करवा चौथ 🌛🌜(एक नयी शुरुआत )
नैना की शादी के बाद पहली करवा चौथ थी वो बहुत उत्साहित थी क्या पहनेगी कैसे तैयार होगी I इस दिन के लिए वो बहुत ख़ुशी ख़ुशी तैयारी रही थी I तभी नैना की 7 साल की ननद की बेटी नेहा जो की इधर ही रहती थी क्योंकि उसके पापा की कुछ साल पहले डेथ हो गई थी,भागते हुए आयी,
'मामी ये आप क्या कर रही हो कितनी सुंदर साड़ी हैं',
बेटा ये मैं कल पहनूंगी कल करवा चौथ है ना',
ओह मतलब आपका हैप्पी डे और मम्मी और मेरा सैड डे',
कहते कहते नेहा उदास हो गयी I इतनी छोटी सी बच्ची के मुंह से ऐसा सुनकर नेहा को बहुत बुरा लगा उसने नेहा को गोद में बिठाया और पूछा,
'बेटा ऐसे क्यों कह रही हो',
'मामी कल मम्मा बहुत उदास रहती है, बाहर भी नहीं आती है,नानी मना करती है,और पूजा भी नहीं करती है I मुझे मम्मा को ऐसे देखकर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता'I
.नेहा बोले जा रही थी और नैना के मन में कुछ और चल रहा था I उसने नेहा से पूछा,
' बताओ इसमें से तुम्हे कौन सी साड़ी पसंद है',
नेहा ने एक साड़ी पर हाथ लगाया I नैना ने वो साड़ी अलमारी से निकाल कर उसकी सब मैचिंग रेडी कर ली I
अगले दिन सब व्रत तैयारी कर रहे थे,तभी नैना की सास ने उसे तैयार होने को कहा I नैना बोली,
अगले दिन सब व्रत तैयारी कर रहे थे,तभी नैना की सास ने उसे तैयार होने को कहा I नैना बोली,
'बस मम्मी अभी आई',
वो नेहा की पसंद की साड़ी अपनी ननद के कमरे में लेकर गई और उसने उस साड़ी को अपनी ननद को पहनने को कहा I नेहा की माँ ने पहनने को मना किया तो नैना बोली,
'ठीक है मैं भी तैयार नहीं होंगी और मेरा व्रत तभी सही से होगा जब आप मेरे साथ रहोगे',
नेहा की माँ ने नैना को बहुत समझाया पर नैना नहीं मानी,उसने कहा,
'अपनी नहीं तो नेहा की खुशियों के लिए ही मान जाओ',
आखिर नेहा की मां को तैयार होना पड़ा और बाहर भी आना पड़ा I नेहा अपनी मम्मी को देखकर बहुत खुश हुई I वो अपनी मम्मी और मामी के साथ सब तैयारियों में व्यस्त हो गई उसका उत्साह अलग ही दिख रहा था,उसकी मम्मी जो उसके साथ थी I
रात को चांद देखने के बाद सब खाना खाने बैठे तो नेहा ने अपनी मामी को अपने गले लगा लिया और और कहा,
रात को चांद देखने के बाद सब खाना खाने बैठे तो नेहा ने अपनी मामी को अपने गले लगा लिया और और कहा,
'थैंक्यू मामी मेरी मम्मी का सैड डे हैप्पी डे बनाने के लिए',
सुनते ही सबकी आंखों में आंसू आ गये पर वो दुख के नहीं खुशी के आंसू थे I नैना आज बहुत खुश थी और सोच रही थी की हमारे लिए ऐसी खुशी किस काम की जो दूसरे के दुख को और बढ़ाएं,किसी के दुख को कम करके उसको थोड़ी खुशियां देने से ही तो त्योहार त्योहार बनता है Iआज वो सच में बहुत खुश थी I
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