तीसरी लहर सितंबर से अक्टूबर के बीच आएगी I (ऐसा अनुमान हैँ )
इसमें बच्चों को खतरा ज्यादा है I (निसंदेह होगा भी, क्यूंकि 18 साल से ऊपर वालों के टीका लग चुका है )
इसी बीच सरकार ने स्कूल खोलने की परमिशन दे दी I
9 से 12 कक्षा तक के स्कूल खुलेंगे, (इस कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों की उम्र सामान्यतः 14 से 18 के बीच होती है, मतलब की इन बच्चों के अभी तक टीका नहीं लगा)
सरकार ने कहा है कि स्कूल बाध्य नहीं करेंगे, कक्षाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में चलेंगी I
स्कूल से कांसेंट फॉर्म भेजे जा रहे हैं,जिनको भरना अभिभावकों के लिए अनिवार्य है, इसमें साफ-साफ लिखा है कि बच्चों को कुछ भी होता है तो सारी जिम्मेदारी अभिभावकों के ऊपर I स्कूल वाले अपने ऊपर कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं, (मतलब की कोई तो डर हैँ तभी तो वो जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं ),उनको तो बस स्कूल खोलने हैं I
साथ ही बच्चों और अभिभावकों पर अनावश्यक दबाव डाल रहे हैं, कभी एग्जाम्स के रूप में,कभी दूसरे रूप में, जिससे स्कूल भेजना जरूरी है I
अभिभावक बेचारे ठगे से खड़े हैँ क्या करें, अपने नौनिहालों को जानबूझकर कैसे खतरे में डाल दें I यह तो वही हालत हो गई जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में लिखा होता है, 'यात्री अपने सामान की हिफाजत खुद करें', पर यहां बात सामान कि नहीं अभिभावकों की जान की है, जो माता-पिता अपने बच्चों को हर मुसीबत से बचाते हैं, फ़िर कैसे अपने जिगर के टुकड़े को खतरे में भेज दे I
आए दिन खबर आ रही है जहां भी स्कूल खुले,कितने ही बच्चे पॉजिटिव हो गए I कई स्कूल सील करनें पड़े I मुंबई में भी एक स्कूल में 22 बच्चे पॉजिटिव,जिसमें 4 बच्चें 12 साल से कम उम्र के I
जैसे सिगरेट के पैकेट पर लिखा होता है 'सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है',
और इसमें तो फ़िर भी जिसको लत होती हैँ वही पीता हैँ, यहाँ तो सबको पीनी ही पड़ेगी I
स्कूल वाले स्कूल खोलने को अगर इतने ही बेचैन है,एक बार तो कोई स्कूल हिम्मत दिखाता,ऐसा कांसेंट फॉर्म भेजता जिसमे लिखा होता,
'आप अपने बच्चों को भेजो,उनको सुरक्षा देना हमारा जिम्मा,वह आपकी ही नहीं हमारी भी जान है ',
एक बार तो कोई स्कूल ऐसा कदम उठाता, तब शायद अभिभावकों को थोड़ी हिम्मत भी आती I
माना ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों को जो शिक्षा मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल पा रही, उनका सर्वागीण विकास नहीं हो पा रहा I हर अभिभावक चाहता है कि सब कुछ पहले जैसा सामान्य हो जाए, पर अपने बच्चों की जान की कीमत पर तो किसी भी हालत में नहीं I
Well said Di...👍👍👍
ReplyDeleteSchool administration bhi Jaanta hai Khatra to hai but unhe kamai Jyada Pyari Hai. Unhe bachcho ki jaan se jyada apni fees ki tension hai.
बिलकुल सही 👍👍
ReplyDeleteसही कहा दी
ReplyDeleteThanku ritu 🙏😊
ReplyDeleteBilkul sahe kha
ReplyDeletePesa itna pyara h ki bacho ko bhe daav pr lga rhe h ye school wale
बिलकुल सही 🙏🙏👍👍
ReplyDeleteVery well said and written di.parents ki problems ko kitna achchi tarah se samajh kar sabdo me piroya h.really Very nice 😊👌😄👍☺😀
ReplyDeleteThanku sooo much Ankita 🙏😍
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