Jindagi ek unsuljhi paheli

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Tuesday, 13 October 2020

परवरिश एक माँ की

 कुछ दिन से मन में उथल-पुथल चल रही है, एक  खबर सुनने और पढ़ने को मिली, जबसे सैफ अली खान की बेटी सारा ड्रग्स केस में फसी, सैफ  अमृता  से बहुत गुस्सा है और उसने तो गुस्से में अमृता की परवरिश तक पर ही सवाल उठा  दिए !

पता नहीं यह खबर सच है या नहीं, पर सैफ  अमृता की  परवरिश पर सवाल उठा रहा है, पर वह उस समय कहां था जब उसके बच्चे बड़े हो रहे थे,  जब उनको अपने पापा की जरूरत थी!

 एक इंटरव्यू में सैफ अली खान ने बोला, सारा और इब्राहिम मुझसे बस एक फोन कॉल की दूरी पर है, तो क्या जरूरी है बच्चे जब किसी समस्या में होंगे तो तुमको फोन करेंगे, नहीं बच्चों के मन में बहुत कुछ चल रहा होता है, विशेषकर किशोरावस्था में,  जो वह कभी अपने पेरेंट्स से  शेयर नहीं करते, पेरेंट्स को उनके मन से खोदकर निकालना पड़ता है, पर क्या सैफ  उनके पास थे अपने बच्चों का मन पढ़ने के लिए, नहीं ना, वह तो किसी और से शादी करके अपना अलग घर बसा चुके थे, फिर कैसे  अमृता सिंह पर आरोप लगाया परवरिश का, उसको यह अधिकार भी किसने दिया !

श्वेता तिवारी की बेटी पलक जिसने अभी हाल ही में अपना18 वा  जन्मदिन मनाया, उसके पापा मतलब श्वेता तिवारी के पहले पति ने उसे विश किया !

श्वेता ने दो  शादी करी, पर दोनों ही सफल नहीं हुई, और दोनों बच्चों को अपने साथ लेकर अलग रह रही है !

श्वेता तिवारी ने भले दो शादी कर ली, पर  शादी टूटने पर भी अपने बच्चों को नहीं छोड़ा, आज उसके पहले दोनों  पति भले  शादी करके अलग घर बसा ले,  पर वह कभी अपनी पहली पत्नी के बच्चों को अपने पास रखने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगे, यह तो एक  माँ ही है जो अकेले दम पर अपने बच्चों को हर हालत में पाल  सकती है, फिर चाहे वह अमीर हो या गरीब !

पर एक बाप चाहे वह कितना ही अमीर हो, अकेले पालने  की हिम्मत नहीं कर सकता,  हां कुछ अपवाद हर जगह होते हैं!

 इसलिए कभी एक मां की परवरिश पर आरोप मत लगाना, वह अपने बच्चों के लिए किसी से भी लड़ सकती हैँ !

Thursday, 8 October 2020

भरोसा

 अभी-अभी दरवाजे पर धोबन  आयी,  उसने अपने आप कपड़े कमरे में रख दिए और मैंने भी उसे पैसे दे दिए !

 ना मैंने कपडे गिने,  ना उसने पैसे गिने,  दोनों ही कोविड के रूल्स  फॉलो करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रख रहे थे , अचानक मेरे मन में आया कि पहले जब वो आती  थी तो कितनी झिकझिक होती थी, उसके सामने एक एक कपड़ा गिनती, उसका भी पैसों के लिए किच किच  करना,  मैं कहती देख कैसे कपड़े प्रेस किये , पर अब बिना कुछ बोले हम दोनों अपना-अपना काम  रहे हैं हैँ !

पर ताजूब ना मुझे कभी कोई शिकायत आई,  कपड़े हमेशा  पूरे होते, सही से प्रेस होते,  ना कभी उसने पैसों के लिए ही कुछ कहा !


क्यूंकि इस कोरोना  ने भले हमसे सब कुछ छीन लिया, हमारी खुशियां,  हमारा घूमना फिरना, हमारी आजादी, पर अब लोग इस भरोसे के भरोसे ही जी रहे हैं,  उन्हें पता है कि भगवान ने हमें इतना बड़ा आईना दिखा दिया अगर अब भी एक दूसरे को धोखा देंगे तो फिर जी कैसे पाएंगे, एक ये  विश्वास और भरोसा ही बचा है जो हमें  हिम्मत दे रहा है !

आप लोग भी lockdown में  किराने का सामान लाए होंगे, बस किराने वाले को पर्ची  दे दी होगी, उसने जो सामान दिया होगा.. बिना चेक करें उसे घर ले आए होंगे, मुझे नहीं लगता बाद में  किसी को कोई शिकायत हुई  होगी की सामान कम या ज्यादा हैँ या  खराब निकला और किराने वाले को भी पेमेंट पेटीएम कर दिया होगा या कैश दिया होगा, कोई बहस नहीं, कोई बार्गेनिंग नहीं !


शुकर हैँ इस कोरोना ने  हमें अपनों से दूर कर दिया, पर  गैरों पर भरोसा करना सिखा  दिया !

Thursday, 1 October 2020

नज़रिया

 पेपर में एक वाक्या पढ़ कर  दिल को   छू गया I


एक लड़की ने अपना  संस्मरण सुनाया कि जब पहली बार उसने आलू का परांठा बनाया तो तवे  पर डालते ही उस परांठे के  20 टुकड़े हो गए,लड़की के पापा बोले, 

'वाह आज तो परांठे के टुकड़े भी नहीं करने पड़ेंगे ', और उसकी मम्मी की आंखें नम हो गई I


 होने  को बहुत मामूली सी बात थी, पर यह कहीं ना कहीं मेरे दिल को छू गई I

अपने पराठे के टुकड़े देखकर वैसे ही उस लड़की का दिल टूट गया  होगा,  पर अपने पापा की बात सुनकर उसका टूटा हुआ दिल फिर से जुड़ गया होगा और उसने सोच लिया होगा कि अब दोबारा अच्छे से कोशिश करेगी और बिल्कुल सही पराठा बनाएंगी, क्यूंकि उसको विश्वास था की अगर वो गलती करेगी तो उसके अपने उसके साथ होंगे,बजाय उसका मज़ाक बनाने के उसकी गलती सुधारने में साथ देंगे I


पर अगर उस परांठे के टुकड़े देखकर उसके पापा उस पर हँसते,  उसकी मम्मी उसको डांटती   तो पहले ही उसका दिल जो अपने पराठे की दशा देख कर  टूटा था, पापा मम्मी के तानों से शायद और टूट जाता  और शायद ना तो वो  दोबारा कोशिश करती  या फिर कुकिंग से ही जी  चुराती, क्यूंकि उसको डर होता की उसकी गलती पर सब हंसेंगे I

हम जानते हैं कि कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता, कहीं ना कहीं कोई न कोई गलती करता है तो यह हमारे पर है कि हम हमारा नजरिया कैसा रखते हैं, अगर हम किसी की गलती का मज़ाक बनातेहैँ,  उसका उपहास बनाते हैं या फिर उस गलती को सकारात्मक तरीके से लेकर उसको गलती सुधारने का मौका देते हैं I

 यहां मैं एक बात और कहना चाहूंगी कि जिस बेटी  की गलती पर मां-बाप ने सकारात्मक नजरिया रखा,  अगर वैसा ही नजरिया अपनी बहू के लिए रखेंगे तो किसी लड़की  को कभी पराये पन का एहसास नहीं होगा और वह मन से सब को अपना बना लेगी I