Jindagi ek unsuljhi paheli

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Friday, 18 December 2020

और सुना, कुछ नहीं, तू बता

 आजकल वो रहते हैँ थोड़ा व्यस्त,

काम से शायद हो गए कुछ ज्यादा ही पस्त !


पहले भी तो घंटो हम बतियाते थे,

कुछ तुम्हारी सुनते और कुछ अपनी बतिया सुनाते थे

!

पर आजकल बातें होती बहुत ही कम,

हां, हूँ से ज्यादा नहीं  या फिर उससे भी कम!


डरते डरते मैं फ़ोन हूँ करती,

हेलो सुनते ही थोड़ा सा फिर डरती!


सामने से आती एक आवाज,

क्या हुआ हैँ कुछ काम!


मैं बोलती, था तो सही पर नहीं हैँ अब ध्यान,

चलो मैं रखती हूँ फिर फ़ोन,

सुनते ही धर लेती मैं इन होंठो पर फिर से  मौन!!


फिर मन में एक ख्याल आता, क्या यू ही नहीं कर सकती मैं तुमसे अब बात,

और सुना, तू बता, कुछ नहीं, तू ही सुना,

ये  सब सुने हो गया एक जमाना!

होने को तो हैँ बहुत सी दास्ता,

पर शायद तुम्हारे पास नहीं हैँ वक्त,सुनने को अब मेरा कोई भी फसाना!

Friday, 4 December 2020

एक पाती बेटी के भावी जीवन साथी के नाम 🙏🙏🙏

 उस माँ की भावना जो कुछ दिन में अपनी बेटी...।अपने जिगर के टुकड़े को किसी और के हाथ सौंपने जा रही है, उसके दिल की हालत को शब्दों में ढालने की एक छोटी सी कोशिश 🙏🙏🙏🙏🙏



प्रिय बेटे....हमेशा खूब खुश रहो,आज मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूं, एक बेटी की मां की मनोव्यथा जिसे मैं पल पल महसूस कर रही हूं,शायद मैं बोलकर तुम्हें कभी नहीं कह पाऊंगी,पर आज तुम्हें लिखकर बताना चाहती हूं, उम्मीद करती हूं मैं मेरे मन की भावना तुम तक पहुंचा सकूं!


बेटा आज मैं तुम्हें मेरी बेटी नहीं... अपने कलेजे का टुकड़ा निकाल कर दे रही हूं, जब से उसकी उम्र शादी की हुई, मैं उसके लिए उपयुक्त वर ढूंढ रही थी,जिसके हाथों में उसका हाथ देकर मैं निश्चित हो जाऊं,वैसे सच कहूं मुझे मेरी बेटी कभी बोझ लगी ही नहीं, हां दुनिया को जरूर खटकता था कि अब इसकी शादी कर दो पर  मुझे तो कभी मेरी बेटी बोझ नहीं लगी, पर प्रकृति का नियम है जिसे निभाना तो पड़ेगा ही!


जब मैंने पहली बार तुम्हें देखा तो लगा कि आज तक मेरी बेटी की जिंदगी में जो मेरा रोल था अब वह तुम्हारा होने जा रहा है,जैसे मैं उसकी खुशी में खुश होती हूँ, दुख में दुखी होती हूँ,उसके आंसू बहते तो आंखें मेरी नम हो जाती हैँ, मैं दुआ करती हूँ काश वह सब तुम्हारे साथ हो,बस तुम मेरी बेटी की जिंदगी में मेरी जगह ले लेना और मुझे कुछ नहीं चाहिए,अगर तुम मेरी बेटी की जिंदगी में मेरी जगह ले लोगे तो शायद में निश्चित हो जाऊंगी! हो सकता है वो  कभी कुछ गलत करें,उससे कुछ भूल हो जाए तो उसको प्यार से,कभी-कभी थोड़ी झिड़की से समझा देना,अकेले में चाहे उससे कितना भी लड़ लेना पर दुनिया के सामने उसका सुरक्षा कवच बन जाना,उसकी हिम्मत बन जाना, जब कभी लोगों की भीड़ में तन्हा हो जाए तो उसका साथी बन जाना,उसके आंसू बहाने को अपना कंधा दे देना!


क्या पता कभी वो  उदास हो,दुखी हो,फिर भी मुझे खुश करने को कह दे कि मैं ठीक हूं, खुश हूं तो अगर मैं फोन पर उसकी आंखों को ना पढ सकूँ तो तुम पढ़ कर उसे संभाल लेना, और उसके झूठ को सच बना देना!

बेटा अब उसकी जिंदगी तुम से जुड़ गई उसको अपनी जिंदगी बना लेना, मैं मेरी दिल की धड़कन तुम्हें दे रही हूं, इस धड़कन को खुलकर धड़कने देना बस मेरा तुमसे यही विनम्र निवेदन हैँ 🙏🙏🙏🙏

Monday, 30 November 2020

मासी माँ की ही जैसी

 मासी माँ तो नहीं होती,

पर माँ से कम भी नहीं  होती!

याद हैँ... कल की ही वो  बात ,

जब हो जाती तू मम्मी से नाराज,

तो सबसे पहले आती मेरे ही पास,

करती ढेरो उनकी शिकायते, लेके बैठ जाती उनके दिए उलहाने,

मैं चुपचाप तुझको सुनती, प्यार से तुझे समझाती,

यू ही नहीं डांटती वो, तेरे भले के लिए ही कहती हैँ वो!

फिर तू नहीं करती मुझसे भी बात,

जब देखो लेती मम्मी का पक्ष,

क्यों नहीं सुनती मुझको निष्पक्ष!

फिर वो अगले ही पल तेरा मान भी जाना,

सब कुछ भूल बेवजह खिलखिलाकर मुस्कुराना!

सच छोटी सी ही समझा तुझे, कभी सोचा ही नहीं,

हो जाएगी इक दिन इतनी बड़ी,भेजना पड़ेगा अपने से इतना दूर!

सच बताऊ तो दिल कपकपा रहा हैँ, आँखे डबडबा रही हैँ,

कैसे जी पाऊँगी तेरे बिन,

दिला पाऊँगी इस दिल को यकीन!

पर हूँ तेरे लिए बहुत ही खुश,

तेरी नयी दुनिया बन जाये तेरे सपनो की दुनिया,

जहा पूरा हो तेरा हर इक ख्वाब,

इन आँखों  में बस ख्वाब और ख़ुशी हो,

आँसू हो तो बस ख़ुशी के हो!

दिल से दुआ हैँ ये मेरी तुझको,

तू जहा भी जाये, तेरे इन कदमो में फूलो की बरसात हो!

Friday, 20 November 2020

माँ तेरा घर अब डिज़ाइनर हो गया हैँ हैँ

 माँ तू अब मॉडर्न हो गयी हैँ,

घर भी तेरा डिज़ाइनर बन गया हैँ !

मॉडुलर किचन से लेकर चिमनी अब लगी, 

रसोई भी  तेरी सिस्टेमेटिक हुई!

कूलर की जगह A. C. ने लिए,

दरी की जगह अब सोफ़े हैँ बिछे !

सब कुछ आधुनिक हो गया हैँ, 

हर जगह सुविधा जनक बन गयी हैँ !

पर जाने क्यों मुझे तो याद आती तेरी वही रसोई,

जहा तू प्यार से बनाती, प्यार से परोसती,

ज़मीन पर बैठ कर जो खाने का स्वाद था आता, 

अब डाइनिंग टेबल के मैनर्स में छिप सा गया हैँ!

मेरे पसीने को तेरे साड़ी के पल्लू से पोंछती, 

अब तेरे  सलवार कुर्ते में वो  पल्लू भी गायब हुआ हैँ !

A.C.में बंद कमरों की वो ठंडक में कहा वो सुकून  हैँ आता,

जो खुले कमरों में तेरे कूलर से था मिलता, 

कही पानी ख़तम तो नहीं हुआ, बार बार कूलर में झाकना !


एक दरवाजे के बंद होते ही तेरे घर में अब सिमटना, 

पहले सारे दरवाजे खुले ही रहते, 

चौक, जाल  और मुंडेरा पर दिन भर हमारा उछलना और कूदना !

हर कमरे में बेड अब बिछे हुए हैँ, 

पर ज़मीन पर गद्दो को डाल कर जो नींद थी आती, 

बेड पर वो करवटो में ही जाती !

मना वो घर अब पुराना हो गया था, तेरी तरह ही जर्ज़र हो चुका था, 

पर मुझे तो तेरा पुराना घर ही था भाता, 

डिज़ाइनर घर में वो सुकून ना आता !


Tuesday, 13 October 2020

परवरिश एक माँ की

 कुछ दिन से मन में उथल-पुथल चल रही है, एक  खबर सुनने और पढ़ने को मिली, जबसे सैफ अली खान की बेटी सारा ड्रग्स केस में फसी, सैफ  अमृता  से बहुत गुस्सा है और उसने तो गुस्से में अमृता की परवरिश तक पर ही सवाल उठा  दिए !

पता नहीं यह खबर सच है या नहीं, पर सैफ  अमृता की  परवरिश पर सवाल उठा रहा है, पर वह उस समय कहां था जब उसके बच्चे बड़े हो रहे थे,  जब उनको अपने पापा की जरूरत थी!

 एक इंटरव्यू में सैफ अली खान ने बोला, सारा और इब्राहिम मुझसे बस एक फोन कॉल की दूरी पर है, तो क्या जरूरी है बच्चे जब किसी समस्या में होंगे तो तुमको फोन करेंगे, नहीं बच्चों के मन में बहुत कुछ चल रहा होता है, विशेषकर किशोरावस्था में,  जो वह कभी अपने पेरेंट्स से  शेयर नहीं करते, पेरेंट्स को उनके मन से खोदकर निकालना पड़ता है, पर क्या सैफ  उनके पास थे अपने बच्चों का मन पढ़ने के लिए, नहीं ना, वह तो किसी और से शादी करके अपना अलग घर बसा चुके थे, फिर कैसे  अमृता सिंह पर आरोप लगाया परवरिश का, उसको यह अधिकार भी किसने दिया !

श्वेता तिवारी की बेटी पलक जिसने अभी हाल ही में अपना18 वा  जन्मदिन मनाया, उसके पापा मतलब श्वेता तिवारी के पहले पति ने उसे विश किया !

श्वेता ने दो  शादी करी, पर दोनों ही सफल नहीं हुई, और दोनों बच्चों को अपने साथ लेकर अलग रह रही है !

श्वेता तिवारी ने भले दो शादी कर ली, पर  शादी टूटने पर भी अपने बच्चों को नहीं छोड़ा, आज उसके पहले दोनों  पति भले  शादी करके अलग घर बसा ले,  पर वह कभी अपनी पहली पत्नी के बच्चों को अपने पास रखने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगे, यह तो एक  माँ ही है जो अकेले दम पर अपने बच्चों को हर हालत में पाल  सकती है, फिर चाहे वह अमीर हो या गरीब !

पर एक बाप चाहे वह कितना ही अमीर हो, अकेले पालने  की हिम्मत नहीं कर सकता,  हां कुछ अपवाद हर जगह होते हैं!

 इसलिए कभी एक मां की परवरिश पर आरोप मत लगाना, वह अपने बच्चों के लिए किसी से भी लड़ सकती हैँ !

Thursday, 8 October 2020

भरोसा

 अभी-अभी दरवाजे पर धोबन  आयी,  उसने अपने आप कपड़े कमरे में रख दिए और मैंने भी उसे पैसे दे दिए !

 ना मैंने कपडे गिने,  ना उसने पैसे गिने,  दोनों ही कोविड के रूल्स  फॉलो करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रख रहे थे , अचानक मेरे मन में आया कि पहले जब वो आती  थी तो कितनी झिकझिक होती थी, उसके सामने एक एक कपड़ा गिनती, उसका भी पैसों के लिए किच किच  करना,  मैं कहती देख कैसे कपड़े प्रेस किये , पर अब बिना कुछ बोले हम दोनों अपना-अपना काम  रहे हैं हैँ !

पर ताजूब ना मुझे कभी कोई शिकायत आई,  कपड़े हमेशा  पूरे होते, सही से प्रेस होते,  ना कभी उसने पैसों के लिए ही कुछ कहा !


क्यूंकि इस कोरोना  ने भले हमसे सब कुछ छीन लिया, हमारी खुशियां,  हमारा घूमना फिरना, हमारी आजादी, पर अब लोग इस भरोसे के भरोसे ही जी रहे हैं,  उन्हें पता है कि भगवान ने हमें इतना बड़ा आईना दिखा दिया अगर अब भी एक दूसरे को धोखा देंगे तो फिर जी कैसे पाएंगे, एक ये  विश्वास और भरोसा ही बचा है जो हमें  हिम्मत दे रहा है !

आप लोग भी lockdown में  किराने का सामान लाए होंगे, बस किराने वाले को पर्ची  दे दी होगी, उसने जो सामान दिया होगा.. बिना चेक करें उसे घर ले आए होंगे, मुझे नहीं लगता बाद में  किसी को कोई शिकायत हुई  होगी की सामान कम या ज्यादा हैँ या  खराब निकला और किराने वाले को भी पेमेंट पेटीएम कर दिया होगा या कैश दिया होगा, कोई बहस नहीं, कोई बार्गेनिंग नहीं !


शुकर हैँ इस कोरोना ने  हमें अपनों से दूर कर दिया, पर  गैरों पर भरोसा करना सिखा  दिया !

Thursday, 1 October 2020

नज़रिया

 पेपर में एक वाक्या पढ़ कर  दिल को   छू गया I


एक लड़की ने अपना  संस्मरण सुनाया कि जब पहली बार उसने आलू का परांठा बनाया तो तवे  पर डालते ही उस परांठे के  20 टुकड़े हो गए,लड़की के पापा बोले, 

'वाह आज तो परांठे के टुकड़े भी नहीं करने पड़ेंगे ', और उसकी मम्मी की आंखें नम हो गई I


 होने  को बहुत मामूली सी बात थी, पर यह कहीं ना कहीं मेरे दिल को छू गई I

अपने पराठे के टुकड़े देखकर वैसे ही उस लड़की का दिल टूट गया  होगा,  पर अपने पापा की बात सुनकर उसका टूटा हुआ दिल फिर से जुड़ गया होगा और उसने सोच लिया होगा कि अब दोबारा अच्छे से कोशिश करेगी और बिल्कुल सही पराठा बनाएंगी, क्यूंकि उसको विश्वास था की अगर वो गलती करेगी तो उसके अपने उसके साथ होंगे,बजाय उसका मज़ाक बनाने के उसकी गलती सुधारने में साथ देंगे I


पर अगर उस परांठे के टुकड़े देखकर उसके पापा उस पर हँसते,  उसकी मम्मी उसको डांटती   तो पहले ही उसका दिल जो अपने पराठे की दशा देख कर  टूटा था, पापा मम्मी के तानों से शायद और टूट जाता  और शायद ना तो वो  दोबारा कोशिश करती  या फिर कुकिंग से ही जी  चुराती, क्यूंकि उसको डर होता की उसकी गलती पर सब हंसेंगे I

हम जानते हैं कि कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता, कहीं ना कहीं कोई न कोई गलती करता है तो यह हमारे पर है कि हम हमारा नजरिया कैसा रखते हैं, अगर हम किसी की गलती का मज़ाक बनातेहैँ,  उसका उपहास बनाते हैं या फिर उस गलती को सकारात्मक तरीके से लेकर उसको गलती सुधारने का मौका देते हैं I

 यहां मैं एक बात और कहना चाहूंगी कि जिस बेटी  की गलती पर मां-बाप ने सकारात्मक नजरिया रखा,  अगर वैसा ही नजरिया अपनी बहू के लिए रखेंगे तो किसी लड़की  को कभी पराये पन का एहसास नहीं होगा और वह मन से सब को अपना बना लेगी I

Monday, 17 August 2020

एक माँ का अपनी बेटी से वादा 😍😍😍😍

 कैसे भूल सकती मैं तेरी वो पहली मुस्कान,

 जिस  पर कुर्बान थे, मेरे ये  दोनों जहान !

याद हैँ तेरी वो मीठी सी हसीं, 

जिसमे मेरी सारी दुनिया थी बसी !

जब तू चलने लगी डगमग डगमग नन्हे इन कदमो से, 

हटा दी मैंने तेरी राह की सारी अडचन, 

तुझे संभल कर पग भरने के लिए !

तेरी वो मुँह से निकलती जरा सी भी आह, 

छीन लेती मेरा चैन, और  लूट लेती  जैसे   मेरा सारा जहाँ !


जिस चीज पर भी तू रख देती हाथ, 

जब तक ना दे दू तुझे, नहीं छोड़ती तेरा वो साथ !

फिर आज जब तू बड़ी होने लगी, 

और मुझसे कही ज्यादा इस दुनिया को तेरी विदाई की चिंता होने लगी !

पर ये मेरा वादा हैँ तुझसे, ढूंढूंगी तेरे लिए कोई ऐसा वर, 

जो तेरे सारे दुख, मुसीबत, एक चुटकी में लेगा  बस हर !

एक बार नहीं, सौ बार मैं सोचूंगी, 

ऐसे ही नहीं बस तेरा हाथ किसी को भी मैं सौपूंगी !

बचपन में तेरी गुड़िया के लिए भी जब ढूंढ़ती थी मैं गुड्डा, 

तेरे सुकून के लिए ठोक बजा कर उसे भी मैं परखती !

फिर अब तो हैँ मेरी इस गुड़िया की बारी, 😘😘

जिस पर जाऊ मैं बलिहारी, 🤗🤗

जिसके लिए मैं सारी दुनिया ही हारी, 

ले लू उसकी सौ सौ बलाये, और जाऊ मैं वारी, 

बस अब कर ली तुझे तेरे सपनो के राजकुमार से मिलवाने की तैयारी !👫

Wednesday, 12 August 2020

बेटी ही क्यों?

 सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक निर्णय में कहा, 'बेटियां हमेशा प्यारी बेटियां होती हैं,  लेकिन बेटों की नीयत  और व्यवहार विवाह के बाद बदलने लगते हैं'!

सोलह आने सच है यह बात,  एक बेटी  अपने मां बाप को कभी दुखी नहीं देख सकती,  शादी के बाद तो वो  मन से उनके और करीब आ जाती है, और हमेशा उनकी फिक्र में रहती है, कोई उनके मां-बाप को बुरा भला कहे,  वह न कभी सुन सकती और  ना ही  सहन कर पाती !

पर फिर बेटे क्यों ऐसे हो जाते हैं,  जो बेटे शादी से पहले अपने मां बाप के प्यारे होते हैं,  जिनको अपने मां-बाप इतने प्यारे होते हैं, यकायक  शादी  होते ही वह उनकी आंखों में खटकने लगते हैं,  उनको उनकी जरा सी भी टोकाटाकी  बर्दाश्त नहीं होती, वह अपने निर्णय,  अपनी  स्वतंत्र जिंदगी जीना चाहते हैं !

पर इधर बेटी  अपनी छोटी से छोटी बात, अपने सारे निर्णय अपने मां-बाप को बताती है !

पर यहां मै  एक बात कहना चाहूंगी, एक बेटी अपने मां-बाप से सब शेयर करती है,  पर एक बहू कभी नहीं,  यही बेटी जब  बहू बनती है, तो  उसको अपनी आजादी,अपने  अधिकार,  अपना घर सब याद आ जाता है,  पर जब वह बेटी होती है तो अपने मां बाप की बहू को सारे उसके कर्तव्य याद दिलाती है!

शायद यह सब मानते होंगे, आदमी लोग घर गृहस्थी की बातों में ज्यादा रुचि नहीं रखते, वो तो वो  ही समझते हैं जो उनको बताया जाता है, जब उनकी पत्नी  दिन रात उनके मां-बाप के खिलाफ  कान भरती  है तो वो  उसकी बातों में तुरंत ही आ जाते हैं, क्योंकि वह बातों की गहराई में जाते ही नहीं है,  यह नहीं समझते कि जो माँ बाप शादी से पहले उसके परम हितैषी थे,  अब दुश्मन कैसे हो गए! 

अगर हर बेटी अपने सास-ससुर से वही रिश्ता शेयर करें जो वह अपने मां-बाप से करती है तो शायद कोर्ट भी अपने  निर्णय पर दोबारा सोचेगा,  फिर शायद उसको यही कहना पड़े की बेटियों की तरह बेटे  भी पूरी जिंदगी अपने मां-बाप के प्यारे बेटे ही रहते हैं!

पर यहां मैं आपको एक बात और कहना चाहूंगी कि जो मां बाप अपने बेटी की गलत बात को भी सही कहते हैं,  गर वह बहू की भी हर गलती को नजरअंदाज करेंगे तो शायद चीजें थोड़ी और आसान हो जाएंगी!

 वैसे भी कहते हैं ना की ताली कभी भी एक हाथ से नहीं बजती है !

अगर आप इस विषय पर अपनी राय रखना चाहे तो मुझे बहुत बहुत ख़ुशी होगी !🙏🙏🙏

Thursday, 6 August 2020

Happy bday✍️✍️✍️✍️✍️

हेलो कैसे हैं आप सब, क्या हुआ🤔🤔🤔,  भूल गए आप सब मुझे,  वैसे  आपकी कोई गलती नहीं है, मैं आज  यहां आई बहुत दिन बाद हू !

पर आज  कारण था मेरे यहां पर आने का, आज किसी का जन्मदिन है,  तो मैं उसका जन्मदिन आप सबके साथ मनाने आई हू, क्यूंकि  आप लोग के प्रोत्साहन के बिना उसका जन्म संभव भी नहीं था !

आज मेरी कलम✍️✍️✍️✍️, मेरी लेखनी का जन्मदिन है,  आज ही के दिन मैंने अपना पहला ब्लॉग पोस्ट किया, 'मां की परेशानी',  और सच बताऊं तो आप सब ने मुझे बहुत सम्मान दिया,  मेरा प्रोत्साहन करके मुझ में नई ऊर्जा जगा दी!

 वैसे इसका श्रेय किसी और को भी जाता है, मैंने मेरी पोस्ट, ' मां की परेशानी ', सबसे पहले व्हाट्सएप स्टेटस पर डरते डरते लगायी, मैं  बहुत घबरा गई, कही कोई हसेगा तो नहीं,  पर किसी का कमेंट आया 'माशाअल्लाह', 

सच उस एक कमेंट ने मुझमे एक  जोश भर दिया,  मुझे हिम्मत दी  और मैंने अपना ब्लॉग बनाया, इसलिए आप सबसे एक विनती हैँ🙏🙏🙏, अगर आपको कुछ अच्छा  लगता है, तो प्रशंसा करने में झिझके  नहीं,  आपकी  एक छोटी सी  प्रशंसा किसी के जीवन को नई दिशा दे सकती है!

 वैसे मैंने उस पर  एक ब्लॉग भी लिख रखा है, 'आर्ट ऑफ अप्प्रेसिअशन '!

आजकल में एक ऐप प्रतिलिपि पर लिखा रही हू, वहां भी मेरे कई दोस्त बन गए, (पर चिंता मत करिये आप सब को नहीं भूली मैं 🤗🤗🤗🤗 ), वहां  मैं कई बार नंबर वन पर भी आ चुकी,  कभी-कभी तो एक ही समय में 3 स्थान पर नंबर वन 💃💃💃💃!

वहां कई प्रतियोगिताएं भी होती हैं,  जिसमे मुझे  इनाम भी मिला!

 आज मैं आप सबको धन्यवाद देने आई हू,  और आप सब  से कुछ मांगना चाहती  हू, मेरे इस सफर में   हमेशा मेरे साथ रहना,  क्योंकि अपनों का साथ बहुत हिम्मत देता है!

 थैंक्यू ऑल ऑफ यु वंस अगेन🙏🙏🙏, and  हैप्पी बर्थडे मेरी कलम को✍️✍️✍️,  मेरी लेखनी को !

चलिए मैं चलती हूं, कभी  कुछ दिल  की बात आप तक पहुंचानी  होगी तो जरूर मिलूंगी,  यहीं पर,  तब तक अपना ध्यान रखिए,  मास्क लगाइए,  सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करिये, बाय 👋👋👋👋🤗🤗🤗🤗

Saturday, 30 May 2020

स्कूल चले हम 🤔🤔?

इस कोरोना  ने हमसे  कितना कुछ छीन लिया,  हमारी खुशी, हमारी आजादी, हमारे रिश्ते, हमारी मुस्कुराहट, और अब.... अब वह छिन रहा है, स्कूल का वह माहौल, जो पता नहीं कभी वापस आएगा या नहीं!
 जब से समाचार आया है कि नई गाइडलाइंस आई है जिसमें हर  स्टूडेंट्स को अल्टरनेट डेज बुलाएंगे,  6 फीट की दूरी पर बच्चों को बैठना होगा,  वह आपस में टिफ़िन शेयर  नहीं कर पाएंगे,  मतलब बच्चे क्या स्कूल केवल पढ़ने के लिए जाते थे,  नहीं... वह स्कूल जाते थे अपने दोस्तों से मिलने,  उनसे अपनी बातें करने, अपना दिल हल्का करने, दूसरे का टिफिन खाने या चुराने, एक दूसरे की टांग खींचने !
स्कूल में तो बच्चों की खिलखिलाहट और शैतानियां गूंजती रहती थी !
अब वो स्कूल की इमारत शक की, डर  की इमारत बन जाएगी, जहाँ जाने से बच्चे और माँ बाप सब घबराएंगे!
बच्चे एक दूसरे से कतराएंगे, आपस में दूरी बनाएंगे, अपनी बात शेयर  नहीं कर पाएंगे !
बच्चों के मानसिक विकास पर कितना असर पड़ेगा! जिन दोस्तों से मिलने को स्कूल जाते थे अब उनसे ही उनको दूरी बनानी पड़ेगी !
सोच कर ही सिहरन और  दुख हो रहा है, हमारे बच्चे क्या हमारे गुनाहों की सजा भुगत रहे हैं, और अभी  भी हम नहीं सम्भले तो पता नहीं उनको क्या-क्या भुगतना पड़ेगा !

Thursday, 7 May 2020

बस थोड़ा सा जी लू मैं

छोड़ आई,,, तेरे लिए, सब कुछ छोड़ आई,,  मेरा घर, मेरी सखियां,  मेरी गलियां, मेरी खुशियां, मेरी यादें, यहाँ तक मेरी पहचान भी !
 निभाने लगी,  आते ही तेरी सब जिम्मेदारी, कस ली कमर एक नई शुरुआत कि, नये आगाज की, भूल गई, कभी मुझे भी भूख लगती है, भूल गई कभी मुझे भी दर्द होता है,  भूल गई,, है कुछ मेरे  भी अरमान !
अब तो बस खुद को सबके  बाद में रख दिया, और सब की खुशी में ही अपनी खुशी देखने लगी !

पर कभी-कभी तो मैं भी जीना चाहती हूं, भूलना चाहती हूं जिम्मेदारी,  रहना चाहती हूं आजाद,  लेना चाहती हूं खुलकर सांस,,,,  क्या हुआ गर दूध गैस पर उबल रहा है,  क्या हुआ जो कपड़े बारिश में भीग रहे हैं,  क्या हुआ जो आज बच्चों ने खाने की जगह मैगी खा ली,  क्या हुआ जो शाम की चाय मैंने नहीं बनाई, क्या हुआ आज  सबसे पहले मैं खाना खाने बैठ गई, क्या हुआ जो दो  पैसे नहीं बचा कर मैं अपने लिए कुछ ले आई,  क्या हुआ जो फुर्सत के दो पल जी लिए !
क्यों,, क्या मैं नहीं हूं इंसान,  क्या नहीं है मेरे कोई अरमान,  नहीं है मेरी कोई खुशी, नहीं है मेरे कोई अहसास !
अगर है,,  तो जी लेने दो,,  बस कुछ पल,,, सिर्फ और सिर्फ मेरे लिए !

Tuesday, 28 April 2020

Lockdown में हर घर की कहानी

बंद, बंद, इस lockdown में सब कुछ बंद,  होटल, रेस्टोरेंट भी बंद, क्या बच्चे,  क्या बड़े, जो वीक में 4 दिन बाहर खाना खाते थे,  2 दिन घर में, अब सातों दिन कैसे खा पाएंगे घर का खाना😱😱,  होटल बंद तो क्या, यह जुबान और चंचल मन,  यह तो दौड़ता रहता है, एक तो पहले से ही बाई नहीं आती, ऊपर से सब लोग घर में,, बेचारी औरते पूरी तरह से व्यस्त  और पस्त है,  कभी रोटी सब्जी बना दो तो  बच्चों का मुंह बन जाता है, तुरई  देख कर पतिदेव भी मुंह बनाते हैं,  पर बेचारे डर के मारे  चुपचाप खा लेते हैं!
चलो जी यूट्यूब देख कर ही कुछ बनाया जाए,  और नहीं भी बनाए तो क्या करें, जब लोगों के स्टेटस और एफबी पर नई नई डिशेस के फोटो आते  हैं तो सबके मुंह बन जाते हैं,,  उनके घर में भी तो बाई  नहीं है, पर वह भी तो बना रही है, बहुत बार बहाना बनाया,  सामान लिमिटेड है,  सोच समझ कर खर्च करेंगे,  पर नहीं,  दूसरे  के घर में भी  तो बन रहा है,वह भी तो सामान लाते हैं, कोई  उगाते थोड़े  ना है!कभी कभी बच्चों और पतिदेव को कीड़ा काटता, तुम हटो आज हम बनाएंगे, डिश क्या बनती, रसोई पूरी फैल जाती, जिसको देख कर श्रीमती जी फैल जाती,ऊपर से क्रेडिट, आज तुमको आराम करवाया, खाना हमने बनाया !
बेचारी औरतें नमकीन बनाती तो मीठे की फरमाइश, जलेबी बनाती तो कभी वो बन जाता  हलवा,,, पर क्या करें जी होटल की कमी तो यही पूरी करनी है !
खाना खाने से पहले ही एक आवाज आती है,,, रुको अभी फोटो तो लेने दो,  अपडेट करना है, फ्रेंड्स ओर रिलेटिव्स भी तो देखें, यह क्या अभी तक किसी ने कमेंट नहीं किया, मैंने तो उसकी डिश को झट से लाइक कर दिया था, लो जी एक नई टेंशन और,, और इधर घर के सदस्य बेचारे इंतजार में बैठे हैं कि हमको तो खाने दो, लाइक तो हम ही कर देंगे !
तो ऐसा है आजकल सबके घरों में यही हाल,  कहीं ज्यादा, कहीं कम, अब तो  सबकी एक ही भगवान से इच्छा है, होटल खुले, आर्डर करें, आहा कितना मजा आता है आराम से बैठकर आर्डर करने में !

Monday, 20 April 2020

बाई, आज फिर से तुम्हारी याद आयी है

बाई, आज फिर से तुम्हारी याद आयी है

झाड़ू, पोछे को कर, करके,
छूटी रुलाई है,
आज फिर से बाई, तुम्हारी याद आयी है !

सिंक में रखे ढेर बर्तनो ,
को देख कर दे रहे, दुहाई है,
आज फिर से बाई तुम्हारी याद आयी है !

पडा हुआ  गंदे  कपड़ो का,  ढेर है,
कर रहे डंडे से चादरों की सुताई है,
आज फिर से बाई तुम्हारी याद आयी है !

बैठे है थके हारे , तन्हाई में,
जी रहे है, तेरी यादो की जुदाई में,
आज फिर से बाई तुम्हारी याद आयी है !

Wednesday, 1 April 2020

जिंदगी का सफरनामा

चले थे बहुत कुछ की चाह में,
आज सब कुछ लुटा दिया,

चले थे सबको अपना बनाने,
आज वक्त ने तन्हा बना दिया,

चले थे दुनिया को अपनी मुट्ठी में करने,
आज  उसी ने  हमें घुटनों पर ला दिया,

 उड़ना चाहते थे आसमानों में,
 आज पिंजरे का कैदी बना दिया,

ये जिंदगी का  कैसा सफरनामा है,
 जहां जिंदगी भर भागते रहे,  भागते रहे

और  आज  जिंदगी ने एक ऐसे मोड़ पर ला दिया,
जहां कहीं नहीं जाना,  कहीं नहीं भागना,
 एक ना  ख़तम होने वाला, अनचाहा सा ठहराव ला  दिया!

Monday, 16 March 2020

आजकल माहौल कुछ बदला बदला सा है 🤔🤔😉

आजकल माहौल कुछ बदला बदला सा है 🤔🤔😉

घर में सुबह कोई जल्दी नहीं बच्चों के स्कूल जाने की,
 हस्बैंड जी भी कर रहे वर्क फ्रॉम होम हैं,
 बेचारी गृहिणियों को नहीं मिल रहे  फुर्सत के दो पल हैं,
नहीं लड़ा पा रही सहेलियों से गप्पे,
नहीं बिता पा रही , सुकून और आराम के दो पल है,
जो बच्चे पापा से मिलते थे वीकेंड पर,
आजकल चौबीसो घंटे साथ है,
बाजार में नहीं कोई भीड़ भाड़ है,
प्रदूषण से नहीं कोई बेजार है,
लोग अब दूर  से ही कर रहे राम राम श्याम हैं,
सार्क  देश भी  एक होकर कर रहे विचार हैं,
जिसमे  भारत और पाकिस्तान हैं,
 आतंकी,  चोर, डाकू जिनको नहीं लगता किसी से भी डर,
वो भी आजकल कोरोना  से बेजार हैं,
 मासूम जानवरों की नहीं चढ़ रही बलि है,
सब शाकाहार को कर रहे नमन हैं,
 तो सच में आजकल... माहौल कुछ बदला-बदला सा है !😃😃😅😅😉😉

Thursday, 5 March 2020

एक नयी आशा 🤗🤗

एक नयी आशा 🤗🤗
थक गई वह अपनी जिंदगी से... वही बोरिंग रूटीन... रोज सुबह उठो...  बच्चों को स्कूल भेजो... खाना बनाओ... घर के काम करो! लाइफ में कोई एक्साइटमेंट नहीं बचा... कोई होप ... कोई आशा नहीं... यही सोच सोच कर सुमिता सुबह से चिड़चिड़ी हो रही थी... किसी काम में भी उसका मन नहीं लग रहा था... सब काम बेमन से कर रही थी !
तभी डोर बेल बजी... गेट खोला तो कामवाली बाई थी... आते ही वह अपने काम में लग गई... बर्तन साफ करते करते वह कुछ गुनगुना रही थी और तल्लीनता से अपने काम में व्यस्त थी! सुमिता  ने कहा... आज तो बड़ी खुश लग रही है... क्या बात है!
 मेम साहब आज मेरे आदमी ने मुझसे वादा किया है कि वह  अब कभी शराब के हाथ नहीं लगाएगा... और कुछ काम भी करेगा... बस इसी  आशा में मैं खुश हूं!
 अरे तो इसमें नया क्या है.. वो तो हर  थोड़े दिन में तुझसे वादा करता है... पर फिर वही ढाक के तीन पात और शराब पीकर कितना मारता है तुझको... कैसे तू उस पर विश्वास कर लेती है.. तू परेशान नहीं होती  रोज रोज के झूठे वादों से...और वो ही रूटीन  जिंदगी के साथ !
बाई बोली.. मेम साहब मुझे पता है मेरा आदमी कई बार मुझसे वादा कर चुका और तोड़  चुका.. पर वो भी हर  बार इसी आशा के साथ वादा करता है की अब इन बुरी आदतों को छोड़ देगा और मैं भी इसी  आशा के साथ उसके  ऊपर भरोसा करती हूं कि आज नहीं तो कल वो  सुधर जाएगा !इसी आशा में तो हम जिंदा हैं.. हमारी गृहस्ती की गाड़ी चल रही है... बिना आशा के कैसी जिंदगी...जिंदगी में कोई ना  कोई आशा रहनी चाहिए तभी जिंदगी हसीं ख़ुशी चलती है !कह कर बाई  वापस कुछ गुनगुनाते हुए अपने काम में लग गई! और उधर सुमिता सोच रही थी की  जब ये अनपढ़, मजबूर इतनी समझदारी की बातें कर रही है कि आशा से हम जिंदा हैं... हमारे जीवन में उत्साह है तो फिर मैं क्यों नहीं समझ पा रही... मेरे पास तो आशा के बहुत से कारण है... मेरे बच्चों का  सुनहरा भविष्य... मेरे पति की तरक्की और इन सब की खुशी के लिए ही तो मैं जी रही हूं... यही तो मेरी आशा की किरण है! इतना सोचते से ही सुमिता एक नए उत्साह से भर गई  और वापस अपने रोज के  रूटीन को एक नयी  आशा और नये उत्साह के साथ करने लगी..साथ ही साथ वो कुछ गुनगुना भी रही थी !🤗🤗

Friday, 28 February 2020

देखो इंसानियत जल रही है 😔😔

देखो इंसानियत जल रही है..
यहाँ अमित मरा तो कही फिरदौस भी मरा है..
कही राधा विधवा हुई तो उधर सलमा भी बेवा हुई है...
कही चिराग अपने पापा को ढूंढ रहा है तो  सलीम भी अपने अब्बू को याद कर रो रहा है
गर रीमा अपने भाई की कलाई पर राखी नहीं बांध पायेगी तो सायरा भी ईद पर ईदी किससे लेगी.
खुशियाँ और दुख हिन्दू मुसलमान पूछ कर नहीं आते...
ये तो वो है जो इंसान का इंसान से भाईचारा नहीं देख पाते
अब वक्त नहीं है चुप बैठने का
उठो और देखो कौन हमें लड़ा रहा है
कौन इस आग में घी डाल रहा है
अब उठो.. अब बैठने का वक्त नहीं है
अगर अब भी नहीं उठे तो शायद कभी नहीं उठ पाओगे
अभी  तो दिल्ली ही जला है
पता नहीं और कितने शहर जलते देखते रह जाओगे.  🙏🙏😔😔

Tuesday, 25 February 2020

हैप्पीनेस क्लासेस 😊🤗

हैप्पीनेस क्लासेज 😊🤗
 आज से 20 से 25 साल पहले हम सोच सकते थे कि बच्चों के लिए स्कूल में हैप्पीनेस क्लासेज की जरूरत पड़ेगी... उनको खुश रहने का तरीका बताया जाएगा... नहीं... क्यों.... क्योंकि तब बच्चे वैसे ही खुश रहते थे... उनको खुश रखने के लिए कोई हैप्पीनेस क्लासेज की जरूरत ही नहीं थी.
वैसे तब उनके पास ना कोई मॉडर्न गेजेट्स थे... ना आज की तरह सारी फैसिलिटी थी... पर तब भी वह खुश रहते थे... क्योंकि तब बच्चों के ऊपर इतना प्रेशर नहीं होता था जितना अब  है... बच्चे तब भी पढ़ते थे...पर आज  की तरह कंपटीशन रेस में नहीं थे... उनके ऊपर  मार्क्स का, टीचर्स का, पेरेंट्स का,  स्कूल रिकॉर्ड का प्रेशर नहीं होता था.. बच्चे  बेफिक्र होकर पढ़ते थे...बेफिक्र होकर खेलते थे .
 आज जब  अमेरिका की फर्स्ट लेडी melenia trump दिल्ली के गवर्मेंट स्कूल की हैप्पीनेस क्लासेज में आई... तब पता चला उन क्लासेज का जो  सच में आज की जरूरत है.
आज बच्चों के पास  मॉडर्न गेजेट्स है, बेस्ट फैसिलिटीज, बेस्ट ट्यूटर है... पर अगर कुछ नहीं  है तो वह है 'खुशी '...pateince, satisfaction..और इसलिए सब कुछ होते हुए भी वो खुश नहीं है.. कही ना कही अकेले है, असंतुष्ट है... वो अच्छे मार्क्स जरूर ला रहे है... पर अच्छे नागरिक नहीं बन पा रहे... सही गलत का अंतर नहीं समझ पा रहे.. क्योंकी कोई समझ नहीं रहा कि बच्चों को मार्क्स और करियर के  अलावा  जिस चीज की जरूरत है वह है खुशी.. जब तक वह खुश नहीं रहेंगे... कहां से खुद के लिए और समाज के लिए बेहतर कर पाएंगे.
 और मैं तो कहती हूं यह हैप्पीनेस  क्लासेज की  जरूरत स्कूल में ही नहीं घरों में भी  है... पेरेंट्स को चाहिए कि वह बच्चों को आर्टिफिशियल  चीजें नहीं  नेचुरल  खुशी दे.. ऐसा एनवायरनमेंट दे ताकि   वह खुलकर अपनी बात कह सके.. खुल कर जी सके.
याद है पहले स्कूल्स में नैतिक शिक्षा की किताबें होती थी... जिसमें बच्चों को सही गलत की बातें बताई जाती थी... आज भी  बहुत जरूरत है उसी  नैतिक शिक्षा की. 🙏

Tuesday, 18 February 2020

लाफिंग बुद्धा, टर्टल =खुशियाँ, पैसा, पॉजिटिव एनर्जी 🤔🤔

लाफिंग बुद्धा, टर्टल =खुशियाँ, पैसा, पॉजिटिव एनर्जी 🤔

आजा बेटा खाना खा ले.... सुबह का गया हुआ है... भूख लग आयी  होगी... रामू की मां ने रामू से बोला तो वो  गुस्से में बोला... मां मुझे भूख नहीं है... मैं नहीं खाऊंगा खाना... क्यों बेटा.. क्या हुआ... क्यों नहीं खाएगा खाना... और इतना गुस्से में क्यों है...बापू से लड़ाई हुई है  क्या... मां आप और बापू  हमेशा मुझे कहते हो कि झूठ नहीं बोला कर... सच बोला कर... पर बापू खुद तो दिन भर  झूठ बोलते हैं और मुझसे भी झूठ बुलवाते है... अरे ये क्या कह रहा है बेटा ... तेरे बापू  तो कभी झूठ नहीं बोलते... और तुझसे क्यों झूठ बुलवाएंगे.... क्या कुछ भी बोले जा रहा है.... तो माँ बापू हर किसी से कहते हैं ये लाफिंग बुद्धा लेकर जाओ... आपके घर में खुशियां आएंगी... कोई दुख नहीं रहेगा.... यह फेंगशुई  लेकर जाओ... आपके घर में पॉजिटिव एनर्जी आएगी... और ये कछुआ लेकर जाओ आपके घर में पैसा आएगा... हाँ  तो सही तो कहते हैं बापू... इसमें गलत क्या है... क्यों माँ... क्यों गलत नहीं है... अपने घर में तो कितने सारे लाफिंग बुद्धा हैं, टर्टल है,  फेंगशुई है.... पर कहां है खुशियां... कहां है पैसा.... दो टाइम का खाना भी सही से नहीं मिलता... आधे टाइम तो तू भूखी रहती है.
 रामू की मां उसको प्यार से खाना खिलाते हुए बोली... बेटा यह सब तो अमीरों के लिए है.... उनके घरों  में रखने से उनके पास में पैसा आता है... खुशियां आती  हैं.... हमें तो इनको बेचने से कैसे तैसे दो  टाइम का खाना मिल जाता है.... क्या यह हमारे लिए खुशियां और पॉजिटिव एनर्जी नहीं है....ले देख आज मैंने तेरे लिए थोड़ी सी खीर बनाई है ... खा कर बता कैसी है ..कल एक बड़ी गाड़ी वालीे मेमसाहब आयी थी और बहुत सारे कछुए ले गई थी...   और ले ये 2 rs आज टॉफ़ी भी ले आना .... रामू अपनी मां के हाथ से खाना खाते हुए सोच रहा  था... शायद माँ  सही कह रही है.... इनको  बेचने से तो मैं खाना खा पा रहा हूं... और आज तो टॉफ़ी भी लाऊँगा... सही तो है... यही तो है खुशियां और रामू भागकर पड़ोस में टॉफी लेने चला गया और रामू की मां देख रही थी की रामू  के बापू के लिए खाना बचा है या नहीं... वह तो आज भी  पानी पी कर ही पेट भर लेगी. 

Thursday, 13 February 2020

हैप्पी वैलेंटाइन डे 🤩🤩

हैप्पी वैलेंटाइन डे (बस इतनी सी ख्वाहिश है )🤩🤩
नहीं चाहती... तुम मुझे फूलो का गुलदस्ता दो .💐💐.. बस अपने लम्बे और इम्पोर्टेन्ट फ़ोन कॉल्स📱📱 में बिजी होते हुए भी मुझे देख कर हल्का सा मुस्कुरा दो 😉...
नहीं चाहिए मुझे कोई डायमंड सेट.. बस जब घर के काम में बिजी रहू😥😥....तो इतना सा ही बोल दो. कितना काम करती हो.. थक गई होंगी....
नहीं चाहती दिन में 10 बार बोलो.... I LOVE YOU.🤩🤩....बस कभी खुद भी कॉल करके पूछो .. क्या कर रही हो....खाना खाया..
नहीं चाहती कैंडल लाइट डिनर पर लेकर चलो.. बस जब खाना बनाऊ... तो किचन में आकर थोड़ा सा मेरा हाथ ही बटा  दो ....
नहीं चाहती लॉन्ग ड्राइव पर चले..बस जब थक कर रूम में आउ तो रिमोट और मोबाइल छोड़ कर मुझसे पूछो... कैसा रहा आज का दिन.
बस इतनी सी ख्वाहिश है. 🤗🤗🤩🤩
Happy valentine day to all 😍😍

Tuesday, 11 February 2020

रफ़ कॉपी 📖📖

रफ़ कॉपी 📖📖
कुछ दिन पहले पेपर में आर्टिकल आया..  रफ कॉपी ... पढ़कर दिल को छू गया... रफ़ कॉपी  की कीमत.... उसकी हालत हम सब जानते हैं... अपनी  स्कूल लाइफ में हर किसी के बैग में एक रफ कॉपी होती हैं.... हम हमारा सारा काम पहले उसमें उतारते हैं... फिर फेयर कॉपी में... कभी सोचा ऐसा क्यों.. ताकि हमारी फेयर कॉपी सुंदर देखें.. उसमें कोई overwriting,wrong work  नहीं दिखे..  इसका मतलब रफ कॉपी जो दिखने में बदसूरत  है... पर  उसी की वजह से फेयर कॉपी सुंदर है...मतलब  रफ कॉपी की कीमत ऐसी है जिसे  कोई नहीं समझ सकता... उसने सब का बोझ अपने ऊपर ले लिया... अपने  को बदसूरत बना कर दूसरे को  सुंदर बनाया तो मतलब उसकी सुंदरता का कोई अंदाजा  नहीं लगा सकता.
 घर में रफ़ कॉपी कौन हुआ...  हमारे बड़े... हमारे पेरेंट्स...वो अपनी हर इच्छा...हर  तमन्ना को दफन कर देते हैं... ताकि उनके बच्चों को अच्छा और सुंदर जीवन दे सकें... अपने बच्चों का  भविष्य और वर्तमान सुंदर बनाने के लिए खुद तप कर बदसूरत  हो जाते हैं... वह तो ये तक भूल जाते हैं कि उनकी भी कोई इच्छाएं हैं.
और जैसे कि हम सब  रफ कॉपी की कोई वैल्यू नहीं समझते.. उस पर ना कवर करते ना  उसको सही से रखते...  वैसे ही हम भी हमारे पेरेंट्स की  ना फीलिंग की कदर करते...  ना  उनके साथ  valuable टाइम स्पेंड करते...यह भी नहीं देखते कि हमारी इच्छाओं के लिए उन्होंने अपनी इच्छा को दफन कर दिया.
रोजाना हम सब की रफ़ कॉपी बैग के किसी कोने में पड़ी रहती है... हम उसकी  कोई कदर नहीं करते... पर  कभी जब जरुरत होने पर रफ़ कॉपी नहीं मिलती तो  आप परेशान हो  जाते है.. ठीक वैसे ही रोज की जिंदगी में आप अपने पेरेंट्स की परवाह नहीं करते... पर जरुरत होने पर वो आपके पास नहीं होते तो आप परेशान हो जाते है.
तो मेरी सभी से रिक्वेस्ट है.. जैसे तुम रफ कॉपी को भर जाने पर  पर  उसको अपने बैग से निकाल देते हो ..पर  प्लीज अपने घर की रफ कॉपी मतलब अपने पेरेंट्स को ऐसे कभी अपनी जिंदगी से मत निकालना ...  उनकी कदर करना... उनकी फीलिंग्स  का सम्मान करना.. ताकि उनको लगे  की चाहे वो रफ़ हुए हो पर तब भी उनको अपनी रफनेस पर गर्व हो की आखिर उन्होंने तप कर ना केवल तुम्हारा वर्तमान और  भविष्य को सुंदर बनाया... बल्कि तुम्हारे मन को भी  सुंदर बनाया.
सो प्लीज रिक्वेस्ट टू आल... रेस्पेक्ट योर रफ़ कॉपी... रेस्पेक्ट योर पेरेंट्स. 🙏🙏

Saturday, 8 February 2020

आखिर कब तक 🤷‍♀️

आखिर कब तक...🤷‍♀️
आज से 20 साल पहले... वो सहमी सी लड़की..🙇‍♀️🙇‍♀️

आज फिर वह पीछे-पीछे आ रहा है... बहुत डर लग रहा है.... अगर उसने रोक लिया तो... कुछ बोला तो... क्या करूंगी मैं... और दिल जोर-जोर से धड़कने लगा... जल्दी-जल्दी तेज कदम भरती  हुई घर की और लगभग भागने सी लगी...घर पहुंच कर ऐसे लगा जैसे  कोई सुरक्षा चक्र में आ गई  हो...  पर घर आकर भी एक अपराध बोध से ग्रस्त.... सबसे नजर चुराते हुए.. जैसे अपराध उसने किया है... शाम को टेरेस पर आई तो देखा वो नीचे खड़ा है... और एक टुक  उसे देख  है... फिर से वह घबराकर भाग गई... दिल जोर-जोर से धड़कने लगा... अब क्या करेगी  सब  क्या कहेंगे...वो डरपोक  बहुत ज्यादा डर गई... कल   फिर से  स्कूल और फिर उस लड़के का पीछा... घर पर तो किसी को बता नहीं पाई...पर जब स्कूल में अपने फ्रेंड्स को बताया तो सब ने कहा.. तू  इतना सज धज कर आती है ना इसलिए... तो घबरा कर वह बालों में तेल लगाने लगी और तेल लगाकर ही स्कूल जाती... पर फिर भी उसने पीछा नहीं छोड़ा... कल जो उसकी फ्रेंड उसके साथ स्कूल जाती थी... वह स्कूल नहीं जाएगी... अब क्या करें... वह अकेली कैसे स्कूल जाएगी... नहीं नहीं मैं भी नहीं जाऊंगी... उसने घर पर कहा कि कल मैं स्कूल नहीं जाऊंगी तो सब डांटने लगे.. कोई  बहाना बनाने की जरूरत नहीं है... चुपचाप स्कूल जाना..
बेचारी रात भर सो नहीं पाई... अकेली कैसे जाएगी... कैसे तैसे  स्कूल के लिए रवाना और फिर उसका पीछा  शुरू... लड़की को आज तो लगा जैसे दिल निकल कर बाहर आ जाएगा... जैसे तैसे स्कूल पहुंची... रोज रोज का ड्रामा.. अब तो वो लेटर भी देने लगा और फोर्स करता पढ़ने के लिए... लड़की का बेचारा बुरा हाल... आखिर में उसके भाइयों को पता चला तो सब ने मिलकर उस लड़के की इतनी धुनाई करी  और अब वह लड़की अकेले स्कूल नहीं जाती थी... उसके बॉडीगार्ड भाई उसके साथ जाते थे... पर इतना कुछ होने पर भी उस लड़की को हमेशा यही लगा कि शायद उसकी ही गलती थी जो वो लड़का उसका पीछा करता था.

आज की मॉडर्न लड़की...🏃‍♀️🏃‍♀️
लड़की की कार का एक लड़का कंटिन्यू पीछा कर रहा था..एक दिन लड़की ने  पूछ लिया... प्रॉब्लम क्या है.. लड़के ने  भी सीधे फ्रेंडशिप का ऑफर दिया... लड़की ने भी साफ शब्दों में मना कर दिया... लड़के ने पीछा नहीं छोड़ा... कहीं से उसका मोबाइल नंबर पता चला और मैसेज,  कॉल... उसको परेशान कर दिया... उसने अपने पेरेंट्स को बताया.. पेरेंट्स ने लड़के को समझा दिया... आइंदा से किया तो देखना पर  लड़का दूसरे तरीके से लड़की को परेशान करने लगा... लड़की के  पेरेंट्स ने लड़की को अकेले आने जाने से मना कर दिया.. उसके फोन पर ध्यान रखने लगे... रात को भी टाइम से घर आने की हिदायत...  लड़की ने पूछा मैंने क्या किया... मेरी क्या  गलती है... लड़की के  पेरेंट्स ने बोला.. तुम जो ये  दिन भर डोलती  रहती हो... हर लड़के से बात करती हो.. यह उसी का नतीजा है.
 आखिर में लड़की को लगा सच में शायद मैं ही गलत थी और उसने भी अपने आप को समेट लिया.. क्योंकि शायद उसकी नजर में वो ही  गलत थी.
आप लोग सोच रहे होंगे... मैं क्या कहना चाहती हूं... मैंने आपको आज से 20 साल पहले और आज की लड़की की हालत बताई... कहने को हम बहुत मॉडर्न हो गए... लड़का लड़की कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे है... लड़की  हर फील्ड में लड़कों के बराबर है... पर गलत आज भी लड़की ही है.... ऐसा क्यों🤔... कभी सोचा🤷‍♀️... क्यूंकि  हमारा सामाजिक ताना-बाना ही ऐसा है कि कोई भी गलत हरकत करता है तो दोष  लड़की को दिया जाता है... लड़के को नहीं.... इसी कारण  लड़की सहमी रहती है और लड़के  बे खौफ अपराध करते है ... प्लीज अपनी मेंटालिटी को बदलो... और ऐसे अपराधी को समाज से बाहर कर दो तभी हालात सुधरेंगे नहीं तो फिर एक लड़की बिना कारण अपने को दोषी समझेगी और फिर कोई लड़का बेखौफ उसका पीछा करेगा. 

Monday, 3 February 2020

खुल कर खेलने तो दो 🤸‍♂️🤸‍♀️🤼‍♂️🤾‍♂️🤾‍♀️

खुल कर खेलने तो दो🤸‍♂️🤸‍♀️🤼‍♂️🤾‍♂️🤾‍♀️
आजा अतुल खेलने चलें... नहीं मेरी तो टेनिस क्लास है... अरे अपना क्रिकेट मैच है  दूसरी गली के बच्चों के साथ... एक दिन मत जा  टेनिस क्लास.... नहीं मम्मी डाँटेंगी... फीस जाती है... और कहेंगी  क्या आवारा बच्चों की जैसी खेलते हो....
आजा प्रिया घर घर खेले... नहीं मेरी तो डांस क्लास है... अरे आजा बड़ा मजा आएगा... मेरी और फ्रैंड्स भी आ रही है... मम्मी प्लीज् आज  मैं घर घर खेल लू.. No..go to your dance class... dont waste your time in such stupid games.
 ऊपर जो मैंने लिखा आज ये आम बात है....हर घर में  यही हाल है... बच्चों की कभी कौन सी क्लास... कभी कौन सी...  और अगर हॉबी क्लास   नहीं हुई तो ट्यूशन क्लास.. बच्चों को हमने मशीन बना दिया... सुबह  स्कूल... आते से ही ट्यूशन... फिर हॉबी क्लासेस... बच्चे अपने मन से अपने बनाये खेल तो खेलते ही नहीं है.. खेलने की  भी  क्लासेस....वो भी हमारी पसंद के खेल.
 पर कभी सोचा इन क्लासेस में बच्चे अपने मन से खेल सकते हैं... नहीं... वहां उनको अपने कोच के इंस्ट्रक्शंस,  रूल फॉलो करने होते हैं... उनके अकॉर्डिंग खेलना... उनके डिसीजन मानना...  याद कीजिए हम लोग जब खेलते थे.. हॉबी क्लासेस में नहीं... अपने  फ्रेंड्स  के साथ... घर में, गलियों में, पार्क में तो वहां रूल्स भी हमारे...इंस्ट्रक्शंस भी हमारे.. और लड़ाई होने पर solution भी  हमारे... इससे  हम लोगों में डिसीजन पावर, सेल्फ डिपेंड और ना जाने क्या क्या  सीखने को मिलता  था... और उस खेल में जो मजा होता था... क्यूंकि वहां कोई कोच नहीं होता  था हमें इंस्ट्रक्शंस देने वाला.. हम हमारे गेम्स बनाते.. और खेलते.. उसका मजा ही अलग था...क्यूंकि नियम भी हमारे.. खेल भी हमारे.. और खिलाने वाले भी हम..और एक बात यहाँ समय की कोई सीमा नहीं.. जब मन तब खेलो.. कितनी भी देर खेलो... घर तब जाना जब लगे  की अब घर पर डांट पड़ेगी.
 पर आज बच्चों को हमने एक कठपुतली बना दिया... वह हर जगह दूसरों को फॉलो करते हैं...
तो कहां से बनाएंगे वह खुद के रूल्स... कहां से लेंगे खुद के decisions.. उनको एक बार खुलकर खेलने तो दो अपनी गली में... अपने घर में... देखना उनके चेहरे पर  जो  खिलखिलाहट दिखेगी... जो मस्ती, बेपरवाही दिखेगी... वह कोई हॉबी क्लासेस में दिख जाए तो बता देना...वहां तो वो  रोबोट के जैसे होते है.. जो कोच के रूल्स फॉलो करते है.
माना  आज  कम्पटीशन का टाइम है  पर अगर weekdays  में नहीं तो  वीकेंड पर तो  उनको खेलने दो... उसका कितना मजा बच्चों को आएगा... और उनके चेहरे पर जो सुकून आएगा...  वह सुकून आपके चेहरे पर भी देखने को मिलेगा... पर एक बार इसके लिए उनको खुल कर खेलने तो दो. 🙏

Saturday, 1 February 2020

लत 🥂🚭

लत 🥂🚭
मयंक हॉस्पिटल के बिस्तर पर लेटा हुआ था.... चारों ओर मशीन से घिरा  हुआ... वह आधी बेहोशी में था पर डॉक्टर की  बातें उसके कानों में साफ-साफ आ रही थी.... डॉक्टर उसकी पत्नी को बोल रहे थे...इनको  कितनी बार समझाया... अपनी सिगरेट, गुटखे की लत को हटाओ.. नहीं तो स्थिति   बहुत खतरनाक हो जाएगी... पर इन्होने  बिल्कुल ध्यान नहीं दिया.. और आज इनकी   यह हालत है... यह तो शुक्र है जो ये  टाइम पर यहां आ गए.. पर अगर अब भी इन्होने  अपने आप पर काबू नहीं पाया तो फिर हमारे हाथ में कुछ भी नहीं है.
 मयंक की पत्नी रोये जा रही थी... प्लीज  डॉक्टर इनको  सही कर दो... मेरा आपसे वादा है... अब कभी इन चीजों के  हाथ नहीं लगाएंगे.. मयंक के बच्चे भी रो रहे थे और मम्मी से कह रहे थे मम्मी चुप हो जाओ...  हम सब मिलकर पापा की इस लत को छुड़ाएंगे... मम्मी... पापा हमसे प्यार नहीं करते क्या... मयंक की  छोटी बच्ची ने अपनी मम्मी से  सवाल किया तो उसकी पत्नी रोते हुए बोली... नहीं बेटा... पापा तो अपन सब से बहुत प्यार करते हैं... नहीं मम्मी... आप झूठ बोलती हो... अगर पापा अपने से  प्यार करते तो कभी इन गन्दी चीजों के  हाथ नहीं लगाते... पापा को हमसे ज्यादा ये गन्दी चीज  प्यारी है...मयंक की पत्नी को समझ ही नहीं आया इस बात का  क्या जवाब दें.
उधर आधी बेहोशी में मयंक ने ये सब  बातें सुनी तो उसको इतना रोना आया और वह आत्मग्लानि से भर गया.... उसको अपने  ऊपर धिक्कार  होने लगा... ऐसा नहीं है वो एकदम से बीमार हो गया...उसकी  इन लतो   की वजह से वह बहुत सी  बीमारीयों  की चपेट में आ गया था ... सबने उसे बहुत समझाया पर उसे फर्क नहीं पड़ा... सबके सामने वह वादा करता पर अगले दिन से सब चालू.... वास्तव में उसने इन सब चीजों को कभी सीरियसली नहीं लिया...वो  तो समझता था सब उसे यू ही कहते हैं और इन सब चीजों से कुछ फर्क नहीं पड़ेगा.
कुछ प्रॉब्लम होने पर डॉक्टर के पास जाता... दवाइयां लेता पर  जो समस्या की जड़... मूल वजह थी... उसकी लते... वह उसने कभी  छोड़ी ही नहीं... वो तो   पूरी तरह से इसकी गिरफ्त में आ चुका था.
 इसकी  वजह से उसकी पत्नी से बहुत लड़ाई होती... पर वो अपनी दलीले देकर मना लेता.. पत्नी भी बेचारी हारकर हथियार डाल देती.... उसके शुभचिंतकों ने उसे बहुत समझाया... पर वह अपने ऊपर कंट्रोल ही नहीं कर पाया और आज उसकी ये  हालत है कि वह अपनी लत  तो क्या ... नॉर्मल खाना भी नहीं खा पा रहा... अभी तो सिर्फ ड्रीप  के सहारे ही है.
पर आज अपनी बच्ची के मुंह से ये सब  सुनकर शर्म से पानी-पानी हो गया  और अपने आप से वादा कर रहा है  कि अब अपनी लत  को छुड़ाकर रहूंगा... अब कभी उसके पास नहीं जाऊंगा.... मुझे बस अब मेरी फैमिली के पास जाना है.... अब जैसे डॉक्टर्स कहेँगे... और जो मेरे स्वास्थ्य के लिए अच्छा होगा... वही करूंगा... तभी नर्स ने उसको नींद  का इंजेक्शन लगा दिया.. और वो नींद के आगोश में चला गया....पर एक नयी सुबह बाहे खोल कर  उसके  इंतजार में बैठी थी...जहाँ ये लते नहीं होंगी... होंगी तो उसकी अच्छी आदते... उसका हसता खेलता परिवार... और हां सबसे जरुरी उसका अच्छा स्वास्थय. 🙏🙏🙏


Thursday, 30 January 2020

जान है तो जहान है

जान है तो जहान है
  इस  इस समय मैं हॉस्पिटल में बैठी हूं.... मेरी मम्मी एडमिट है आईसीयू में... वह अपने होश में नहीं है.. उनको ऐसे देखकर दिल कितना रो रहा है.. बता  नहीं सकती
एक मां जिसको हमेशा होश में देखा... अपने बच्चों की परवाह करते  देखा... आज उनको अपने बच्चों का जाने दो... खुद का ही होश  नहीं है.
एक बात देखी हम पूरी जिंदगी भागते हैं... पैसे कमाने... ऐशो आराम की चीज जुटाने.... अपनी मस्ती में रहना... दूसरों की परवाह करना... समाज की परवाह करना.... जो वक्त आने पर पता नहीं तुम्हारा साथ भी देंगे या नहीं... और जो तुम्हारा साथ देगा... तुम्हारा शरीर... उसको सबसे एंड में रख देना... कहां की समझदारी है.
 यहां आकर पता चला हेल्थ है तो सब कुछ है... नहीं तो कितना  कमा लो.. जब शरीर ही  साथ नहीं देगा तो उन चीजों को कहां से भोगोगे...  मेरी सभी से रिक्वेस्ट है..🙏🙏🙏 प्लीज सबकी छोड़ कर अपनी  परवाह सबसे  पहले करो🙏🙏🙏🙏... तुम हेल्दी रहोगे तभी तो दूसरों का ध्यान रख पाओगे... इसलिए अगर तुम्हें अपने लोगों की परवाह है... तो पहले खुद की परवाह करना सीखो... तभी तुम सबका ध्यान रख पाओगे... इसलिए आज से... नहीं अभी से प्रॉमिस करो अपने आप से की अपनी परवाह सबसे पहले करो.. खासकर औरते... जो हमेशा अपने आप को सबसे बाद में देखती है.
हेल्थ है तो सब कुछ है वरना तो बस  मशीन्स के सहारे ही रह  जाओगे. 

Wednesday, 29 January 2020

कल आज और कल👵👴👩👨👩‍💼👨‍💼

 कल आज और कल👵👴👩👨👩‍💼👨‍💼
20 से 25 साल पहले पेरेंट्स और बच्चे...
बेटा...  बोला ना  आज खाने में आलू की सव्जी  और पराठे है.... मम्मी मुझे नहीं खाना... कुछ और बनाओ ...देख बेटा खाना तो यही है... खाना है तो खा नहीं तो हवा खा...  कल ही तो पकोड़ी  बनायीं थी....  मम्मी आज टिफ़िन  में क्या है... अचार  और परांठा... कल ही तो सब्जी रखी थी... रोज-रोज के नाटक मत किया करो... मैं भी इंसान हूं... मम्मी मैं स्कूल से आ गया.. ठीक है रसोई में  खाना रखा है लगा लो... मम्मी मैं क्रिकेट खेलने जा रहा हूँ ... . आने दो पापा को  तुम्हारी शिकायत नहीं करी तो... पढ़ाई को तो आग लगा रखी हैँ तुम लोग  ने .... तुम्हारी बहन को देखो... सुबह से अपनी सहेलियों के  साथ घर -घर खेल रही हैं...दिन भर धुप में डोलते रहो....  हां आप तो हर बात पापा को बोला करो.. . जुबान चलाता हैं... शर्म नहीं आती... चला लो जुबान जब तुम पेरेंट्स बनोगे तब पता चलेगा.

 आज वही बच्चे जो अब  पेरेंट्स बन गए...
दिन भर मोबाइल या टीवी... कुछ और काम है... पढ़ाई तो होती नहीं तुमसे... इस मोबाइल ने  तो बर्बाद कर दिया... मम्मी आज खाने में फिर वो ही  डोसा,  पावभाजी.... मुझे नहीं खाना मैं pizzaऑर्डर कर रहा हूं... करके देख... खाना कौन खाएगा..वेस्ट नहीं होगा...  पैसे का तो दर्द ही नहीं है तुम लोग को....
 पापा आज मैं लेट आऊंगा...फ्रेंड्स  के साथ मूवी  देखने जाऊँगा फिर डिनर...नो बेटा... टाइम खराब है.... टाइम से घर आ जाना... पापा आप लोग ही मना करते  हो... मेरे फ्रेंड्स के  मम्मी पापा तो नहीं करते... हर चीज आप से पूछ कर करो... कुछ फ्रीडम  तो हैं ही नहीं...  वी वांट स्पेस... कह लो बेटा जब पेरेंट्स बनोगे  तब पता चलेगा.

आज से 10 से 15 साल बाद जब  ये ही बच्चे पेरेंट्स बनेंगे....
बेटा खाने में कैप्सूल खाया और अपना ऑक्सीजन मास्क तो लगाओ..बाहर बहुत पॉलुशन है ...  मन नहीं है मम्मी... और ये क्या tab और गैजेट्स फैला रखे हैं.. तुम लोग की कॉपी किताबें नहीं होती क्या पढ़ने के लिए...  अरे  मम्मी जस्ट चिल...we are new generation...  हम इसी पर पढ़ाई करते हैं... आपके जैसे पेन पेंसिल से नहीं... मम्मी मैं  गेम ज़ोन जाऊंगा... दो-तीन घंटे लग जाएंगे... खाना भी वही खाऊंगा... बेटा थोड़ा तो हेल्थ का ध्यान रखो... बिलकुल नहीं सुनते.... .मम्मी मुझे पता हैँ मुझे कैसे रहना हैँ.. मैं  पागल नहीं हूँ... कैसे बदतमीज बच्चे हो... जब तुम पेरेंट्स बनोगे तब पता चलेगा.
 क्या हुआ किस सोच में पड़ गये🤔🤔 ... पड़ा कुछ फर्क पेरेंट्स और बच्चों के रिलेशन में🤷‍♀️🤷‍♀️ ... नहीं ना... जमाना कोई भी हो.... पेरेंट्स और बच्चों का रिश्ता ऐसा ही रहेगा ... पेरेंट्स समझते हैं की बच्चे उनकी सुनते नहीं..  परवाह नहीं करते..और बच्चे  ये ही सोचेंगे कि यह हमको नहीं समझते... हमें कुछ करने नहीं देते... सो एंजॉय.... डोंट टेक स्ट्रेस.... जस्ट चिल. 🤗😇बट इतना भी चिल मत करना की पेरेंट्स बच्चों को समझाना छोड़ दे और बच्चे पेरेंट्स को समझना 😉

Tuesday, 28 January 2020

मैं (I)😎💃/🕺

मैं (I)😎💃/🕺
आज मैं नहीं होता तो   तुम एक कदम नहीं चल सकते थे... यह घर मुझसे चल रहा है... मैं नहीं होता तो तुम्हें इस दुनिया में कोई नहीं पूछता... मैं, मैं, मैं... ये एक शब्द हर आदमी के अंदर होता है... कोई इस मैं  में ही जिंदगी गुजार देता है और सामने वाले को ऐसे जताता  है की जैसे वो ही उसकी जिंदगी का मालिक है... वो ही  उसका कर्ता धर्ता है.
पर क्या सच में ऐसा ही है... हम सब देखते आये हैं... कितना भी बड़ा आदमी हो... उसके होने पर हम सोचते हैं कि उसके बिना हम कदम नहीं चल सकते...we can't survive without him... पर  ऐसा नहीं होता.. अगर वह किसी वजह से वहां नहीं है तो भी दुनिया चलती  है...  हां  कुछ देर के लिए ठिठकती हैँ, अटकती हैँ पर चलना सीख ही लेती हैं.  तो फिर क्यों हम इस मैं मे  जीते हैं.... क्यों ना हम  इस मैं को हम बना ले और सामने वाले को बताएं की you are also important in your place....   तुम्हारा भी अस्तित्व है... उसके विचारों की, भावनाओं की उतनी ही कदर है... फिर देखना अगर तुम उस जगह नहीं भी हुए तो तुम्हे मिस किया जाएगा... तुम्हारी इम्पोर्टेंस समझी जाएगी
पर अगर  हम इस मैं में ही जीते रहे तो एक टाइम के बाद उस जगह पर सब घुटन महसूस करेंगे... वहां से निकलने को झटपटायेंगे.. एंड उसके ना होने पर आजाद महसूस करेंगे. इसलिए अगर हमें किसी की दुनिया में जगह बनानी है तो हम बनकर बनानी होगी मैं बन कर नहीं. 

Sunday, 26 January 2020

मेरी डायरी मुझसे गुस्सा हैँ 📖📖😔😔

मेरी डायरी मुझसे गुस्सा हैँ...📖📖😔😔
  आज बहुत दिन बाद ..... दिन क्या शायद हफ्तों गुजर गये....  सोचा डायरी लिखती हूं.... अपनी डायरी को ढूंढा तो पहले तो वह मिली नहीं.... बड़ी मुश्किल से मिली तो  देखा उस पर धूल की परत जम रही थी.... एक बार देखकर दिल दुखा की अरे ये इसकी क्या हालत हो रही है... पहले कितनी चमकती रहती थी .... फिर भी धूल झाड कर  जैसे ही खोला तो डायरी क्या खोली .... देखा तो वह तो सिसकियां ले रही हैँ... लगातार रोये जा रही हैँ.. मैंने घबरा  कर कारण पूछा    तो आप मानोगे नहीं वह मुझसे बात करने को तैयार ही नहीं हुई...  मैंने उसे बहुत समझाया तो उसका रोना तो बंद हो गया पर उसकी जो शिकायते, गुस्सा शुरू हुआ तो रुकने का नाम ही नहीं लिया... वह तो अपनी भड़ास, गुस्सा जो  इतने दिन से उसने  भर रखा था... बोलती गई.. और मै  सुनती....
 वो बोली... आज तुमको मेरी याद कैसे आ गई.... मैंने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी की अब  तुम मेरे पास आओगी भी.... तुमको तो अपने दिल की बातें कहने को  नये दोस्त, नये  लोग मिल गए... अब मेरे पास आ कर क्या करोगी.... जाओ अपने दोस्तों के पास.... मैंने कहा ऐसा नहीं है.... मैं मानती हूं कि मुझे तुम्हारे पास आये  बहुत टाइम हो गया.... पर क्या करती... मुझे टाइम ही नहीं मिलता था   तो डायरी गुस्से में  बोली... हां क्यों मिलेगा  टाइम... 😏...एक टाइम ऐसा  भी था  की  तुम मेरे पास कैसे भी टाइम निकाल कर आती थी.... अपने  दिन की... जिंदगी की... छोटी-छोटी बातें मुझसे शेयर  करती थी.. जब तक तुम मुझे बता नहीं देती थी तुम्हें चैन नहीं पड़ता था.... खाना हजम नहीं होता था... तुम अपनी छोटी से छोटी बात.... अपनी खुशियां 🙂, अपना गम😔, अपनी फ्रस्ट्रेशन😣, अपना गुस्सा 😤... सब मेरे को बताती थी...  पता है जब तुम मुझसे अपनी खुशियां शेयर  करती थी तो मैं भी उतनी ही खुश होती तो जितनी की तुम...  जब तुम  बहुत दुखी होती थी तो मैं भी बहुत दुखी होती थी  और तुम्हें समझाती थी... और पता हैँ जब  तुम अपना गुस्सा मुझ पर उतारती   थी तो मैं चुपचाप सुनती रहती थी.... फिर बाद में तुम को प्यार से समझाती थी.
 मालूम हैँ... मैं बहुत खुश थी की  तुम मुझे अपना सच्चा दोस्त मानती हो... तभी तो खुशी ही नहीं... अपना दुख, अपना  गुस्सा... सब मुझसे शेयर करती हो.... और मैं बहुत प्राउड फील करती थी कि कम से कम मैं तुम्हारी सच्ची हमदर्द हूं... तुम मुझे अपना समझती हो... तब ही तो  जब कोई तुम्हारी नहीं सुनता  था... तुम्हें मेरी जरूरत होती थी... तुम भाग कर मेरे पास आती थी...  पर शायद मैं गलत थी... जिंदगी में हर कोई अपने मतलब के लिए ही साथी ढूंढता है... जब तुम अकेली थी तो मेरे पास आती थी...  क्योंकि तुम्हारे पास  शेयर करने को कोई नहीं था... पर अब.... और डायरी चुप हो गई.
थोड़ी देर हम दोनों  के  बीच  सन्नाटा पसरा   रहा... मुझे समझ ही नहीं आया मैं क्या बोलू...क्यूंकि वो गलत  नहीं थी... गलती मेरी ही थी... पर मैं बहुत सरप्राइज़ हुई  की गॉड  इतना गुस्सा भर रहा है इसमें....मुझे कभी अहसास ही नहीं हुआ...  फिर  मैंने बोलना शुरू किया... तुम ठीक कह रही हो... और सच में गलती मेरी है जो मैंने इतने दिन तक तुम्हें याद नहीं किया.... पर एक बात बताऊ...  चाहे मुझे कितने  भी दोस्त मिल जाये... पर मैं जो बात तुमसे कह सकती हूं.... तुमसे शेयर कर सकती हू ...  हर किसी से कभी नहीं....तुमसे बात करते हुए मुझे कभी भी सोचना नहीं पड़ता ... जो मन आया बोल दिया.... पर दुसरो के साथ मैं ऐसे थोड़े ना बात कर सकती हूँ... दुसरो के साथ बात करते हुए दस  बार सोचना पड़ता हैँ.. किसी को बुरा ना लगे.... किसी की फीलिंग्स हर्ट ना हो...   वैसे भी आदमी दिन भर कहीं भी जाएं... किधर भी रहे... आखिर में थक कर  अपने घर ही आता है ना.... और तुम  मेरा घर  ही हो.... यहां आकर मुझे सुकून... मुझे राहत मिलती है... मैं तुम्हारे पास आकर बिलकुल हलकी हो जाती हू ... पर आज से मैं तुमसे प्रॉमिस करती हूं... मैं कहीं भी जाऊं.... मैं रोज तुम्हारे पास आऊँगी.... तुमसे बातें करूंगी... अब कभी तुमको अकेला नहीं छोडूंगी.... प्रॉमिस.... पक्का वाला प्रॉमिस.🤝 🤝
डायरी थोड़े गुस्से मैं और थोड़ी  हंसी में मेरे गले लग गई... और मैंने भी अपनी डायरी को अपने गले लगा लिया.... फिर पता नहीं कितनी देर तक हम बात करते रहे.... समय का पता ही नहीं चला.🤗🤗

फंडा ये हैँ.... की नये दोस्त बनाओ... पर अपने  सच्चे और असली दोस्तों, अपने पुराने साथियों को  कभी मत छोड़ना. 👬👭👫

वक्त

वक्त
"मेरा पानी उतरते देख किनारे पर घर मत बना लेना, मैं समुन्दर हूँ लौट कर जरूर आऊंगा "
कल मैंने ये लाइन न्यूज़ पेपर में पड़ी जी की अमित शाह ने  जो की  सेंटर में होम मिनिस्टर हैं... उस टाइम कही  थे जब कांग्रेस गवर्मेंट में वह एक केस से बाहर निकल कर आए थे... उस टाइम पी. चिदंबरम होम मिनिस्टर थे. अब जैसा आपको पता ही है कि अब पी चिदंबरम सीबीआई कस्टडी में है और  उसी बिल्डिंग में लाए गए जिसका उन्होंने मिनिस्टर रहते इनॉगरेशन किया था.
आप सोच रहे होंगे मैं आज शायद पॉलिटिक्स से रिलेटेड कुछ लिख रही हूं... तो नहीं ऐसा कुछ नहीं है. मैं आपको ध्यान दिलाना  चाहती हूं कि यहां अमित शाह ने जो 'मैं' यूज़ किया... वहां उनका मतलब खुद से नहीं बल्कि टाइम से,  समय से है. जी हां दोस्तों वक्त बहुत ही मजबूत होता है... अगर इंसान का वक्त सही नहीं है  तो वह कितना भी कोशिश कर ले उस की हर चाल उलटी होती हैँ... उसको सही होने पर भी गलत ही समझा जाता है..बट  अगर इंसान का वक्त सही है तो समझो सब सही है... उसकी बात पत्थर की लकीर होती है.. दुनिया में उसकी तूती बोलती है और सब उसको फॉलो करना चाहते हैं... इन स्पाइट वो गलत ही  हो. हम सुनते भी आए हैं कि वक्त बहुत बड़ा मरहम होता है जो हर जख्म को भर देता है और पुराने से पुराने घाव को हरा कर देता है. एक सॉन्ग भी है कि...
 "वक्त इंसान का ऐसा भी कभी आता है
 राह में छोड़ कर साया भी चला जाता है... दिन भी निकलेगा कभी रात के आने पर ना जा ".
अगर वक्त सही नहीं हैँ तो दुनिया तो दूर की बात  अपने भी साथ नहीं देते. पर ऐसा नहीं है रात के बाद सुबह भी आती है... इसलिए हमें अगर वक्त सही नहीं है तो ऐसा नहीं कि हम मेहनत ना करें क्योंकि जैसा हम सब जानते हैं काम करते रहो क्योंकि "अपना टाइम आयेगा"..बस हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि जब वक्त हमारा हो तो हमें अकड़ नहीं दिखानी चाहिए... हम में घमंड नहीं आना चाहिए क्यूंकि  पता नहीं ऊँट कब किस करवट बैठेगा और जो दुनिया आज हमको सर आंखों पर बैठा रही है वह  हमें पटक भी सकती है. इसलिए  दोस्तों हमें वक्त के साथ चलना चाहिए और सही टाइम का वेट करना चाहिए और अपने काम से दुनिया को जवाब देना चाहिए ना की अपनी अकड़ से. 

जिंदगी एक अनसुलझी पहेली

जिंदगी एक अनसुलझी पहेली
 प्लीज... प्लीज गॉड बस इस प्रॉब्लम से निकाल  दे.. 🙏बस मुझे सर्विस मे प्रमोशन मिल जाये फिर कोई प्रॉब्लम ही नहीं है.. गॉड बोर्ड एक्साम्स में अच्छे मार्क्स आ जाये 🙏 फिर सब ठीक है.... आप सोच रहे होंगे मैं यह सब क्या लिख रही हूं... बट इतना तो है कि हम सब लाइफ में इस सिचुएशन को हर टाइम फेस  करते हैं... एक प्रॉब्लम से पीछा छुड़ाते हैं... फिर कोई दूसरी प्रॉब्लम... तो आज मैं अपनी सबकी इस मन की उलझन को अपने स्टाइल से कहने की कोशिश कर रही हूं....
 जिंदगी एक अनसुलझी पहेली... 😇

एक उलझन सुलझी तो दूसरी उलझी...
 उलझने सुलझाते सुलझाते हम खुद ही उलझ गए...
ढूंढ़ते रहे उस डोर का छोर 🤔
 पर सारे धागे अपने आप में उलझ गए...
कब तक.. कब तक ये धागे उलझते रहेंगे..
पता नहीं इन सवालों को सुलझाते  हुए मैं खुद ही उलझ गई..
जिंदगी की गणित में मैं इतना उलझ गई...
 पता ही नहीं चला इस गणित  में मैं कब फेल हो गई....
जिंदगी मुझे पता था तू मुश्किल है...
पर इतनी.... 🤔🤔...कभी नहीं सोचा था...🤷‍♀️
 ए जिंदगी तेरे से एक छोटे सी  गुजारिश है...🙏
तू  थोड़ा सा सरल हो जा...
और मुझको अपने गले लगा ले 🤗🤗

हिम्मत /मंजिल

हिम्मत /मंजिल
'संपर्क टूटा है हौसला नहीं
 विक्रम रुका है
इसरो  नहीं '
कल रात पूरा देश उस  ऐतिहासिक पल का गवाह बनना चाहता था... सबको लग रहा था कि बस मंजिल मिल ही गई .. सारे वर्ल्ड में में हमारा नाम होगा... पर एन्ड मोमेंट पर हम सबके सपने  टूट गया... हम हमारी मंजिल से कुछ कदम दूर रह गए... एक पल को सब हताश हो गए,  निराश हो गए. पर अगले ही पर लगा...  कोई नहीं अभी  मंजिल और हैं ,  रास्ते नये बनाएंगे... मंजिल तक पहुंचेंगे... हिम्मत नहीं हारेंगे.
ऐसा ही हम सब के साथ जिंदगी के किसी ना किसी मोड़ पर  होता है... हमें लगता है कि हम  हमारी मंजिल तक पहुंच ही गए... हम बहुत एक्साइटेड हो जाते  हैं... बड़े-बड़े सपने देखने लगते हैं.... कल्पनाओं के संसार में चले जाते हैं... पर जैसे ही मंजिल से   भटकते हैं.... हम निराश हो जाते हैं, डिप्रेशन में चले जाते हैं... एक पल को ऐसा लगता है कि सब कुछ खत्म हो गया... . ऐसा लगता है कि जिंदगी में कुछ भी नहीं बचा.
 पर मैं ऐसे उन सभी लोगों से कहना चाहूंगी.... 'मंजिल खोयी  है
 रास्ते नहीं
सपने टूटे हैं
हिम्मत नहीं '
और जैसा की आज सारा देश इसरो पर गर्व कर रहा हैं... उनके प्रयासों को, उनकी कोशिशों की सराहना कर रहा.... उनकी तारीफ कर रहा है.... उनकी और उम्मीदों से देख रहा हैं...  कि हां हम होंगे 'कामयाब एक दिन '
ऐसा ही हम सब के साथ होता है... अगर हम कभी फेल भी होते  हैं... पर हमने कोशिश करी है तो  लोगों को भी उम्मीद होती है कि हम जरूर कुछ अच्छा करेंगे,  सक्सेज होंगे. वैसे भी हम पढ़ते आए हैं कि..
'लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती...
 कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती'. 

डबल स्टैण्डर्ड (दोहरी मानसिकता )A short story🤷‍♀️🤔

डबल स्टैण्डर्ड (दोहरी मानसिकता )A short story🤷‍♀️🤔
रोज की तरह सुमन  अपनी सास के लिए चाय ले  कर गई... उसकी  सास  फोन पर  अपनी किसी रिश्तेदार से बात कर रही  थी... जिसके  बेटे की वाइफ की कुछ टाइम पहले मौत  हुई थी...  उसके 15 साल की  एक बच्ची थी...  बेटे   कि माँ चाहती थी कि बेटा दूसरी शादी करले ... पर बेटा इस बात के लिए राजी नहीं था...सुमन की सास उसे  समझा रही थी... कि क्यों नहीं मान रहा तेरा बेटा.... अरे अभी उसकी उम्र ही क्या है और जब उसकी बेटी शादी करके दूसरे घर चली जाएगी तो वह किसके सहारे रहेगा... उसे सहारा देने वाला भी तो कोई चाहिए ना... तू चिंता मत कर मैं आकर उसको समझाउंगी... अरे सारी जिंदगी पड़ी है उसके सामने.
जैसे ही  सुमन की सास ने  फोन रखा...सुमन  ने अपनी सास को चाय का कप पकड़ाते हुए कहा...मम्मी मेरी फ्रेंड की भी ये ही  स्टोरी है... उसके हस्बैंड की  भी  कुछ  टाइम पहले  मौत हो गयी... उसका एक  बेटा  हैं जो 10th क्लास में पढ़ता हैं...में भी उसको दूसरी शादी के लिए समझाती हूँ .
 इतना सुनते ही सुमन की सास बोली अरे अब इस उम्र में दूसरी शादी करके क्या करेंगी ...  अपने बच्चे को पढाये, उसे बड़ा करें...  अब इन सब चीजों में ही उसको अपना मन लगाना चाहिए. इतना सुनते ही सुमन का मुंह खुला का खुला रह गया... लगा कि जैसे वो सुन्न हो गयी...  उसकी सास कुछ देर पहले इसी सिचुएशन में कुछ और कह रही थी और अब कुछ और...  क्यों... क्यूंकि फर्क सिर्फ इतना हैं की उधर एक आदमी है और इधर  एक औरत.
 सुमन बिना कुछ कहे चाय  के खाली कप लेकर किचन की ओर बढ़ गयी...  पर उसका दिमाग उन कप्स की तरह खाली नहीं था जिसमे भरे हुए थे सवाल... सवाल अपनी सास के या कह लो इस समाज के डबल स्टैण्डर्ड को लेकर.. जिनका उसके पास कोई जवाब नहीं था. 

रिश्ते (दिल♥️ /दिमाग़ 🤔

रिश्ते (दिल♥️ /दिमाग़🤔 )
'आपका दिल बहुत कीमती है
कोशिश करें इसमें वही रहे
जो रहने के काबिल हो'
कितनी सही लाइन्स हैं और   शायद कोई बहुत दिमाग वाले पर्सन ने लिखी होंगी.  पर क्या सच में  हमें ऐसा करना चाहिए... रिश्ते निभाते हुए कैलकुलेशन करें की क्या हमारे लिए सही है और क्या गलत है... किस रिश्ते से हमें   फायदा होगा और किस से नुकसान... हां यह बात शायद उनके लिए सही है जो रिश्ते निभाते हुए दिमाग का यूज करते हैं और अपने मतलब के लिए  रिश्ते निभाते हैं.
पर जो रिश्ते दिल से निभाते हैं... वह बस रिश्ते निभाने में यकीन रखते हैं और  पूरी शिद्दत से रिश्ते निभाते में यकीन रखते हैं फिर  चाहे इसमें उनका ईगो हर्ट हो... उनकी self-respect को चोट पहुंचे... वो परवाह नहीं करते... वो सब कुछ लुटा कर बस  पूरे दिल से रिश्ते निभाते में यकीन रखते हैं... और इसे निभाते हुए  चाहे वह खाली हाथ रह जाए... वह परवाह नहीं करते.
 वैसे आजकल जो लोग दिमाग से रिश्ते निभाते हैं वह ज्यादा खुश रहते हैं. पर पता नहीं क्यों मुझे  ऐसा लगता कि रिश्ते निभाओ  तो दिल से निभाओ.. दिमाग से तो व्यापार ही निभा लो.😌..  देखना अगर  दिल से रिश्ता निभाओगे तो  दिल से ही खुशी  भी मिलेगी.
प्लीज आप लोग कमेंट के साथ जरूर  बताइए की रिश्ते  कैसे निभाने चाहिए... दिल से या दिमाग़ से. 

एक लड़की के मन की व्यथा (दर्द )👩🙇‍♀️

एक लड़की के मन की व्यथा (दर्द )🙇‍♀️👩
मां-बाप का घर
 तुम तो पराया धन हो
आज या कल तुम्हें तुम्हारे घर जाना ही है...
 ससुराल
 ये  तो पराए घर से आयी हैं ये क्या इस घर को अपना समझेगी ....
लड़की
एक कोने में आंखों में आंसू और मन में ढेरों सवाल🤔
मेरा घर कौन सा है...
 मैं किस घर को अपना समझ कर
 अपना घोंसला बनाऊं...🏘🏡
 एक ऐसा घोंसला जहां कोई मुझे पराया नहीं कह सके. 😌

हम बदलेंगे.... सिस्टम बदलेगा

हम बदलेंगे.... सिस्टम बदलेगा
कुछ दिन पहले अख़बार में न्यूज़  आयी की हमारी कोई भी यूनिवर्सिटी वर्ल्ड के टॉप 300 में भी स्टैंड नहीं करती... पढ़कर ही इतनी शर्म आई कि हम इतने पीछे हैं... इंडिया के बच्चे बाहर जाकर इतना नाम कर रहे हैं और हमारे देश में इनको सही एजुकेशन भी नहीं मिल रही.
जबकि ये  वही इंडिया है जहां का नालंदा विश्वविद्यालय सारे वर्ल्ड  में फेमस था.... पूरे वर्ल्ड से  यहां एजुकेशन लेने बच्चे आते थे.. क्योंकि तब हम बच्चों को एजुकेट करते थे... मोरल वैल्यूज देते थे... अब तो स्कूल कॉलेज बिजनेस बन गए... हमारा सिस्टम ही ऐसा है कि हम बच्चों को 5 स्टार होटल की सुविधाएं देते हैं पर एजुकेशन का ध्यान नहीं रखते... अपने इंस्टिट्यूट का रिजल्ट 100% जाये उसके लिए हर तरीका अपनाने को तैयार रहते हैं पर  बच्चों को क्या चाहिए... उसका क्या इंटरेस्ट हैं....किसी को परवाह नहीं.
टीचर बच्चों को स्कूल में कहते हैं... मेरी ट्यूशन क्लास ज्वाइन करो... क्यों..  तुम उन्हें  स्कूल में क्यों नहीं सही से पढ़ाते  हो... क्यों नहीं  हम उन बच्चों की एक्स्ट्रा क्लासेज arrange करते जिसको इसकी नीड हैं.... बट अगर ऐसा करेंगे तो ट्यूशन के नाम पर उनको जो बिजनेस है उसका क्या होगा.
आज कॉलेज में एडमिशन के लिए कटऑफ 90% जाती है...इसका मतलब जिनकी 80% आयी वो  बेकार है... तुम कटऑफ इतनी  हाई रखते  हो... व्हाट  अबाउट योर एजुकेशन स्टैंडर्ड... उसकी कटऑफ कौन डिसाइड करेगा.
तो क्या हम यह समझे कि सारा दोष सिस्टम का है नहीं इसमें हमारा...  हम पेरेंट्स का दोष ज्यादा है.... हमने बच्चों को मार्क्स की, परसेंटेज की फैक्ट्री बना दिया...  जहां  90% से नीचे तो एक्सेप्ट ही नहीं करते हैं... और बच्चों के मार्क्स के हिसाब  से  हम  हमारा  स्टैंडर्ड सोसाइटी में देखते हैं... चाहे इस मार्क्स की रेस में   उनका बचपन पीछे रह जाये....  वी डोंट केयर.
क्या हम लोग भी बचपन में 90% लेकर आए थे... चुप क्यों हो गए.. याद कीजिए... और वैसे भी क्या ये  मार्क्स  ही उनका फ्यूचर  डिसाइड करेंगे.
 हमने कभी सोचा कि हम उन्हें educate तो कर ही नहीं रहे  बस  उन्हें  मार्क्स  की रेस में दौड़  लगवा रहे हैं.
 प्लीज मेरी सभी पेरेंट्स  से रिक्वेस्ट है🙏.. अपने बच्चों को समझो... उनका इंटरेस्ट देखो... हर  बच्चा पढ़ाई में अच्छा हो... जरूरी नहीं...वो एवरेज  भी हो सकता है.. उसका कुछ और इंटरेस्ट हो सकता है... हमें वही देखना है.... हम नहीं देखेंगे तो कौन देखेगा.
हमें  हमारी एजुकेशन  पालिसी हर बच्चे को ध्यान में रखकर बनानी होगी और तभी हमारा देश भी वर्ल्ड में अपना  नाम करेगा और एजुकेशन सिस्टम ही सुधार जाये तो हमारी यूनिवर्सिटीज भी वर्ल्ड रैंक में आएंगी.

आज का अकेलापन

आज का अकेलापन
भाभी ये  आप डायरी में क्या लिखती रहती  हो... महीने का हिसाब.... कामवाली बाई ने कविता से पूछा तो वह हंसकर बोली महीने का नहीं जिंदगी का हिसाब लिखती हूं.... बाई नीचे जमीन पर बैठ गयी और  सवालिया नज़रों से कविता को देखने लगी... भाभी महीने का हिसाब मतलब🤔... कविता थोड़ी हंसी और फिर बोली ...मेरे साथ दिन भर क्या होता है... मैं क्या करती हूं.... मुझे किस बात पर गुस्सा आता है... कब मैं खुश होती हूं.... यह सब मैं इस डायरी में लिखती हूं... बाई चकित होकर बोली तो फिर आप भैया को और बच्चों को क्यों नहीं बताती हो यह सब.
कविता थोड़ी रुकी और  गहरी सांस भर कर बोली तेरे भैया को और बच्चों को मेरे लिए टाइम ही कहां है... बेटा अपने फ्रेंड्स  के साथ चैटिंग... बेटी  फेसबुक फ्रेंड्स... और तेरे साहब वह दिनभर बिजनेस की टेंशन में रहते हैं..कहते हैं आते ही  चिकचिक शुरू.... let me live my time... और वह अपने मोबाइल में बिजी....  पर हां इस डायरी के पास मेरे लिए टाइम ही टाइम है...ये मेरी सारी शिकायतें, गुस्सा,  तकलीफ सब तसल्ली से सुनती है... इसके पास  बहुत टाइम है मुझे समझने का... बाई कुछ समझी कुछ नहीं और अपने काम में लग गई.
अगले सब अपने अपने काम की भागदौड़ में बिजी थे और कविता सब की जरूरत के अकॉर्डिंग काम कर रही थी कि तभी वह चक्कर खाकर गिर गयी और बेहोश हो गई... सब घबरा गये और उसे डॉक्टर  के लेकर भागे. डॉक्टर ने कहा कविता डिप्रेशन में है.... ट्रीटमेंट लंबा चलेगा... सबको बड़ा ताज्जुब हुआ कि किस बात का डिप्रेशन  था... हमको तो पता ही नहीं चला.
 तभी पीछे से बाई की आवाज आई... साहब आपको  पता हो ना हो पर भाभी की डायरी को सब पता  होगा... आप लोग के पास टाइम ही कहा था भाभी के लिए.... आप लोगों ने तो अपनी एक  अलग ही दुनिया बना ली थी अपना अकेलापन दूर करने के लिए.
सबने एकदम से पीछे मुड़कर  बाई को देखा कि ये क्या कह रही है और इसको इतना कुछ कैसे पता है.... जो हमको भी नहीं पता. सब बाई  की बात सुनकर एक आत्मग्लानि से भर गए. इस टाइम सब कविता से बात करना चाहते थे पर कविता चुपचाप सो रही थी.
बाई  सब को अचरज भरी नजरों से देख रही थी कि इस टाइम सब भाभी से बात करके अपना अकेलापन दूर करना चाहते हैं🤔....भाभी  तो कब से यही चाहती थी. 

छोटी सी शुरआत (A new begininig )A thanks note

छोटी सी शुरुआत (A new begining )A thanks note

कैसे करूं.... करूं या ना करूं.... एक डर सा लग रहा है... सब क्या कहेंगे.... कोई हंसा तो.... रहने दो... नहीं शुरु करती... मन में अजीब सा लग रहा है.

कोई नहीं स्टार्ट करती तो हूं... जो होगा देखा जाएगा... कहीं से तो शुरू करना ही पड़ेगा... ऐसे ही कुछ हजारों सवाल मेरे मन में थे.... जब मैंने ब्लॉग लिखना स्टार्ट किया था.
एक डर, एक हिचक.... लोग क्या कहेंगे.... पर ऐसे ही ना ना करते मैंने आज मेरे 10 ब्लॉग्स पब्लिश कर दिए😊.... और ये सब  आपके सपोर्ट के  बिना पॉसिबल ही नहीं था... आप सबके कमैंट्स  एंड व्यूज ने मुझे मोटिवेट किया कुछ करने  को.... और अब मेरी रिस्पांसिबिलिटी और ज्यादा बढ़ गई है... कुछ अच्छा करने की... कुछ नया लिखने की.
और हां मेरे ब्लॉग्स से कभी किसी को दुख ना पहुंचे.... किसी की फीलिंग हर्ट ना हो... बस ये  ही मैं गॉड से प्रे करती हूं...और  आप सब की wishes  चाहती  हूँ....मैं आशा करती हूँ... आप सब  मुझे हमेशा ऐसे ही सपोर्ट करते रहेंगे... अगर आप सब मेरे साथ हैं तो प्लीज 👍का sign दीजिये 🙏🙏.

सोशल मीडिया

सोशल मीडिया
आज न्यूज़ पेपर में न्यूज़ है कि सुप्रीम कोर्ट भी बहुत चिंतित है सोशल मीडिया के ज्यादा यूज़ से.....  एक जज ने तो यहां तक कह दिया कि मैं स्मार्ट फोन की जगह कीपैड लेने की सोच रहा हूं.

तब से मेरे मन में इसको लेकर ढेरों सवाल है कि हमारे लिए ये useful हैं या हानिकारक...  मैं किसी डिसीजन पर नहीं पहुंच पा रही... मैंने अपनी मनोस्तिथि को कुछ इन शब्दों में बयां किया हैं...

वह रे सोशल मीडिया तेरी माया....
कभी एक क्लिक में ले सेल्फी...
कभी कोई क्लिक करें तुम्हारी फोटो.
 घर बैठे झटपट हम करें नेट बैंकिंग...
 चोर करें हमारे ऑनलाइन अकाउंट में घुसपैठ.
एक ही पोस्ट कर दें तुमको पॉपुलर....
और कभी एक ही पोस्ट बना दे तुमको हंसी का पात्र.
एक ही वीडियो से हो जाओ तुम घर-घर पॉपुलर ...और कभी लगे कहां खो गई हमारी निजता.
 कभी लगे कितना बढ़िया है यह मनोरंजन का साधन...
 कभी लगे छीन लिया इसने  हमारा सुखचैन.
कही  मिल जाये अपने बचपन के दोस्त....
छिन जाये  हमारे घर के ही रिश्ते.
कभी लगे खट्टा...
कभी लगे मीठा...
कभी अपना सा.. कभी पराया.
मैं इसके पास जाना नहीं चाहती...
 और दूर इससे रहना भी नहीं चाहती.🤗🤗

एक बार सोचियेगा जरूर

एक बार सोचियेगा जरूर
गाड़ी को side नहीं देने पर लड़के ने 40 साल के आदमी पर गोली चला दी... स्टूडेंट ने अपने टीचर पर गन चला दी... बच्चे ने मोबाइल में खेलने से मना  करने पर अपने पापा को तलवार से मार दिया.
क्या हो रहा हैं ये.. किस तरह की न्यूज़ चल रही हैं.. यह हो क्या रहा है हम सबको... हम इतने अग्रेसिव कैसे होते जा रहे हैं... पेशंस कहां गया हम लोगों का.. ना सुनना तो हम लोग की आदत ही नहीं है... कोई हमको कुछ कह तो वह हम सुन नहीं सकते. कभी सोचा है ऐसा क्यों... आज हम किस पीरियड में है... जहां 2 मिनट मैग्गी है, इंस्टेंट कॉफी है,  30 मिनट पिज़्ज़ा डिलीवरी है, ऑनलाइन शॉपिंग है,
व्हाट्सएप मैसेजस भेजते से ही लोगों को मिल जाना... वीडियो डाउनलोड ना हो तो गुस्सा..
कही  लोगों को हर चीज इनस्टेंट मिल जाना ही तो उनके अग्रेशन का कारण नहीं है.
 एक टाइम था हम लेटर भेजकर हफ्तों उसके आने का वेट करते थे... उसका भी एक अलग मजा होता था...ट्रैन में जाते थे तो  लोगों से इतना घुलमिल जाते थे कि मंजिल पर पहुंचने की जल्दी ही नहीं होती थी.. बल्कि सफर में ज्यादा मजा आता था..
लोगों के पास टाइम होता था एक दूसरे की सुनने का... हर चीज तसल्ली से होती थी... इसलिए तब के लोगों में पेशेंस ज्यादा होता था... आज लोगों के पास में सब चीजें हैँ... तब भी  वो खुश नहीं है... उनकी ये असंतुष्टि ही  उनकी फ़्रस्टेशन में बदल जाती है और उनकी ये फ़्रस्टेशन  ही एक दिन newspaper की हैडलाइन बन जाती हैँ...  माना आज हम बहुत एडवांस हो गए हैं.... और टाइम के साथ चेंज होना भी चाहिए.... पर सोचिए हम खुश कब थे तब या अब..... संतुष्ट कब थे तब या अब....  बदलाव हो तो अच्छे के लिए... ऐसे बदलाव का क्या फायदा जिससे हम खुद को तो नुकसान पहुचाये ही.. दूसरों के लिए भी  खतरा बन जाए... एक बार सोचिएगा  जरूर. 

जय माता दी 🙏

जय माता दी🙏
मम्मी प्लीज आज प्याज के पराठे बना दो.... नहीं बेटा अब 9 दिन तक घर में कोई प्याज़ नहीं,  लहसुन नहीं... और हां अंडे का तो नाम भी मत लेना... पीछे से चिंटू की दादी बोली.
क्यों दादी ऐसा क्या है जो 9 दिन तक प्याज़, लहसुन  नहीं खा सकते... अरे बेटा नवरात्री हैँ....  माता रानी के दिन है... इन दिनों  हमें शुद्ध खाना खाना चाहिए,  रोज माता रानी को धोक  लगाना चाहिए.... और अच्छे से रहना चाहिए...हां  तो  दादी मैं  अच्छे से रहूँगा और माता रानी को धोक भी लगाऊंगा पर  प्लीज प्याज का पराठा तो खाने दो.... चिंटू मैंने मना किया ना...  जबान मत लड़ा.

चिंटू बिना खाए ही  गुस्से में चला गया.... पीछे से दादी गुस्से में चिल्लाई... नहीं खाता तो ना खाये  पर अब 9 दिन तक कोई चीज ऐसी नहीं आएगी जिससे कि धर्म भ्रष्ट हो... मातारानी गुस्सा हो.
 तभी पड़ोस से  दादी की फ्रेंड आ गई.... अरे विमला क्या कर रही है... अरे तुझे पता है यह सामने वालों की लड़की रोज शाम को किसी लड़के के साथ में आती है... पता नहीं कौन है,  क्या है,  किस जात का है..... खैर हमें क्या... उसके घर वाले जाने.
चिंटू की दादी ने पूछा....  खाना खा लिया तो फ्रेंड गुस्से में बोली... अरे कहां बहु को  फोन से फुर्सत मिले तो खाए.... अभी तो तैयारी कर रही है.... आजकल की लड़कियों को कोई शर्म लाज तो है नहीं... तभी चिंटू की दादी धीरे से बोली... अरे हमारी कौन सी कम है... अपनी मनमानी चलाती है.... पोते, पोतिया भी ऐसे ही हो गए... जरा सी बात पर मुंह फुला ले... ऐसे ही धीरे-धीरे दोनों घंटे भर तक बात करते रहे.
इधर चिंटू की मम्मी काम करते-करते सोच रही थी की प्याज, लहसुन खाने से माता रानी नाराज हो जाती है..... पर क्या दूसरों के बारे में बात करने से खुश होती हैं.... क्या हम प्याज़ ,  लहसुन  के साथ में यह भी वचन ना ले की तन से, मन से,  कर्म से... ना किसी के लिए बुरा बोलेंगे... ना किसी का बुरा करेंगे.... कम से  कम इन   9 दिन तो करने की कोशिश करें.... क्या पता माता रानी को नया फॉर्मूला अच्छा लगे... पर उसकी दादी को बोलने की हिम्मत नहीं थी.... क्या पता उसके बोलने से बड़ों की इज्जत कम हो जाए.
 वह तो चुपचाप काम करते हुए सोच रही थी  कि चलो चिंटू के लिए बिना प्याज वाला पास्ता बनाते हैँ...क्यूंकि  चिंटू के भूखा जाने से पता नहीं माता रानी खुश हैँ क्या.... पर चिंटू की माँ तो नहीं...वो तो  उसको खुश करने की कोशिश में लगी थी .

 तो एक बार सब जोर से बोलो.... जय माता दी🙏

आखिर मेरा कुसूर ही क्या था 🤔😔

आखिर मेरा कुसूर ही क्या था 🤔😔

एक मां बाप ने अपने बच्चे  को घर से इसलिए निकाल दिया क्योंकि उसमें संस्कार नहीं थे..🙄. एक ने इसलिए  निकाल दिया कि बच्चे का रंग सांवला था और रिश्तेदार ताना देते थे.... और किसी ने इसलिए निकाल दिया  कि बच्चे का मन नहीं लगता था
आप सोच रहे होंगे ऐसा कैसे हो सकता है.... मैंने भी जब न्यूज़पेपर में यह न्यूज़ पड़ी तो बहुत ही सरप्राइज़ हुई की कोई मां बाप इतनी छोटी सी बात पर  कैसे अपने बच्चे को घर से निकाल देंगे.
Unbelievable... पर  ऐसा ही हुआ... बस फर्क सिर्फ इतना सा है कि वह बच्चे उनके सगे नहीं... गोद लिए हुए बच्चे थे.... तो... तो क्या हुआ... आखिर गोद लिए बच्चे क्या उनके अपने नहीं थे... जब उनको जरूरत थी अपनी जिंदगी का सूनापन दूर करने के लिए...अपने जीवन में खुशियां भरने के लिए... अपनी जिंदगी की कमी पूरी करने के लिए... तब उनको गोद ले लिया और अब उनको इतनी छोटी सी बात पर घर से निकाल  दिया.. मानो वो कोई बच्चे नहीं... कोई सामान हो... जिनको जरूरत ना होने पर बाहर फेंक दिया.
 अरे बच्चे में संस्कार नहीं थे तो उसे समझाते... प्यार से सिखाते... और हंसी आती है कि बच्चे का रंग सांवला था तो उसे बाहर निकाल दिया.. अरे उन रिश्तेदारों के तानो की परवाह कर  रहे हो.. वो तो तब भी ताने दे रहे होंगे जब तुमने बच्चा गोद लिया होगा...  तब तुम ने उनकी परवाह नहीं करी.... क्यूंकि तब तुम्हें अपनी खुशियों की परवाह थी... और हां किसी ने इसलिए  निकाल दिया कि बच्चे का मन नहीं लगता था... अरे कोशिश तो करते उसका मन लगाने की... अगर तुम उसको मन से नहीं अपनाओगे  तो उसका मन कहां से लगेगा... पहल तो तुमको ही करनी होगी.
 एक बार अपने दिल पर हाथ रख कर बताओ ... क्या तुम अपने खुद के बच्चे को भी ऐसे ही घर से निकाल देते... कभी नहीं...अरे  वह तो तुम्हारे सर पर खड़ा होकर भी नाचता  तो भी तुम उसको नहीं निकालते.
अरे भगवान ने तो  इन बच्चों को अनाथ बना कर पहले ही अन्याय किया है...वो  कैसे भी करके अपनी जिंदगी से समझौता करके चल रहे थे... तुमने  इनको अपना कर फिर   फेंक दिया.... तुमने तो इनको कहीं का नहीं रहने दिया... अब कैसे ये  वापस अपनी पुरानी दुनिया में जा पाएंगे.
 यह बच्चे और भगवान क्या तुम्हें कभी माफ कर पाएंगे.....अरे उनकी तो जाने दो.... क्या तुम्हारा जमीर वह तुम्हे कभी माफ कर पाएगा.... अरे पर  मैं भी क्या बोल रही हूं.... जो लोग इतना घिनौना काम कर सकते  हैं.... उनका क्या कोई जमीर होता भी होगा... कभी नहीं.
 ये  बच्चे जिंदगी भर समाज से यही सवाल पूछेंगे... आखिर हमको अपनाया ही क्यों  और फिर अपना कर फेंका ही क्यों...  आखिर इसमें हमारा क्या दोष  था. 😔😔

तुम करती ही क्या हो (A True story of housewives )

तुम करती ही क्या हो (A true story of housewives)
मम्मी कल टिफिन में समोसा रखना... मेरे फ्रेंडस  को बहुत पसंद है... नहीं मम्मी मैं  वेज इडली लेकर जाऊंगा..... हमेशा इसकी मनमानी नहीं चलेगी.... अरे  लड़ाई मत करो.... मैं दोनों की पसंद का रख दूंगी... पायल ने बच्चों की लड़ाई खत्म करते हुए कहा.... पायल कल मुझे जल्दी जाना है.... मीटिंग है... तो खाना जल्दी तैयार  कर देना... और हां कुछ अच्छा सा रखना साथ में और लोग भी होंगे.... अपने पतिदेव की बात सुन कर पायल एक बार तो टेंशन में आ गई पर फिर बोली... ठीक है तैयार  कर दूंगी
वैसे उसका अलार्म 5:30 बजे का है पर  कल जल्दी  हैँ तो उसने 5:00 बजे का सेट कर दिया... बिस्तर पर लेटी   ही थी की याद आया अरे इडली के लिए सूजी भिगोना तो  भूल ही गई और वह रसोई में सूजी भिगोने चली गई.
 सुबह अलार्म बजते से ही पायल मशीन की जैसे काम में लग गई और सबकी पसंद के अकॉर्डिंग खाना रेडी करने लगी... तभी गैस खत्म हो गई... एक बार तो उसको लगा पतिदेव की हेल्प ले लूं.. पर देखा तो वो  रेडी हो रहे थे... पायल  खुद ही सिलेंडर बदलने लगी... टेबल पर रखी चाय कब से उसका वेट कर रही थी पर  वह चाह कर भी  उसके पास नहीं जा पा रही थी.
आखिर भागदौड़ करके सबको भेजने के बाद  सोचा अब चैन से  बैठ कर चाय पीते हैँ...  तभी उसका मोबाइल बजा... काम वाली का फोन था... मैडम आज काम पर नहीं आऊंगी.... तबीयत ठीक नहीं है... सुनते ही पायल का दिमाग भन्ना गया... सिंक में रखे ढेर बर्तन उसको मुँह चिड़ा रहे  थे... और पूरी तरह बिखरा घर उसको ऐसे लग रहा था जैसे कोई  राक्षस खड़ा हो ... बुझे मन से उसने  ठंडी चाय एक घुट मे ख़तम करी   और घर के काम  में लग गई... घर का काम खत्म करते-करते उसको 12:00 बज गए... तभी याद आया कि dryclean वाले  के  एक महीने से कपड़े रखे हैं
..आज तो लाने ही पड़ेंगे...रेडी होकर वह कपडे लायी... इतने में  बच्चों के आने का टाइम हो गया... आते ही उनको खाना खिलाकर होमवर्क कराने लगी...  बच्चे बोले... मम्मी आज शाम को कुछ स्पेशल बनाना... रोटी सब्जी खा कर बोर हो गए... पायल शाम की प्लानिंग में बिजी हो गई...
 तभी पतिदेव आ गए.. बोले आज का दिन बहुत हेक्टिक था... कल संडे है... लेट तक उठूंगा.... सुनते ही पायल बोली... मैं भी आज बहुत थक गई.
.. कल मैं भी आराम करूंगी.. सुन कर बच्चे हंसने लगे... मम्मी आप तो घर पर ही रहती हो..आपका तो रोज ही संडे होता है... पतिदेव भी बोले... वैसे भी तुम दिन भर करती ही क्या हो... हर चीज की तो मेड हैँ... इतना सुनते ही पायल की  आंखों में आंसू आ गए... वो वाशरूम के बहाने अपने आंसू छिपाने लगी...  वापस आयी  तो देखा सब लोग मस्ती कर रहे हैँ... हॅस रहे हैँ...वह अपने परिवार की खुशियों में इन आसुओ की वजह से बाधा नहीं   बनना चाहती थी... वह भी उनके साथ मस्ती करने लगी... पर दिमाग़ में उसके कही ना कही चल रहा था की सच में... 'वो दिन भर करती ही क्या हैँ '😔🤷‍♀️


अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो 🤔🤔?

अगले  जन्म मोहे बिटिया ही कीजो 🤔🤔?

लड़की...
जीन्स पहनू....  मैं गलत...
रात को पार्टी करू... मैं  गलत...
लड़को के साथ बात करू... मैं  गलत...
लड़के  मेरे साथ गलत हरकत करें... तो भी मैं गलत...

लड़के...
रात को पार्टी... लड़के है....
लड़कियों को छेडे.... लड़के है....
लड़कियों को नीचा दिखाए...लड़के है....
लड़कियों को गलत नजर से देखे... लड़के है...

ओह अब समझ आया.. लड़कियों का पर्यायवाची गलत .... एंड लड़को का पर्यायवाची  सही है.
फिर मैं कैसे कहु.🤷‍♀️.. अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो.🤔?

  

ये उन दिनों की बात है 🤗🤗

ये उन दिनों की बात है 🤗🤗
 मम्मी मुझे लेट हो रहा है स्कूल के लिए...  मेरा टिफिन दो जल्दी... भैया तुझको कितनी बार बोला मेरे सामान के हाथ क्यों लगाया... मम्मी आप हमेशा दीदी का फेवर लिया करो... मैं तो फालतू हूं ना...  friends  चलो छुपन छुपाई खेलने.. नहीं पकड़म पकड़ाई खेलेंगे.
 आज तो बुधवार है... आज चित्रहार आएगा... गॉड शम्मी कपूर का गाना आ जाये.... और  उसी टाइम  लाइट चली गई तो... इस बार  रामायण में भगवान राम सीता को लेने लंका जायेंगे... मम्मी आप खाना जल्दी बना लेना.... नहीं तो आप रामायण नहीं देख पाओगे.... अरे कोई ऊपर जाकर एंटीना हिलाओ... पिक्चर साफ नहीं आ रही है.... मम्मी दादी हमेशा गुस्सा करती है कि रामायण के टाइम हाथ जोड़कर क्यों नहीं बैठते.

मम्मी इस बार गर्मियों की छुट्टी में मामा के यहां 1 महीने के लिए चलेंगे.... अरे बेटा स्कूल से आकर कपड़े तो बदल ले.... मम्मी भूल गई क्या कल संडे है.... मैं तो खेलने जा रहा हूं.
मम्मी पड़ोस से  अंकल आए थे..उनके यहाँ शादी है तो  गमले लेकर गए हैं घर सजाने को... मैं भी  उनकी हेल्प करने जा रहा हूं.
आज तू टिफिन में क्या लाई है... चल लंच करते हैं... अरे अभी तो सेकंड पीरियड है... टीचर डाँटेगी.... कोई नहीं चुपके से  खाते हैं.
 अरे क्या हुआ दोस्तों... कहां खो गए सब.... वापस आ जाइए... यह तो 'उन दिनों की बात है'.... 😊
यह बेफिक्री बेपरवाही  अब कहां नसीब अब तो तब की बेपरवाही ने कब जिम्मेदारी की चादर ओढ़ ली पता ही नहीं चला... तभी तो किसी ने क्या खूब कहा है...
'स्कूल का वो बैग
 फिर से थमा दे माँ
जिंदगी का बोझ उठाना मुश्किल है '
तभी तो हर इंसान को अपना बचपन इतना प्यारा होता है... इन यादों में जाकर  बाहर ही नहीं आना चाहता है... इन यादों में जाकर वापस बच्चा बन जाता है... सच बताइए आप भी बन गए थे ना बच्चा... आपके चेहरे पर भी एक मीठी मुस्कान थी ना.... क्यों नहीं होगी आखिर...ये ' उन दिनों की बात है'🤗🤗

करवा चौथ 🌛🌜(एक नयी शुरुआत )

करवा चौथ 🌛🌜(एक नयी शुरुआत )

नैना की शादी के बाद पहली करवा चौथ थी  वो  बहुत उत्साहित थी क्या पहनेगी कैसे तैयार होगी I इस दिन के लिए वो  बहुत ख़ुशी ख़ुशी  तैयारी रही थी I तभी नैना की 7 साल की ननद की  बेटी नेहा जो की इधर ही रहती थी क्योंकि उसके पापा की कुछ साल पहले डेथ हो गई थी,भागते हुए आयी,

 'मामी ये  आप क्या कर रही हो  कितनी सुंदर साड़ी हैं',

बेटा ये मैं कल पहनूंगी कल करवा चौथ है ना',

 ओह  मतलब आपका हैप्पी डे  और मम्मी और मेरा सैड डे',

कहते कहते नेहा   उदास हो गयी I इतनी  छोटी सी बच्ची  के मुंह से ऐसा सुनकर नेहा को बहुत बुरा लगा उसने नेहा को गोद में  बिठाया और   पूछा,

'बेटा ऐसे क्यों कह रही हो',

'मामी  कल मम्मा  बहुत उदास रहती है,  बाहर भी नहीं आती है,नानी  मना करती है,और पूजा भी  नहीं करती है I मुझे मम्मा को ऐसे देखकर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता'I

.नेहा बोले जा रही थी और नैना के मन में कुछ और चल रहा था I उसने नेहा से पूछा,

' बताओ  इसमें से तुम्हे  कौन सी साड़ी  पसंद है',

नेहा ने  एक साड़ी  पर हाथ लगाया I नैना ने  वो साड़ी अलमारी से  निकाल कर उसकी सब मैचिंग रेडी कर ली I
अगले दिन  सब व्रत तैयारी कर रहे थे,तभी नैना की सास ने उसे तैयार होने को कहा I नैना बोली,

'बस मम्मी अभी आई',

वो  नेहा की पसंद की  साड़ी अपनी  ननद के  कमरे में लेकर गई और उसने उस साड़ी को अपनी ननद को पहनने को कहा I नेहा की माँ ने  पहनने को मना किया तो नैना बोली,

'ठीक है मैं भी तैयार नहीं होंगी और मेरा व्रत तभी सही से होगा जब आप मेरे साथ रहोगे',

नेहा की माँ ने नैना को   बहुत समझाया पर नैना नहीं मानी,उसने कहा,

'अपनी नहीं तो नेहा की खुशियों के लिए ही मान जाओ',

आखिर नेहा की मां को तैयार होना पड़ा और बाहर भी आना पड़ा I नेहा अपनी मम्मी को देखकर बहुत खुश हुई I वो अपनी मम्मी और मामी  के साथ सब तैयारियों में व्यस्त हो गई उसका उत्साह अलग ही दिख रहा था,उसकी मम्मी जो  उसके साथ थी I
 रात को चांद देखने के बाद सब खाना खाने बैठे तो नेहा ने अपनी मामी  को अपने गले लगा लिया और और कहा,

'थैंक्यू मामी मेरी मम्मी का सैड डे हैप्पी  डे  बनाने के लिए',

सुनते ही सबकी आंखों में आंसू आ गये पर वो  दुख के नहीं खुशी के आंसू थे I नैना आज बहुत खुश थी और सोच रही थी की हमारे लिए ऐसी खुशी किस काम की जो दूसरे के दुख को और बढ़ाएं,किसी के दुख को  कम करके उसको थोड़ी खुशियां देने से ही तो त्योहार त्योहार बनता है Iआज वो   सच में बहुत खुश थी I

सफाई (cleaning)👨‍💻👩‍💻🧹🧹

सफाई (cleaning)👩‍💻👨‍💻🧹🧹
इन दिनों घर-घर में दिवाली की सफाई चल रही है ...यह हमारा बहुत पुराना कस्टम है.... दिवाली के लिए हम महीने भर पहले से साफ सफाई में लग जाते हैं... इस बहाने घर में जमी साल भर की धूल  भी  साफ हो जाती है और हमें हमारा ऐसा काफी पुराना सामान मिल जाता है... जिससे  हमारी काफी यादें जुड़ी होती हैं... या फिर ऐसा सामान जो हमारे लिए काम का नहीं होता.... पर किसी के लिए जरूरत होती है.... उसको घर से बाहर निकाल कर ना  सिर्फ हमारा घर हल्का   होता है.... हमारा मन भी हल्का हो जाता  है.
 जब भी सफाई शब्द सुनते हैं... तो मन में यही आता है.... घर की सफाई,  कॉलोनी की सफाई या हमारे देश की सफाई.... आजकल तो  लोग बहुत  जागरूक भी हो रहे हैं देश को स्वच्छ बनाने में.... एक बार गंदगी फैलाने से पहले   सोचते हैं.

 लेकिन  क्या सफाई से मतलब यही है.... क्या और भी ऐसी जगह नहीं है जहां की सफाई की बहुत ज्यादा जरूरत है.... एक ऐसी जगह जो हमारी जिंदगी का हिस्सा है जहां हम हमारा आधा टाइम गुजारते हैं.... वो है सोशल मीडिया.
आप सोच रहे होंगे... सोशल मीडिया की सफाई मतलब... पर यह एक ऐसी  जरूरत है जिसकी सफाई होनी बहुत जरूरी है और एक बॉलीवुड कलाकार  अनन्या पांडे ने भी  2nd   अक्टूबर को इसके लिए आवाज उठायी हैं...   सच में ये एक  बहुत जरूरी काम है  ... हम सबको  इस तरफ ध्यान देने की जरूरत हैं.
आजकल लोग किसी से गुस्सा है.... तो सोशल मीडिया का यूज करते हैं... किसी से हर्ट हैं तो सोशल मीडिया....  बिना वजह किसी को ट्रोल करते हैं.... यह भी नहीं सोचते कि जिसको शिकार बना रहे हैं उसको कितना हर्ट होगा.... और अगर आपको किसी से शिकायत है  तो पर्सनली  जाकर उसको बताओ... दुनिया को बताने की क्या जरुरत है...
किसी की पिक्चर को एडिट करके उसका मिसयूज करना.... और भी ना जाने क्या क्या गंदगी फैलाते हैं... फेक वीडियोस को सच बता कर वायरल कर देते हैं... कितनी बार इस वजह से लोगों में डिस्प्यूटज भी हो जाते हैं ... बहुत ही क्रिटिकल सिचुएशन हो जाती है... कई बार लोग इतना हर्ट हो जाते हैं और बहुत ही गंभीर कदम उठा लेते हैं... जिसका मैं यहां जिक्र करना भी पसंद नहीं करूंगी.
तो  मैं सब से रिक्वेस्ट करती हूं कि सोशल मीडिया का यूज़ पॉजिटिविटी के लिए करें.... क्यों नेगेटिविटी फैलाना.... अगर किसी से शिकायत है तो पर्सनली जाकर  मिलो...  पर प्लीज सोशल मीडिया को अपने घर के जैसे साफ रखें. 🙏

विदाई.. बेटे की 🚶‍♂️🚶‍♂️🚶‍♂️🚶‍♂️

विदाई.... बेटे की🚶‍♂️🚶‍♂️🚶‍♂️🚶‍♂️
आज तक हम सब  सुनते आए हैं की लड़की तो पराया धन है.... किसी और की अमानत होती है... शादी के बाद परायी हो जाएगी... और हमें लड़की के मां-बाप से बहुत सहानुभूति होती है... की कैसे वो अपने जिगर के टुकड़े को किसी और को देंगे... कितनी तकलीफ होगी उनको.... बचपन से हम सब यही सुनते और समझते आये  हैं कि लड़की तो पराई हो जाती है.
पर क्या आपने कभी यह सोचा कि लड़की ही नहीं शादी के बाद तो लड़का भी पराया हो जाता है... अजीब लग रहा है ना सुनने में... पर यह बात बिल्कुल सच है.... लड़का भी शादी के बाद पराया हो जाता है... चाहे वह उसी घर में रहे   पर अब वो अपने मां-बाप के लिए पराया हो जाता है... कैसे... 🤔🤔
अब मां बाप अपने बेटे पर अपना हक पहले जैसे नहीं जमा सकते.... उसकी पत्नी के सामने उसको डांट नहीं सकते.... जो माँ शादी के पहले अपने बेटे की छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखती थी...उसने  खाना खाया या नहीं... वह कहां जा रहा है.... कब आएगा... दिन भर  कहां था... उसकी अलमारी सही करना... गलती होने पर उसको डांटना... प्यार आने पर उसको गोदी में सुलाना.... उसके बालों में मालिश करना... पर क्या  शादी के बाद वो ऐसा कर पायेगी...  और अगर बेटा करवाना भी चाहे तो ये सोसाइटी उसको मम्मा  बॉय बताकर उसका मजाक बनाएगी.. और वो चाहकर भी अपने मां बाप से पूछ कर कोई काम नहीं कर पाएगा...क्यूंकि अब  वो  मैरिड मैन है...रेस्पोंसिबल मन है.
पर बेटी शादी के बाद  भी इस घर से जुड़ी रहती है... लाइफ में कोई भी प्रॉब्लम आए... वह अपने मां बाप से शेयर करती है... लाइफ की तो जाने दो... कौन सी सब्जी में कौन से मसाले पड़ेंगे... अपने बच्चे को कैसे पाले... वह भी अपनी मां से पूछती है... क्योंकि उसको पता है की यह सोसाइटी उसको मम्मा गर्ल कह कर उसका मजाक नहीं बनाती है... वो मन से हमेशा अपने पेरेंट्स से जुड़ी रहती है.
इसलिए शादी के बाद बेटी ही नहीं बेटा भी विदा होता है... फर्क सिर्फ इतना है कि बेटी इस  घर से विदा होती है... पर बेटा मां-बाप की जिंदगी से विदा होता है...जो  शायद और भी तकलीफ देह होता है .
मुझे तो ऐसा ही लगता है...प्लीज आप लोग अपने व्यूज बताइयेगा 😊

कौन सही.... कौन गलत 🤔🤔

कौन सही... कौन गलत 🤔🤔
Scene 1st (पार्ट A)
बहू का दर्द...
मेरे सास ससुर मुझको  अपने हिसाब से जीने नहीं देते... हमेशा इनके अकॉर्डिंग चलो... आखिर मेरी भी तो लाइफ है... कभी खाना खाने का मन ना हो तो भी उनके लिए तो बनाना ही पड़ेगा... हर बात में रोक-टोक...  अपने मन से कपड़े भी नहीं पहन सकते.... हमेशा उनकी बेटी सही और मैं गलत... बेटे को भी अपने अकॉर्डिंग चलना  चाहते हैं... फिर मुझे लाये क्यों....  फ्रीडम तो  लाइफ में है ही नहीं... घुट -घुट कर रहो.
पार्ट B
सास का दर्द....
 मेरी बहू जब देखो अपनी-अपनी चलाती  हैं....
हमारी तो सुनती नहीं... बेटे को भी अपना गुलाम बना लिया... हम तो जैसे हैं ही  नहीं... मेरी बेटी को देखो कितना काम करती है ससुराल में... यह तो जो मन आये वह कपड़े पहनती हैं...रोज रोज  बाहर जाना... घर में तो मन लगता ही नहीं... बड़ो से पूछने का तो कोई काम है   ही नहीं.
Scene 2(पार्ट A)
बेटी का दर्द...
मेरे मम्मी पापा बहुत दुखी है... भाभी को देखो... कुछ भी नहीं करती मम्मी पापा के लिए.... उन्होंने खाना खाया या नहीं खाया... दवाई ली या नहीं... कोई मतलब नहीं... वह कैसे रह रहे हैं कोई ध्यान नहीं.... अपने हिसाब से रहना, कपड़े पहनना... घर पर तो कभी रहती  नहीं... भाई  को भी अपना गुलाम बना लिया.
(पार्ट B)
माँ का दर्द...
मेरी बेटी ससुराल में इतना काम करती है.... सास ससुर नाच नचाते   हैं....उनके ही अकॉर्डिंग रहती है
...अपने मन से कुछ नहीं कर पाती... कपड़े भी उनकी पसंद के पहनो... जमाई को देखो... वो भी मां-बाप के कहने में ही चले.... बेचारी बहुत ही दुखी है.
😊😊😃😃क्या हुआ... क्या सोच रहे हैं.... मुझे नहीं लगता अब कुछ कहने की जरूरत है.... आप समझ गए होंगे मैं क्या कहना चाहती हूं... कि कौन सही है कौन गलत है... अगर हम जो दूसरों से एक्सपेक्ट करते हैं... खुद वैसे बन जाए... तो शायद किसी बेटी को अपने मां-बाप की चिंता नहीं रहेगी... और किसी मां बाप को  अपनी बेटी  की...🤗🤗😉😉
हां थोड़ा मुश्किल जरूर है.. पर आजमा कर देखो.
..अगर आप अपने मां बाप और बेटी से सच्चा प्यार करते हो तो इतना तो  उनके लिए कर ही सकते हो.... आपकी ये  इनडायरेक्ट कोशिश का उनको डायरेक्ट फल मिलेगा.... एक बार करके तो देखो.🤗🤗


Generation gap 👨‍👩‍👧‍👦

Generation gap👨‍👩‍👧‍👦
सुनो आप कुछ ज्यादा ही फ्रैंक  नहीं होते क्या रोहन के साथ.. मेरे ख्याल से  पेरेंट्स और बच्चों  में  खुलापन तो होना चाहिए  पर थोड़ी झिझक भी होनी चाहिए...   ताकि बच्चों में डर रहे... रेस्पेक्ट रहे... रोहन की मम्मी ने रोहन के पापा को समझाते हुए कहा तो रोहन के पापा ने हंसते हुए बोला तुम ना बहुत सोचती हो... ऐसा  कुछ नहीं है... आजकल बच्चों के साथ फ्रेंडशिप रखनी चाहिए... जिससे वह हमसे कुछ छिपाये नहीं और वह हम से डरे भी नहीं... तभी तो यह जनरेशन गैप  खत्म होगा और देखना मैं  ये गैप खत्म करके रहूंगा...रोहन की मम्मी ने कहा आपको समझाना बेकार है और वह अपने काम में लग गई.
अगले दिन रोहन के पापा ने रोहन से कहां... बेटा आज मुझे ऑफिस में ज्यादा काम नहीं है... चलो अपन आउटिंग पर चलते हैं... रोहन ने कहा पापा आज तो मेरा  फ्रेंड्स के साथ पहले से प्रोग्राम है... मैं नहीं आ पाऊंगा... अरे तो क्या हुआ... फ्रेंड्स को भी बुला लो... हम सब साथ चलते हैं... और मैं तो वैसे भी तुम सबके साथ बहुत फ्रैंक हू...  मुझसे क्या छुपा है. वी विल स्पेंड ग्रेट टाइम buddy...
रोहन थोड़ा परेशान हुआ पर जब  उसके पापा ने बहुत इंसिस्ट किया तो उसने कहा ठीक है... मैं फ्रेंडस से बोलता हूं... तभी रोहन के पापा का फोन आ गया.. और वो दूसरे रूम में चले गये.
रोहन ने  अपने फ्रेंड्स को कांफ्रेंस पर  लेकर कॉल किया और बताया कि पापा भी साथ चलेंगे... सब एक साथ बोले... तू पागल है... मैं नहीं आ पाऊंगा... एक-एक करके सब फ्रेंड ने  मना कर दिया... रोहन बोला पता मुझे भी है... पर क्या करूं वह मान ही नहीं रहे... ऐसा करता हूं कोई बहाना बना देता हूं... हम कभी और चलते हैं... सब फ्रेंड्स एग्री हो गये... रोहन का फोन स्पीकर पर था... पीछे से रोहन के पापा ने सब सुन लिया पर वह अनजान बने रहे. रोहन पापा के पास आया पर उसके  बोलने से पहले ही वह बोले बेटा मुझे तो ऑफिस में अर्जेंट काम आ गया तो मैं तो तुम लोग के साथ नहीं आ पाऊंगा... नेक्स्ट टाइम... तुम लोग जाओ अभी... रोहन मन ही मन बहुत खुश था... क्योंकि अब उसका प्रोग्राम कैंसिल नहीं होगा.... रोहन के जाने के बाद रोहन के  पापा ने रोहन की मां को चाय बनाने को कहा तो वह बोली आपको तो अर्जेंट काम था... क्या हुआ जा नहीं रहे..
तब रोहन के पापा बोले...  तुम सही कहती  थी... बच्चों में और पेरेंट्स में एक रेखा होनी चाहिए... तभी रिश्तो का सम्मान   रहता  है... शायद इसको ही सो कॉल्ड जनरेशन गैप कहते हैं... जो शायद हमेशा ही रहेगा. रोहन की मम्मी ने रोहन के पापा के कंधे पर हाथ रखा और कहा आप बैठे मैं आपके लिए चाय लाती हूं.. वी विल स्पेंड ग्रेट टाइम... जस्ट चिल...  और दोनों ठहाका मार  कर हंसने लगे. 

Friday, 24 January 2020

जरुरी तो नहीं 🤷‍♀️

जरुरी तो नहीं🤷‍♀️
एक वीडियो कॉन्फ्रेसिंग सेशन मे शाहरुख़ खान से उसके चाहने वाले ने पूछा.... कि हमारे सही काम के बदले में कोई हम से घृणा करें तो क्या करें.... तो शाहरुख खान ने बोला.... सही चीज पर्सनल  होती है.... किसी दूसरे की उम्मीद या  डिमांड पर आधारित नहीं होती..... नफरत या प्यार उसे जस्टिफाई नहीं करता... सही चीज किसी से एक्सपेक्टेशन नहीं चाहती.
ये बात मुझे बहुत ही सही लगी ... अगर हम ध्यान से देखें तो कितनी सही बात है... आज हम लोग कोई सही या अच्छा काम करते हैं तो दूसरों से आशा करते हैं कि वह उसकी तारीफ करें... प्रशंसा करें... और नहीं भी करें तो कम से कम घृणा तो नहीं करें.
लेकिन ये  जरूरी तो नहीं कि जो काम हम सही कर रहे हैं दूसरों को वह सही ही लगे और वैसे भी अगर तुम्हारा काम सही है तो करते रहो.... और इसको तो पॉजिटिव लो की अगर कोई तुमसे नफरत  कर रहा है तो इसका मतलब तुम्हारा काम सही है...इसको तो इनाम समझो.... क्यूंकि तुम्हारा काम सही हैँ  तभी वो तुमसे  नफरत कर रहा हैँ... नहीं तो वो तुमसे कोई मतलब ही नहीं रखते....
अगर तुम सही काम कर रहे हो तो लगातार करते रहो.... किसी के प्यार या नफरत की परवाह मत करो... और ऐसा करके हमारा ध्यान काम पर नहीं लोगो की राय पर ज्यादा होगा जिससे हमारे काम पर भी असर होगा...  वैसे भी तुम अपने काम के लिए उनकी राय को इतना महत्व दे रहे हो... इसका मतलब तुम खुद sure नहीं हो की तुम सही हो या नहीं... तुम उनको  अपनी जिंदगी का इतना इंपॉर्टेंट हिस्सा बनाते ही क्यों हो.... just let them go and do your work in right direction. 

Wednesday, 22 January 2020

मैं लिखती हूँ क्यूंकि.... ✍✍✍

मैं लिखती हूँ क्यूंकि....✍✍✍✍
1,  2, 3,  5, 10, 15,  20, 30,  40, 45 और ये 50.... जी हां फ्रेंड्स आज ये मेरा 50th ब्लॉग  है... 😃😃...सच बताऊं तो मुझे भी यकीन नहीं हो रहा कि मैंने इतने ब्लॉग्स लिख दिए...पर इसमें मेरा अकेले का ही हाथ नहीं हैं.... आप सबका.. मेरे एक, एक रीडर, व्यूअर का हाथ हैं....अगर आप सब मुझको नहीं पढ़ते.. मुझको कमेंट नहीं करते तो क्या मैं कभी इस पॉइंट पर आ सकती थी... कभी नहीं.. आप सबने अपने कीमती समय से समय निकाल कर मुझको पढ़ा... तो आप सब का मैं दिल से शुक्रिया करती हूँ.🙏
 एक्चुअली मैं  केवल  ब्लॉग्स ही नहीं लिख रही... मैं कर रही हूँ आप सब से अपने दिल की बात... शेयर कर रही हूं अपने  दिल की बात जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.
 ऐसे ही बैठे -बैठे मेरे मन में ख्याल आया कि  मैं क्यों लिख रही हूँ... मुझे इससे मिल क्या  रहा हैं .....कुछ भी तो नहीं... तो क्यों न  मैं लिखना  बंद कर दूँ... पर तभी लगा की हर काम का कोई रिवॉर्ड मिले.... ऐसा जरुरी तो नहीं... ये  तो मेरा शौक हैं जिसको मैं खुल कर जी रही हूँ. 🤗
.मैं एक हाउस वाइफ हूँ... जिसके काम का  कोई एन्ड नहीं होता.....दिन का बहुत कम समय वो अपने लिए निकाल पाती हैं.... मैं मेरे उस बिजी schedule में  से टाइम निकाल कर कुछ लिख रही हूँ .... क्यूंकि लिखने से मुझे खुशी मिल रही हैं... एक सेल्फ सेटिस्फेक्शन मिल रहा है... लिखकर मैं अपने आप को दुनिया के सामने खोल रही हूं... मेरे दिल की बातें लिख रही हूं...मुझे लगता है मैं अपने लिए कुछ टाइम निकाल रही हूँ... वह टाइम जो केवल मेरा हो... मेरे लिए हो... मैं चाहती हूं कि मैं कुछ ऐसा लिख सकूँ  जो लोगों के दिल को छू जाए... उनके चेहरे पर मुस्कान ला सके... उनको कुछ सोचने को मजबूर कर दे.. इसलिए मैं अब लिखने लगी हूं... पता नहीं मेरा यह सफर किस मंजिल तक जाएगा... पर सच बताऊ ... मुझे तो मंजिल पर पहुंचने की कोई जल्दी नहीं है... मुझे इस सफर में ही इतना मजा आ रहा है क्योंकि इसमें आप सब.. मेरे अपने.. मेरे साथ है ..और किस को अच्छा नहीं लगता अपने अपनों का साथ...  इसलिए बस मैं यही चाहती हूं कि मेरे इस  सफर में आप सब मेरे साथ यूं ही बनी रहे... आज मैं खुद से एक  प्रॉमिस करती हूँ की मैं लिखती रहूंगी...  और कुछ नहीं मिला तो क्या है... कम से कम खुद तो अपने आप से मिलती रहूंगी... और अपने आपको तो खुश रखूंगी... और आज के टाइम में खुद को खुश रख पाना  भी एक कम चैलेंज नहीं है... तो आज  मैं खुद से प्रॉमिस करती हूं... keep writing... keep writing..... ✍✍✍
मैंने आज तक बहुत से ब्लॉग्स  लिखे... डिफरेंट टॉपिक्स... डिफरेंट सब्जेक्ट... पर जो ब्लॉग्स मेरे दिल के पास हैं वो हैं...
माँ की  परेशानी,
आज का अकेलापन,
 दुआएं,
तुम करती ही क्या हो,
ससुराल के मायने,
 मेरी अम्मा,
दिवाली की भागदौड़,
लंच बॉक्स...,
पर ये तो  मुझे पसंद आए... अगर आपको भी मेरे ब्लॉग्स याद हैं...  तो कमेंट बॉक्स में बताएं कौन सा ब्लॉग आपके दिल को छुआ... किसने आपके चेहरे पर मुस्कान ला दी... और किस ब्लॉग  ने आपको कुछ सोचने को मजबूर कर दिया..और अगर आपको  मेरा कोई ब्लॉग ऐसा लगता हैं की इसको शेयर कर सकते हैं तो प्लीज शेयर  विथ  योर फ्रेंड्स, रिलेटिव्स... 🙏🙏
मैंने मेरी भावनाओं को  कुछ शब्दों में पिरोया है..

लिखकर में रखती हूं अपने दिल की बात...
लिखते समय मैं होती हूँ  खुद के पास...
लिखने से  होती है मुझे आत्म संतुष्टि...
 लिखकर मैं  आती हूं आपके पास...
लिख पर मैं लाना चाहती हूँ आपके चेहरों पर मुस्कान...🙂
लिख कर मैं चाहती हूँ आपका मेरे अपनों का साथ...
लिख कर मैं लेना  चाहती हूँ मेरे इस सफर का मजा...
और ज्यादा भी नहीं मिला तो कम से कम रख पाऊँगी खुद को ही खुश...🤗
जो हैं आज के समय में  बहुत बड़ी जिम्मेदारी... तो आज मैं अपने आप से करती हूं एक वादा...
Keep writing...✍✍✍keep smiling🤗🤗

Sunday, 19 January 2020

कम्फर्ट जोन (comfort zone)

कम्फर्ट जोन (comfort zone )
 कंफर्ट- आराम,  सुकून....जोन - दायरा,  क्षेत्र.
 आप सोच रहे होंगे कि मैं क्या इनका मीनिंग बता रही हूं... यह तो हम सबको मालूम है.... मुझे मालूम है फ्रेंड्स...  आप सब बहुत इंटेलिजेंट है... और सब इसका मतलब जानते हैं.😉
यहाँ मैं  बात कर रही हूँ  कंफर्ट जोन की... जो हर आदमी अपनी जिंदगी में बनाकर रखता है और नेचुरल हैं की वो अपने बनाये हुए कम्फर्ट  जोन  में बहुत सुरक्षित,  बहुत सुकून महसूस करता है और  करना भी चाहिए आखिर ये कम्फर्ट जोन उसका ही बनाया हुआ है और हर किसी का कम्फर्ट जोन होना भी चाहिए क्यूंकि आदमी अपने बनाये हुए कम्फर्ट जोन में बहुत खुश भी रहता हैं और खुशी से बढ़कर क्या चीज है.
हर किसी का कंफर्ट जोन अलग अलग होता है... स्टूडेंट्स,  बच्चे अपने बनाए हुए फ्रेंड्स,  स्कूल, अपने घर को कंफर्ट जोन कहते हैं... जैसे ही उनको यहां से हटा कर कहीं अलग भेजा जाता है या कुछ अलग पढ़ाया जाता है वह घबरा जाते हैं.... बड़े लोग अपने जमे जमाये बिजनेस, सर्विस को कम्फर्ट जोन   कहते हैं.... लेडीज अपने घर, अपनी किचन,  अपनी फैमिली,  अपनी सोसाइटी में कंफर्ट जोन में रहती हैं.
जब भी कोई इनसे कहता हैं  इससे कुछ अलग करो, कोई नया बिजनेस करो,  कोई  नया जॉब, अपनी हॉबी ट्राई करो तो हम घबरा जाते हैं...uneasy   हो जाते हैं और मना कर देते हैं.... giveup कर देते हैं.
 पर अगर हम हमारे आस पास बहुत से लोगो को  देखे ... जैसे कि मैरीकॉम,  सानिया मिर्जा उन्होंने शादी, बच्चे होने के बाद भी giveup नहीं किया...  अपने कंफर्ट जोन से बाहर आयी  और आज पूरी दुनिया में अपना नाम किया और हम सब आज उनकी और प्रशंसा से देख रहे हैं... पर आपने सोचा कि यह भी मना कर देती अपने कंफर्ट जोन  से  बाहर आने को तो क्या हम उनकी ऐसे ही प्रशंसा करते.
नितेश तिवारी डायरेक्टर ऑफ दंगल,  छिछोरे और भी बहुत सी मूवीज के डायरेक्टर... जानते हैं इन्होंने आईआईटी मुंबई से इंजीनियरिंग करी... पर इनका बहुत मन था इस फील्ड में आने का... उन्होंने  हिम्मत करके अपने कंफर्ट जोन से बाहर आकर इधर हाथ आजमाया और आज हम सभी इनकी  मूवीस के दीवाने हैं. सुशांत सिंह राजपूत, कृति सेनन, दिशा पाटनी ये  सब इंजीनियरिंग कर रहे थे पर इन्होंने भी हिम्मत करके अपना लक दूसरे फील्ड में आजमाया.
मार्क  जुकरबर्ग, जेफ़ बेजोस और भी बहुत बड़े बड़े बिजनेसमैन,इंडस्ट्रियलिस्ट सबने अपना आराम का दायरा छोड़कर अपना एक अलग मुकाम बनाया और पूरी दुनिया ने इनका लोहा माना.
इसलिए मेरा मानना है कि अगर हमें कुछ अलग करना है... दुनिया में हमारा नाम करना है... अपना हुनर., अपनी कला,  अपना टैलेंट सब के सामने लाना है तो हम सबको अपने कंफर्ट जोन से बाहर आना ही पड़ेगा.... हां मुश्किल जरूर है पर उसका जो फल होगा वह उतना ही मीठा होगा और उसकी मिठास का अपने को अंदाजा भी नहीं होगा.
वैसे  ये भी जरूरी नहीं कि हम कम्फर्ट जोन  से बाहर आकर सक्सेस ही होंगे ,  पूरी दुनिया में हमारा नाम ही होगा.. पर एटलीस्ट हम कोशिश तो कर रहे हैं...और इससे हमें  कुछ सीखने को ही मिलेगा तो क्या आप तैयार हैं अपने अपने कम्फर्ट जोन  से बाहर आने के लिए पर हां  पहले आप अपने को सिक्योर कर ले फिर ही  इससे बाहर आए.
 कई लोग अपने बनाए कंफर्ट जोन में   इसलिए भी  रहते  हैं कि वह डरते हैं कि दुनिया क्या कहेगी, बात बनाएगी, हसेगी...  तो दोस्तों मेरा मानना हैं की वो तो वैसे  भी बात बनाएंगी... अगर आप कम्फर्ट जोन में हो तब भी और कुछ अलग करते हो तब भी.. तो मेरी तो सलाह हैं    एक बार बाहर आकर तो देखो कम से कम आपको  यह मलाल  तो नहीं रहेगा कि देखो हमने try ही नहीं किया... औरों के लिए नहीं अपने लिए.... एक बार  बाहर आकर तो देखो. 🤗🤗