उस माँ की भावना जो कुछ दिन में अपनी बेटी...।अपने जिगर के टुकड़े को किसी और के हाथ सौंपने जा रही है, उसके दिल की हालत को शब्दों में ढालने की एक छोटी सी कोशिश 🙏🙏🙏🙏🙏
प्रिय बेटे....हमेशा खूब खुश रहो,आज मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूं, एक बेटी की मां की मनोव्यथा जिसे मैं पल पल महसूस कर रही हूं,शायद मैं बोलकर तुम्हें कभी नहीं कह पाऊंगी,पर आज तुम्हें लिखकर बताना चाहती हूं, उम्मीद करती हूं मैं मेरे मन की भावना तुम तक पहुंचा सकूं!
बेटा आज मैं तुम्हें मेरी बेटी नहीं... अपने कलेजे का टुकड़ा निकाल कर दे रही हूं, जब से उसकी उम्र शादी की हुई, मैं उसके लिए उपयुक्त वर ढूंढ रही थी,जिसके हाथों में उसका हाथ देकर मैं निश्चित हो जाऊं,वैसे सच कहूं मुझे मेरी बेटी कभी बोझ लगी ही नहीं, हां दुनिया को जरूर खटकता था कि अब इसकी शादी कर दो पर मुझे तो कभी मेरी बेटी बोझ नहीं लगी, पर प्रकृति का नियम है जिसे निभाना तो पड़ेगा ही!
जब मैंने पहली बार तुम्हें देखा तो लगा कि आज तक मेरी बेटी की जिंदगी में जो मेरा रोल था अब वह तुम्हारा होने जा रहा है,जैसे मैं उसकी खुशी में खुश होती हूँ, दुख में दुखी होती हूँ,उसके आंसू बहते तो आंखें मेरी नम हो जाती हैँ, मैं दुआ करती हूँ काश वह सब तुम्हारे साथ हो,बस तुम मेरी बेटी की जिंदगी में मेरी जगह ले लेना और मुझे कुछ नहीं चाहिए,अगर तुम मेरी बेटी की जिंदगी में मेरी जगह ले लोगे तो शायद में निश्चित हो जाऊंगी! हो सकता है वो कभी कुछ गलत करें,उससे कुछ भूल हो जाए तो उसको प्यार से,कभी-कभी थोड़ी झिड़की से समझा देना,अकेले में चाहे उससे कितना भी लड़ लेना पर दुनिया के सामने उसका सुरक्षा कवच बन जाना,उसकी हिम्मत बन जाना, जब कभी लोगों की भीड़ में तन्हा हो जाए तो उसका साथी बन जाना,उसके आंसू बहाने को अपना कंधा दे देना!
क्या पता कभी वो उदास हो,दुखी हो,फिर भी मुझे खुश करने को कह दे कि मैं ठीक हूं, खुश हूं तो अगर मैं फोन पर उसकी आंखों को ना पढ सकूँ तो तुम पढ़ कर उसे संभाल लेना, और उसके झूठ को सच बना देना!
बेटा अब उसकी जिंदगी तुम से जुड़ गई उसको अपनी जिंदगी बना लेना, मैं मेरी दिल की धड़कन तुम्हें दे रही हूं, इस धड़कन को खुलकर धड़कने देना बस मेरा तुमसे यही विनम्र निवेदन हैँ 🙏🙏🙏🙏