Jindagi ek unsuljhi paheli

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Wednesday, 15 September 2021

कॉलेज से जुडी रोचक घटना

 

कॉलेज लाइफ बंधनों को तोड़ खुलकर जीने की आजादी, यूनिफॉर्म छोड़ डिजाइनर कपड़े पहनने की मनमानी, एक से आठ पीरियड अटेंड करने का बंधन छोड़ क्लासेज बंक करने की मनमानी,पंखो को परवाज देने की ख़ुशी,अनुशासन, नियम सब छोड़ जिंदगी जिंदादिली से जीने की आजादी  I

पर कल्पना कीजिए  कॉलेज में आप को स्कूल से भी सख्त माहौल मिले,तो क्या हालात होगी, मानो आसमान से गिरे खजूर में अटके I


मेरे साथ  कुछ ऐसा ही हुआ I बी एड कॉलेज में मेरा प्रवेश,जहाँ किसी जेल सा सख्त माहौल I वही स्कूल की तरह यूनिफॉर्म,सख्त अनुशासन, सब कुछ वही जो स्कूल में जिया I

एक बार लंच में मैंने मेरी सहेलियों से कहा,

' आइसक्रीम खाने चलते हैं',


कॉलेज से दो कदम की दूरी पर पार्लर था I सबने मना किया,किसी ने देख लिया तो फंस जाएंगे  I पर मेरी जिद के आगे किसी की एक नहीं चली I हमने मजे से आइसक्रीम का स्वाद लिया I


पर हमें नहीं पता था हम आने वाले खतरे से अनजान थे I अगले दिन प्रार्थना सभा (जी हां स्कूल की जैसे प्रार्थना )में हमारी अध्यापिका ने कहा,

' कल कुछ लड़कियां आइसक्रीम का स्वाद ले रही थी,अपने आप हाथ खड़ा कर दो, नहीं तो मुझे नाम लेना पड़ेगा',

हमें काटो तो खून नहीं  I मरते क्या ना करते,सबने हाथ ऊपर कर दिए  I सबके सामने जो बेइज्जती महसूस हुई,लगा अभी जमीन धंस जाए और हम इस में समा जाए I

तब तो जो हुआ वो तो ठीक,उसके बाद सहेलियों से बाद में कितना कुछ सुनना पड़ा, सब तेरी वजह से हुआ I

सच वो अनुभव भुलाए नहीं भूलता I

Tuesday, 7 September 2021

और मै जीत गयी (असली विजेता )

 

स्मिता स्कूल के नोटिस बोर्ड पर कोटेशन लिख रही थी....

' जीतने वाला ही नहीं...बल्कि कहां पर हारना  है,
ये जानने वाला भी महान होता है'I

स्मिता की  साथी अध्यापिका शिल्पी मैम ने जब ये कोटशन  पढ़ा तो  स्मिता से बोली,

' स्मिता नाइस  कोटेशन,पर आज तुम कैसे  कोटेशन लिख रही  हो',

स्मिता नें चॉक एक तरफ रख शिल्पी की तरफ मुड़ते हुए कहा,

'  शिल्पी कभी कभी जिंदगी में  कई घटनाएं ऐसी होती है जो हमारे दिल को छू जाती हैं I मेरे साथ में भी ऐसा ही कुछ हुआ,इसलिए मुझे ये कोटशन ध्यान आ गयी I आओ स्टाफ रूम में,मैं तुम्हे शुरू से बताती हूँ ',

और स्मिता और शिल्पी स्टाफ रूम की तरफ बढ़ गयी I स्मिता और शिल्पी कुर्सी पर बैठ गयी, स्मिता नें आँखों से अपना चश्मा हटाते हुए कहा,

'  कुछ दिन पहले मैंने अपनी क्लास में घोषणा की, कि एक फॉर्म भरना  है  स्कॉलरशिप टेस्ट के लिए,जो इसको अच्छे नम्बर से पास कर लेगा ,उसकी  फीस  माफ हो जाएगी I अब तुम्हे  तो पता हैं की यहाँ सब बच्चे अमीर घरों के आते हैं तो किसी ने क्लास में  इतनी रूचि नहीं दिखाई, सिवाय  दो बच्चों के   एक वनिता और एक रीमा I वनिता क्लास की सबसे होशयार लड़की हैं ,सबको यकीन था की एग्जाम में वो  ही प्रथम आएगी I यहाँ तक की सब उससे पहले से ही पार्टी मांग रहे,

'अब तो डबल ट्रीट लेंगे, एक तो तेरे पापा अच्छी पोस्ट पर हैं, ऊपर से फीस माफ़ 'I

वनिता ने भी सबको  वादा किया  की पक्का वो पार्टी देगी I एग्जाम अगले सप्ताह ही था I  दोनों लड़किया टेस्ट की तैयारी में लग गयी I ऐसा नहीं है  रीमा होशयार नहीं थी,पर उसे पता था वह वनिता को पीछे नहीं छोड़ सकती I एक दिन वनिता  स्कूल लाइब्रेरी में थी तभी वहां पर रीमा  भी आ गई,उसे किसी बुक की जरुरत  थी और वह लाइब्रेरियन से वह बुक मांग रही थी, पर वो बुक किसी  और बच्चे ने इशू करा  ली थी I रीमा  सर  से रिक्वेस्ट कर रही थी,

'सर प्लीज आई वांट दिस बुक वेरी अर्जेंट, मेरा नेक्स्ट वीक टेस्ट है,मुझे बुक जरूर चाहिए '

लाइब्रेरियन बोला ,

' अभी तो संभव नहीं  होगा, और  अगर इतनी ही आवश्यकता है तो तुम मार्केट से क्यों नहीं ले लेते हो, वैसे भी तुम्हें क्या फर्क पड़ेगा तुम अमीर  घर के बच्चे हो',

 ये सुन रीमा  की आंखों में आंसू आ गए, उसने कहा ,

' सर मैं अमीर घर से नहीं हूं, मेरे पापा इस दुनिया में नहीं है I मेरी मम्मी  ने बड़ी मुश्किल से  यहाँ एडमिशन कराया  हैँ I बस वह मुझे अच्छे स्कूल में  पढ़ाना चाहती थी I  मैं  ये एग्जाम क्लियर करके  उनकी मदद करना   चाहती हूँ ',

और वो रोते हुए बाहर चली गयी I वनिता ये सब देख और सुन रही थी, उसके जाने के बाद उसने लाइब्रेरियन से बुक का नाम पूछा और अगले दिन वह बुक खरीद के लाइब्रेरियन को दी और कहा,

'ये  रीमा  को बुला कर दे देना  और  मेरा नाम मत लेना',

अगले सप्ताह दोनों ने पेपर दिया  I रिजल्ट से पहले सबको यकीन था की वनिता ही प्रथम आएगी,पर सबको आश्चर्य हुआ जब रीमा प्रथम आयी,मैं खुद बहुत चौक गयी I मैंने वनिता को बुला पूछा,

' बेटा तुम इतनी होशयार   हो,तुम्हे क्या हुआ I सबसे आश्चर्य तो ये  था  की तुमने आधे से ज्यादा क्वेश्चन एटेम्पट ही नहीं किये थे, आखिर बात क्या हैँ',

लेकिन वनिता कुछ बताने  को तैयार ही नहीं थी, जब  मैंने बहुत दबाव डाला  तब  वो बोली,

'मैम प्लीज आप किसी को बताइएगा नहीं, मेरे  लिए  ये टेस्ट क्लियर करना इतना जरुरी नहीं था, मेरे पापा आराम से फीस  भर सकते हैँ, पर रीमा की मम्मी नहीं',

और उसने रीमा  की पूरी कहानी मुझे बताई I तभी पीछे से  रीमा  और उसकी मम्मी मिठाई लेकर आये,वो दोनों बहुत खुश थे, मैंने उन दोनों को बधाई   दी और सबने मिठाई खायी Iउनके जाने के बाद वनिता  ने कहा,

' मैम आपने इनके चेहरे  पर ख़ुशी देखी, पर अगर इनको पता चल जाता तो शायद इनके चेहरे पर वो ख़ुशी नहीं दिखती I इसलिए प्लीज आप ये  बात कभी किसी को नहीं बताइयेगा',

सच में मैं इतना भावुक हो गयी I इतनी छोटी सी  बच्ची  का इतना बड़ा बलिदान देख कर'I

ये  सब सुन कर शिल्पी मैम बोली,

'तुम्हारी बात सुनने के बाद ऐसा लगा की जरुरी  नहीं हमेशा बड़े ही सीख दे,कभी कभी बच्चे भी बहुत बड़ी सीख दे जाते है I बस हमें  स्वीकार करना आना चाहिए I सच में तुम्हारी बात सुनने के बाद ये कोटेशन बिलकुल सही दिख रहा हैँ I सच बताऊ तो ये कोटेशन नहीं ये  तो वनिता को   तुम्हारी तरफ  से उसका इनाम हैँ'I

तभी स्कूल की घंटी बज गयी और दोनों अपनी अपनी कक्षा में चले गये I


Wednesday, 1 September 2021

वह नेकी जो मुझे सुकून दे गयी

 ऐ खुदा मुझे इस लायक बना कि मैं किसी जरूरतमंद के काम आ सकूं',

' नेकी कर दरिया में डाल',

' ऐसी नेकी करो कि तुम्हारे बाएं हाथ को भी पता नहीं चले 'I

ऐसे जुमले हम पढ़ते आए हैं I सच हैँ अगर उस परवरदिगार की सच्ची बंदगी करना चाहते हो तो किसी जरूरतमंद के काम आ जाओ, फिर ना तुम्हें किसी मंदिर जाने की जरूरत और ना किसी मस्जिद I नेकी करना सच में अपने आप में  सुकून और शांति से कम नहीं  I नेकी करने के बाद जिसके लिए तुमने वो नेकी करी,उसके चेहरे की मुस्कान, शांति और उसकी आंखों में अपने लिए कृतज्ञता देखोगे तो लगेगा साक्षात ईश्वर के दर्शन हो गए, इससे बेहतर सुकून और दृश्य आपकी आंखों को कभी नहीं दिखेगा I कभी-कभी नेकी हम से अपने आप हो जाती है, मानो उस ईश्वर ने हमें इस लायक समझा कि जरूरत पड़ने पर अपने आप हमें वहां भेज दिया I वह खुद तो नहीं आया पर हमें अपना दूत बनाकर  भेज दिया  I

ऐसा ही वाकया मेरे साथ हुआ I मैं रात को अपने पति के साथ कहीं से आ रही थी I जैसे ही मेरी गाड़ी घर के गेट में प्रवेश कर रही थी कि एक संभ्रांत महिला महिला अचानक एक ऑटो से कूदकर मेरे पास आ गई,

'प्लीज हेल्प मी,हेल्प मी, ये ऑटो वाला मुझसे बदतमीजी कर रहा है',

यकायक हुई इस घटना से मैं और मेरे पति कुछ समझ नहीं पाए I कपड़े, ज़ेवर,पहनावे से वो अच्छे घर की महिला लग रही थी I पर रात का समय,ऐसे किसी को घर में घुसाना,पर पता नहीं क्यों हम उसे हमारे घर के अंदर ले आए  I उसको पानी पिलाया, शांत कराया I वह मेरे पति से कहने लगी,

'

मुझे मेरे घर छोड़ दो',


पर जाने क्यों मैंने मेरे पति को उसके साथ अकेले जाने से मना कर दिया I हमने उसे शांत कराया और इतनी रात को ऐसे अकेले जाने का कारण पूछा, तो उसने बताया एक पार्टी में उसका उसके पति से झगड़ा हो गया और वह गुस्से में पार्टी छोड़कर ऑटो में बैठकर अपने घर जा रही थी, पर रास्ते में उसे ऑटो वाले का व्यवहार हाव भाव सही नहीं दिख रहे थे, इसीलिए हमें देखते ही वो ऑटो से कूद गयी I

हमने उससे उसके पति का नंबर मांगा और फोन करके उनको बुलाया I हमें डर तो बहुत लग रहा था,पर पता नहीं क्यों अपने आप यह यह सब हमसे  हो रहा था I थोड़ी देर में उसका पति आया और हमें अनेकानेक धन्यवाद दिया,और उसको लेकर चला गया I

सच उस दिन एक अजीब सा एहसास हुआ, अगर हम नहीं होते तो वह ऑटो वाला उसके साथ कुछ भी कर सकता था I पर सच कहूं एक सुकून मिला और उस ईश्वर को मन ही मन धन्यवाद दिया, उसने हमें इस नेकी के लिए  जो चुना I