Jindagi ek unsuljhi paheli

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Saturday, 30 May 2020

स्कूल चले हम 🤔🤔?

इस कोरोना  ने हमसे  कितना कुछ छीन लिया,  हमारी खुशी, हमारी आजादी, हमारे रिश्ते, हमारी मुस्कुराहट, और अब.... अब वह छिन रहा है, स्कूल का वह माहौल, जो पता नहीं कभी वापस आएगा या नहीं!
 जब से समाचार आया है कि नई गाइडलाइंस आई है जिसमें हर  स्टूडेंट्स को अल्टरनेट डेज बुलाएंगे,  6 फीट की दूरी पर बच्चों को बैठना होगा,  वह आपस में टिफ़िन शेयर  नहीं कर पाएंगे,  मतलब बच्चे क्या स्कूल केवल पढ़ने के लिए जाते थे,  नहीं... वह स्कूल जाते थे अपने दोस्तों से मिलने,  उनसे अपनी बातें करने, अपना दिल हल्का करने, दूसरे का टिफिन खाने या चुराने, एक दूसरे की टांग खींचने !
स्कूल में तो बच्चों की खिलखिलाहट और शैतानियां गूंजती रहती थी !
अब वो स्कूल की इमारत शक की, डर  की इमारत बन जाएगी, जहाँ जाने से बच्चे और माँ बाप सब घबराएंगे!
बच्चे एक दूसरे से कतराएंगे, आपस में दूरी बनाएंगे, अपनी बात शेयर  नहीं कर पाएंगे !
बच्चों के मानसिक विकास पर कितना असर पड़ेगा! जिन दोस्तों से मिलने को स्कूल जाते थे अब उनसे ही उनको दूरी बनानी पड़ेगी !
सोच कर ही सिहरन और  दुख हो रहा है, हमारे बच्चे क्या हमारे गुनाहों की सजा भुगत रहे हैं, और अभी  भी हम नहीं सम्भले तो पता नहीं उनको क्या-क्या भुगतना पड़ेगा !

Thursday, 7 May 2020

बस थोड़ा सा जी लू मैं

छोड़ आई,,, तेरे लिए, सब कुछ छोड़ आई,,  मेरा घर, मेरी सखियां,  मेरी गलियां, मेरी खुशियां, मेरी यादें, यहाँ तक मेरी पहचान भी !
 निभाने लगी,  आते ही तेरी सब जिम्मेदारी, कस ली कमर एक नई शुरुआत कि, नये आगाज की, भूल गई, कभी मुझे भी भूख लगती है, भूल गई कभी मुझे भी दर्द होता है,  भूल गई,, है कुछ मेरे  भी अरमान !
अब तो बस खुद को सबके  बाद में रख दिया, और सब की खुशी में ही अपनी खुशी देखने लगी !

पर कभी-कभी तो मैं भी जीना चाहती हूं, भूलना चाहती हूं जिम्मेदारी,  रहना चाहती हूं आजाद,  लेना चाहती हूं खुलकर सांस,,,,  क्या हुआ गर दूध गैस पर उबल रहा है,  क्या हुआ जो कपड़े बारिश में भीग रहे हैं,  क्या हुआ जो आज बच्चों ने खाने की जगह मैगी खा ली,  क्या हुआ जो शाम की चाय मैंने नहीं बनाई, क्या हुआ आज  सबसे पहले मैं खाना खाने बैठ गई, क्या हुआ जो दो  पैसे नहीं बचा कर मैं अपने लिए कुछ ले आई,  क्या हुआ जो फुर्सत के दो पल जी लिए !
क्यों,, क्या मैं नहीं हूं इंसान,  क्या नहीं है मेरे कोई अरमान,  नहीं है मेरी कोई खुशी, नहीं है मेरे कोई अहसास !
अगर है,,  तो जी लेने दो,,  बस कुछ पल,,, सिर्फ और सिर्फ मेरे लिए !