Jindagi ek unsuljhi paheli

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Tuesday, 27 July 2021

बारिश की बूंदे

 उस दिन सुबह से बारिश का मौसम था I चारवी का कॉलेज जाने का मन नहीं था, पर जरूरी प्रोजेक्ट जमा कराने की आज आखिरी तारीख थी I उसने सोचा फटाफट फ़ाइल जमा कराकर घर आ जाऊंगी I पर जैसे ही फाइल जमा करा वह बस स्टॉप के नजदीक पहुंची I रिमझिम बारिश चालू हो गई  I चारवी तेज कदमों से बस स्टॉप की ओर बढ़ गयी,वह बिल्कुल भीगना नहीं चाहती थी, क्योंकि भीगे कपड़ों में बस के अंदर चढ़ना, और लोगों की गंदी नजर... उफ्फ I

बस स्टॉप पर देखा तो चार-पांच कॉलेज के लड़के शेड के नीचे पहले से खड़े थे I चारवी परेशान थी, ना तो वह बारिश में भीगना चाहती थी, ना अकेली उन लड़कों के साथ खड़ा होना चाहती थी I वह परेशान सी इधर-उधर  देख ही रही,तभी एक कुत्ता जबरदस्ती उसका कुरता मुँह में पकड़ उसे शेड के  नीचे ले आया I एक बार तो चारवी को उस पर गुस्सा भी आया, पर वो कुत्ता चारवी और उन लड़को के बीच खड़ा हो गया I वो लड़के चारवी को देख भद्दे कमेंट कर रहे, गाने गा रहे  I  चारवी असहज हो रही तो कुत्ता उन लड़को पर जोर जोर से  भौंकने लगा I जब तक चारवी की बस नहीं आ गई वह कुत्ता मानो चारवी और उन लड़कों के बीच चारवी का  रक्षक बनकर खड़ा था I जैसे ही चारवी की बस आ गई और वो उसमे बैठी, वो कुत्ता भी वहां से हट गया I

चारवी ने बस की खिड़की में से उसे बिस्किट दिए जिन्हें वह जल्दी-जल्दी खाने लगा I चारवी के चेहरे पर मुस्कान दौड़ गई I वह हमेशा अपने बैग में बिस्किट रखती थी और इस कुत्ते को कॉलेज आते जाते खाने को देती थी  Iउसको लगा मानो आज कुत्ते ने अपना फर्ज अदा कर दिया I चारवी खिड़की से बाहर बरसती बूंदों को देखकर सोच रही, 'सच इंसानों से वफादार तो यह कुत्ते ही होते  हैँ 

Tuesday, 20 July 2021

अंग्रेजी केवल भाषा या बौद्धिकता का प्रमाण पत्र

 

आज हिंदी भाषा के चेहरे पर एक अलग ही नूर था I  सुबह से उसके पैर ज़मीन पर ही नहीं थे I होते भी कैसे  आज  हिंदी दिवस जो हैँ I


सुबह से अखबारों में, सोशल मीडिया पर हर जगह हिंदी दिवस की शुभकामनाएं लोग एक दूसरे को दे रहे थे I हिंदी खुश थी कम से कम आज के दिन तो लोग उसे याद करते हैं,उस को सम्मान देते हैं I वह इसी गुमान में इधर से उधर घूम रही थी I


तभी एक जगह जहां कोई समारोह चल रहा था, उसकी नजर गई I  हिंदी दिवस पर समारोह था I वो शान से एक कुर्सी पर विराजमान हो गई I पास में देखा अंग्रेजी भाषा भी वहीं बैठी हुई है I एक बार तो उसको आश्चर्य भी हुआ... भला  इसका यहां क्या काम I पर फिर सोचा कोई नहीं अगर ये भी मेरे सम्मान समारोह में आए तो इसका दिल से स्वागत है I


लोग एक एक कर मंच पर आते गए और हिंदी भाषा के सम्मान पर पर बोलते रहे I ये अलग बात हैँ उनकी भाषा पर वो पकड़ नहीं थी I हिंदी को दुख भी हुआ पर यही सोच कर संतुष्ट थी की कम से कम मुझे मान तो मिल रहा हैँ ना I

तभी एक सज्जन उसे कुर्सी से उठाने लगे I हिंदी ने जब उठने से इंकार किया तो वह बेरुखी से बोला,

' यह समारोह दिवस बस अभी कुछ देर का ही था, भला तुमसे भी कभी किसी का गुजारा हुआ है  I कल से यहां एक हफ्ते की अंग्रेजी क्लासेज लगेंगी Iएक बहुत बड़े प्रोफेसर एक हफ्ते का प्रशिक्षण देंगे I  शाम से ही उसका रजिस्ट्रेशन शुरू होगा I बाहर अभी से बहुत भीड़ पड़ने लगी हैँ I

हिंदी बेचारी सुबकते हुए खड़ी हो गई I उसे ऐसा लगा जैसे अपने ही घर से उसे बेदखल कर दिया हो I उसने देखा सामने अंग्रेजी सिंहासन पर बैठी उसको हिकारत की नजर से देख रही थी  I  हिंदी चुपचाप वहां से खिसक गई I बाहर देखा बड़ी बड़ी डिग्रियां लिए बच्चे खड़े थे,बहुत नाम कमाया था I पर एक ही बात का मलाल था कि उनकी अंग्रेजी पर पकड़ अच्छी नहीं थी I जिस कारण उनकी तमाम डिग्रीया धूल चाट रही थी  और उनको बौद्धिकता का प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहा था I

हिंदी सोचने लगी सच है मुझे बोलने वाले तो गवार होते हैं I  लोगो के दिलो दिमाग़ पर अंग्रेजी ने ऐसा कब्ज़ा कर लिया मानो वो सिर्फ भाषा नहीं अपितु उनकी बौद्धिकता का प्रमाण हैँ I  वह दुखी मन से लंगड़ाती हुई वहां से निकल गयी I


Sunday, 11 July 2021

अंध श्रद्धा /अन्धविश्वास

 आज अमूमन हर घर में कामवालिया काम पर आती हैं I इनके बिना किसी घर का काम शायद ही पूरा होता हो I आज ये हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गयी I  सुबह-सुबह हर घर में इनका बेसब्री से इंतजार रहता है I इनको घर के कोने कोने की खबर रहती है I लंबे समय तक काम करते करते यह हमारे ही जीवन का हिस्सा बन जाते हैं I


फिर भी हम में से कितने लोग इन पर आंख बंद करके विश्वास करते हैं I शायद बहुत ही कम I घर में से एक चीज  इधर से उधर हुई नहीं कि सबसे पहला शक  इन पर ही जाता है I  ये शक इनके इतने सालो की मेहनत के आगे बेकार  चला जाता है I


 ऐसा ही एक वाक्या मेरे साथ हुआ I हमारे यहां कामवाली बहुत लम्बे समय से आ रही है I हालांकि हम उस पर शक तो नहीं करते पर हाँ आंख बंद करके यकीन करने में शायद झिझक तो होती है I


कल मैंने बाई को उसके महीने की तनख्वाह दीं, अच्छे से दो बार गिन कर I आज उसने मुझसे कहा कि आपने मुझे कल ₹100 ज्यादा दे दिए I क्या फर्क पड़ता अगर वह मुझे नहीं बताती, मुझे तो पता भी नहीं चलता और ना मैं उस पर कभी शक करती,क्योंकि मैंने उसे अच्छे से दो बार तीन बार पैसे गिन कर दिए थे I


पर यह बता कर उसने अपने प्रति विश्वास और मेरा भरोसा जीत लिया I  मेरे मन में उसकी इज्जत और बढ़ गयी I पर अगर वो 100 rs रख लेती नहीं बताती, तो अगर कभी कुछ घर से गायब होता तो मेरा शक उस पर ही जाता , पर शायद अब नहीं जाये I आज उसने 100 rs नहीं गवाएं,अपने प्रति बेशकीमती अंधश्रद्धा और मेरा विश्वास जीता I जो उन 100 rs से कही ज्यादा था I


  फंडा यह है कि आप अपना काम पूरी ईमानदारी से करोगे तो आपका सम्मान और भरोसा और बढ़ेगा और आपको आपकी ईमानदारी का फल एक ना एक दिन जरूर मिलेगा I

Tuesday, 6 July 2021

तुलना

पापा मेरे दोस्त के पापा के पास देखो कितनी बड़ी गाड़ी है, और हमारे पास खटारा कार'!


' मम्मी मेरी सहेली की मम्मी कितनी अच्छी इंग्लिश बोलती हैं, कितने ढंग से रहती हैं,एक आप को देखो'!


 रूही और यश कुछ दिन से बात बात पर अपने मम्मी पापा की तुलना  दूसरों के मम्मी पापा से कर रहे!एक दिन तो हद ही हो गई! यश अपने पापा वत्सल से बोला,


'पापा आप थोड़े काले हो, मेरे दोस्त के पापा देखो कितने गोरे हैं'!


यश का इतना बोलना था की उसकी मम्मी मेघा का गुस्सा सातवे आसमान पर था, वो चिल्ला कर बोली,


'बस यश बहुत हुआ, इतने दिन से मैं देख रही हूँ तुम दोनों बात बात पर हम लोग की तुलना अपने दोस्तों के मम्मी पापा से करते हो! इस चक्कर में पापा दिन रात तनाव में रहते हैं, कैसे तुम्हारे लिए सारी सुख सुविधाएं जुटा पाए!कितना प्रेशर है उनके ऊपर कुछ पता भी है!


और मैं... मैं तुम्हारे दोस्तों की मम्मी जैसा स्मार्ट दिखने के लिए क्या कुछ नहीं कर रही!थक गए हम दोनों तुम दोनों की अपेक्षाओं पर खरे उतरते उतरते'!


 और मेघा मुंह पर हाथ रखकर रोने लगी! यश और रूही अपनी मम्मी के पास आए और उन्हें चुप कराने लगे!  यश अपने पापा से बोला,


'पापा हमें माफ कर दो! हम कभी आप लोगों का दिल नहीं दुखाना चाहते थे!आप  तो दुनिया के बेस्ट मम्मी पापा हो!पर जैसे आप लोग हमारी अपेक्षाओं से थक गए!हम लोग का सोचा...जब आप दिन रात हमारी तुलना दूसरे बच्चों से करते हो, उनके जैसा बनने को कहते हो! हम पर कितना दबाव आता है!और उस दबाव को झेलते झेलते  हमारे ऊपर क्या गुजरती है! काश कि आप भी हमारी तुलना किसी और से नहीं करो, हम जैसे हैं वैसे हमें अपनाओ, हमारी तुलना सिर्फ हमसे करो तो शायद हम और सफल हो, दबाव में नहीं रहे '!


अपने बच्चों के मुंह से इतनी बड़ी बात सुन मेघा और वत्सल दंग रह गए! आज उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ! आज उनके ही बच्चों ने उनकी आँखे खोल दी! उन्होंने अपने बच्चों से वादा किया आज के बाद वह अपने बच्चों की तुलना किसी और से नहीं करेंगे! वो दुनिया के बेस्ट बच्चें हैँ!सबकी आँखे नम थी पर सब खुश थे!