Jindagi ek unsuljhi paheli

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Tuesday, 7 December 2021

 

दिशा के दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था, कल क्रिसमस हैं  बच्चों को क्या गिफ्ट दूँ I उसको कुछ सूझ  ही नहीं रहा था I बच्चों ने पहले से ही बोल दिया था,


' मम्मी  संता से कहना कि कुछ ऐसा गिफ्ट दे  जिसे देखते ही मजा आ जाए',


उन्हें क्या पता था कि संता वंता कुछ नहीं होता, यह तो तुम्हारी मम्मी पापा ही है जो तुमको गिफ्ट लाकर देते हैं और उसे बच्चों की मासूमियत पर हंसी आ गयी I


अचानक वह काम करते-करते अपने बचपन में  चली गई I उस टाइम संता , क्रिसमस का तो इतना क्रेज नहीं होता था,वह तो बस मम्मी पापा से कहते थे कि हमें यह चाहिए तो वह कहते थे,


'भगवान से प्रार्थना करो क्या पता वह तुम्हें दे दे',


और हम  सब भाई बहन भगवान से प्रार्थना करते और भगवान जी मतलब मम्मी पापा उनकी मांग पूरी कर देते I  धीरे-धीरे उसको समझ आने लगा कि भगवान नहीं मम्मी पापा ही हैं जो उनकी इच्छा पूरी करते हैं,पर जान कर भी उसने कभी उन्हें नहीं बताया और मम्मी पापा ने भी उन्हें उसी भ्रम में जीने दिया I कहते हैं ना कभी-कभी कुछ भ्रम.. भ्रम ही रहे तो अच्छे होते हैं,ताकि  हमारे दिल को सुकून मिले,खुशी मिले I वह ना टूटे तो अच्छा ही होता है I


कभी-कभी उसे लगता था कि हम तो हमारी इच्छाएं मम्मी पापा से पूरी करवा लेते  हैं पर उनकी इच्छाओं का क्या,वह तो बस पूरी जिंदगी हमारी इच्छा पूरी करने में लगा देते हैं, क्या कभी उनको नहीं लगता कि उनके भी कोई  संता हो जो उनकी इच्छा पूरी करें I


'अरे  कहां खो गई',


अचानक दिशा के हस्बैंड ने उसे हिला कर कहा तो उसने अपने हस्बैंड कोअपने मन की बात  बताई,  वो गहरी सांस लेकर बोले,


' हमारे लिए कितनी गर्व की बात  हैं की हम  इस काबिल है कि हम उनके संता बन कर उनकी इच्छा पूरी कर सके I और हां मेरी संता तो  तुम  हो,.जब  मुझे किसी चीज की जरूरत होती है तुम बिना कहे पूरी कर देती हो,मेरी हर चीज जगह पर,मेरा हर  काम समय पर,अपने सुख-दुख बांटने को तुम हो,इससे ज्यादा मुझे क्या चाहिए',


  दिशा को भी लगा कि उसके पति भी तो उसके लिए सैंटा है,जो कोई भी मुसीबत में उसके साथ खड़े रहते हैं,जरुरत के समय उसके पास होते हैं I आज उसको  लगा कि हम सब एक दूसरे के संता हैं जो जरूरत होने पर एक दूसरे की इच्छा   पूरी करते हैं I


तभी उसके पति ने कहा,


' चलो बच्चों के गिफ्ट लाएं ताकि उन्होंने जो संता   से  मांगा है वह उन्हें दे सके',


दिशा के चेहरे पर मीठी सी मुस्कान थी I  वह तैयार होने लगी बच्चों का क्रिसमस अच्छा बनाने के लिए,साथ ही साथ वो ये भी सोच रही थी की हर किसी की जिंदगी में एक संता होना ही चाहिए जिसे वो जरुरत होने पर अपनी विश बता सके I












Wednesday, 20 October 2021

लक्छ्मी जी कोठी वालों की

 

एक झोपड़े में झुमकी,

'हे लक्छमीजी तुम इस दिवाली हमारे झोपड़े में  आओ ना,सामने  की कोठी में ख़ुशी  के पास तो तुम पहले से ही हो I मुझे भी तुम्हारी थोड़ी जरुरत हैँ I. प्लीज इस बार मेरी झोपडी में आओ 🙏🙏'I

.झुमकी की माँ,

'बेटी लक्छमीजी  इस बार भी खुशी की कोठी में ही जाएंगी',

'पर क्यों मां',

'क्यूंकि बेटा लक्छमीजी भी पैसे वालों के ही घर जाती हैँ I तू तो इस  गुड़िया से खेल Iआज ख़ुशी की कोठी में दिवाली की सफाई में मिली, वो फ़ेंक रहे थे, मै मेरी झुमकी के लिए ले आयी',

टूटी गुड़िया को देख झुमकी लछमीजी को भूल कर गुड़िया से खेलने लगी I उसके चेहरे पर जो ख़ुशी थी वो तो ख़ुशी के चेहरे  पर महंगी गुड़िया से भी नहीं आती I अब उसको कोई दुख नहीं था अगर इस बार भी लक्छ्मी जी  सामने खुशी की कोठी में जाएंगी, उसको तो खेलने को कीमती गुड़िया जो मिल गयी थी, जो शायद उसे लक्छमीजी  से भी ज्यादा ख़ुशी दे रही थी I

Risha gupta at 07:29
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Wednesday, 13 October 2021

खोयी हुई चाभी

 

कितने दिन हो गए बेटा फोन ही नहीं करती आजकल I कहां हैँ,सब ठीक तो है ना',

छाया की माँ ने फोन पर छाया से कहा तो छाया अचानक से रोने लगी I उसके रोने से छाया की मां का दिल घबरा गया,

' क्या बात है बेटा, सब ठीक तो है ना I बता ना,देख ऐसे रोती रहेगी मेरा दिल बहुत घबरा रहा है I पहले चुप हो ',

छाया हिचकी लेती बोली,

'माँ मैं हार गई,हार गई माँ मैं ',

छाया की माँ घबराई सी बोली,

'क्या हुआ बेटा बता तो सही',

' माँ मैं किसी को नहीं संभाल पा रही, ना घर ना बच्चे और ना ही पति I एक रिश्ता संभालती हूँ तो दूसरा हाथ से छूट जाता हैँ I हर किसी को कोई ना कोई शिकायत है ',

छाया की माँ बोली,

'बेटा मैं समझी नहीं क्या कहना चाहती हैँ',

छाया नम आवाज मे बोली,

'माँ बच्चे कहते हैं हम लोग उनकी जिंदगी में जरुरत से ज्यादा दखल देते हैं,उनको स्पेस नहीं देते I निलय को लगता है मैं बच्चों पर ध्यान नहीं देती,इस कारण हम दोनों में भी तनाव रहता है I खुशियां तो मेरे घर से मानो  रूठ ही गई,मानो कहीं खो गई जो ढूंढने पर भी नहीं मिल रही',

छाया की माँ उसे समझाते हुए बोली,

'बेटा तेरे घर की खुशियां नहीं खोयी ,तेरे घर की चाबी खो गई',

माया थोड़ा चिढ़ते हुए बोली,

'क्या कह रही हो माँ, कौन सी चाभी I अब पहेलियाँ मत बुझाओ मैं पहले ही बहुत परेशान हूं',

छाया की माँ उसे प्यार से समझाते हुए बोली,

''बेटा ये जो घर होता हैँ न उसकी एक चाभी होती हैँ हम सब के पास, और चाभी क्यों चाभियों का गुच्छा होता हैँ,उस गुच्छे मे  तरह तरह की चाभी  होती है,कोई प्यार की, कोई विश्वास की,कोई धैर्य की,और कोई एक दूसरे को समझने की I जब भी तुझे लगे इस जगह पर कोनसी चाभी लगेगी बस वही चाबी उस गुच्छे से निकाल उसकी जगह पर लगा I देखना तेरी खोई हुई चाबी मेरा मतलब खुशियां मिल जाएंगी I बेटा यही कही है कही नहीं गयी, बस ढंग से ढूंढ I याद कर कभी-कभी हम  भूल जाते हैँ, लापरवाही में चाबी रख पूरे घर मे ढूंढ़ते रहते हैं, परेशान होते हैं,पर जहां देखना चाहिए वहीं नहीं देखते ',

मां की बात सुन छाया को एक आशा की किरण दिखी,

'चल माँ मैं फोन रखती हूं',

'क्या हुआ बेटा कुछ काम है',

' हाँ माँ मेरी खोई हुई चाबी ढूंढनी हैँ, थोड़ा समय तो लगेगा ही',

और वो एक नयी उम्मीद से अपनी खोयी चाभी ढूंढने लगी I


Tuesday, 12 October 2021

आखिरी रात

 

गहना की आज आखिरी रात थी इस घर में I उसकी सुदीप से शादी हुए महज दो साल हुए थे I दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे, बराबर का कमाते थे I आपस मे मन मिले तो शादी कर ली I दोनों ने बड़े प्यार और अरमानो से इस घर को सजाया था I यह घर सपना था उन दोनों का I पर ना जाने कब गहना के मन मे ये बात बैठ गयी की जब मैं बराबर से सब करती हूं , कमाती हूँ,फिर  घर का काम मै ही क्यों करू , हम दोनों को मिलकर करना चाहिए I खाने के मैन्यू से लेकर महीने के राशन का सब मैं ही क्यू सोचू I बस ये छोटी छोटी बातें कब उसके अहम तक पहुंच गयी, उसके मैं तक पहुंच गई और धीरे-धीरे दोनों का झगड़ा बढ़ता गया और बात तलाक तक पहुंच गई  I हालांकि सुदीप इसके पक्ष में नहीं था, उसने बहुत समझाने की कोशिश की पर गहना तो कुछ सुनने को ही तैयार नहीं थी I

आज जब उसकी इस घर मे आखिरी रात थी कल से दोनो के रास्ते अलग अलग हो जायेंगे I ना जाने क्यों नींद उसकी आंखों से कोसों दूर थी I जब करवटे बदलते हुए थक गयी तो वह बाहर  बरामदे में आकर झूले पर बैठ गयी,कितना पसंद था उसको झूला I जब सुदीप को पता चला,कितने अरमानो से उसके लिए झूला खरीद कर लाया था I इस पर बैठ  सुदीप के साथ सुख दुख के ना जाने कितने ही पल साझा किये I

तभी उसकी नजर गई घर के हर एक कोने में, हर एक कोना चीख चीख कर मानो उन दोनों के प्यार की गवाही दे रहा, क्यूंकि दोनों ने मिलकर कितने प्यार से सजाया था  I सुदीप ने एक-एक चीज मे गहना की पसंद का ध्यान रखा I

कभी ऑफिस का काम जब ज्यादा होता और रात को भी गहना को काम करना होता तो वह ना जाने कितने कप कॉफी पी जाती,जो सुधीर उसके लिए बिना उसके कहे बना कर लाता I और कितनी ही रातें जब उसको तकिये पर नींद नहीं आती, करवटे बदलती रहती तब सुदीप अपनी बाहों का तकिया बनाता और वह कब उस के आगोश में सो जाती पता ही नहीं चलता I

तो क्या वह गलत हैँ I क्या वो रह पायेगी सुदीप के बिन I नहीं नहीं सुदीप के बिना कैसे रह पाएगी वो,माफी मांग लेंगी उससे I वो पसोपेश मे थी की तभी उसके सामने सुदीप खड़ा था हाथ में कॉफी लिए I

अपने सामने सुदीप को देख गहना सकपका गयी, अपने आसुओ को छिपाते हुए बोली,

' तुम सोए नहीं अभी तक ',

सुदीप उसको कॉफ़ी पकड़ाता हुआ बोला,

' तुम भी तो कहा सोई I मुझे लगा आज हमारी साथ में आखिरी रात हैँ तो क्यों ना मेरे हाथ की कॉफ़ी के साथ  गुजार ले ',

उसका दर्द उसकी आवाज से साफ झलक रहा था I ना जाने क्यू ऐसा सुन गहना का दिल भर आया,उसने झट सुदीप के मुँह पर हाथ रखा और कहा,

'सुदीप ऐसा भूल कर भी मत कहना   I हां यह आखरी रात जरूर हैँ, पर हम दोनों की नहीं, आखिरी रात हैँ मेरे मैं को छोड़ने की,मेरे ईगो को खत्म करने की I सच कहू तो तुम्हारे बिना मेरा कोई वजूद नहीं, मैं 'मैं 'से नहीं तुमसे हूं, तुमसे मिलकर मैं को हम बनाऊंगी I  आखिरी रात हैँ मेरी उस घटिया सोच की I

गहना  रोए जा रही, ना जाने कितने आंसू उसके कॉफ़ी के मग में समा गए I सुजीत ने उसके हाथ से कॉफी का मग लिया और नम आवाज से कहा,

' शुक्रिया मेरी जिंदगी में दोबारा आने के लिए' I और दोनों ना जाने कब तक यूँ ही झूला झूलते रहे, गहना ने आज भी सुदीप की बाहों का तकिया बना रखा था I


Wednesday, 15 September 2021

कॉलेज से जुडी रोचक घटना

 

कॉलेज लाइफ बंधनों को तोड़ खुलकर जीने की आजादी, यूनिफॉर्म छोड़ डिजाइनर कपड़े पहनने की मनमानी, एक से आठ पीरियड अटेंड करने का बंधन छोड़ क्लासेज बंक करने की मनमानी,पंखो को परवाज देने की ख़ुशी,अनुशासन, नियम सब छोड़ जिंदगी जिंदादिली से जीने की आजादी  I

पर कल्पना कीजिए  कॉलेज में आप को स्कूल से भी सख्त माहौल मिले,तो क्या हालात होगी, मानो आसमान से गिरे खजूर में अटके I


मेरे साथ  कुछ ऐसा ही हुआ I बी एड कॉलेज में मेरा प्रवेश,जहाँ किसी जेल सा सख्त माहौल I वही स्कूल की तरह यूनिफॉर्म,सख्त अनुशासन, सब कुछ वही जो स्कूल में जिया I

एक बार लंच में मैंने मेरी सहेलियों से कहा,

' आइसक्रीम खाने चलते हैं',


कॉलेज से दो कदम की दूरी पर पार्लर था I सबने मना किया,किसी ने देख लिया तो फंस जाएंगे  I पर मेरी जिद के आगे किसी की एक नहीं चली I हमने मजे से आइसक्रीम का स्वाद लिया I


पर हमें नहीं पता था हम आने वाले खतरे से अनजान थे I अगले दिन प्रार्थना सभा (जी हां स्कूल की जैसे प्रार्थना )में हमारी अध्यापिका ने कहा,

' कल कुछ लड़कियां आइसक्रीम का स्वाद ले रही थी,अपने आप हाथ खड़ा कर दो, नहीं तो मुझे नाम लेना पड़ेगा',

हमें काटो तो खून नहीं  I मरते क्या ना करते,सबने हाथ ऊपर कर दिए  I सबके सामने जो बेइज्जती महसूस हुई,लगा अभी जमीन धंस जाए और हम इस में समा जाए I

तब तो जो हुआ वो तो ठीक,उसके बाद सहेलियों से बाद में कितना कुछ सुनना पड़ा, सब तेरी वजह से हुआ I

सच वो अनुभव भुलाए नहीं भूलता I

Tuesday, 7 September 2021

और मै जीत गयी (असली विजेता )

 

स्मिता स्कूल के नोटिस बोर्ड पर कोटेशन लिख रही थी....

' जीतने वाला ही नहीं...बल्कि कहां पर हारना  है,
ये जानने वाला भी महान होता है'I

स्मिता की  साथी अध्यापिका शिल्पी मैम ने जब ये कोटशन  पढ़ा तो  स्मिता से बोली,

' स्मिता नाइस  कोटेशन,पर आज तुम कैसे  कोटेशन लिख रही  हो',

स्मिता नें चॉक एक तरफ रख शिल्पी की तरफ मुड़ते हुए कहा,

'  शिल्पी कभी कभी जिंदगी में  कई घटनाएं ऐसी होती है जो हमारे दिल को छू जाती हैं I मेरे साथ में भी ऐसा ही कुछ हुआ,इसलिए मुझे ये कोटशन ध्यान आ गयी I आओ स्टाफ रूम में,मैं तुम्हे शुरू से बताती हूँ ',

और स्मिता और शिल्पी स्टाफ रूम की तरफ बढ़ गयी I स्मिता और शिल्पी कुर्सी पर बैठ गयी, स्मिता नें आँखों से अपना चश्मा हटाते हुए कहा,

'  कुछ दिन पहले मैंने अपनी क्लास में घोषणा की, कि एक फॉर्म भरना  है  स्कॉलरशिप टेस्ट के लिए,जो इसको अच्छे नम्बर से पास कर लेगा ,उसकी  फीस  माफ हो जाएगी I अब तुम्हे  तो पता हैं की यहाँ सब बच्चे अमीर घरों के आते हैं तो किसी ने क्लास में  इतनी रूचि नहीं दिखाई, सिवाय  दो बच्चों के   एक वनिता और एक रीमा I वनिता क्लास की सबसे होशयार लड़की हैं ,सबको यकीन था की एग्जाम में वो  ही प्रथम आएगी I यहाँ तक की सब उससे पहले से ही पार्टी मांग रहे,

'अब तो डबल ट्रीट लेंगे, एक तो तेरे पापा अच्छी पोस्ट पर हैं, ऊपर से फीस माफ़ 'I

वनिता ने भी सबको  वादा किया  की पक्का वो पार्टी देगी I एग्जाम अगले सप्ताह ही था I  दोनों लड़किया टेस्ट की तैयारी में लग गयी I ऐसा नहीं है  रीमा होशयार नहीं थी,पर उसे पता था वह वनिता को पीछे नहीं छोड़ सकती I एक दिन वनिता  स्कूल लाइब्रेरी में थी तभी वहां पर रीमा  भी आ गई,उसे किसी बुक की जरुरत  थी और वह लाइब्रेरियन से वह बुक मांग रही थी, पर वो बुक किसी  और बच्चे ने इशू करा  ली थी I रीमा  सर  से रिक्वेस्ट कर रही थी,

'सर प्लीज आई वांट दिस बुक वेरी अर्जेंट, मेरा नेक्स्ट वीक टेस्ट है,मुझे बुक जरूर चाहिए '

लाइब्रेरियन बोला ,

' अभी तो संभव नहीं  होगा, और  अगर इतनी ही आवश्यकता है तो तुम मार्केट से क्यों नहीं ले लेते हो, वैसे भी तुम्हें क्या फर्क पड़ेगा तुम अमीर  घर के बच्चे हो',

 ये सुन रीमा  की आंखों में आंसू आ गए, उसने कहा ,

' सर मैं अमीर घर से नहीं हूं, मेरे पापा इस दुनिया में नहीं है I मेरी मम्मी  ने बड़ी मुश्किल से  यहाँ एडमिशन कराया  हैँ I बस वह मुझे अच्छे स्कूल में  पढ़ाना चाहती थी I  मैं  ये एग्जाम क्लियर करके  उनकी मदद करना   चाहती हूँ ',

और वो रोते हुए बाहर चली गयी I वनिता ये सब देख और सुन रही थी, उसके जाने के बाद उसने लाइब्रेरियन से बुक का नाम पूछा और अगले दिन वह बुक खरीद के लाइब्रेरियन को दी और कहा,

'ये  रीमा  को बुला कर दे देना  और  मेरा नाम मत लेना',

अगले सप्ताह दोनों ने पेपर दिया  I रिजल्ट से पहले सबको यकीन था की वनिता ही प्रथम आएगी,पर सबको आश्चर्य हुआ जब रीमा प्रथम आयी,मैं खुद बहुत चौक गयी I मैंने वनिता को बुला पूछा,

' बेटा तुम इतनी होशयार   हो,तुम्हे क्या हुआ I सबसे आश्चर्य तो ये  था  की तुमने आधे से ज्यादा क्वेश्चन एटेम्पट ही नहीं किये थे, आखिर बात क्या हैँ',

लेकिन वनिता कुछ बताने  को तैयार ही नहीं थी, जब  मैंने बहुत दबाव डाला  तब  वो बोली,

'मैम प्लीज आप किसी को बताइएगा नहीं, मेरे  लिए  ये टेस्ट क्लियर करना इतना जरुरी नहीं था, मेरे पापा आराम से फीस  भर सकते हैँ, पर रीमा की मम्मी नहीं',

और उसने रीमा  की पूरी कहानी मुझे बताई I तभी पीछे से  रीमा  और उसकी मम्मी मिठाई लेकर आये,वो दोनों बहुत खुश थे, मैंने उन दोनों को बधाई   दी और सबने मिठाई खायी Iउनके जाने के बाद वनिता  ने कहा,

' मैम आपने इनके चेहरे  पर ख़ुशी देखी, पर अगर इनको पता चल जाता तो शायद इनके चेहरे पर वो ख़ुशी नहीं दिखती I इसलिए प्लीज आप ये  बात कभी किसी को नहीं बताइयेगा',

सच में मैं इतना भावुक हो गयी I इतनी छोटी सी  बच्ची  का इतना बड़ा बलिदान देख कर'I

ये  सब सुन कर शिल्पी मैम बोली,

'तुम्हारी बात सुनने के बाद ऐसा लगा की जरुरी  नहीं हमेशा बड़े ही सीख दे,कभी कभी बच्चे भी बहुत बड़ी सीख दे जाते है I बस हमें  स्वीकार करना आना चाहिए I सच में तुम्हारी बात सुनने के बाद ये कोटेशन बिलकुल सही दिख रहा हैँ I सच बताऊ तो ये कोटेशन नहीं ये  तो वनिता को   तुम्हारी तरफ  से उसका इनाम हैँ'I

तभी स्कूल की घंटी बज गयी और दोनों अपनी अपनी कक्षा में चले गये I


Wednesday, 1 September 2021

वह नेकी जो मुझे सुकून दे गयी

 ऐ खुदा मुझे इस लायक बना कि मैं किसी जरूरतमंद के काम आ सकूं',

' नेकी कर दरिया में डाल',

' ऐसी नेकी करो कि तुम्हारे बाएं हाथ को भी पता नहीं चले 'I

ऐसे जुमले हम पढ़ते आए हैं I सच हैँ अगर उस परवरदिगार की सच्ची बंदगी करना चाहते हो तो किसी जरूरतमंद के काम आ जाओ, फिर ना तुम्हें किसी मंदिर जाने की जरूरत और ना किसी मस्जिद I नेकी करना सच में अपने आप में  सुकून और शांति से कम नहीं  I नेकी करने के बाद जिसके लिए तुमने वो नेकी करी,उसके चेहरे की मुस्कान, शांति और उसकी आंखों में अपने लिए कृतज्ञता देखोगे तो लगेगा साक्षात ईश्वर के दर्शन हो गए, इससे बेहतर सुकून और दृश्य आपकी आंखों को कभी नहीं दिखेगा I कभी-कभी नेकी हम से अपने आप हो जाती है, मानो उस ईश्वर ने हमें इस लायक समझा कि जरूरत पड़ने पर अपने आप हमें वहां भेज दिया I वह खुद तो नहीं आया पर हमें अपना दूत बनाकर  भेज दिया  I

ऐसा ही वाकया मेरे साथ हुआ I मैं रात को अपने पति के साथ कहीं से आ रही थी I जैसे ही मेरी गाड़ी घर के गेट में प्रवेश कर रही थी कि एक संभ्रांत महिला महिला अचानक एक ऑटो से कूदकर मेरे पास आ गई,

'प्लीज हेल्प मी,हेल्प मी, ये ऑटो वाला मुझसे बदतमीजी कर रहा है',

यकायक हुई इस घटना से मैं और मेरे पति कुछ समझ नहीं पाए I कपड़े, ज़ेवर,पहनावे से वो अच्छे घर की महिला लग रही थी I पर रात का समय,ऐसे किसी को घर में घुसाना,पर पता नहीं क्यों हम उसे हमारे घर के अंदर ले आए  I उसको पानी पिलाया, शांत कराया I वह मेरे पति से कहने लगी,

'

मुझे मेरे घर छोड़ दो',


पर जाने क्यों मैंने मेरे पति को उसके साथ अकेले जाने से मना कर दिया I हमने उसे शांत कराया और इतनी रात को ऐसे अकेले जाने का कारण पूछा, तो उसने बताया एक पार्टी में उसका उसके पति से झगड़ा हो गया और वह गुस्से में पार्टी छोड़कर ऑटो में बैठकर अपने घर जा रही थी, पर रास्ते में उसे ऑटो वाले का व्यवहार हाव भाव सही नहीं दिख रहे थे, इसीलिए हमें देखते ही वो ऑटो से कूद गयी I

हमने उससे उसके पति का नंबर मांगा और फोन करके उनको बुलाया I हमें डर तो बहुत लग रहा था,पर पता नहीं क्यों अपने आप यह यह सब हमसे  हो रहा था I थोड़ी देर में उसका पति आया और हमें अनेकानेक धन्यवाद दिया,और उसको लेकर चला गया I

सच उस दिन एक अजीब सा एहसास हुआ, अगर हम नहीं होते तो वह ऑटो वाला उसके साथ कुछ भी कर सकता था I पर सच कहूं एक सुकून मिला और उस ईश्वर को मन ही मन धन्यवाद दिया, उसने हमें इस नेकी के लिए  जो चुना I

Saturday, 28 August 2021

आ बैल मुझे मार (कांसेंट फॉर्म )

 

तीसरी लहर सितंबर से अक्टूबर  के बीच आएगी I (ऐसा अनुमान हैँ )

इसमें बच्चों को खतरा ज्यादा है I (निसंदेह होगा भी, क्यूंकि 18 साल से ऊपर वालों  के टीका लग चुका है )

इसी बीच सरकार ने स्कूल खोलने की परमिशन दे दी I

9 से 12 कक्षा तक के स्कूल खुलेंगे, (इस कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों की उम्र सामान्यतः 14 से 18 के बीच होती है, मतलब की इन बच्चों के अभी तक टीका नहीं लगा)

सरकार ने कहा है कि स्कूल बाध्य नहीं करेंगे, कक्षाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में  चलेंगी I

स्कूल से कांसेंट  फॉर्म भेजे जा रहे हैं,जिनको भरना अभिभावकों के लिए अनिवार्य है, इसमें साफ-साफ लिखा है कि  बच्चों को कुछ भी होता है तो सारी जिम्मेदारी अभिभावकों के ऊपर I स्कूल वाले अपने ऊपर कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं, (मतलब की कोई तो डर हैँ तभी तो वो जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं ),उनको तो बस स्कूल खोलने हैं I

साथ ही बच्चों और अभिभावकों पर अनावश्यक दबाव डाल रहे हैं, कभी एग्जाम्स के रूप में,कभी दूसरे रूप में, जिससे स्कूल भेजना जरूरी है I

अभिभावक बेचारे ठगे से खड़े हैँ क्या करें, अपने नौनिहालों को जानबूझकर कैसे खतरे में डाल दें I यह तो वही हालत हो गई जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में लिखा होता है, 'यात्री अपने सामान की हिफाजत खुद करें', पर यहां बात सामान कि नहीं अभिभावकों की जान की है, जो माता-पिता अपने बच्चों को हर मुसीबत से बचाते हैं, फ़िर कैसे अपने जिगर के टुकड़े को खतरे में भेज दे I

आए दिन खबर आ रही है जहां भी स्कूल खुले,कितने ही बच्चे पॉजिटिव हो गए I कई स्कूल सील करनें पड़े I मुंबई में भी एक स्कूल में 22 बच्चे पॉजिटिव,जिसमें 4 बच्चें 12 साल से कम उम्र के  I

जैसे सिगरेट के पैकेट पर लिखा होता है 'सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है',

और इसमें तो फ़िर भी जिसको लत होती हैँ वही पीता हैँ, यहाँ तो सबको पीनी ही पड़ेगी I

स्कूल वाले स्कूल खोलने को अगर इतने ही बेचैन है,एक बार तो कोई स्कूल हिम्मत दिखाता,ऐसा कांसेंट फॉर्म भेजता जिसमे लिखा होता,

'आप अपने बच्चों को भेजो,उनको सुरक्षा देना हमारा जिम्मा,वह आपकी ही नहीं हमारी भी जान है ',

एक बार तो कोई स्कूल ऐसा  कदम उठाता, तब शायद अभिभावकों को थोड़ी हिम्मत भी आती I

माना ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों को जो शिक्षा मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल पा रही, उनका सर्वागीण विकास नहीं हो पा रहा I हर अभिभावक चाहता है कि सब कुछ पहले जैसा सामान्य हो जाए, पर अपने बच्चों की जान की कीमत पर तो किसी भी हालत में नहीं I


Wednesday, 25 August 2021

हिंदी भाषा

हॉल में उपस्थित सारे लोग गिटपिट अंग्रेजी में बोल कर अपनी बौद्धिकता का प्रदर्शन कर रहे थे I अंग्रेजी तो उनके मुंह से ऐसे निकल रही थी,मानो यही उनकी मातृभाषा हो I अंग्रेजी बोलना मात्र ही जैसे उनकी बौद्धिकता का प्रमाण पत्र  हो I

हिंदी बोलने वालों की यहां पर कोई जगह नहीं थी I एक पल को वो ठिठका, सहमा,क्या यहां अपनी बात रखना सही होगा,यह समझ भी पाएंगे उसकी बात I पर उसको अपने ऊपर पूर्ण विश्वास था, यकीन था  खुद के ऊपर I

और जैसे ही उसने बोलना शुरू किया, एक पल को तो लोग उसको हिकारत से देखने लगे I मानो यह कोई अलग ग्रह से आया कोई अनपढ़ गँवार हो I वहां उपस्थित लोग ऐसा अभिनय कर रहे जैसे उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा I पर वह ना ठिठका और ना झिझका I  एक-एक शब्द को बहुत ही सधे अंदाज में बोल रहा, और अपनी बात को लोगों के सामने पूरे तर्क और वितर्क के साथ रख रहा I

धीरे-धीरे जो लोग अभी तक अंग्रेजी बोलने वालों को ही बौद्धिक समझ रहे, उसकी बौद्धिकता का लोहा मानने लगे, और उसकी वाहवाही करने लगे I धीरे-धीरे जो लोग उससे कतरा रहे, उसके चारों और उसको सुनने वालों की भीड़ जमा हो गई I और वह अभी भी अपनी बात पूर्ण आत्मविश्वास के साथ हिंदी में रख रहा था I

उसने अपनी बात के साथ लोगो को ये भी समझा दिया की भाषा किसी की बौद्धिकता का प्रमाण पत्र नहीं होती I


Wednesday, 18 August 2021

शिक्षक का योगदान

 

और बेस्ट स्पीच का अवार्ड जाता है प्रतीक को '

पूरा स्कूल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजने लगा I डॉक्टर प्रतीक ने वीडियो वही रोक दिया,न जाने कितनी बार अपनी स्पीच के इस वीडियो को देखते I हर बार उनकी आंखें नम हो जाती I और हर बार अपने संजीव सर के प्रति नतमस्तक हो जाते I ये उन्ही की मेहनत और विश्वास का नतीजा था,जो वो इतने प्रभावी तरीके से स्पीच दे पा रहे थे I

अनायासा वह अपनी पुरानी स्कूल की यादों में खो गए I प्रतीक एक डरपोक,आत्मविश्वास की कमी से जूझता बच्चा, किसी के भी सामने वो पसीने से लथपथ हो जाता, और  इसी डर के कारण उसको बोलने में घबराहट होने लगी,और वो हकलाने लगा I

कक्षा में बच्चे उसका मजाक बनाते  I उसको हकला हकला कह चिढ़ाने लगे I धीरे-धीरे वह बिल्कुल चुप रहने लगा I सबसे कटा कटा रहने लगा I कोई भी उसका दोस्त नहीं था I

स्कूल में सांस्कृतिक गतिविधि के एक नये शिक्षक आये थे संजीव सर I उन्होंने एक भाषण प्रतियोगिता के लिए बच्चों के नाम मांगे I सब बच्चें  बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे, पर प्रतीक चुपचाप पीछे की बेंच पर मानो सबसे छिप कर बैठा था I


जब संजीव सर की उस पर नजर पड़ी और पूछा,

'तुम क्यों नहीं ले रहे हिस्सा ',

सब बच्चें हॅसने लगे,

'सर ये तो हकला हैँ, इसको तो सही से बोलना ही नहीं आता, ये क्या भाषण देगा 'I

सर ने सब बच्चों को डांट कर चुप कराया और प्रतीक को अपने पास बुलाया I कितना डरा हुआ था वह उस दिन भी I पर सर ने अपने प्यार और अपनत्व से उसका डर दूर करा I उसको विश्वास दिलाया कि वह कुछ भी कर सकता है, उसके अंदर छिपे आत्मविश्वास को बढ़ाया I  और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लायी I आगे जाकर वो चुप रहने वाला प्रतीक एक सफल वक्ता बन गया I स्टेज पर चढ़ते ही शब्द अपने आप उसके मुंह से निकलते I

बस उसने ठान लिया वह एक बहुत बड़ा स्पीच थैरेपिस्ट बनेगा I क्यूंकि वो ऐसे लोगो की समस्या की जड़ को अच्छे से जानता था  I  आज वह अपने सर की बदौलत ही शहर का नंबर वन स्पीच थैरेपिस्ट हैँ I और ना जाने कितने ही बच्चों की समस्या को अपने प्यार और विश्वास से दूर करता हैँ I

सच अगर आज संजीव सर उसकी जिन्दगी में नहीं आते तो वह तो कब का अपने आप को इस दुनिया के डर से समेट चुका होता I


Thursday, 12 August 2021

यादगार राखी

 राखी भाई-बहन के पवित्र बंधन का एक अनोखा सा त्यौहार I सब जानते हैँ इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है, और भाई उसकी सुरक्षा का वचन लेता है I भाई बचपन से ही फ़िर चाहे वह छोटा हो या बड़ा,बहन की हिफाजत में,उसकी सुरक्षा में हमेशा आगे रहता है और इसके लिए उसको कोई वचन नहीं दिलाना पड़ता, वो तो स्वतः ही अपने मन से ये काम करता है, मानो ये उस का फर्ज है,उसका कर्तव्य है I तो फिर क्यों यह राखी का पर्व मनाना I क्या भाई को याद दिलाना पड़ता है...नहीं, इस पर्व को मना भाई और बहन की एक दूसरे के प्रति जो मन में छिपी भावनाये हैँ,जो एहसास है, इस दिन उसका उन दोनों को मानो आभास होता है I आप भी किसी की बहन होंगी,किसी के भाई होंगे, एक बार अपने दिल पर हाथ रख कर बताना,क्या नहीं होता इस दिन एक सुखद अनुभूति, एक अलग एहसास I

होने को तो हर राखी ही यादगार होती है,पर मुझे मेरी बचपन की दो राखी बहुत ही यादगार हैँ I बचपन में हर भाई बहन की तरह मेरी और मेरे भाई की बहुत लड़ाई होती थी I राखी से एक-दो दिन पहले हम दोनों की लड़ाई हो गई, और हमारी बोलचाल बंद हो गई  I मम्मी मामा के यहां राखी मनाने चली गई I राखी पर सुबह से हम दोनों अपने हठ में बैठे, पहल कौन करे I दोनों ही राखी मनाने के लिए बेकरार, पर बाल हठ और अहम रिश्तो के आड़े आ रहा, पहल कौन करे I बस यही दोनों के मन में चल रहा I दोपहर में पापा ने हम दोनों से कहा,

' राखी नहीं मनानी क्या ',

बस क्या था, हम तो जैसे इसी मौके की तलाश में बैठे थे I भाई ने झट से अपनी कलाई आगे कर दी और मैंने भी फटाफट उसके राखी बांध दी I उस समय हम दोनों के मन में जो भावनाओं का तूफान हिलोरे मार रहा था,उसको शायद ही कभी शब्दों में बांध पाऊं  I

हमारा संयुक्त परिवार था, मेरी ताई जी के यहां एक आठ दस साल का छोटू नाम का लड़का बतौर सहायक काम करता था I उसकी मुझसे बहुत पटती थी I बहुत पटर पटर करता था I

  राखी पर मैं मेरे इतने सारे भाइयों के राखी बांध रही, पर आज पटर पटर करने वाला वो छोटू चुपचाप सब देख रहा I मुझसे उसके चेहरे की उदासी और अकेलापन छुपा नहीं I, मैंने उसकी कलाई पर राखी बांध दी,एक पल को तो वह अचकचा गया,तभी उसको एहसास हुआ कि मुझे क्या तोहफा दे I मैंने उसको आंखों ही आंखों में आश्वस्त किया कि मुझे कुछ नहीं चाहिए  I उसकी आंखें नम हो गई I वह बोला,

' दीदी मैं आपको कभी नहीं भूलूंगा 'I

आज इस बात को वर्षो हो गए, पता नहीं  वह कहां है कैसा है,और शायद मुझे भूल भी गया हो,पर मैं उसको कभी नहीं भूलूंगी I

राखी पर यही दुआ हर भाई  और बहन का प्यार सलामत रहे I

Tuesday, 3 August 2021

आजादी मेरी नजर में

 

सुबह से वो बहुत खुश थी I कितने दिन से वह प्रयासरत थी  उन बाल मजदूरों को उस कारखाने से आजाद कराने के लिए I जब से उसे उनके बारे में पता चला,वह हर पल तड़प रही,कोशिशे कर रही की उन बच्चों को उस क़ैद से कैसे मुक्त कराएं I

आखिर उस के अथक प्रयासों और मेहनत का ही नतीजा था कि आज वह बच्चे उस क़ैद से आजाद हो रहे थे I वह जल्द से जल्द उन बच्चों से मिलना चाह रही थे, उनकी आंखों में आजादी की चमक और खुशी देखना चाहती थी I पर ये क्या उनकी आंखों में कोई खुशी नहीं, कोई चमक नहीं  I सबके चेहरे पर एक तनाव, चिंता थी कि अब यहां से कहां जाएंगे I क्यूंकि किसी बच्चे को गरीबी की वजह से उनके मां बाप ने बेचा था, और कोई अनाथ था I कम से कम यहां पेट भरने को खाना और सिर ढकने को छत थी,अब कहां जाएंगे I

सहसा उसको एहसास हुआ कि केवल बेड़ियों से  मुक्त कराना ही आजादी नहीं I सही मायनों में आजादी का मतलब एक ऐसा जहां, एक ऐसा आसमान देना है जहा वो खुलकर अपनी उड़ान भर सके I  नहीं तो इतने बड़े आसाम में पँख फड़फड़ाते कही थक कर गिर नहीं जाये, उनको उनके हिस्से का आसमान देना ही होगा I


और वह एक एनजीओ के साथ मिलकर उनको खुला आसमान,मतलब सही मायने में उनकी आजादी दिलवाने के लिए फिर से लग  गई I

Tuesday, 27 July 2021

बारिश की बूंदे

 उस दिन सुबह से बारिश का मौसम था I चारवी का कॉलेज जाने का मन नहीं था, पर जरूरी प्रोजेक्ट जमा कराने की आज आखिरी तारीख थी I उसने सोचा फटाफट फ़ाइल जमा कराकर घर आ जाऊंगी I पर जैसे ही फाइल जमा करा वह बस स्टॉप के नजदीक पहुंची I रिमझिम बारिश चालू हो गई  I चारवी तेज कदमों से बस स्टॉप की ओर बढ़ गयी,वह बिल्कुल भीगना नहीं चाहती थी, क्योंकि भीगे कपड़ों में बस के अंदर चढ़ना, और लोगों की गंदी नजर... उफ्फ I

बस स्टॉप पर देखा तो चार-पांच कॉलेज के लड़के शेड के नीचे पहले से खड़े थे I चारवी परेशान थी, ना तो वह बारिश में भीगना चाहती थी, ना अकेली उन लड़कों के साथ खड़ा होना चाहती थी I वह परेशान सी इधर-उधर  देख ही रही,तभी एक कुत्ता जबरदस्ती उसका कुरता मुँह में पकड़ उसे शेड के  नीचे ले आया I एक बार तो चारवी को उस पर गुस्सा भी आया, पर वो कुत्ता चारवी और उन लड़को के बीच खड़ा हो गया I वो लड़के चारवी को देख भद्दे कमेंट कर रहे, गाने गा रहे  I  चारवी असहज हो रही तो कुत्ता उन लड़को पर जोर जोर से  भौंकने लगा I जब तक चारवी की बस नहीं आ गई वह कुत्ता मानो चारवी और उन लड़कों के बीच चारवी का  रक्षक बनकर खड़ा था I जैसे ही चारवी की बस आ गई और वो उसमे बैठी, वो कुत्ता भी वहां से हट गया I

चारवी ने बस की खिड़की में से उसे बिस्किट दिए जिन्हें वह जल्दी-जल्दी खाने लगा I चारवी के चेहरे पर मुस्कान दौड़ गई I वह हमेशा अपने बैग में बिस्किट रखती थी और इस कुत्ते को कॉलेज आते जाते खाने को देती थी  Iउसको लगा मानो आज कुत्ते ने अपना फर्ज अदा कर दिया I चारवी खिड़की से बाहर बरसती बूंदों को देखकर सोच रही, 'सच इंसानों से वफादार तो यह कुत्ते ही होते  हैँ 

Tuesday, 20 July 2021

अंग्रेजी केवल भाषा या बौद्धिकता का प्रमाण पत्र

 

आज हिंदी भाषा के चेहरे पर एक अलग ही नूर था I  सुबह से उसके पैर ज़मीन पर ही नहीं थे I होते भी कैसे  आज  हिंदी दिवस जो हैँ I


सुबह से अखबारों में, सोशल मीडिया पर हर जगह हिंदी दिवस की शुभकामनाएं लोग एक दूसरे को दे रहे थे I हिंदी खुश थी कम से कम आज के दिन तो लोग उसे याद करते हैं,उस को सम्मान देते हैं I वह इसी गुमान में इधर से उधर घूम रही थी I


तभी एक जगह जहां कोई समारोह चल रहा था, उसकी नजर गई I  हिंदी दिवस पर समारोह था I वो शान से एक कुर्सी पर विराजमान हो गई I पास में देखा अंग्रेजी भाषा भी वहीं बैठी हुई है I एक बार तो उसको आश्चर्य भी हुआ... भला  इसका यहां क्या काम I पर फिर सोचा कोई नहीं अगर ये भी मेरे सम्मान समारोह में आए तो इसका दिल से स्वागत है I


लोग एक एक कर मंच पर आते गए और हिंदी भाषा के सम्मान पर पर बोलते रहे I ये अलग बात हैँ उनकी भाषा पर वो पकड़ नहीं थी I हिंदी को दुख भी हुआ पर यही सोच कर संतुष्ट थी की कम से कम मुझे मान तो मिल रहा हैँ ना I

तभी एक सज्जन उसे कुर्सी से उठाने लगे I हिंदी ने जब उठने से इंकार किया तो वह बेरुखी से बोला,

' यह समारोह दिवस बस अभी कुछ देर का ही था, भला तुमसे भी कभी किसी का गुजारा हुआ है  I कल से यहां एक हफ्ते की अंग्रेजी क्लासेज लगेंगी Iएक बहुत बड़े प्रोफेसर एक हफ्ते का प्रशिक्षण देंगे I  शाम से ही उसका रजिस्ट्रेशन शुरू होगा I बाहर अभी से बहुत भीड़ पड़ने लगी हैँ I

हिंदी बेचारी सुबकते हुए खड़ी हो गई I उसे ऐसा लगा जैसे अपने ही घर से उसे बेदखल कर दिया हो I उसने देखा सामने अंग्रेजी सिंहासन पर बैठी उसको हिकारत की नजर से देख रही थी  I  हिंदी चुपचाप वहां से खिसक गई I बाहर देखा बड़ी बड़ी डिग्रियां लिए बच्चे खड़े थे,बहुत नाम कमाया था I पर एक ही बात का मलाल था कि उनकी अंग्रेजी पर पकड़ अच्छी नहीं थी I जिस कारण उनकी तमाम डिग्रीया धूल चाट रही थी  और उनको बौद्धिकता का प्रमाण पत्र नहीं मिल पा रहा था I

हिंदी सोचने लगी सच है मुझे बोलने वाले तो गवार होते हैं I  लोगो के दिलो दिमाग़ पर अंग्रेजी ने ऐसा कब्ज़ा कर लिया मानो वो सिर्फ भाषा नहीं अपितु उनकी बौद्धिकता का प्रमाण हैँ I  वह दुखी मन से लंगड़ाती हुई वहां से निकल गयी I


Sunday, 11 July 2021

अंध श्रद्धा /अन्धविश्वास

 आज अमूमन हर घर में कामवालिया काम पर आती हैं I इनके बिना किसी घर का काम शायद ही पूरा होता हो I आज ये हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गयी I  सुबह-सुबह हर घर में इनका बेसब्री से इंतजार रहता है I इनको घर के कोने कोने की खबर रहती है I लंबे समय तक काम करते करते यह हमारे ही जीवन का हिस्सा बन जाते हैं I


फिर भी हम में से कितने लोग इन पर आंख बंद करके विश्वास करते हैं I शायद बहुत ही कम I घर में से एक चीज  इधर से उधर हुई नहीं कि सबसे पहला शक  इन पर ही जाता है I  ये शक इनके इतने सालो की मेहनत के आगे बेकार  चला जाता है I


 ऐसा ही एक वाक्या मेरे साथ हुआ I हमारे यहां कामवाली बहुत लम्बे समय से आ रही है I हालांकि हम उस पर शक तो नहीं करते पर हाँ आंख बंद करके यकीन करने में शायद झिझक तो होती है I


कल मैंने बाई को उसके महीने की तनख्वाह दीं, अच्छे से दो बार गिन कर I आज उसने मुझसे कहा कि आपने मुझे कल ₹100 ज्यादा दे दिए I क्या फर्क पड़ता अगर वह मुझे नहीं बताती, मुझे तो पता भी नहीं चलता और ना मैं उस पर कभी शक करती,क्योंकि मैंने उसे अच्छे से दो बार तीन बार पैसे गिन कर दिए थे I


पर यह बता कर उसने अपने प्रति विश्वास और मेरा भरोसा जीत लिया I  मेरे मन में उसकी इज्जत और बढ़ गयी I पर अगर वो 100 rs रख लेती नहीं बताती, तो अगर कभी कुछ घर से गायब होता तो मेरा शक उस पर ही जाता , पर शायद अब नहीं जाये I आज उसने 100 rs नहीं गवाएं,अपने प्रति बेशकीमती अंधश्रद्धा और मेरा विश्वास जीता I जो उन 100 rs से कही ज्यादा था I


  फंडा यह है कि आप अपना काम पूरी ईमानदारी से करोगे तो आपका सम्मान और भरोसा और बढ़ेगा और आपको आपकी ईमानदारी का फल एक ना एक दिन जरूर मिलेगा I

Tuesday, 6 July 2021

तुलना

पापा मेरे दोस्त के पापा के पास देखो कितनी बड़ी गाड़ी है, और हमारे पास खटारा कार'!


' मम्मी मेरी सहेली की मम्मी कितनी अच्छी इंग्लिश बोलती हैं, कितने ढंग से रहती हैं,एक आप को देखो'!


 रूही और यश कुछ दिन से बात बात पर अपने मम्मी पापा की तुलना  दूसरों के मम्मी पापा से कर रहे!एक दिन तो हद ही हो गई! यश अपने पापा वत्सल से बोला,


'पापा आप थोड़े काले हो, मेरे दोस्त के पापा देखो कितने गोरे हैं'!


यश का इतना बोलना था की उसकी मम्मी मेघा का गुस्सा सातवे आसमान पर था, वो चिल्ला कर बोली,


'बस यश बहुत हुआ, इतने दिन से मैं देख रही हूँ तुम दोनों बात बात पर हम लोग की तुलना अपने दोस्तों के मम्मी पापा से करते हो! इस चक्कर में पापा दिन रात तनाव में रहते हैं, कैसे तुम्हारे लिए सारी सुख सुविधाएं जुटा पाए!कितना प्रेशर है उनके ऊपर कुछ पता भी है!


और मैं... मैं तुम्हारे दोस्तों की मम्मी जैसा स्मार्ट दिखने के लिए क्या कुछ नहीं कर रही!थक गए हम दोनों तुम दोनों की अपेक्षाओं पर खरे उतरते उतरते'!


 और मेघा मुंह पर हाथ रखकर रोने लगी! यश और रूही अपनी मम्मी के पास आए और उन्हें चुप कराने लगे!  यश अपने पापा से बोला,


'पापा हमें माफ कर दो! हम कभी आप लोगों का दिल नहीं दुखाना चाहते थे!आप  तो दुनिया के बेस्ट मम्मी पापा हो!पर जैसे आप लोग हमारी अपेक्षाओं से थक गए!हम लोग का सोचा...जब आप दिन रात हमारी तुलना दूसरे बच्चों से करते हो, उनके जैसा बनने को कहते हो! हम पर कितना दबाव आता है!और उस दबाव को झेलते झेलते  हमारे ऊपर क्या गुजरती है! काश कि आप भी हमारी तुलना किसी और से नहीं करो, हम जैसे हैं वैसे हमें अपनाओ, हमारी तुलना सिर्फ हमसे करो तो शायद हम और सफल हो, दबाव में नहीं रहे '!


अपने बच्चों के मुंह से इतनी बड़ी बात सुन मेघा और वत्सल दंग रह गए! आज उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ! आज उनके ही बच्चों ने उनकी आँखे खोल दी! उन्होंने अपने बच्चों से वादा किया आज के बाद वह अपने बच्चों की तुलना किसी और से नहीं करेंगे! वो दुनिया के बेस्ट बच्चें हैँ!सबकी आँखे नम थी पर सब खुश थे!

Wednesday, 9 June 2021

आखिर की वो दो रोटी

 

मई का महीना,चिलचिलाती गर्मी, तापमान 45 डिग्री से ऊपर! घर का हर सदस्य गर्मी से त्राहि-त्राहि कर रहा!कूलर पंखे एसी में भी किसी को चैन नहीं मिल रहा! सब बार-बार देख रहे कही ए. सी.खराब तो नहीं हो गया!इस समय किसी की भी इतनी हिम्मत नहीं जो इन सब के आगे से एक क्षण को भी उठ जाये!

उधर घर की गृह लक्ष्मी प्रचंड गर्मी में रसोई में अपने घरवालों की पसंद का खाना बना रही थी! गर्मी में किसी को खाना भाता भी नहीं है इसलिए वो पूरा जतन कर रही कि सबकी पसंद का ऐसा खाना बनाएं जो सब खुश होकर खा ले! पसीने की बूंदे उसके माथे पर चू रही थी! कमर,गर्दन शरीर का कोई हिस्सा नहीं बचा होगा जहां से पसीना छलक ना रहा हो! वो बार बार अपना पसीना पोंछते हुए सबकी पसंद का ध्यान रखते हुए पूरे मन से खाना तैयार कर रही! सब्जी चावल दाल सब बना लिया बस अब रोटी सेकने की बारी थी!

मुश्किल से दो रोटी भी नहीं सेंकी होंगी की उसके मोबाइल पर बेटे का फ़ोन आ गया मैग्गी की फरमाइश थी पर गरमी में उठ कर आने की हिम्मत नहीं थी इसलिए घर की घर में फ़ोन कर दिया! सौम्या ने गैस बंद कर पहले  बेटे के लिए मैग्गी बनायीं! इधर उसने दो चार रोटी और सेंकी की याद आया एक बार गरमी में सबके लिए शिकंजी बना दू, गैस बंद कर शिकंजी बनायीं, तभी छाछ की फरमाइश आ गयी! सबको शिकंजी छाछ देकर फिर वो रोटी सेकने लगी!

अब गरमी से वो भी बेहाल हो रही!  उसने फूलके गिने,सबके हिसाब से पूरे हो गए! बस अब आखिर की उसकी दो रोटी सेकनी बची थी!अब तक वो भी गरमी से निढाल हो चुकी थी! पूरा खाना मन से बनाया पर आखिर की वो दो रोटी उसको किसी पहाड़ पर चढ़ने से कम नहीं लग रहा था!उसने बेमन से रोटी बनायीं, ना उसके  आकार पर ध्यान दिया ना उसकी सिकाई पर!  बस कैसे भी करके उसने वो दो रोटी सेक कर गैस बंद कर दी! अगर कोई भी इन दो रोटी और बाकी की रोटी पर नजर डालता तो  यकीन ना करता की ये सारी रोटी एक ही बंदे ने बनाई है!आखिर सौम्या ने अपनी वह कच्ची पक्की दो रोटी सेक कर गैस बंद करी और उन आखिर की दो रोटी को मोड़ कर रखा दिया ताकि गलती से भी किसी को ना दे दे इ! अब उसको ऐसा लग रहा जैसे उसने कोई गढ़ जीत लिया हो!


Friday, 14 May 2021

प्रेरणा /प्रेरक

 उदाहरण 1

'ऐसा क्यों सोचते हो तुम कुछ नहीं कर सकते!मुझे देखो मैंने जिंदगी में क्या नहीं किया, कितना नाम है मेरा,शोहरत है,रुतबा है फिर  तुम्हारा क्यों नहीं हो सकता!अरे कुछ करोगे नहीं तो कहां से सफलता मिलेगी,सफलता के लिए कुछ करना पड़ता है!बैठे-बैठे कोई मुंह में निवाला  नहीं दे देगा!मैंने देखो कितना संघर्ष किया तब जाकर जिंदगी के इस मोड़ पर खड़ा हूं '!


उदाहरण -2

'ऐसा क्यों सोचते हो कि तुम कुछ नहीं कर सकते तुम कभी सफल नहीं हो सकते!जरा ढंग से देखो  तुम्हारे अंदर कितना टैलेंट है एक बार बिना झिझक के अपना टैलेंट निकाल कर तो देखो!अपनी परिस्थितियों के अनुसार और अपनी योग्यता के अनुसार काम करो! हर कोई एक सामान नहीं होता सबके गुण अलग अलग होते हैँ, बस अपने उस गुण को पहचानो फिर देखना दुनिया में तुम्हारा भी नाम होगा और तुम भी सफल होंगे '!


ऊपर के दोनों उदाहरण में क्या फर्क है, दोनों कोई मोटिवेशनल स्पीकर के हैं!दोनों लोगों को जागरुक कर रहे हैं पर पहले उदाहरण में लोगों को लग रहा है जैसे कि वह हमें समझा नहीं रहा हमें प्रेरित नहीं कर रहा बल्कि उपदेश दे रहा है, भाषण दें रहा हैँ !आज खुद प्रसिद्ध हो गया  तो जरूरी तो नहीं हम भी हो जाए सब की योग्यता और परिस्थितियां अलग अलग होती हैं!


पर दूसरे उदाहरण में वह कोई उपदेश नहीं दे रहा वो भाषण नहीं लग रहा वो अपने गुण बताने की बजाय हमारे गुण बता रहा हैँ!वह हम पर विश्वास कर रहा है उसको हम पर यकीन है!हमारे अंदर भी गुणों की खान है बस हमें उसे निकालना है हमारी परिस्थितियों और हमारी योग्यता के अनुसार!


तो अगर आप भी किसी को समझाना चाहते हैं तो केवल उपदेशक नहीं बनना होगा उसके सहायक बनिए उसके हमराज बनिए! यकीन मानिए वह आपसे प्रभावित होगा खुद  प्रेरित  होगा!उपदेशक तो कोई भी बन सकता है जरूरी नही कोई सर्वगुन्न संपन्न या बहुत ही सफल आदमी ही उपदेशक बने! हर व्यक्ति जिंदगी के हर मोड़ पर अपने साथ रहने वाले को प्रेरित करते हैं उसका मोटीवेटर बनता हैँ!


पर उसको भाषण मत दीजिए! अपने गुण बताने की बजाय उसके गुणगान कीजिये! यकीन मानिये आप भी किसी प्रेरक से कम नहीं हो सकते! तो हैँ तैयार आप अपनों के प्रेरक बनने के लिए!

Friday, 16 April 2021

चूल्हा चौका

 'क्या करोगी इतना पढ़ लिखकर,लड़की हो संभालना तो चूल्हा चौका ही है ',


ऐसी बातें पुराने जमाने में ही नहीं...अब भी कई जगह सुनने को मिल जाती हैं,फिर भी आज लड़कियां बिना किसी की सुने अपने सपने पूरे करने में लगी है,हर वह चीज कर रही है जो कोई भी इंसान कर सकता है,अपनी सोच को अंजाम दे रही हैं, हर सपना पूरा कर रही हैँ!


आप पेपर में एक घटना पढ़ कर ऐसा लगा कि क्या वास्तव में महिलाओं का काम सच में केवल चूल्हा चौका संभालना ही है! सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई,केस था योग्य महिला वकील को जज क्यों नहीं बनाया गया,पता चला उन वकील महिलाओं ने स्वेच्छा से पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया,इससे बड़ी महानता क्या हो सकती है! सब सोचेंगे हम तो पहले ही कहते थे संभालना तो चुल्हा चौका ही है और इसका उदाहरण ये घटना है! नहीं अगर वह वकील चाहती तो पदभार ग्रहण कर सकती थी पर उन्होंने शिक्षा घर बिखेरने के लिए नहीं, घर सवारने के लिए प्राप्त करी,और इतना पढ़ लिखकर उनकी सोच किस हद तक ऊंची हो गई, वो अच्छे से जानती थी उनके लिए क्या सही है और क्या गलत!इससे उनकी पदवी घटी नहीं बहुत बढ़ गयी!


इससे ही मिलता-जुलता एक वाक्या मुझे याद आया,जो मैंने कभी पढ़ा था, एक बहुत ही ऊंचे पद पर एक महिला ऑफिसर का प्रमोशन हुआ,जब उसका इंटरव्यू हुआ और उससे पूछा आपकी सारी इच्छाएं पूरी हो गई,अभी भी ऐसी कोई इच्छा बची है तो वह बोली,


' मुझे मुझे मेरे घर के लिए एक वाइफ चाहिए,सुनने में अटपटा लगेगा, पर सच में उसको अपने घर के लिए वाइफ चाहिए,क्योंकि उसको पता था उससे अच्छा उसके परिवार को कोई नहीं संभाल सकता, भले वह कितने नौकर चाकर रखे, पर वो निष्ठां कहां से ला पाएंगे!

सच कहा किसी ने महिला होना आसान नहीं होता!

Sunday, 4 April 2021

नो कमैंट्स

 1Msg -Nice dp

No comments,

Msg -nice dp,
Thanku 😍😍😍

2-msg -good morning,
No comments,

Good morning
V. Gm.

क्या अंतर है ऊपर के इन दोनों मैसेजेस में, यही की एक में मैसेज के बदले कमेंट मिला,दूसरे में नहीं!

तो क्या हुआ ऐसा तो अक्सर होता है, दिन में पता नहीं कितनी बार हम सब के साथ, हम सोशल साइट पर रहते हैं,रोज कितनी बार इन चीजों से सब का सामना होता है, कभी हमें कमेंट के बदले कमेंट मिलता है और कभी नहीं! हम भी कई बार कमेंट का रिप्लाई नहीं देते,कोई जरूरी तो नहीं, फिर फर्क भी क्या पड़ता है केवल एक कमेंट से, जरुरी तो नहीं हर मैसेज का रिप्लाई दे!

पर एक बार दोबारा से ऊपर मैसेजेस को देखिए,जहाँ कमेंट के बदले कमेंट मिला, मिलने वाले को अच्छा लगा, संतुष्टि हुई कि आपने उसको रिप्लाई दिया, आपके पास उसके लिए समय हैँ, पर जहां कमेंट के बदले कमेंट नहीं मिला वहां पर ज्यादा फर्क तो नहीं पड़ा पर हां दिल में कुछ खटका,एक हुक सी उठी,क्या हो गया अगर एक कमेंट कर देते तो, ब्लू टिक होने पर भी जवाब नहीं दिया,इग्नोर कर दिया!


आज जब सारे रिश्ते ही सोशल साइट पर निभ रहे हैं तो इन कमैंट्स का बहुत फर्क पड़ता है, कोई कितना भी कहे की हमें फर्क नहीं पड़ता,पर सच कहु तो फर्क सबको पड़ता हैँ!

और  एक बार पर्सनल पर कोई हमें कमेंट नहीं करें तो इतना फर्क नहीं पड़ता, पर सोचिए जहां आजकल ग्रुप बने होते हैं, फैमिली, फ्रेंड्स के ग्रुप, वहां पर कोई एक सदस्य बहुत खुश होकर कोई मैसेज करता है, और जब ग्रुप में सारे मेंबर्स उसे इग्नोर करते हैँ,कोई भी एक सदस्य भी उसे कमेंट नहीं करता तो कमेंट करने वाले को कितना हर्ट होता हैँ, कितनी बेइज्जती लगती हैँ, क्यूंकि वहां काफ़ी सारे सदस्य हैँ!

क्या जाता हैँ एक कमेंट करने में, तुम्हारे एक कमेंट से सामने वाला खुश होगा तो क्या हर्ज हैँ,बशर्ते वह कमेंट केवल दिखावा नहीं दिल से होना चाहिए!

हाँ कभी कभी व्यस्तता की वजह से रिप्लाई नहीं कर पाते पर कभी कभी, वैसे भी एक मैसेज करने में कितनी देर लगती हैँ!


ये मेरे व्यक्तिगत विचार है जरुरी नहीं आप सभी इससे सहमत हैं, पर सहमत हो या असहमत  एक कमेंट तो बनता ही हैँ 🤗🤗🤗

Saturday, 27 February 2021

आखिर क्यों

 आखिर क्यों ये रीत बनायीं,

अपनी ही बेटी बन जाये परायी!


सोच सोच आँखे भर आयी,

कैसे सह पाऊँगी मैं ये जुदाई!


दिल पे पत्थर भी रखना पड़ेगा,

तुझसे दूर अब रहना पड़ेगा!


पर ये दुआएं हमेशा तेरे साथ हैँ,
दूर ही सही,पर इस दिल के बहुत तू पास हैँ!

Monday, 1 February 2021

फोटो फ्रेम

आज पेपर में एक पिक्चर देखी, विराट कोहली और अनुष्का ने अपनी बेटी के साथ पहली पिक्चर शेयर करी, कितने  खुश और संतुष्ट दिख रहे थे दोनों,इससे पहले कई मौके आए होंगे उनके चेहरे पर खुशी के,पर इस हसीं  जैसी खूबसूरत हसीं आज तक उनके चेहरे पर नहीं दिखी!

विराट ने  एक संदेश में लिखा,'मेरी पूरी दुनिया एक फ्रेम  में '

सही कहा उसकी बेटी, उसकी पत्नी और वह... उसके लिए पूरी दुनिया ही तो थे,पर पता नहीं क्यों मुझे लगा क्या इतनी छोटी सी दुनिया है उनकी, तुम्हारे मां-बाप जिनके लिए तुम उनकी दुनिया हो, कम से कम उनको तो अपनी इस दुनिया में शामिल  कर लेते,अगर तुम्हारी दुनिया का फ्रेम  थोड़ा छोटा है तो उसे थोड़ा.. बस थोड़ा सब  बड़ा  कर लो !

आखिर क्यों हम हमारी दुनिया छोटी बनाते जा रहे हैं, क्यों सिवाय   हम दो हमारे दो या हमारा एक को ही सजाते हैं, उससे आगे सोचते ही नहीं!तुम्हारे मां-बाप के लिए तो तुम पूरा जहान हो, कम से कम  उनको तो अपनी दुनिया का हिस्सा बना लो!

आजकल टीवी में जो विज्ञापन आते हैं उसमें भी छोटी सी फैमिली दिखाते हैं,आखिर क्यों हम हमारी दुनिया को इतना संकुचित करते जा रहे हैं, जैसे संयुक्त परिवार टूटकर छोटे होने लगे, वैसे ही हमारी सोच, हमारी दुनिया को भी इतना संकुचित कर दिया, जो हमें हमारी दुनिया समझते हैं, जब हमने उनको  अपनी दुनिया से अलग कर दिया तो वो तो ठगे से देखते रह गए!

एक बार सोच कर देखिए अगर सही लगे तो अपने फोटो फ्रेम...मतलब अपनी  दुनिया को थोड़ा सा बड़ा कर लो, जिनके लिए दुनिया बड़ी करी, उनकी आंखों की चमक देख तुम्हें अपनी दुनिया शायद और भी खूबसूरत लगने लगेगी!

Thursday, 7 January 2021

हाउस वाइफ /सैलरी (मुआवजा )

 इन दिनों दो खबर चल रही हैं,जिस पर रह रहकर ध्यान जा रहा है, कमल हासन ने कहा,' अगर मैं चुनाव जीत गया तो गृहणियों   को भी हर महीने सैलरी मिलेगी', सुनकर अच्छा लगा चलो हमें हमारे काम का मेहनताना मिलेगा, फिर  अगले ही पल दिमाग में आया, मेहनताना निश्चित कैसे होगा, किस किस काम का मेहनताना देंगे,चलो खाना बनाना, घर संभालना,सफाई इन सब का तो दे देंगे,पर वह काम जो किसी को दिखते  भी नहीं,उनका  कैसे मिलेगा,जैसे कि रात को जैसे ही बिस्तर पर लेटी नहीं तभी दिमाग में आया दूध में जामन नहीं लगाया, छोले नहीं भिगोए,सुबह खाना बन गया तो शाम के खाने की चिंता, घर का कोई सदस्य बीमार ना हो, दिन रात उनकी सेहत के  ख्याल में अपनी सेहत से खिलवाड़,अपने से पहले अपनों के लिए सोचना, खुद को सब के बाद में रखना और उसके बाद में भी जब सब उसको अनदेखा करते, उसकी भावनाओं की परवाह नहीं करते, जरा सी गलती होने पर उस को कटघरे में खड़ा कर देते जैसे कोई घोर अपराधी  हो,और इन सबके बावजूद कोई पूछता है कि करती क्या है तो सब बोलते कुछ नहीं एक गृहणी  है, दिन भर करती ही क्या हो तुम, खुद भी यही कहती कि मैं कुछ नहीं करती, तो कितनी सैलरी निश्चित करोगे!अगर करोगे तो अफॉर्ड  नहीं कर पाओगे, बहुत महंगी पड़ेंगी हम, हां फिर भी देना ही चाहते हो तो हमारे काम के महत्व को  समझो, हम को तवज्जो दो, हमारा सम्मान करो, दो पल हमसे प्यार से बोलो, समझो हम घर के केंद्र बिंदु हैं, हमारे बिना तुम्हारा वजूद नहीं, कभी-कभी हमें सॉरी  और थैंक यू बोल दो,बस मिल गई हमें हमारी सैलरी, माना यह देने में आपको थोड़ी झिझक होगी, और आपके अहम को  भी ठेस लग सकती है,पर अगर देना ही  चाहते तो बस इतना सा दे दो, पैसे तो तुम तुम्हारे पास ही रख लो!

एक दूसरी खबर ने ध्यान आकर्षित किया,हाईकोर्ट ने एक दंपति की मोटरसाइकिल दुर्घटना में मौत के बाद औरत के परिजनों को कम  मुआवजा दिया और कहा ये एक आम गृहणी थी, कुछ नहीं करती थी, तब  सुप्रीम कोर्ट ने कहा, औरत को भी बराबर का मुआवजा  मिलेगा, वो सिर्फ एक गृहणी  नहीं पूरी घर की अर्थव्यवस्था संभालती, घर संभालती उसका महत्व आदमी से बिल्कुल कम नहीं!

सच  इस खबर ने इतनी खुशी दी, आज मुझे मेरे गृहणी होने पर गर्व है, उसको महज़  मुआवजा नहीं मिला, हमारे काम का सम्मान मिला, हमारी  भावना, हमारे वजूद को पहचान मिली, भले उसके परिजनों को  मुआवजा मिला, पर  और बाकी सारी हाउस वाइफ को सम्मान मिला, पहचान मिली, सच इससे  बेहतर मुआवजा क्या हो सकता है!

Saturday, 2 January 2021

दुआओ की वैक्सीन

2021 भी आ गया और आज उसका दूसरा दिन है, सच समय कैसे निकल जाता है पता ही नहीं चलता,वैसे भी इस बार 2021 का इंतजार जिस बेसब्री से किया शायद ही कभी किसी साल का किया हो, 2020 ने हम सबको जो मंजर दिखाया शायद ही कभी किसी ने सपने में सोचा होगा, बच्चे से लेकर बड़े तक बस भगवान से प्रार्थना कर रहे,यह मुसीबत कैसे भी करके कम हो जाये, पूरे संसार में सब एक ही मुसीबत से परेशान,ऐसा तो सदियों में नहीं हुआ I

हम सबने और सालों की तरह 2020 का स्वागत भी बहुत धूमधाम से किया, किसको पता  था हम किस आपदा के पास आ रहे हैँ Iफरवरी-मार्च से कोरोना धीरे-धीरे देश में भी पैर पसारने लगा, हमको लगा शायद हम पर इतना असर नहीं होगा हम कोरोना को भी  बड़ी आसानी से हरा देंगे I

 जब सबसे पहले जनता कर्फ्यू लगा तो लोगों को एक नया अनुभव लगा,इतना सन्नाटा....पक्षियों की आवाज दिन में भी साफ सुनाई दे रही,बाहर जो भी निकल रहा पुलिस के डंडे से उसका स्वागत हो रहा! फिर 3 दिन का लॉक डाउन, फिर 21 दिन का, सब ने पहली बार खुद से कामवाली बाइयों को काम पर आने से मना कर दिया, घर में सबके काम बांट दिए गए, किसी को जिम्मा झाड़ू का, तो किसी को पोंछे का,तो किसी के जिम्मे बर्तन,  किसी के जिम्मे खाना , पहली बार सबको पता लगा कि जो  गृहणी सबकी नजरो मे दिन भर  करती ही क्या थी, वो वाकई कितना कुछ करती हैँ और उफ्फ भी नहीं करती I

बाजार से सामान आता तो  जैसे कोई विस्फोटक सामग्री खुद ही घर में ले आए हैं, लाने वाला फटाफट से सबसे पहले नहाने जाता साबुन से हाथ धोता, सब्जियों को नमक और सोडे  से ना जाने कब तक धोते, किराने के सामान को तो तीन-चार दिन तक हाथ नहीं लगाते,हर घर में शेफ  पैदा होने लगे,किसी के घर जलेबी तो किसी के घेवर, कही  गोलगप्पे के चटखारे,  तो कहीं समोसे कचोरी, सब अपने-अपने वीडियो शेयर कर रहे!

शुरू में सब को बहुत मजा आ रहा, ना बच्चों को स्कूल की टेंशन, ना बड़ो को  ऑफिस दुकान की टेंशन,ना सुबह का पता ना शाम का! लूडो कैरम, चैस जो धूल  खा रहे, जगमगाने लगे I

जो बुजुर्ग  अकेले बैठे बुढ़ापा काट रहे, उनके चेहरे पर रौनक आ गई, छोटे से लेकर बड़े जिनको दिन भर  सांस लेने की फुर्सत नहीं, एक  घर में रहकर  भी  दर्शन नहीं होते अब दिन भर उनसे घिरे रहते, महाभारत, रामायन हर घर में देखते, दूरदर्शन जिसको सब भूल गए, वापस उसकी मांग बढ़ गयी I

जिन  बच्चों को मोबाइल से दूर रखते, अब माता-पिता खुद उनके हाथों में मोबाइल देने  लगे, क्यूंकि  स्कूल मोबाइल में सिमट  गया I

फिर एक नजारा सबने देखा, गरीब मजदूर, नंगे पैर, कड़ी धूप में  अपने घर के लिए पैदल रवाना हो गए, उनकी बेबसी देख शायद सबका दिल ही पसीजा होगा,  बहुत से लोगों ने भूखों के लिए अपने घर के द्वार खोल दिए, जिसकी जितनी सामर्थ्य उतनी मदद कर रहे I

पुलिस, डॉक्टर  को भगवान का दर्जा मिलने लगा,वैसे भी मंदिर, मस्जिद सब बंद थे, पर वो अपने घर में भी अकेले हो गए,  उनके घरवाले ही उनके  पास जाने से  कतराने  लगे,अपनों से मिले उनको महीने हो जाते,उनकी और उनके  अपने की बेबसी बस महसूस ही  कर पाए I

रोज मोबाइल में केस देखते कितने केस  आ रहे,जिस कॉलोनी में कोरोना पॉजिटिव मिलता वो जैसे मौत का मंजर दिखती, लोग वहां जाने से भी कतराते,पहली बार पॉजिटिव शब्द इतना नेगेटिव रहा!

भरी गर्मी में जब कुल्फी आइसक्रीम सब  की जान होती,उसको   हटाकर सब काढ़ा, गरम पानी का  सेवन कर रहे,बार-बार ऑक्सीजन का लेवल नाप रहे!

सबने मिलकर  ताली बजाई, थाली बजाई, गो कोरोना गो जैसे राष्ट्रगीत हो गया, दिए जलाए, फिर लगा गर्मी में तापमान वृद्धि से कोरोना  अपने आप दम तोड़ देगा,  जिस गंगा को साफ करने के लिए करोड़ों का बजट बनाया वह अपने आप ऐसी साफ हुई जिसकी कभी किसी ने कल्पना भी नहीं करी होगी,प्रदूषण का नामो निशान मिट गया, सड़कों पर जानवर बेखौफ घूम रहे और हम इंसान पिंजरे में डर कर कैदी बने हुए!

फिर धीरे-धीरे लॉकडाउन खुलने लगा और लोग पूरी एहतियात से बाहर निकलने लगे, धीरे-धीरे लोग छोटे-छोटे शादी और समारोह भी करने लगे,मेहमानों की संख्या सीमित कर दी, शादियों के ऐसे नजारे की  किसी ने कल्पना नहीं करी होगी,जहा दूल्हा दुल्हन भी  मुखोटे में होंगे, जिस घर में शादी का कार्ड आने पर खुशी होती, अब माथे पर पसीना छलक आता!

अब जैसे ही सब थोड़ा बेफिक्र होने लगे तो एक नये स्ट्रैन ने सबकी  नींद उड़ा दी, वैसे भारत की नई वैक्सीन आ गयी, आओ  मिलकर दुआ करें कभी भी 2020 जैसा साल वापस ना देखना पड़े,ये साल सबके लिए हर   तरीके से अच्छा हो, एक साथ इतने हाथ उठेंगे तो शायद कोरोना की वैक्सीन ये दुआएं बन जाये 🙏🙏🙏🙏