Jindagi ek unsuljhi paheli

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Sunday, 26 January 2020

वक्त

वक्त
"मेरा पानी उतरते देख किनारे पर घर मत बना लेना, मैं समुन्दर हूँ लौट कर जरूर आऊंगा "
कल मैंने ये लाइन न्यूज़ पेपर में पड़ी जी की अमित शाह ने  जो की  सेंटर में होम मिनिस्टर हैं... उस टाइम कही  थे जब कांग्रेस गवर्मेंट में वह एक केस से बाहर निकल कर आए थे... उस टाइम पी. चिदंबरम होम मिनिस्टर थे. अब जैसा आपको पता ही है कि अब पी चिदंबरम सीबीआई कस्टडी में है और  उसी बिल्डिंग में लाए गए जिसका उन्होंने मिनिस्टर रहते इनॉगरेशन किया था.
आप सोच रहे होंगे मैं आज शायद पॉलिटिक्स से रिलेटेड कुछ लिख रही हूं... तो नहीं ऐसा कुछ नहीं है. मैं आपको ध्यान दिलाना  चाहती हूं कि यहां अमित शाह ने जो 'मैं' यूज़ किया... वहां उनका मतलब खुद से नहीं बल्कि टाइम से,  समय से है. जी हां दोस्तों वक्त बहुत ही मजबूत होता है... अगर इंसान का वक्त सही नहीं है  तो वह कितना भी कोशिश कर ले उस की हर चाल उलटी होती हैँ... उसको सही होने पर भी गलत ही समझा जाता है..बट  अगर इंसान का वक्त सही है तो समझो सब सही है... उसकी बात पत्थर की लकीर होती है.. दुनिया में उसकी तूती बोलती है और सब उसको फॉलो करना चाहते हैं... इन स्पाइट वो गलत ही  हो. हम सुनते भी आए हैं कि वक्त बहुत बड़ा मरहम होता है जो हर जख्म को भर देता है और पुराने से पुराने घाव को हरा कर देता है. एक सॉन्ग भी है कि...
 "वक्त इंसान का ऐसा भी कभी आता है
 राह में छोड़ कर साया भी चला जाता है... दिन भी निकलेगा कभी रात के आने पर ना जा ".
अगर वक्त सही नहीं हैँ तो दुनिया तो दूर की बात  अपने भी साथ नहीं देते. पर ऐसा नहीं है रात के बाद सुबह भी आती है... इसलिए हमें अगर वक्त सही नहीं है तो ऐसा नहीं कि हम मेहनत ना करें क्योंकि जैसा हम सब जानते हैं काम करते रहो क्योंकि "अपना टाइम आयेगा"..बस हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि जब वक्त हमारा हो तो हमें अकड़ नहीं दिखानी चाहिए... हम में घमंड नहीं आना चाहिए क्यूंकि  पता नहीं ऊँट कब किस करवट बैठेगा और जो दुनिया आज हमको सर आंखों पर बैठा रही है वह  हमें पटक भी सकती है. इसलिए  दोस्तों हमें वक्त के साथ चलना चाहिए और सही टाइम का वेट करना चाहिए और अपने काम से दुनिया को जवाब देना चाहिए ना की अपनी अकड़ से. 

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