... कुछ नया लिखने की.
और हां मेरे ब्लॉग्स से कभी किसी को दुख ना पहुंचे.... किसी की फीलिंग हर्ट ना हो... बस ये  ही मैं गॉड से प्रे करती हूं...और  आप सब की wishes  चाहती  हूँ....मैं आशा करती हूँ... आप सब  मुझे हमेशा ऐसे ही सपोर्ट करते रहेंगे... अगर आप सब मेरे साथ हैं तो प्लीज 👍का sign दीजिये 🙏🙏.

सोशल मीडिया

सोशल मीडिया
आज न्यूज़ पेपर में न्यूज़ है कि सुप्रीम कोर्ट भी बहुत चिंतित है सोशल मीडिया के ज्यादा यूज़ से.....  एक जज ने तो यहां तक कह दिया कि मैं स्मार्ट फोन की जगह कीपैड लेने की सोच रहा हूं.

तब से मेरे मन में इसको लेकर ढेरों सवाल है कि हमारे लिए ये useful हैं या हानिकारक...  मैं किसी डिसीजन पर नहीं पहुंच पा रही... मैंने अपनी मनोस्तिथि को कुछ इन शब्दों में बयां किया हैं...

वह रे सोशल मीडिया तेरी माया....
कभी एक क्लिक में ले सेल्फी...
कभी कोई क्लिक करें तुम्हारी फोटो.
 घर बैठे झटपट हम करें नेट बैंकिंग...
 चोर करें हमारे ऑनलाइन अकाउंट में घुसपैठ.
एक ही पोस्ट कर दें तुमको पॉपुलर....
और कभी एक ही पोस्ट बना दे तुमको हंसी का पात्र.
एक ही वीडियो से हो जाओ तुम घर-घर पॉपुलर ...और कभी लगे कहां खो गई हमारी निजता.
 कभी लगे कितना बढ़िया है यह मनोरंजन का साधन...
 कभी लगे छीन लिया इसने  हमारा सुखचैन.
कही  मिल जाये अपने बचपन के दोस्त....
छिन जाये  हमारे घर के ही रिश्ते.
कभी लगे खट्टा...
कभी लगे मीठा...
कभी अपना सा.. कभी पराया.
मैं इसके पास जाना नहीं चाहती...
 और दूर इससे रहना भी नहीं चाहती.🤗🤗

एक बार सोचियेगा जरूर

एक बार सोचियेगा जरूर
गाड़ी को side नहीं देने पर लड़के ने 40 साल के आदमी पर गोली चला दी... स्टूडेंट ने अपने टीचर पर गन चला दी... बच्चे ने मोबाइल में खेलने से मना  करने पर अपने पापा को तलवार से मार दिया.
क्या हो रहा हैं ये.. किस तरह की न्यूज़ चल रही हैं.. यह हो क्या रहा है हम सबको... हम इतने अग्रेसिव कैसे होते जा रहे हैं... पेशंस कहां गया हम लोगों का.. ना सुनना तो हम लोग की आदत ही नहीं है... कोई हमको कुछ कह तो वह हम सुन नहीं सकते. कभी सोचा है ऐसा क्यों... आज हम किस पीरियड में है... जहां 2 मिनट मैग्गी है, इंस्टेंट कॉफी है,  30 मिनट पिज़्ज़ा डिलीवरी है, ऑनलाइन शॉपिंग है,
व्हाट्सएप मैसेजस भेजते से ही लोगों को मिल जाना... वीडियो डाउनलोड ना हो तो गुस्सा..
कही  लोगों को हर चीज इनस्टेंट मिल जाना ही तो उनके अग्रेशन का कारण नहीं है.
 एक टाइम था हम लेटर भेजकर हफ्तों उसके आने का वेट करते थे... उसका भी एक अलग मजा होता था...ट्रैन में जाते थे तो  लोगों से इतना घुलमिल जाते थे कि मंजिल पर पहुंचने की जल्दी ही नहीं होती थी.. बल्कि सफर में ज्यादा मजा आता था..
लोगों के पास टाइम होता था एक दूसरे की सुनने का... हर चीज तसल्ली से होती थी... इसलिए तब के लोगों में पेशेंस ज्यादा होता था... आज लोगों के पास में सब चीजें हैँ... तब भी  वो खुश नहीं है... उनकी ये असंतुष्टि ही  उनकी फ़्रस्टेशन में बदल जाती है और उनकी ये फ़्रस्टेशन  ही एक दिन newspaper की हैडलाइन बन जाती हैँ...  माना आज हम बहुत एडवांस हो गए हैं.... और टाइम के साथ चेंज होना भी चाहिए.... पर सोचिए हम खुश कब थे तब या अब..... संतुष्ट कब थे तब या अब....  बदलाव हो तो अच्छे के लिए... ऐसे बदलाव का क्या फायदा जिससे हम खुद को तो नुकसान पहुचाये ही.. दूसरों के लिए भी  खतरा बन जाए... एक बार सोचिएगा  जरूर. 

जय माता दी 🙏

जय माता दी🙏
मम्मी प्लीज आज प्याज के पराठे बना दो.... नहीं बेटा अब 9 दिन तक घर में कोई प्याज़ नहीं,  लहसुन नहीं... और हां अंडे का तो नाम भी मत लेना... पीछे से चिंटू की दादी बोली.
क्यों दादी ऐसा क्या है जो 9 दिन तक प्याज़, लहसुन  नहीं खा सकते... अरे बेटा नवरात्री हैँ....  माता रानी के दिन है... इन दिनों  हमें शुद्ध खाना खाना चाहिए,  रोज माता रानी को धोक  लगाना चाहिए.... और अच्छे से रहना चाहिए...हां  तो  दादी मैं  अच्छे से रहूँगा और माता रानी को धोक भी लगाऊंगा पर  प्लीज प्याज का पराठा तो खाने दो.... चिंटू मैंने मना किया ना...  जबान मत लड़ा.

चिंटू बिना खाए ही  गुस्से में चला गया.... पीछे से दादी गुस्से में चिल्लाई... नहीं खाता तो ना खाये  पर अब 9 दिन तक कोई चीज ऐसी नहीं आएगी जिससे कि धर्म भ्रष्ट हो... मातारानी गुस्सा हो.
 तभी पड़ोस से  दादी की फ्रेंड आ गई.... अरे विमला क्या कर रही है... अरे तुझे पता है यह सामने वालों की लड़की रोज शाम को किसी लड़के के साथ में आती है... पता नहीं कौन है,  क्या है,  किस जात का है..... खैर हमें क्या... उसके घर वाले जाने.
चिंटू की दादी ने पूछा....  खाना खा लिया तो फ्रेंड गुस्से में बोली... अरे कहां बहु को  फोन से फुर्सत मिले तो खाए.... अभी तो तैयारी कर रही है.... आजकल की लड़कियों को कोई शर्म लाज तो है नहीं... तभी चिंटू की दादी धीरे से बोली... अरे हमारी कौन सी कम है... अपनी मनमानी चलाती है.... पोते, पोतिया भी ऐसे ही हो गए... जरा सी बात पर मुंह फुला ले... ऐसे ही धीरे-धीरे दोनों घंटे भर तक बात करते रहे.
इधर चिंटू की मम्मी काम करते-करते सोच रही थी की प्याज, लहसुन खाने से माता रानी नाराज हो जाती है..... पर क्या दूसरों के बारे में बात करने से खुश होती हैं.... क्या हम प्याज़ ,  लहसुन  के साथ में यह भी वचन ना ले की तन से, मन से,  कर्म से... ना किसी के लिए बुरा बोलेंगे... ना किसी का बुरा करेंगे.... कम से  कम इन   9 दिन तो करने की कोशिश करें.... क्या पता माता रानी को नया फॉर्मूला अच्छा लगे... पर उसकी दादी को बोलने की हिम्मत नहीं थी.... क्या पता उसके बोलने से बड़ों की इज्जत कम हो जाए.
 वह तो चुपचाप काम करते हुए सोच रही थी  कि चलो चिंटू के लिए बिना प्याज वाला पास्ता बनाते हैँ...क्यूंकि  चिंटू के भूखा जाने से पता नहीं माता रानी खुश हैँ क्या.... पर चिंटू की माँ तो नहीं...वो तो  उसको खुश करने की कोशिश में लगी थी .

 तो एक बार सब जोर से बोलो.... जय माता दी🙏

आखिर मेरा कुसूर ही क्या था 🤔😔

आखिर मेरा कुसूर ही क्या था 🤔😔

एक मां बाप ने अपने बच्चे  को घर से इसलिए निकाल दिया क्योंकि उसमें संस्कार नहीं थे..🙄. एक ने इसलिए  निकाल दिया कि बच्चे का रंग सांवला था और रिश्तेदार ताना देते थे.... और किसी ने इसलिए निकाल दिया  कि बच्चे का मन नहीं लगता था
आप सोच रहे होंगे ऐसा कैसे हो सकता है.... मैंने भी जब न्यूज़पेपर में यह न्यूज़ पड़ी तो बहुत ही सरप्राइज़ हुई की कोई मां बाप इतनी छोटी सी बात पर  कैसे अपने बच्चे को घर से निकाल देंगे.
Unbelievable... पर  ऐसा ही हुआ... बस फर्क सिर्फ इतना सा है कि वह बच्चे उनके सगे नहीं... गोद लिए हुए बच्चे थे.... तो... तो क्या हुआ... आखिर गोद लिए बच्चे क्या उनके अपने नहीं थे... जब उनको जरूरत थी अपनी जिंदगी का सूनापन दूर करने के लिए...अपने जीवन में खुशियां भरने के लिए... अपनी जिंदगी की कमी पूरी करने के लिए... तब उनको गोद ले लिया और अब उनको इतनी छोटी सी बात पर घर से निकाल  दिया.. मानो वो कोई बच्चे नहीं... कोई सामान हो... जिनको जरूरत ना होने पर बाहर फेंक दिया.
 अरे बच्चे में संस्कार नहीं थे तो उसे समझाते... प्यार से सिखाते... और हंसी आती है कि बच्चे का रंग सांवला था तो उसे बाहर निकाल दिया.. अरे उन रिश्तेदारों के तानो की परवाह कर  रहे हो.. वो तो तब भी ताने दे रहे होंगे जब तुमने बच्चा गोद लिया होगा...  तब तुम ने उनकी परवाह नहीं करी.... क्यूंकि तब तुम्हें अपनी खुशियों की परवाह थी... और हां किसी ने इसलिए  निकाल दिया कि बच्चे का मन नहीं लगता था... अरे कोशिश तो करते उसका मन लगाने की... अगर तुम उसको मन से नहीं अपनाओगे  तो उसका मन कहां से लगेगा... पहल तो तुमको ही करनी होगी.
 एक बार अपने दिल पर हाथ रख कर बताओ ... क्या तुम अपने खुद के बच्चे को भी ऐसे ही घर से निकाल देते... कभी नहीं...अरे  वह तो तुम्हारे सर पर खड़ा होकर भी नाचता  तो भी तुम उसको नहीं निकालते.
अरे भगवान ने तो  इन बच्चों को अनाथ बना कर पहले ही अन्याय किया है...वो  कैसे भी करके अपनी जिंदगी से समझौता करके चल रहे थे... तुमने  इनको अपना कर फिर   फेंक दिया.... तुमने तो इनको कहीं का नहीं रहने दिया... अब कैसे ये  वापस अपनी पुरानी दुनिया में जा पाएंगे.
 यह बच्चे और भगवान क्या तुम्हें कभी माफ कर पाएंगे.....अरे उनकी तो जाने दो.... क्या तुम्हारा जमीर वह तुम्हे कभी माफ कर पाएगा.... अरे पर  मैं भी क्या बोल रही हूं.... जो लोग इतना घिनौना काम कर सकते  हैं.... उनका क्या कोई जमीर होता भी होगा... कभी नहीं.
 ये  बच्चे जिंदगी भर समाज से यही सवाल पूछेंगे... आखिर हमको अपनाया ही क्यों  और फिर अपना कर फेंका ही क्यों...  आखिर इसमें हमारा क्या दोष  था. 😔😔

तुम करती ही क्या हो (A True story of housewives )

तुम करती ही क्या हो (A true story of housewives)
मम्मी कल टिफिन में समोसा रखना... मेरे फ्रेंडस  को बहुत पसंद है... नहीं मम्मी मैं  वेज इडली लेकर जाऊंगा..... हमेशा इसकी मनमानी नहीं चलेगी.... अरे  लड़ाई मत करो.... मैं दोनों की पसंद का रख दूंगी... पायल ने बच्चों की लड़ाई खत्म करते हुए कहा.... पायल कल मुझे जल्दी जाना है.... मीटिंग है... तो खाना जल्दी तैयार  कर देना... और हां कुछ अच्छा सा रखना साथ में और लोग भी होंगे.... अपने पतिदेव की बात सुन कर पायल एक बार तो टेंशन में आ गई पर फिर बोली... ठीक है तैयार  कर दूंगी
वैसे उसका अलार्म 5:30 बजे का है पर  कल जल्दी  हैँ तो उसने 5:00 बजे का सेट कर दिया... बिस्तर पर लेटी   ही थी की याद आया अरे इडली के लिए सूजी भिगोना तो  भूल ही गई और वह रसोई में सूजी भिगोने चली गई.
 सुबह अलार्म बजते से ही पायल मशीन की जैसे काम में लग गई और सबकी पसंद के अकॉर्डिंग खाना रेडी करने लगी... तभी गैस खत्म हो गई... एक बार तो उसको लगा पतिदेव की हेल्प ले लूं.. पर देखा तो वो  रेडी हो रहे थे... पायल  खुद ही सिलेंडर बदलने लगी... टेबल पर रखी चाय कब से उसका वेट कर रही थी पर  वह चाह कर भी  उसके पास नहीं जा पा रही थी.
आखिर भागदौड़ करके सबको भेजने के बाद  सोचा अब चैन से  बैठ कर चाय पीते हैँ...  तभी उसका मोबाइल बजा... काम वाली का फोन था... मैडम आज काम पर नहीं आऊंगी.... तबीयत ठीक नहीं है... सुनते ही पायल का दिमाग भन्ना गया... सिंक में रखे ढेर बर्तन उसको मुँह चिड़ा रहे  थे... और पूरी तरह बिखरा घर उसको ऐसे लग रहा था जैसे कोई  राक्षस खड़ा हो ... बुझे मन से उसने  ठंडी चाय एक घुट मे ख़तम करी   और घर के काम  में लग गई... घर का काम खत्म करते-करते उसको 12:00 बज गए... तभी याद आया कि dryclean वाले  के  एक महीने से कपड़े रखे हैं
..आज तो लाने ही पड़ेंगे...रेडी होकर वह कपडे लायी... इतने में  बच्चों के आने का टाइम हो गया... आते ही उनको खाना खिलाकर होमवर्क कराने लगी...  बच्चे बोले... मम्मी आज शाम को कुछ स्पेशल बनाना... रोटी सब्जी खा कर बोर हो गए... पायल शाम की प्लानिंग में बिजी हो गई...
 तभी पतिदेव आ गए.. बोले आज का दिन बहुत हेक्टिक था... कल संडे है... लेट तक उठूंगा.... सुनते ही पायल बोली... मैं भी आज बहुत थक गई.
.. कल मैं भी आराम करूंगी.. सुन कर बच्चे हंसने लगे... मम्मी आप तो घर पर ही रहती हो..आपका तो रोज ही संडे होता है... पतिदेव भी बोले... वैसे भी तुम दिन भर करती ही क्या हो... हर चीज की तो मेड हैँ... इतना सुनते ही पायल की  आंखों में आंसू आ गए... वो वाशरूम के बहाने अपने आंसू छिपाने लगी...  वापस आयी  तो देखा सब लोग मस्ती कर रहे हैँ... हॅस रहे हैँ...वह अपने परिवार की खुशियों में इन आसुओ की वजह से बाधा नहीं   बनना चाहती थी... वह भी उनके साथ मस्ती करने लगी... पर दिमाग़ में उसके कही ना कही चल रहा था की सच में... 'वो दिन भर करती ही क्या हैँ '😔🤷‍♀️


अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो 🤔🤔?

अगले  जन्म मोहे बिटिया ही कीजो 🤔🤔?

लड़की...
जीन्स पहनू....  मैं गलत...
रात को पार्टी करू... मैं  गलत...
लड़को के साथ बात करू... मैं  गलत...
लड़के  मेरे साथ गलत हरकत करें... तो भी मैं गलत...

लड़के...
रात को पार्टी... लड़के है....
लड़कियों को छेडे.... लड़के है....
लड़कियों को नीचा दिखाए...लड़के है....
लड़कियों को गलत नजर से देखे... लड़के है...

ओह अब समझ आया.. लड़कियों का पर्यायवाची गलत .... एंड लड़को का पर्यायवाची  सही है.
फिर मैं कैसे कहु.🤷‍♀️.. अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो.🤔?

  

ये उन दिनों की बात है 🤗🤗

ये उन दिनों की बात है 🤗🤗
 मम्मी मुझे लेट हो रहा है स्कूल के लिए...  मेरा टिफिन दो जल्दी... भैया तुझको कितनी बार बोला मेरे सामान के हाथ क्यों लगाया... मम्मी आप हमेशा दीदी का फेवर लिया करो... मैं तो फालतू हूं ना...  friends  चलो छुपन छुपाई खेलने.. नहीं पकड़म पकड़ाई खेलेंगे.
 आज तो बुधवार है... आज चित्रहार आएगा... गॉड शम्मी कपूर का गाना आ जाये.... और  उसी टाइम  लाइट चली गई तो... इस बार  रामायण में भगवान राम सीता को लेने लंका जायेंगे... मम्मी आप खाना जल्दी बना लेना.... नहीं तो आप रामायण नहीं देख पाओगे.... अरे कोई ऊपर जाकर एंटीना हिलाओ... पिक्चर साफ नहीं आ रही है.... मम्मी दादी हमेशा गुस्सा करती है कि रामायण के टाइम हाथ जोड़कर क्यों नहीं बैठते.

मम्मी इस बार गर्मियों की छुट्टी में मामा के यहां 1 महीने के लिए चलेंगे.... अरे बेटा स्कूल से आकर कपड़े तो बदल ले.... मम्मी भूल गई क्या कल संडे है.... मैं तो खेलने जा रहा हूं.
मम्मी पड़ोस से  अंकल आए थे..उनके यहाँ शादी है तो  गमले लेकर गए हैं घर सजाने को... मैं भी  उनकी हेल्प करने जा रहा हूं.
आज तू टिफिन में क्या लाई है... चल लंच करते हैं... अरे अभी तो सेकंड पीरियड है... टीचर डाँटेगी.... कोई नहीं चुपके से  खाते हैं.
 अरे क्या हुआ दोस्तों... कहां खो गए सब.... वापस आ जाइए... यह तो 'उन दिनों की बात है'.... 😊
यह बेफिक्री बेपरवाही  अब कहां नसीब अब तो तब की बेपरवाही ने कब जिम्मेदारी की चादर ओढ़ ली पता ही नहीं चला... तभी तो किसी ने क्या खूब कहा है...
'स्कूल का वो बैग
 फिर से थमा दे माँ
जिंदगी का बोझ उठाना मुश्किल है '
तभी तो हर इंसान को अपना बचपन इतना प्यारा होता है... इन यादों में जाकर  बाहर ही नहीं आना चाहता है... इन यादों में जाकर वापस बच्चा बन जाता है... सच बताइए आप भी बन गए थे ना बच्चा... आपके चेहरे पर भी एक मीठी मुस्कान थी ना.... क्यों नहीं होगी आखिर...ये ' उन दिनों की बात है'🤗🤗

करवा चौथ 🌛🌜(एक नयी शुरुआत )

करवा चौथ 🌛🌜(एक नयी शुरुआत )

नैना की शादी के बाद पहली करवा चौथ थी  वो  बहुत उत्साहित थी क्या पहनेगी कैसे तैयार होगी I इस दिन के लिए वो  बहुत ख़ुशी ख़ुशी  तैयारी रही थी I तभी नैना की 7 साल की ननद की  बेटी नेहा जो की इधर ही रहती थी क्योंकि उसके पापा की कुछ साल पहले डेथ हो गई थी,भागते हुए आयी,

 'मामी ये  आप क्या कर रही हो  कितनी सुंदर साड़ी हैं',

बेटा ये मैं कल पहनूंगी कल करवा चौथ है ना',

 ओह  मतलब आपका हैप्पी डे  और मम्मी और मेरा सैड डे',

कहते कहते नेहा   उदास हो गयी I इतनी  छोटी सी बच्ची  के मुंह से ऐसा सुनकर नेहा को बहुत बुरा लगा उसने नेहा को गोद में  बिठाया और   पूछा,

'बेटा ऐसे क्यों कह रही हो',

'मामी  कल मम्मा  बहुत उदास रहती है,  बाहर भी नहीं आती है,नानी  मना करती है,और पूजा भी  नहीं करती है I मुझे मम्मा को ऐसे देखकर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता'I

.नेहा बोले जा रही थी और नैना के मन में कुछ और चल रहा था I उसने नेहा से पूछा,

' बताओ  इसमें से तुम्हे  कौन सी साड़ी  पसंद है',

नेहा ने  एक साड़ी  पर हाथ लगाया I नैना ने  वो साड़ी अलमारी से  निकाल कर उसकी सब मैचिंग रेडी कर ली I
अगले दिन  सब व्रत तैयारी कर रहे थे,तभी नैना की सास ने उसे तैयार होने को कहा I नैना बोली,

'बस मम्मी अभी आई',

वो  नेहा की पसंद की  साड़ी अपनी  ननद के  कमरे में लेकर गई और उसने उस साड़ी को अपनी ननद को पहनने को कहा I नेहा की माँ ने  पहनने को मना किया तो नैना बोली,

'ठीक है मैं भी तैयार नहीं होंगी और मेरा व्रत तभी सही से होगा जब आप मेरे साथ रहोगे',

नेहा की माँ ने नैना को   बहुत समझाया पर नैना नहीं मानी,उसने कहा,

'अपनी नहीं तो नेहा की खुशियों के लिए ही मान जाओ',

आखिर नेहा की मां को तैयार होना पड़ा और बाहर भी आना पड़ा I नेहा अपनी मम्मी को देखकर बहुत खुश हुई I वो अपनी मम्मी और मामी  के साथ सब तैयारियों में व्यस्त हो गई उसका उत्साह अलग ही दिख रहा था,उसकी मम्मी जो  उसके साथ थी I
 रात को चांद देखने के बाद सब खाना खाने बैठे तो नेहा ने अपनी मामी  को अपने गले लगा लिया और और कहा,

'थैंक्यू मामी मेरी मम्मी का सैड डे हैप्पी  डे  बनाने के लिए',

सुनते ही सबकी आंखों में आंसू आ गये पर वो  दुख के नहीं खुशी के आंसू थे I नैना आज बहुत खुश थी और सोच रही थी की हमारे लिए ऐसी खुशी किस काम की जो दूसरे के दुख को और बढ़ाएं,किसी के दुख को  कम करके उसको थोड़ी खुशियां देने से ही तो त्योहार त्योहार बनता है Iआज वो   सच में बहुत खुश थी I

सफाई (cleaning)👨‍💻👩‍💻🧹🧹

सफाई (cleaning)👩‍💻👨‍💻🧹🧹
इन दिनों घर-घर में दिवाली की सफाई चल रही है ...यह हमारा बहुत पुराना कस्टम है.... दिवाली के लिए हम महीने भर पहले से साफ सफाई में लग जाते हैं... इस बहाने घर में जमी साल भर की धूल  भी  साफ हो जाती है और हमें हमारा ऐसा काफी पुराना सामान मिल जाता है... जिससे  हमारी काफी यादें जुड़ी होती हैं... या फिर ऐसा सामान जो हमारे लिए काम का नहीं होता.... पर किसी के लिए जरूरत होती है.... उसको घर से बाहर निकाल कर ना  सिर्फ हमारा घर हल्का   होता है.... हमारा मन भी हल्का हो जाता  है.
 जब भी सफाई शब्द सुनते हैं... तो मन में यही आता है.... घर की सफाई,  कॉलोनी की सफाई या हमारे देश की सफाई.... आजकल तो  लोग बहुत  जागरूक भी हो रहे हैं देश को स्वच्छ बनाने में.... एक बार गंदगी फैलाने से पहले   सोचते हैं.

 लेकिन  क्या सफाई से मतलब यही है.... क्या और भी ऐसी जगह नहीं है जहां की सफाई की बहुत ज्यादा जरूरत है.... एक ऐसी जगह जो हमारी जिंदगी का हिस्सा है जहां हम हमारा आधा टाइम गुजारते हैं.... वो है सोशल मीडिया.
आप सोच रहे होंगे... सोशल मीडिया की सफाई मतलब... पर यह एक ऐसी  जरूरत है जिसकी सफाई होनी बहुत जरूरी है और एक बॉलीवुड कलाकार  अनन्या पांडे ने भी  2nd   अक्टूबर को इसके लिए आवाज उठायी हैं...   सच में ये एक  बहुत जरूरी काम है  ... हम सबको  इस तरफ ध्यान देने की जरूरत हैं.
आजकल लोग किसी से गुस्सा है.... तो सोशल मीडिया का यूज करते हैं... किसी से हर्ट हैं तो सोशल मीडिया....  बिना वजह किसी को ट्रोल करते हैं.... यह भी नहीं सोचते कि जिसको शिकार बना रहे हैं उसको कितना हर्ट होगा.... और अगर आपको किसी से शिकायत है  तो पर्सनली  जाकर उसको बताओ... दुनिया को बताने की क्या जरुरत है...
किसी की पिक्चर को एडिट करके उसका मिसयूज करना.... और भी ना जाने क्या क्या गंदगी फैलाते हैं... फेक वीडियोस को सच बता कर वायरल कर देते हैं... कितनी बार इस वजह से लोगों में डिस्प्यूटज भी हो जाते हैं ... बहुत ही क्रिटिकल सिचुएशन हो जाती है... कई बार लोग इतना हर्ट हो जाते हैं और बहुत ही गंभीर कदम उठा लेते हैं... जिसका मैं यहां जिक्र करना भी पसंद नहीं करूंगी.
तो  मैं सब से रिक्वेस्ट करती हूं कि सोशल मीडिया का यूज़ पॉजिटिविटी के लिए करें.... क्यों नेगेटिविटी फैलाना.... अगर किसी से शिकायत है तो पर्सनली जाकर  मिलो...  पर प्लीज सोशल मीडिया को अपने घर के जैसे साफ रखें. 🙏

विदाई.. बेटे की 🚶‍♂️🚶‍♂️🚶‍♂️🚶‍♂️

विदाई.... बेटे की🚶‍♂️🚶‍♂️🚶‍♂️🚶‍♂️
आज तक हम सब  सुनते आए हैं की लड़की तो पराया धन है.... किसी और की अमानत होती है... शादी के बाद परायी हो जाएगी... और हमें लड़की के मां-बाप से बहुत सहानुभूति होती है... की कैसे वो अपने जिगर के टुकड़े को किसी और को देंगे... कितनी तकलीफ होगी उनको.... बचपन से हम सब यही सुनते और समझते आये  हैं कि लड़की तो पराई हो जाती है.
पर क्या आपने कभी यह सोचा कि लड़की ही नहीं शादी के बाद तो लड़का भी पराया हो जाता है... अजीब लग रहा है ना सुनने में... पर यह बात बिल्कुल सच है.... लड़का भी शादी के बाद पराया हो जाता है... चाहे वह उसी घर में रहे   पर अब वो अपने मां-बाप के लिए पराया हो जाता है... कैसे... 🤔🤔
अब मां बाप अपने बेटे पर अपना हक पहले जैसे नहीं जमा सकते.... उसकी पत्नी के सामने उसको डांट नहीं सकते.... जो माँ शादी के पहले अपने बेटे की छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखती थी...उसने  खाना खाया या नहीं... वह कहां जा रहा है.... कब आएगा... दिन भर  कहां था... उसकी अलमारी सही करना... गलती होने पर उसको डांटना... प्यार आने पर उसको गोदी में सुलाना.... उसके बालों में मालिश करना... पर क्या  शादी के बाद वो ऐसा कर पायेगी...  और अगर बेटा करवाना भी चाहे तो ये सोसाइटी उसको मम्मा  बॉय बताकर उसका मजाक बनाएगी.. और वो चाहकर भी अपने मां बाप से पूछ कर कोई काम नहीं कर पाएगा...क्यूंकि अब  वो  मैरिड मैन है...रेस्पोंसिबल मन है.
पर बेटी शादी के बाद  भी इस घर से जुड़ी रहती है... लाइफ में कोई भी प्रॉब्लम आए... वह अपने मां बाप से शेयर करती है... लाइफ की तो जाने दो... कौन सी सब्जी में कौन से मसाले पड़ेंगे... अपने बच्चे को कैसे पाले... वह भी अपनी मां से पूछती है... क्योंकि उसको पता है की यह सोसाइटी उसको मम्मा गर्ल कह कर उसका मजाक नहीं बनाती है... वो मन से हमेशा अपने पेरेंट्स से जुड़ी रहती है.
इसलिए शादी के बाद बेटी ही नहीं बेटा भी विदा होता है... फर्क सिर्फ इतना है कि बेटी इस  घर से विदा होती है... पर बेटा मां-बाप की जिंदगी से विदा होता है...जो  शायद और भी तकलीफ देह होता है .
मुझे तो ऐसा ही लगता है...प्लीज आप लोग अपने व्यूज बताइयेगा 😊

कौन सही.... कौन गलत 🤔🤔

कौन सही... कौन गलत 🤔🤔
Scene 1st (पार्ट A)
बहू का दर्द...
मेरे सास ससुर मुझको  अपने हिसाब से जीने नहीं देते... हमेशा इनके अकॉर्डिंग चलो... आखिर मेरी भी तो लाइफ है... कभी खाना खाने का मन ना हो तो भी उनके लिए तो बनाना ही पड़ेगा... हर बात में रोक-टोक...  अपने मन से कपड़े भी नहीं पहन सकते.... हमेशा उनकी बेटी सही और मैं गलत... बेटे को भी अपने अकॉर्डिंग चलना  चाहते हैं... फिर मुझे लाये क्यों....  फ्रीडम तो  लाइफ में है ही नहीं... घुट -घुट कर रहो.
पार्ट B
सास का दर्द....
 मेरी बहू जब देखो अपनी-अपनी चलाती  हैं....
हमारी तो सुनती नहीं... बेटे को भी अपना गुलाम बना लिया... हम तो जैसे हैं ही  नहीं... मेरी बेटी को देखो कितना काम करती है ससुराल में... यह तो जो मन आये वह कपड़े पहनती हैं...रोज रोज  बाहर जाना... घर में तो मन लगता ही नहीं... बड़ो से पूछने का तो कोई काम है   ही नहीं.
Scene 2(पार्ट A)
बेटी का दर्द...
मेरे मम्मी पापा बहुत दुखी है... भाभी को देखो... कुछ भी नहीं करती मम्मी पापा के लिए.... उन्होंने खाना खाया या नहीं खाया... दवाई ली या नहीं... कोई मतलब नहीं... वह कैसे रह रहे हैं कोई ध्यान नहीं.... अपने हिसाब से रहना, कपड़े पहनना... घर पर तो कभी रहती  नहीं... भाई  को भी अपना गुलाम बना लिया.
(पार्ट B)
माँ का दर्द...
मेरी बेटी ससुराल में इतना काम करती है.... सास ससुर नाच नचाते   हैं....उनके ही अकॉर्डिंग रहती है
...अपने मन से कुछ नहीं कर पाती... कपड़े भी उनकी पसंद के पहनो... जमाई को देखो... वो भी मां-बाप के कहने में ही चले.... बेचारी बहुत ही दुखी है.
😊😊😃😃क्या हुआ... क्या सोच रहे हैं.... मुझे नहीं लगता अब कुछ कहने की जरूरत है.... आप समझ गए होंगे मैं क्या कहना चाहती हूं... कि कौन सही है कौन गलत है... अगर हम जो दूसरों से एक्सपेक्ट करते हैं... खुद वैसे बन जाए... तो शायद किसी बेटी को अपने मां-बाप की चिंता नहीं रहेगी... और किसी मां बाप को  अपनी बेटी  की...🤗🤗😉😉
हां थोड़ा मुश्किल जरूर है.. पर आजमा कर देखो.
..अगर आप अपने मां बाप और बेटी से सच्चा प्यार करते हो तो इतना तो  उनके लिए कर ही सकते हो.... आपकी ये  इनडायरेक्ट कोशिश का उनको डायरेक्ट फल मिलेगा.... एक बार करके तो देखो.🤗🤗


Generation gap 👨‍👩‍👧‍👦

Generation gap👨‍👩‍👧‍👦
सुनो आप कुछ ज्यादा ही फ्रैंक  नहीं होते क्या रोहन के साथ.. मेरे ख्याल से  पेरेंट्स और बच्चों  में  खुलापन तो होना चाहिए  पर थोड़ी झिझक भी होनी चाहिए...   ताकि बच्चों में डर रहे... रेस्पेक्ट रहे... रोहन की मम्मी ने रोहन के पापा को समझाते हुए कहा तो रोहन के पापा ने हंसते हुए बोला तुम ना बहुत सोचती हो... ऐसा  कुछ नहीं है... आजकल बच्चों के साथ फ्रेंडशिप रखनी चाहिए... जिससे वह हमसे कुछ छिपाये नहीं और वह हम से डरे भी नहीं... तभी तो यह जनरेशन गैप  खत्म होगा और देखना मैं  ये गैप खत्म करके रहूंगा...रोहन की मम्मी ने कहा आपको समझाना बेकार है और वह अपने काम में लग गई.
अगले दिन रोहन के पापा ने रोहन से कहां... बेटा आज मुझे ऑफिस में ज्यादा काम नहीं है... चलो अपन आउटिंग पर चलते हैं... रोहन ने कहा पापा आज तो मेरा  फ्रेंड्स के साथ पहले से प्रोग्राम है... मैं नहीं आ पाऊंगा... अरे तो क्या हुआ... फ्रेंड्स को भी बुला लो... हम सब साथ चलते हैं... और मैं तो वैसे भी तुम सबके साथ बहुत फ्रैंक हू...  मुझसे क्या छुपा है. वी विल स्पेंड ग्रेट टाइम buddy...
रोहन थोड़ा परेशान हुआ पर जब  उसके पापा ने बहुत इंसिस्ट किया तो उसने कहा ठीक है... मैं फ्रेंडस से बोलता हूं... तभी रोहन के पापा का फोन आ गया.. और वो दूसरे रूम में चले गये.
रोहन ने  अपने फ्रेंड्स को कांफ्रेंस पर  लेकर कॉल किया और बताया कि पापा भी साथ चलेंगे... सब एक साथ बोले... तू पागल है... मैं नहीं आ पाऊंगा... एक-एक करके सब फ्रेंड ने  मना कर दिया... रोहन बोला पता मुझे भी है... पर क्या करूं वह मान ही नहीं रहे... ऐसा करता हूं कोई बहाना बना देता हूं... हम कभी और चलते हैं... सब फ्रेंड्स एग्री हो गये... रोहन का फोन स्पीकर पर था... पीछे से रोहन के पापा ने सब सुन लिया पर वह अनजान बने रहे. रोहन पापा के पास आया पर उसके  बोलने से पहले ही वह बोले बेटा मुझे तो ऑफिस में अर्जेंट काम आ गया तो मैं तो तुम लोग के साथ नहीं आ पाऊंगा... नेक्स्ट टाइम... तुम लोग जाओ अभी... रोहन मन ही मन बहुत खुश था... क्योंकि अब उसका प्रोग्राम कैंसिल नहीं होगा.... रोहन के जाने के बाद रोहन के  पापा ने रोहन की मां को चाय बनाने को कहा तो वह बोली आपको तो अर्जेंट काम था... क्या हुआ जा नहीं रहे..
तब रोहन के पापा बोले...  तुम सही कहती  थी... बच्चों में और पेरेंट्स में एक रेखा होनी चाहिए... तभी रिश्तो का सम्मान   रहता  है... शायद इसको ही सो कॉल्ड जनरेशन गैप कहते हैं... जो शायद हमेशा ही रहेगा. रोहन की मम्मी ने रोहन के पापा के कंधे पर हाथ रखा और कहा आप बैठे मैं आपके लिए चाय लाती हूं.. वी विल स्पेंड ग्रेट टाइम... जस्ट चिल...  और दोनों ठहाका मार  कर हंसने लगे. 

Friday, 24 January 2020

जरुरी तो नहीं 🤷‍♀️

जरुरी तो नहीं🤷‍♀️
एक वीडियो कॉन्फ्रेसिंग सेशन मे शाहरुख़ खान से उसके चाहने वाले ने पूछा.... कि हमारे सही काम के बदले में कोई हम से घृणा करें तो क्या करें.... तो शाहरुख खान ने बोला.... सही चीज पर्सनल  होती है.... किसी दूसरे की उम्मीद या  डिमांड पर आधारित नहीं होती..... नफरत या प्यार उसे जस्टिफाई नहीं करता... सही चीज किसी से एक्सपेक्टेशन नहीं चाहती.
ये बात मुझे बहुत ही सही लगी ... अगर हम ध्यान से देखें तो कितनी सही बात है... आज हम लोग कोई सही या अच्छा काम करते हैं तो दूसरों से आशा करते हैं कि वह उसकी तारीफ करें... प्रशंसा करें... और नहीं भी करें तो कम से कम घृणा तो नहीं करें.
लेकिन ये  जरूरी तो नहीं कि जो काम हम सही कर रहे हैं दूसरों को वह सही ही लगे और वैसे भी अगर तुम्हारा काम सही है तो करते रहो.... और इसको तो पॉजिटिव लो की अगर कोई तुमसे नफरत  कर रहा है तो इसका मतलब तुम्हारा काम सही है...इसको तो इनाम समझो.... क्यूंकि तुम्हारा काम सही हैँ  तभी वो तुमसे  नफरत कर रहा हैँ... नहीं तो वो तुमसे कोई मतलब ही नहीं रखते....
अगर तुम सही काम कर रहे हो तो लगातार करते रहो.... किसी के प्यार या नफरत की परवाह मत करो... और ऐसा करके हमारा ध्यान काम पर नहीं लोगो की राय पर ज्यादा होगा जिससे हमारे काम पर भी असर होगा...  वैसे भी तुम अपने काम के लिए उनकी राय को इतना महत्व दे रहे हो... इसका मतलब तुम खुद sure नहीं हो की तुम सही हो या नहीं... तुम उनको  अपनी जिंदगी का इतना इंपॉर्टेंट हिस्सा बनाते ही क्यों हो.... just let them go and do your work in right direction. 

Wednesday, 22 January 2020

मैं लिखती हूँ क्यूंकि.... ✍✍✍

मैं लिखती हूँ क्यूंकि....✍✍✍✍
1,  2, 3,  5, 10, 15,  20, 30,  40, 45 और ये 50.... जी हां फ्रेंड्स आज ये मेरा 50th ब्लॉग  है... 😃😃...सच बताऊं तो मुझे भी यकीन नहीं हो रहा कि मैंने इतने ब्लॉग्स लिख दिए...पर इसमें मेरा अकेले का ही हाथ नहीं हैं.... आप सबका.. मेरे एक, एक रीडर, व्यूअर का हाथ हैं....अगर आप सब मुझको नहीं पढ़ते.. मुझको कमेंट नहीं करते तो क्या मैं कभी इस पॉइंट पर आ सकती थी... कभी नहीं.. आप सबने अपने कीमती समय से समय निकाल कर मुझको पढ़ा... तो आप सब का मैं दिल से शुक्रिया करती हूँ.🙏
 एक्चुअली मैं  केवल  ब्लॉग्स ही नहीं लिख रही... मैं कर रही हूँ आप सब से अपने दिल की बात... शेयर कर रही हूं अपने  दिल की बात जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.
 ऐसे ही बैठे -बैठे मेरे मन में ख्याल आया कि  मैं क्यों लिख रही हूँ... मुझे इससे मिल क्या  रहा हैं .....कुछ भी तो नहीं... तो क्यों न  मैं लिखना  बंद कर दूँ... पर तभी लगा की हर काम का कोई रिवॉर्ड मिले.... ऐसा जरुरी तो नहीं... ये  तो मेरा शौक हैं जिसको मैं खुल कर जी रही हूँ. 🤗
.मैं एक हाउस वाइफ हूँ... जिसके काम का  कोई एन्ड नहीं होता.....दिन का बहुत कम समय वो अपने लिए निकाल पाती हैं.... मैं मेरे उस बिजी schedule में  से टाइम निकाल कर कुछ लिख रही हूँ .... क्यूंकि लिखने से मुझे खुशी मिल रही हैं... एक सेल्फ सेटिस्फेक्शन मिल रहा है... लिखकर मैं अपने आप को दुनिया के सामने खोल रही हूं... मेरे दिल की बातें लिख रही हूं...मुझे लगता है मैं अपने लिए कुछ टाइम निकाल रही हूँ... वह टाइम जो केवल मेरा हो... मेरे लिए हो... मैं चाहती हूं कि मैं कुछ ऐसा लिख सकूँ  जो लोगों के दिल को छू जाए... उनके चेहरे पर मुस्कान ला सके... उनको कुछ सोचने को मजबूर कर दे.. इसलिए मैं अब लिखने लगी हूं... पता नहीं मेरा यह सफर किस मंजिल तक जाएगा... पर सच बताऊ ... मुझे तो मंजिल पर पहुंचने की कोई जल्दी नहीं है... मुझे इस सफर में ही इतना मजा आ रहा है क्योंकि इसमें आप सब.. मेरे अपने.. मेरे साथ है ..और किस को अच्छा नहीं लगता अपने अपनों का साथ...  इसलिए बस मैं यही चाहती हूं कि मेरे इस  सफर में आप सब मेरे साथ यूं ही बनी रहे... आज मैं खुद से एक  प्रॉमिस करती हूँ की मैं लिखती रहूंगी...  और कुछ नहीं मिला तो क्या है... कम से कम खुद तो अपने आप से मिलती रहूंगी... और अपने आपको तो खुश रखूंगी... और आज के टाइम में खुद को खुश रख पाना  भी एक कम चैलेंज नहीं है... तो आज  मैं खुद से प्रॉमिस करती हूं... keep writing... keep writing..... ✍✍✍
मैंने आज तक बहुत से ब्लॉग्स  लिखे... डिफरेंट टॉपिक्स... डिफरेंट सब्जेक्ट... पर जो ब्लॉग्स मेरे दिल के पास हैं वो हैं...
माँ की  परेशानी,
आज का अकेलापन,
 दुआएं,
तुम करती ही क्या हो,
ससुराल के मायने,
 मेरी अम्मा,
दिवाली की भागदौड़,
लंच बॉक्स...,
पर ये तो  मुझे पसंद आए... अगर आपको भी मेरे ब्लॉग्स याद हैं...  तो कमेंट बॉक्स में बताएं कौन सा ब्लॉग आपके दिल को छुआ... किसने आपके चेहरे पर मुस्कान ला दी... और किस ब्लॉग  ने आपको कुछ सोचने को मजबूर कर दिया..और अगर आपको  मेरा कोई ब्लॉग ऐसा लगता हैं की इसको शेयर कर सकते हैं तो प्लीज शेयर  विथ  योर फ्रेंड्स, रिलेटिव्स... 🙏🙏
मैंने मेरी भावनाओं को  कुछ शब्दों में पिरोया है..

लिखकर में रखती हूं अपने दिल की बात...
लिखते समय मैं होती हूँ  खुद के पास...
लिखने से  होती है मुझे आत्म संतुष्टि...
 लिखकर मैं  आती हूं आपके पास...
लिख पर मैं लाना चाहती हूँ आपके चेहरों पर मुस्कान...🙂
लिख कर मैं चाहती हूँ आपका मेरे अपनों का साथ...
लिख कर मैं लेना  चाहती हूँ मेरे इस सफर का मजा...
और ज्यादा भी नहीं मिला तो कम से कम रख पाऊँगी खुद को ही खुश...🤗
जो हैं आज के समय में  बहुत बड़ी जिम्मेदारी... तो आज मैं अपने आप से करती हूं एक वादा...
Keep writing...✍✍✍keep smiling🤗🤗

Sunday, 19 January 2020

कम्फर्ट जोन (comfort zone)

कम्फर्ट जोन (comfort zone )
 कंफर्ट- आराम,  सुकून....जोन - दायरा,  क्षेत्र.
 आप सोच रहे होंगे कि मैं क्या इनका मीनिंग बता रही हूं... यह तो हम सबको मालूम है.... मुझे मालूम है फ्रेंड्स...  आप सब बहुत इंटेलिजेंट है... और सब इसका मतलब जानते हैं.😉
यहाँ मैं  बात कर रही हूँ  कंफर्ट जोन की... जो हर आदमी अपनी जिंदगी में बनाकर रखता है और नेचुरल हैं की वो अपने बनाये हुए कम्फर्ट  जोन  में बहुत सुरक्षित,  बहुत सुकून महसूस करता है और  करना भी चाहिए आखिर ये कम्फर्ट जोन उसका ही बनाया हुआ है और हर किसी का कम्फर्ट जोन होना भी चाहिए क्यूंकि आदमी अपने बनाये हुए कम्फर्ट जोन में बहुत खुश भी रहता हैं और खुशी से बढ़कर क्या चीज है.
हर किसी का कंफर्ट जोन अलग अलग होता है... स्टूडेंट्स,  बच्चे अपने बनाए हुए फ्रेंड्स,  स्कूल, अपने घर को कंफर्ट जोन कहते हैं... जैसे ही उनको यहां से हटा कर कहीं अलग भेजा जाता है या कुछ अलग पढ़ाया जाता है वह घबरा जाते हैं.... बड़े लोग अपने जमे जमाये बिजनेस, सर्विस को कम्फर्ट जोन   कहते हैं.... लेडीज अपने घर, अपनी किचन,  अपनी फैमिली,  अपनी सोसाइटी में कंफर्ट जोन में रहती हैं.
जब भी कोई इनसे कहता हैं  इससे कुछ अलग करो, कोई नया बिजनेस करो,  कोई  नया जॉब, अपनी हॉबी ट्राई करो तो हम घबरा जाते हैं...uneasy   हो जाते हैं और मना कर देते हैं.... giveup कर देते हैं.
 पर अगर हम हमारे आस पास बहुत से लोगो को  देखे ... जैसे कि मैरीकॉम,  सानिया मिर्जा उन्होंने शादी, बच्चे होने के बाद भी giveup नहीं किया...  अपने कंफर्ट जोन से बाहर आयी  और आज पूरी दुनिया में अपना नाम किया और हम सब आज उनकी और प्रशंसा से देख रहे हैं... पर आपने सोचा कि यह भी मना कर देती अपने कंफर्ट जोन  से  बाहर आने को तो क्या हम उनकी ऐसे ही प्रशंसा करते.
नितेश तिवारी डायरेक्टर ऑफ दंगल,  छिछोरे और भी बहुत सी मूवीज के डायरेक्टर... जानते हैं इन्होंने आईआईटी मुंबई से इंजीनियरिंग करी... पर इनका बहुत मन था इस फील्ड में आने का... उन्होंने  हिम्मत करके अपने कंफर्ट जोन से बाहर आकर इधर हाथ आजमाया और आज हम सभी इनकी  मूवीस के दीवाने हैं. सुशांत सिंह राजपूत, कृति सेनन, दिशा पाटनी ये  सब इंजीनियरिंग कर रहे थे पर इन्होंने भी हिम्मत करके अपना लक दूसरे फील्ड में आजमाया.
मार्क  जुकरबर्ग, जेफ़ बेजोस और भी बहुत बड़े बड़े बिजनेसमैन,इंडस्ट्रियलिस्ट सबने अपना आराम का दायरा छोड़कर अपना एक अलग मुकाम बनाया और पूरी दुनिया ने इनका लोहा माना.
इसलिए मेरा मानना है कि अगर हमें कुछ अलग करना है... दुनिया में हमारा नाम करना है... अपना हुनर., अपनी कला,  अपना टैलेंट सब के सामने लाना है तो हम सबको अपने कंफर्ट जोन से बाहर आना ही पड़ेगा.... हां मुश्किल जरूर है पर उसका जो फल होगा वह उतना ही मीठा होगा और उसकी मिठास का अपने को अंदाजा भी नहीं होगा.
वैसे  ये भी जरूरी नहीं कि हम कम्फर्ट जोन  से बाहर आकर सक्सेस ही होंगे ,  पूरी दुनिया में हमारा नाम ही होगा.. पर एटलीस्ट हम कोशिश तो कर रहे हैं...और इससे हमें  कुछ सीखने को ही मिलेगा तो क्या आप तैयार हैं अपने अपने कम्फर्ट जोन  से बाहर आने के लिए पर हां  पहले आप अपने को सिक्योर कर ले फिर ही  इससे बाहर आए.
 कई लोग अपने बनाए कंफर्ट जोन में   इसलिए भी  रहते  हैं कि वह डरते हैं कि दुनिया क्या कहेगी, बात बनाएगी, हसेगी...  तो दोस्तों मेरा मानना हैं की वो तो वैसे  भी बात बनाएंगी... अगर आप कम्फर्ट जोन में हो तब भी और कुछ अलग करते हो तब भी.. तो मेरी तो सलाह हैं    एक बार बाहर आकर तो देखो कम से कम आपको  यह मलाल  तो नहीं रहेगा कि देखो हमने try ही नहीं किया... औरों के लिए नहीं अपने लिए.... एक बार  बाहर आकर तो देखो. 🤗🤗

Friday, 17 January 2020

मोटा पैकेज 💶💸💷💵💰

मोटा पैकेज💸💷💵💰
अरे क्या हुआ... आप कमरे में ऐसे  चुपचाप  क्यों बैठे हैं.. आप तो शर्मा  अंकल के गए थे ना मिठाई देने...  मैं तो तैयार हो गई की आप आओगे तो कॉलोनी में सबके चलेंगे मिठाई देने... आखिर हमारी बेटी का इतना अच्छा जॉब लगा हैं अमेरिका में... इतना मोटा पैकेज..बेटा पहले ही ऑस्ट्रेलिया में सेट है... अपने को और  क्या चाहिए... और आप  महाशय ऐसे हो कि मुंह लटका कर बैठे हो... संदीप की वाइफ बोले जा रही थी और संदीप चुपचाप सुन रहा था.
जब  उसकी वाइफ ने उसकी उदासी कारण पूछा तो संदीप बोला श्रेया तुम्हें पता है... मैंने हमेशा से सपना देखा था कि मेरे बच्चों का विदेश में जॉब लगे... अच्छा पैकेज मिले... पता है क्यों... क्यूंकि  हमारे पड़ोसी अंकल शर्मा जी को मैंने  देखा था जब उनके बच्चे.. जो मेरे फ्रेंड्स थे ... बाहर  मोटे पैकेज पर सेट हो गए थे तो शर्मा अंकल कितने खुश थे... पूरी कॉलोनी उनके बच्चों की तारीफ कर रही थी.. और शर्मा अंकल भी  सर ऊंचा करके घूम रहे थे.
तब से मेरा सपना था कि मैं तो कुछ नहीं बन पाया पर अपने बच्चों को जरूर इस मुकाम पर पहुँचाऊँगा.. और आज मेरा सपना भी पूरा हो गया. पर..... पर क्या संदीप की पत्नी बोली... तब संदीप बोला अभी शर्मा जी के घर मिठाई देने गया तो देखा  पूरा घर अस्त-व्यस्त था... मुझे देखते ही शर्मा अंकल बोले... बेटा कुछ खाने को ऑनलाइन मंगा दे... आज खाने वाली भी नहीं आई और बिखरे  घर को देख कर शर्मिंदा होते हुए बोले आज सफाई वाली भी नहीं आयी.... अब तुम्हारी आंटी तो इस दुनिया में रही नहीं .. मुझसे कहा ये  काम होता है.
 तब मैंने कहा अंकल आप अपने बच्चों के पास क्यों नहीं चले जाते... आराम से रहो.... तब अंकल बोले... बेटा शुरू में तो एक,  दो बार गया भी था पर मन नहीं लगा.... अपनी मिट्टी खींच लाई. बच्चे भी क्या करें ....वह भी अपनी जिम्मेदारी में  फस  चुके हैं... वैसे हर महीने अच्छी खासी रकम भेजते  हैं... उससे ही जिंदगी चल रही है.
 बेटा जरा मेरा खाना ऑनलाइन मंगा दो... अब हम बुड्ढों को तो ऑनलाइन मंगाना  आता नहीं.
ये सब देख सुन कर  मुझे समझ ही नहीं आया की अंकलजी को मिठाई खिलाता या नहीं... मुझे  तो उनके प्रेजेंट में अपना फ्यूचर नजर आने लगा और  समझ  ही नहीं आया की इस पल  को सेलिब्रेट करूं या नहीं... यह सब सुनकर श्रेया धम्म  से चेयर पर बैठ गयी  और  वो भी सोच के सागर में डूब गई.

Thursday, 16 January 2020

दोषी कौन 🤔🤔?

दोषी कौन🤔🤔?
कुछ दिन पहले मेरे शहर  जयपुर में दोहरा हत्याकांड हुआ... एक महिला और उसके  बेटे  को उसके ही घर में मार दिया.. मरवाया  भी उसके पति ने... पूरा शहर दहल गया.
महिला के घरवालों का  रो रो कर बुरा हाल हो गया... लड़की की मां रोते हुए बोली की अरे मेरे दोहिते (बेटी का बेटा ) को  तो छोड़ देते... उसे ही श्वेता समझकर पाल लेते. जिसने भी खबर पढ़ी,  सुनी.. वह अंदर तक सहम गये और उस महिला की मां और परिजनों से सहानुभूति रखने लगा.
पर क्या इस हत्या मे केवल उसका पति ही दोषी था? ऐसा नहीं कि अचानक उसने अपनी पत्नी और बच्चे को  मार दिया.... उन दोनों के बीच बहुत समय से झगड़ा हो रहा था... या यू कह ले  कि शादी हुई जब से...  लड़का किसी और लड़की से प्यार करता था... उसके घरवालों ने उसकी जबरदस्ती शादी करवाई... लड़का वापस अपनी गर्लफ्रेंड से शादी करना चाहता था... उसने कई बार लड़की के घरवालों को फोन किया कि मुझे इसके साथ नहीं रहना... इसे ले जाओ और मारने से कुछ दिन पहले भी  उसने लड़की के भाई को फोन करके कहा  था की इसको यहां से ले जाओ.... मुझे इसकी शक्ल से भी नफरत हैँ... नहीं तो मैं इसे  मार दूंगा. 2 दिन पहले लड़की ने  अपनी मम्मी को वीडियो कॉल करके  अपना सूजा हुआ हाथ दिखाया जो की उसके हस्बैंड ने किया था.. उसको बहुत मारा था...  अपनी फ्रेंड को भी लड़की ने बताया... पर उसकी मां ने उसको ही समझाया कि कोई नहीं.. हस्बैंड वाइफ में लड़ाई होती रहती हैं.. तू चुप रह, समझौता कर. हद तो तब हो गयी जब उस लड़की  ने  दिन  भर कुछ नहीं खाया कि उसका हस्बैंड भूखा ही घर से चला गया था.
 इन सब चीजों को देख कर दुख मुझे भी बहुत हुआ... उस लड़की के लिए , उसके बच्चे के लिए  और उसकी मां और घरवालों से बहुत ही सहानुभूति हुई.. पर साथ ही गुस्सा भी बहुत आया कि आज तुम रो रहे उस बात के लिए जो तुम्हें बहुत पहले से ही दिख रही थी... आज तुम कह रहे हो कि अरे  मेरे दोहिते को तो  छोड़ देते... हम उसको ही श्वेता समझ कर पाल लेते... अरे अपनी श्वेता को तो रखा नहीं गया...  उस आदमी ने तो पहले ही बोला था की मैं  इसे  जान से मार दूंगा... फिर क्या कर रहे थे..  किस चीज का वेट कर रहे थे. अब रोने से क्या फायदा है.
पर क्या दोष केवल लड़की के घरवालों का है.... उस समाज का नहीं जो हर उस लड़की को सवालिया नज़रों से देखती है जो शादी के बाद अपना ससुराल छोड़कर अपने मायके आ जाती है... और सीधे सीधे दोष लड़की को ही देते हैं.
मैंने खुद देखा... मेरे  पहचान वालों की बेटी जब शादी के बाद ससुराल छोड़कर घर आ गई... पूरी दुनिया ने उसकी बात बनायीं... उसकी गलती बताई... पर बाद में पता चला कि लड़की की सास उसे किसी साधु के पास में जाने को और रहने को कहती थी. बिना सोचे समझे हमने उस लड़की  को गलत ठहरा दिया.ऐसी औरत  अगर ढंग से रह  ले,हॅस ले,  किसी लड़के से बात कर ले... सब उसे ही गलत समझते हैं.
 और क्या लड़के  के मां-बाप दोषी नहीं थे..जब  उनको पता था कि हमारा लड़का किसी और लड़की से प्यार करता है तो क्यों इतनी जिंदगी बर्बाद करी.
आखिर हत्यारा क्या केवल लड़का हैँ...  नहीं.. हत्या केवल उसी ने  नहीं की है... लड़की के घरवाले,  हम सब, और इस समाज... हम सब ने मिलकर उस लड़की को और  उसके बच्चे को मारा, उसके सपनों को और उसके अरमानों को कुचला है. वह लड़की खुद भी दोषी है जिसने इतना होने पर भी उस लड़के का साथ नहीं छोड़ा.
 प्लीज 🙏🙏🙏अब तो जागो, रोने से क्या होगा, लड़की को इंडिपेंडेंट ही नहीं बनाओ...  उसे यह भी समझाओ की शादी करके तुझे धक्का  नहीं दिया... तेरे को जब लगे कि कुछ गलत है... तू बिना किसी डर के सबको बता सके... नहीं तो पता नहीं ऐसी कितनी और श्वेता और उसके बच्चे का ये ही हश्र (रिजल्ट )होगा. 

Tuesday, 14 January 2020

वक्त की कीमत 🧭🧭

वक्त की कीमत 🧭🧭
इस आर्टिकल को पढ़ते टाइम आप सब से रिक्वेस्ट हैँ... 🙏प्लीज अपने कीमती वक्त से वक्त निकल कर इसको पढ़े  जरूर... आपको शायद अहसास हो पाए की आपका कीमती वक्त सही जगह, सही लोगो के साथ गुजर रहा हैँ या नहीं.
पेपर मे एक  आर्टिकल पढ़कर मैं  अंदर तक हिल गयी.   ये एक सच्ची घटना हैँ..
 एक बेटा अपने पापा से पूछता है... पापा आप 1 घंटे में कितने पैसे कमा लेते हो.. उसके पापा ने पहले तो मना किया कि यह भी कोई पूछने की बात है.. पर जब बच्चे ने बहुत जिद करी तो उसके पापा ने कहा  $100.. तब उसने पापा से $50 मांगे. उसके पापा ने पहले तो मना किया पर जब बच्चा रोते हुए अपने रूम में चला  गया तो पापा ने उसके रूम में जाकर उसको प्यार किया  और उसको $50 दिए और  पूछा... बताओ बेटा तुम  क्या करोगे  इसका... तो उसने अपने pillow  के नीचे से थोड़े और पैसे निकालकर पापा को दिए और कहा लो पापा ये 100$... बस अपना एक घंटा मुझे दे दो.
सच में मैं अंदर तक हिल गई छोटा सा बच्चा... उसको पैसे नहीं बस अपने पापा का वक्त चाहिए था. जब इतना छोटा सा बच्चा वक्त की  कीमत   जान सकता है तो हम क्यों नहीं. हम सब बस भाग रहे हैं.. दौड़ रहे हैँ...  क्यों जिससे हमारे अपने खुश रह सके.. उनको दुनिया की खुशी दे सके. मैं मानती हूं आज के टाइम में कंपटीशन,  पैसा बहुत मायने रखता है.. पर एक चीज और हैँ जो मायने रखती हैँ.. वह हैँ.. वक्त, हमारा वक्त,  हमारे अपनों के लिए वक्त. एक बार अपना  कीमती वक्त निकाल कर देखो... इस वक्त को अपने अपनों के साथ बिता कर देखो.. बाकी सब भूल जाओगे. जो मजा  इस वक्त में होगा वो कही नहीं होगा.
अभी कुछ दिन पहले न्यूज़पेपर और टीवी में न्यूज़ थी कि एक बहुत बड़ा बिजनेसमैन, करोड़पति अपने घर में अकेला इस दुनिया से चला गया.. उसको शमशान ले  जाने वाला भी कोई नहीं था. क्यों वह तो बहुत पैसे वाला था... उसने तो अपने जीवन का बहुत सारा वक्त उसको कमाने में लगा दिया... फिर कहां गए उसके अपने.
प्लीज  वक्त रहते वक्त की कीमत जानो . खूब कमाओ.... खूब तरक्की करो... पर अपनों के लिए वक्त निकालो... क्योंकि वक्त चला गया तो कभी वापस नहीं आएगा.
 हमने बहुत लोगों के मुँह से कहते सुना है की तुम्हे किस चीज की कमी है... जब चाहिए मैं तुम्हें पैसा देता हूं.... जो चीज तुम्हें चाहिए मैं तुम्हें देता हूं... मैं कमा  किसके लिए रहा हूं ...तुम लोगों के लिए ही तो... पर क्या तुम्हारे अपने बस पैसों से खुश हैँ ... नहीं वह तुम्हारे उस वक्त से खुश हैं जो तुम उनके साथ बिताते हो .. अपनी पत्नी,  बच्चों, माता-पिता, अपने परिवार वालों के साथ वक्त बिताये.
इस  बिताए हुए वक्त की कीमत  का कोई अंदाजा नहीं लगा सकता. ये वक्त  अनमोल है जिसका कहीं भी कोई मोल नहीं है. सो प्लीज एंजॉय योर क्वालिटी टाइम विद योर नियर एंड डियर वनस🙏🙏😌

स्पेस वर्सेज अकेलापन

स्पेस वर्सेज अकेलापन

हेलो फ्रेंड्स... i am back with my 2nd blog... आपके कमैंट्स ने  मुझे मोटिवेट किया मेरे नए ब्लॉग  के लिए... इसलिए आप कमेंट करने में बिलकुल भी hesitate मत होना यह मेरे लिए एनर्जी ड्रिंक के जैसे है.🥛🥛🤣
 जैसा कि फ्रेंड्स सब कहते हैं.. आई वांट स्पेस... प्लीज लेट me लीव.. तो मेरा न्यू ब्लॉग इसी  टॉपिक पर है.. मेरे को आशा है कि आपको यह पसंद आएगा नहीं भी आये तो bear  कर लेना.😀
 स्पेस .... ढाई अक्षर का छोटा सा शब्द... बट जिसका  मीनिंग बहुत बड़ा है... आज हर किसी को स्पेस,  खुलापन अच्छा लगता है... फिर चाहे  वो घर हो, सड़क हो और चाहे कमरे... सबको ज्यादा स्पेस  अच्छा लगता है. आजकल लोग ये स्पेस रिश्तो में भी लाने लगे हैं... वह चाहते हैं कि हर रिश्ते में खुलापन हो, एक स्पेस हो...  जहां वह किसी का इंटरफेयर पसंद नहीं करते.. फिर चाहे पेरेंट्स एंड बच्चे हो.. भाई बहन  हो.. यहां तक कि हसबैंड एंड वाइफ... वह अपने अकॉर्डिंग लाइफ जीना चाहते हैं.
पर सच में क्या ये स्पेस सही हैँ...  क्या मां पापा को  अपने बच्चों की जिंदगी में क्या चल रहा है... देखने का अधिकार नहीं है... हस्बैंड वाइफ को एक दूसरे की दुनिया में देखने का राइट नहीं है. कभी-कभी ऐसा लगता है कहीं ये  स्पेस हमें अकेला तो नहीं कर रहा.  हम इस space में इतने अकेले हो गए की चाह कर भी अपनी प्रॉब्लम किसी से शेयर नहीं कर पर रहे.. क्योंकि ये स्पेस हमने ही तो चाहा था.. तो कोई क्यों हमारी प्रॉब्लम पूछने आएगा .. क्यूंकि ये फ्रीडम ये अकेलापन हमने ही चाहा था... पता नहीं मुझे समझ  नहीं  आता guys.. अगर आपको आये तो कमेंट के साथ अपने ओपिनियन रखना.
 होप यू  लाइक इट..   मिलते हैं नेक्स्ट ब्लॉग  के साथ..till then bye and have a good day. 

Sunday, 12 January 2020

माँ की परेशानी 🤱

माँ की परेशानी 🤱
  जूते एक कोने में..मोज़े दूसरे...किताबें एक कमरे में.. कॉपियां दूसरे... चादरों पर सलवटे...  और तकिये अस्त-व्यस्त.... गीला तौलिया पलंग पर और बाथरूम गंदा.... क्योंकि बच्चे घर पर है और मां परेशान.... जूते shoerack में.... मोज़े अलमारी में... किताबें शेल्फ में और बैग  टेबल पर...चादरों पर ना कोई सलवटे और तकिये  जगह पर.. तौलिये बस दो ही वो भी अपनी जगह पर ... बाथरूम बिल्कुल साफ.... क्योंकि बच्चे पढ़ने बाहर गए और माँ... माँ अब भी परेशान. 

Saturday, 11 January 2020

असली विजेता (Real Hero )

असली विजेता(Real Hero)
स्मिता स्कूल के नोटिस बोर्ड पर कोटेशन लिख रही थी....
' जीतने वाला ही नहीं...
बल्कि कहां पर हारना  है...
  ये जानने वाला भी महान होता है.'
स्मिता की colleauge ने जब ये कोटशन  पढ़ा तो  बोली... स्मिता नाइस  कोटेशन...पर आज तुम कैसे  कोटेशन लिख रही  हो...तब स्मिता बोली  कभी कभी जिंदगी में  कई घटनाएं ऐसी होती है जो दिल को छू जाती हैं... मेरे साथ में भी ऐसा ही कुछ हुआ... इसलिए मुझे ये कोटशन ध्यान आ गयी... आओ स्टाफ रूम में... मैं तुम्हे शुरू से बताती हूँ और स्मिता ने बोलना शुरू किया... उसने बताया  कुछ दिन पहले मैंने अपनी क्लास में अनाउंस किया कि एक फॉर्म फिल करना है... फॉर स्कॉलरशिप टेस्ट... जो इसको क्लियर करेगा उसकी  फीस  माफ हो जाएगी.. अब तुम्हे  तो पता हैं की यहाँ सब बच्चे अमीर घरों के आते हैं तो किसी ने क्लास में  इतना इंटरेस्ट नहीं दिखाया.... सिवाय  दो बच्चों के   एक वनिता और एक रीमा... वनिता क्लास की सबसे इंटेलीजेंट लड़की हैं  ...सबको कन्फर्म था की एग्जाम वो ही क्लियर करेंगी...  सबने उससे advance में ही पार्टी मांग ली की  अब तो डबल ट्रीट लेंगे... एक तो तेरे पापा अच्छी पोस्ट पर हैं ऊपर से फीस माफ़.वनिता ने भी सबको  प्रॉमिस किया  की पक्का वो पार्टी देगी .
 एग्जाम नेक्स्ट वीक ही था...  दोनों टेस्ट की तैयारी में लग गई.. ऐसा नहीं है  रीमा इंटेलीजेंट नहीं थी... पर उसे पता था वह वनिता को पीछे नहीं छोड़ सकती.
 एक दिन वनिता  स्कूल लाइब्रेरी में थी तभी वहां पर रीमा  भी आ गई.. उसे किसी बुक की नीड   थी और वह librarian से वह बुक मांग रही थी... पर वो बुक किसी  और बच्चे ने इशू करा  ली थी.  रीमा  सर  से रिक्वेस्ट कर रही थी.. सर प्लीज आई वांट दिस बुक वेरी अर्जेंट.... मेरा नेक्स्ट वीक टेस्ट है... मुझे बुक जरूर चाहिए तो librarian बोला   अभी तो पॉसिबल नहीं  होगा और  अगर इतनी ही नीड है तो तुम मार्केट से क्यों नहीं ले लेते हो... वैसे भी तुम्हें क्या फर्क पड़ेगा तुम अमीर  घर के बच्चे हो...   तब रीमा  की आंखों में आंसू आ गए उसने कहा  सर मैं अमीर घर से नहीं हूं मेरे पापा इस दुनिया में नहीं है.... मेरी मम्मी  ने बड़ी मुश्किल से  यहाँ एडमिशन कराया  हैँ..  बस वह मुझे अच्छे स्कूल में  पढ़ाना चाहती थी...   मैं  ये एग्जाम क्लियर करके  उनकी मदद करना   चाहती हूँ ...  और वो रोते हुए बाहर चली गयी.
  वनिता ये सब देख और सुन रही थी उसके जाने के बाद उसने लाइब्रेरियन से बुक का नाम पूछा और अगले दिन वह बुक खरीद के लाइब्रेरियन को दी और कहा ये  रीमा  को बुला कर दे देना  और  मेरा नाम मत लेना .. नेक्स्ट वीक दोनों ने पेपर दिया.
 रिजल्ट से पहले सब sure थे की वनिता ही फर्स्ट आएगी पर सब सरप्राइज हुए  हुए जब रीमा फर्स्ट  आयी...मैं खुद बहुत surprise हुई  मैंने पूछा बेटा तुम इतने इंटेलिजेंट  हो.. तुम्हे क्या हुआ.. सबसे सरप्राइज तो ये  था  की तुमने आधे से ज्यादा क्वेश्चन एटेम्पट ही नहीं किये थे... बात क्या हैँ.
बट वनिता  बताने  को तैयार ही नहीं थी... जब  मैंने बहुत insist करा तब  बोली mam  प्लीज आप किसी को बताइएगा नहीं...  मेरे  लिए  ये टेस्ट क्लियर करना इतना जरुरी नहीं था....  मेरे पापा आराम से फीस  भर सकते हैँ पर रीमा की मम्मी नहीं और उसने रीमा  की पूरी स्टोरी mam को बताई.
तभी पीछे से  रीमा  और उसकी मम्मी मिठाई लेकर आये ..वो दोनों बहुत खुश थे.. मैंने उन दोनों को कॉन्ग्रैट्स  बोला और सबने मिठाई खायी.. उनके जाने के बाद वनिता  ने कहा mam  आपने इनके चेहरे  पर ख़ुशी देखी... अगर इनको पता चल जाता तो शायद इनके चेहरे पर वो ख़ुशी नहीं दिखती... इसलिए प्लीज आप ये  बात कभी किसी को नहीं बताइयेगा. सच में मैं इतना भावुक हो गयी... इतनी छोटी सी  बच्ची  का इतना बड़ा sacrifice देख कर.
ये  सब सुन कर स्मिता की colleaugue बोली .. तुम्हारी बात सुनने के बाद ऐसा लगा की जरुरी  नहीं हमेशा बड़े ही सीख दे... कभी कभी बच्चे भी बहुत बड़ी सीख दे जाते हैँ... बस हमें एक्सेप्ट करना आना चाहिए. .. सच में तुम्हारी बात सुनने के बाद ये कोटेशन बिलकुल सही दिख रहा हैँ....सच बताऊ तो ये कोटेशन नहीं ये  तो वनिता का  तुम्हारी साइड से रिवॉर्ड हैँ.
तभी स्कूल bell की आवाज सुन कर दोनों अपनी अपनी क्लास में चले गये. 

Thursday, 9 January 2020

मेरी अम्मा 🤶

मेरी अम्मा 🤶
अम्मा,  दादी, मां... कितना मीठा शब्द है....और शब्द जितना मीठा है उससे भी मीठी होती हैं अम्मा😌.... आज सुबह-सुबह मैं घर के सामने शॉप पर ब्रेड लेने गई तो कोई अलाव जला कर हाथ ताप रहा था..🔥🔥.  देखते से ही मैं मेरी  अम्मा की यादों में खो गई... वह भी इसी तरह सर्दी में  हाथ तापती रहती थी. पहले के  समय में आज की तरह हीटर तो होते नहीं थे...  तो मेरी अम्मा अपनी सर्दी मिटाने को अलाव का ही सहारा लेती  थी... मटके को ऊपर से तोड़कर उसमें लकड़ी  डाल के आग लगा कर  हाथ तापने  बैठ जाती थी... जानते हैं आप.... ऐसा  कर वह अपनी  सर्दी तो भगाती  थी इसके पीछे  एक secret भी था... इस बहाने वह हम सब को अपने पास बुला लेती थी... ऐसे  तो हम कहां बैठने वाले थे उनके  पास... उनके लाख बुलाने पर भी नहीं जाते थे पर जैसे  ही वो हाथ तापने बैठती हम भी उनके पास आ जाते थे... अब  उस टाइम हम लोगों के ऊपर इतना प्रेशर तो होता नहीं था... पढ़ाई का, मोबाइल का और ना ही टीवी का ... तो हम भी थोड़ा टाइम पास कर लेते थे .. अभी बैठे हैं तो केवल हाथ ही थोड़ी ना तापने थे  तो शुरू हो जाता अपने  किस्से कहानियां... दिनभर सब ने क्या किया, क्या हुआ... सब शुरू  हो जाते... अम्मा मेरी बहरी थी.. उन्हें सुनाई नहीं देता पर हमारे  हावभाव से वह सब समझ जाती थी और वह भी शुरू हो जाती थी अपनी कहानियां सुनाने... हमारे टाइम में तो एक पैसे का सेर घी  मिलता था... अरे हम भी पढ़े होते तो तुम्हारे जैसे पटर पटर बोलते... और पता नहीं क्या क्या.
 अब हम खाली हाथ ही नहीं तापते... कोई अपने पैर तापने  लगता तो अम्मा गुस्सा होती जो भी पैर तापेगा वो रात में बिस्तर गीला करेगा😅😅... अब पता नहीं इसके  पीछे अम्मा का क्या  लॉजिक छिपा था पर सच बताऊ हम डर जाते  थे और पैर नहीं तापते थे🙈 ... हमारी मम्मी उस जलते अलाव  में ही भरते वाले बैंगन और अपनी शकरकंदी भी सेक  लेती थी... पता नहीं उस अलाव  से एक ठंड ही नहीं जाती थी और पता नहीं कितने ही  काम हो जाते थे.
हमारी अम्मा...  अब अम्मा है तो ज्ञान का तो खजाना है और उनकी  कई  बातें आज भी मुझे याद है... जब भी कड़ी बनाती तो याद आती है... छोरी कड़ी में 101 उबाल  नहीं आए तो कड़ी नहीं बनती... इसलिए मैं भी कड़ी को उबालती  रहती हूं... जैसे ही कभी जल्दी बंद करने की सोचती भी हूँ  तो उनकी 101 की सीख याद आ जाती...रोटी बेलते टाइम मैं पलोथन (सूखा आटा )थोड़ा ज्यादा लगाती तो गुस्सा करती... ससुराल में सास से डांट खायेगी और अब मैं जब कभी ज्यादा पलोथन लगाती तो उनकी याद आती हैं...  मम्मी की डांट और  मार से बचना हो तो हम सब भागकर अम्मा के  पास चले जाते.
 मेरे बेटे का जन्म हुआ तो जैसे वो  खुशी से पागल हो गई... मैं नहाने जाती तो गुस्सा करती इतनी देर तक नहाती हैं.. बच्चे को अकेला छोड़ दिया और खुद उसके पास जाकर बैठ जाती... उसको ठीक से तैयार नहीं करने देती... नजर लग जाएगी..अगर वो हसता तो कहती किसी के  सामने हसे तो चुपके से नोच दिया कर नहीं तो  नजर लग जाएगी.😀.और पता नहीं कौन कौन से  उनके लॉजिक थे जो हमारी तो समझ से परे थे . 🤔
हमारी अम्मा 90 से ऊपर की थी पर दांत बिल्कुल सही सलामत... क्योंकि रात को दूध पीने के बाद भी आधे घंटे तक कुल्ला  नहीं करती थी और बैठी रहती थी.. हम कहते  अम्मा सो जाओ कि नहीं अभी कुल्ला करके आऊंगी नहीं तो दांत खराब हो जाएंगे... किसी के सामने खाना नहीं खाती थी कि नजर लग जाएगी.
 पता नहीं ऐसी  कितने अनगिनत बातें हैं अम्मा की... जितनी उनकी उम्र थी उससे ज्यादा उनकी बातें थी.
आज वह मेरे साथ नहीं है पर उनकी यादें और बातें आज भी मेरे साथ हैं. वैसे एक बात है पहले की अम्मा ज्यादा किस्मत  वाली होती थी कि उनके पोते पोतियों के पास टाइम होता था उनकी कहानियां सुनने के लिए... आजकल के पोते पोतियों  के पास में ना टाइम है और आजकल की अम्मा.... उनके पास में कौन सा टाइम है😉....वह भी तो अपने मोबाइल और टीवी में बिजी रहती हैं तो किस्मत वाले अम्मा के साथ-साथ पहले के पोते पोती भी थे. 😅😅
 तो ये तो मेरी  अम्मा के किस्से थे... आप सब के पास में भी तो अपनी अम्मा के किस्से छुपे होंगे..प्लीज कमेंट बॉक्स में उनका कोई भी एक किस्सा शेयर करिये....  क्यूंकि ये महज़ किस्से नहीं  उनके ज्ञान का खजाना है जो हम सब के काम आ सकता है.
तो एक बार  हम सबकी अम्मा के लिए 👏👏👏👏🤗🤗😘😘😘😘

Tuesday, 7 January 2020

बिना शर्त वाला प्यार 🐕

बिना शर्त वाला प्यार🐕

 कल रात के खाने के बाद मैं वाकिंग पर कॉलोनी में गई तभी देखा एक घर में एक कार की   एंट्री हुई ...और जैसे ही कार से घर के मालिक उतरे  तो उनका डॉगी उनको देखकर चिपक गया और  बहुत देर तक अपनी खुशी जाहिर करता रहा.... यह सब देख कर मन में कुछ अजीब फीलिंग आई.
डॉगी,  एनिमल, बेजुबान प्राणी.... अपने मालिक को  देख कर कितना खुश हो रहा था.... फिर लगा क्या घर में सब मेंबर ऐसी ही खुश हो रहे होंगे.... ऐसे  ही उनका वेट कर रहे होंगे .. .. हाँ उनकी वाइफ  खुश होगी... उनका वेट कर रही होगी... और  उनके बच्चे ....वह भी ऐसे ही खुश होंगे... अगर बच्चे बहुत छोटे हैं तो जरूर होंगे... पर अगर टीनएजर्स  बच्चे हुए तो उनको तो  पता भी नहीं होगा उनके पापा आ गए हैं... क्यूंकि कोई अपनी स्टडी में बिजी होगा.👩‍🏫.. कोई मोबाइल में🤳... कोई टीवी में  में... 📺
पापा ही आकर बच्चों से बात करें तो ठीक नहीं तो पता नहीं बात भी कब होगी.... हां अगर बच्चों ने पापा से कुछ मंगवाया होगा... उनकी कोई डिमांड होगी तो जरूर भाग कर आएंगे और अपनी चीजें मिलते ही वापस अपने अपने रुम में चले जाएंगे.

क्योंकि आज की दुनिया का ये  एक कड़वा सच है.... यहाँ हर कोई बिना शर्त के..मतलब के  प्यार ही नहीं करता.... उसका मतलब है तो वह प्यार करेगा नहीं तो सब अपने-अपने रास्ते. आजकल लोग प्यार भी शर्तो  से करते हैं.
 गर्लफ्रेंड ऐसा बॉयफ्रेंड ढूंढ़ती हैं जो उसके ऊपर बेशुमार पैसा खर्च करें... उसकी सारी बातें माने... बच्चे अपनी डिमांड पूरी होने पर ही प्यार करते हैं... मां-बाप अपने बच्चों को तब प्यार करते हैं जब वो उनके ख्वाहिशों पर  पूरा उतरते हैं.... तो आजकल प्यार में भी शर्त  आने लगी है... बिना शर्त का ऐसा प्यार तो बस यह बेजुबान जानवर ही कर सकता है.😌
 अब समझ आया लोग क्यों डॉगी को ज्यादा पालते हैं... अपने बच्चों से  ज्यादा डॉगी को प्यार करते हैं... आखिर किस को बिना शर्त वाला प्यार अच्छा नहीं लगेगा.
एक बार आप भी इस जानवर की जैसे बिना  शर्त का प्यार करके तो देखो... जिससे आप प्यार करोगे उसको तो ऑब्वियस  अच्छा लगेगा ही....  कही ना कही आपको भी ख़ुशी मिलेगी 🤗🤗. 

Monday, 6 January 2020

असली ख़ुशी 🤔🤔

असली ख़ुशी 🤔

 नीलम ने अपने बॉस को अपना रेजिग्नेशन लेटर दिया तो उसके  बॉस ने कहा नीलम एक बार फिर से सोच लो कहीं ऐसा ना हो बाद में तुम्हें अपने डिसीजन पर अफसोस हो... आज तुम इतनी अच्छी पोस्ट पर हो... तुम्हारी एजुकेशन तुम्हारे काम आ रही है... कहीं जल्दबाजी में लिए  गये डिसीजन से  बाद में तुम्हें पछताना ना पड़े और ऐसा लगे की  मैं भी और वूमेन की तरह जस्ट  हाउस वाइफ  बनकर  रह गयी.
पर नीलम ने कहा.. नहीं सर..  मैंने और मेरे हस्बैंड ने ये डिसिशन बहुत ही  सोच समझ कर लिया है और  ये मेरा रेसिग्नेशन लेटर नहीं मेरे बेटे को मेरी साइड से बर्थडे गिफ्ट हैं... ये सुन कर बॉस  सरप्राइज हुए और बोले.. बर्थडे गिफ्ट तुम्हारा रेसिग्नेशन लेटर... मैं कुछ समझा  नहीं ...तो  नीलम शून्य में देखती हुई बोली आज तक मुझे ये ही लगा कि मैंने और  मेरे हस्बैंड ने अपने बच्चे को सबसे अच्छी लाइफ दी हैं.. हमने उसको बड़े से बड़े स्कूल में एडमिशन कराया... सारे मॉडर्न गेजेट्स दिए... उसका  हाईटेक रूम है... और जितनी भी चीजें थी... उसको हमने किसी चीज की कमी नहीं होने दी... पर एक लेटर ने  मेरी आंखें खोल दी.
 बॉस थोड़ा और क्यूरियस हुए और बोले कौन सा लेटर ...
 तब नीलम ने बताया मेरे बेटे  को स्कूल में एक लेटर लिखने को कहा... जिसमें अपनी बेस्ट विशेज गॉड  से मांगनी थी... आपको सरप्राइज होगा उसने कुछ भी ऐसा नहीं मांगा जो आजकल के बच्चे मांगते... उसने भगवान से कहा प्लीज मेरी मम्मी मेरे फ्रेंड्स  की मम्मी की जैसे मेरे पास दिन भर घर पर रहे... मैं जब स्कूल जाऊं तो मुझे बाय बोलने को बाहर आये..  स्कूल बस से आउ तो मम्मी लेने आए  मेड  नहीं...  मेरे को होमवर्क कराएं... मेरे साथ खेले... मैंने स्कूल में क्या किया मैं उनके साथ शेयर कर सकूं...  शाम तक का वेट नहीं करना पड़े... मुझे बस मम्मी चाहिए वह मेड नहीं  जिसके साथ मुझे ना चाहते हुए भी दिन भर रहना पड़ता हैं...
मेरी मम्मी हर पीटीएम में  मेरे साथ आये  हर स्कूल फंक्शन में मेरे साथ रहे...
सच में सर जब मैंने लेटर  पड़ा तो मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया... मैंने तो आज तक यही सोचा था कि मेरा बेटा बहुत खुश होगा... मेरी एजुकेशन उसके काम आ रही है... पर नहीं एजुकेशन का मतलब यह नहीं कि बच्चों को आर्टिफिशियल खुशी दे...  एजुकेशन का मतलब उनको रियल  खुशी दे पाए..  उनको हर पल हमारा साथ मिले.. मेड्स का नहीं ... इसी मे उनकी सच्ची ख़ुशी हैं... इन आर्टिफिशल चीजों में नहीं..
और हाँ..  मेरे को मेरे डिसिशन पर  ना अभी अफसोस है और ना  आगे होगा... क्योंकि अब मेरे बेटे को मेरा साथ मिलेगा... अपनी मम्मी का... मेड  का नहीं... थैंक यू सर ..  और नीलम अपने बॉस के केबिन से बाहर निकल गई और उसके  बॉस कभी नीलम को जाते हुए देखते  और कभी उसके रेजिग्नेशन लेटर को.

Friday, 3 January 2020

Amitabh bachhan(A LEGEND)

Amitabh bachhan(A LEGEND)

 अमिताभ बच्चन -A legend, fabulous actor, great man, ideal of all, etc., etc....  पता नहीं और क्या क्या सिनोनिम्स होंगे उनके. Recently  उनको दादा साहब फाल्के अवार्ड मिला. यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं थी उन जैसी पर्सनालिटी  के लिए... इससे  तो शायद इस अवार्ड  की इज्जत बढ़ गई होगी.
 हाल ही जब ये अवार्ड फंक्शन राष्ट्रपति भवन में आयोजित हुआ  और unfortunately वो बीमार हो गए और अपना अवार्ड लेने नहीं आ पाए ,जब  मैंने उनका ट्वीट पढ़ा... 'i am unable to get award'...  तो  मुझे बहुत दुख हुआ और साथ ही यह भी लगा की  क्या हुआ वह  नहीं आ पाए.... award को तो खुद चलकर उनके पास आना चाहिए था.
और जैसे मेरे मन की मुराद पूरी हो गई...आखिर उनको award  देने के लिए फिर एक इवेंट ऑर्गेनाइज हुआ और  उनको बहुत ही रिस्पेक्टफुली award दिया गया... जो की  होना भी था. उन जैसी पर्सनालिटी के लिए ये कोई बहुत बड़ी बात नहीं थी.
 अमिताभ बच्चन...  ऐसा नहीं कि अमिताभ बच्चन यू  ही अमिताभ बच्चन बन गये...  उन्होंने भी  बहुत उतार-चढ़ाव देखे...शुरू में उनको  रेडियो  तक में सर्विस नहीं मिली उनकी आवाज के कारण... पिक्चर्स में भी शुरुआत में सफलता नहीं मिली... फिर जंजीर पिक्चर से उनका ना खत्म होने वाला दौर शुरू हुआ और वह पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री में छा गए. एक पिक्चर  की शूटिंग के दौरान जब वह घायल हुए और मौत के मुंह में चले गए ...पर लोगों की दुआओं की वजह से वह वापस मौत को हराकर आ गए. पर कहते हैं ना कि दिन के बाद रात आती है.. ऐसा ही उनके साथ भी हुआ. एक टाइम के  बाद उनकी पिक्चर्स पिटने  लगी... उनकी कंपनी भी  फ्लॉप हो गई... उनके पास कोई काम नहीं था. एक वक्त ऐसा भी आया कि वह खुद प्रोडूसर्स  के पास काम मांगने गए. आखिर रात के बाद फिर सुबह आयी.. उनको केबीसी मिला और  उनकी पिक्चर्स भी चलने लगी.
 बीच में वह पॉलिटिक्स में भी आए पर यहाँ  वो ज्यादा कुछ अच्छा नहीं कर पाए और अपने ऊपर लगे आरोपों से आहत होकर उसको भी छोड़ दिया.
 अमिताभ बच्चन ...75 से ऊपर होकर भी लगातार बिना रुके, बिना थके काम कर रहे हैं और पता नहीं कितने लोगों को प्रेरणा  दे रहे हैं. इतनी ऊंचाइयों पर  होने के बाद भी  he is  so polite, humble, gentleman.
अमिताभ बच्चन की लिटरेचर पर  भी बहुत ही अच्छी पकड़ है और उन्होंने बहुत ही खूबसूरती से अपने फादर की legacy को आगे बढ़ाया है... उनके ट्वीट्स  और ब्लॉग्स बहुत ही अमेजिंग होते हैं जिससे पता चलता है कि लिटरेचर पर  उनकी कितनी अच्छी पकड़ है.. he has a very good sense of humour too.
उनके लिए जितना भी लिखा जाये कम हैं.. फिर इस छोटे से ब्लॉग में कहा से वो आ पाएंगे🙂.. पर उनको सम्मान देने की ये  मेरी एक छोटी सी कोशिश हैं...  ऐसे  महानायक को मेरा दिल से प्रणाम🙏🙏😊

Wednesday, 1 January 2020

New year resolution

New year resolution

  आप सभी को very happy new year...  मेरी भगवान से यही प्रार्थना है कि आप सब का यह साल हर तरह से आपके लिए अच्छा हो.
 अब जैसा कि नया साल आया है तो सब ने कुछ ना कुछ सोच रखा होगा और कई  new year resolution लिए होंगे.  New year resolution... शुरू शुरू में जब ये  वर्ड सुना तो बहुत ही भारी-भरकम लगा... और सच बताऊं तो मुझे तो समझ ही नहीं आया कि इसका मतलब क्या होता है. कोई हमसे हमारा new year resolution पूछता तो हमें समझ में नहीं आता क्या बोले...   और जब कोई अपना  resolution बताता  तो हम उसको बहुत ही इंटेलिजेंट,  इंटेलेक्चुअल समझते और पता नहीं उसको अपने आप से बहुत ही अलग समझते.... सोचते ये  तो बहुत ही महान है और उसको अपने आप ही बहुत रेस्पेक्ट देते.धीरे धीरे  हम भी उनकी देखा देखी सबको  अपना new year resolution बताने लगे.... हम ऐसा करेंगे, वैसा करेंगे.. बड़े बड़े वादे करते और अपने ऊपर घमंड करते...सच बताऊ तो लोगो की देखा देखी उनके resolution भी कॉपी कर लेते....  और जब वादे निभाने की बारी आती तो 1 से 2 हफ्ते उसको निभाते भी फिर धीरे-धीरे उसको अपने अकॉर्डिंग एडजस्ट  करते... आज से नहीं  कल  से कर लेंगे.... और धीरे-धीरे यह भी भूल जाते कि हमने कोई resolution  लिया भी है. ऐसा हम हर साल करते वैसे ये हम ही नहीं... अधिकतर सब लोग ऐसा ही करते हैं.
मेरे ख्याल से अगर हमें कुछ अच्छा काम करना है... कोई नई शुरुआत करनी है  तो कोई अच्छे दिन का वेट क्या करना.... अगर हमारे मन में कुछ अच्छी सोच हैं.. कुछ अच्छा काम हैं  है तो आज से अभी से शुरुआत करें.... क्यों किसी नये साल का, अच्छे दिन का, मुहूर्त का बहाना बनाएं..अगर हम काम शुरू करने के लिए अच्छे दिन का बहाना बनाएंगे तो क्या जरुरी  हैं की आप  उसको पूरा  नहीं करने का बहाना नहीं बनाओगे... मेरी नजर में तो जितने भी लोग हैं उनमें से अधिकतर को देखा है कि वह new year resolution लेते हैं....  बहुत बड़े बड़े वादे करते हैं.... और फिर उनको तोड़ देते हैं यह कह कर की इस बार नहीं हो पाया अगले साल पक्का... जैसा कि कहते हैं की वादे  तो होते  ही तोड़ने के लिए हैं.😅
तो  इस बार मेरा तो new year resolution यही है कि अगर मेरा कोई अच्छा  काम करने का मन होगा या कोई अच्छा काम करना होगा तो तभी से शुरू कर दूंगी    जब वह मेरे मन में आएगा किसी अच्छे दिन का वेट नहीं करुँगी 😉 . वैसे आप लोग का  इस बार new year resolution क्या हैं.. कमेंट बॉक्स में बताइयेगा जरूर 😊.