Jindagi ek unsuljhi paheli

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Sunday, 26 January 2020

मेरी डायरी मुझसे गुस्सा हैँ 📖📖😔😔

मेरी डायरी मुझसे गुस्सा हैँ...📖📖😔😔
  आज बहुत दिन बाद ..... दिन क्या शायद हफ्तों गुजर गये....  सोचा डायरी लिखती हूं.... अपनी डायरी को ढूंढा तो पहले तो वह मिली नहीं.... बड़ी मुश्किल से मिली तो  देखा उस पर धूल की परत जम रही थी.... एक बार देखकर दिल दुखा की अरे ये इसकी क्या हालत हो रही है... पहले कितनी चमकती रहती थी .... फिर भी धूल झाड कर  जैसे ही खोला तो डायरी क्या खोली .... देखा तो वह तो सिसकियां ले रही हैँ... लगातार रोये जा रही हैँ.. मैंने घबरा  कर कारण पूछा    तो आप मानोगे नहीं वह मुझसे बात करने को तैयार ही नहीं हुई...  मैंने उसे बहुत समझाया तो उसका रोना तो बंद हो गया पर उसकी जो शिकायते, गुस्सा शुरू हुआ तो रुकने का नाम ही नहीं लिया... वह तो अपनी भड़ास, गुस्सा जो  इतने दिन से उसने  भर रखा था... बोलती गई.. और मै  सुनती....
 वो बोली... आज तुमको मेरी याद कैसे आ गई.... मैंने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी की अब  तुम मेरे पास आओगी भी.... तुमको तो अपने दिल की बातें कहने को  नये दोस्त, नये  लोग मिल गए... अब मेरे पास आ कर क्या करोगी.... जाओ अपने दोस्तों के पास.... मैंने कहा ऐसा नहीं है.... मैं मानती हूं कि मुझे तुम्हारे पास आये  बहुत टाइम हो गया.... पर क्या करती... मुझे टाइम ही नहीं मिलता था   तो डायरी गुस्से में  बोली... हां क्यों मिलेगा  टाइम... 😏...एक टाइम ऐसा  भी था  की  तुम मेरे पास कैसे भी टाइम निकाल कर आती थी.... अपने  दिन की... जिंदगी की... छोटी-छोटी बातें मुझसे शेयर  करती थी.. जब तक तुम मुझे बता नहीं देती थी तुम्हें चैन नहीं पड़ता था.... खाना हजम नहीं होता था... तुम अपनी छोटी से छोटी बात.... अपनी खुशियां 🙂, अपना गम😔, अपनी फ्रस्ट्रेशन😣, अपना गुस्सा 😤... सब मेरे को बताती थी...  पता है जब तुम मुझसे अपनी खुशियां शेयर  करती थी तो मैं भी उतनी ही खुश होती तो जितनी की तुम...  जब तुम  बहुत दुखी होती थी तो मैं भी बहुत दुखी होती थी  और तुम्हें समझाती थी... और पता हैँ जब  तुम अपना गुस्सा मुझ पर उतारती   थी तो मैं चुपचाप सुनती रहती थी.... फिर बाद में तुम को प्यार से समझाती थी.
 मालूम हैँ... मैं बहुत खुश थी की  तुम मुझे अपना सच्चा दोस्त मानती हो... तभी तो खुशी ही नहीं... अपना दुख, अपना  गुस्सा... सब मुझसे शेयर करती हो.... और मैं बहुत प्राउड फील करती थी कि कम से कम मैं तुम्हारी सच्ची हमदर्द हूं... तुम मुझे अपना समझती हो... तब ही तो  जब कोई तुम्हारी नहीं सुनता  था... तुम्हें मेरी जरूरत होती थी... तुम भाग कर मेरे पास आती थी...  पर शायद मैं गलत थी... जिंदगी में हर कोई अपने मतलब के लिए ही साथी ढूंढता है... जब तुम अकेली थी तो मेरे पास आती थी...  क्योंकि तुम्हारे पास  शेयर करने को कोई नहीं था... पर अब.... और डायरी चुप हो गई.
थोड़ी देर हम दोनों  के  बीच  सन्नाटा पसरा   रहा... मुझे समझ ही नहीं आया मैं क्या बोलू...क्यूंकि वो गलत  नहीं थी... गलती मेरी ही थी... पर मैं बहुत सरप्राइज़ हुई  की गॉड  इतना गुस्सा भर रहा है इसमें....मुझे कभी अहसास ही नहीं हुआ...  फिर  मैंने बोलना शुरू किया... तुम ठीक कह रही हो... और सच में गलती मेरी है जो मैंने इतने दिन तक तुम्हें याद नहीं किया.... पर एक बात बताऊ...  चाहे मुझे कितने  भी दोस्त मिल जाये... पर मैं जो बात तुमसे कह सकती हूं.... तुमसे शेयर कर सकती हू ...  हर किसी से कभी नहीं....तुमसे बात करते हुए मुझे कभी भी सोचना नहीं पड़ता ... जो मन आया बोल दिया.... पर दुसरो के साथ मैं ऐसे थोड़े ना बात कर सकती हूँ... दुसरो के साथ बात करते हुए दस  बार सोचना पड़ता हैँ.. किसी को बुरा ना लगे.... किसी की फीलिंग्स हर्ट ना हो...   वैसे भी आदमी दिन भर कहीं भी जाएं... किधर भी रहे... आखिर में थक कर  अपने घर ही आता है ना.... और तुम  मेरा घर  ही हो.... यहां आकर मुझे सुकून... मुझे राहत मिलती है... मैं तुम्हारे पास आकर बिलकुल हलकी हो जाती हू ... पर आज से मैं तुमसे प्रॉमिस करती हूं... मैं कहीं भी जाऊं.... मैं रोज तुम्हारे पास आऊँगी.... तुमसे बातें करूंगी... अब कभी तुमको अकेला नहीं छोडूंगी.... प्रॉमिस.... पक्का वाला प्रॉमिस.🤝 🤝
डायरी थोड़े गुस्से मैं और थोड़ी  हंसी में मेरे गले लग गई... और मैंने भी अपनी डायरी को अपने गले लगा लिया.... फिर पता नहीं कितनी देर तक हम बात करते रहे.... समय का पता ही नहीं चला.🤗🤗

फंडा ये हैँ.... की नये दोस्त बनाओ... पर अपने  सच्चे और असली दोस्तों, अपने पुराने साथियों को  कभी मत छोड़ना. 👬👭👫

15 comments:

  1. Very beautifully written di👌👌👌👌👌

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  2. Thanks a lot ankita 😘😘😘

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  3. Well written Badi mummy
    Well aapne sahi kaha hum chahe kitne hi friends banaye apna asli friend hume nahi bhulna chaiye

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  4. Absolutely betu😘😘...and thanks a lot 👍

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  5. Bahut sahi likha hai..Purane friends ko itni assani se nahin bhulaya ja sakta..is daud bhag bhari zindagi mein ho sakta hia ki humare paas time kam rahta hai apne purane doston se touch base karne ka..lekin jo maja unke paas jake aata hai..jo sukoon milta hai..uska koi mukabla nahin hai..
    well written..

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  6. Bilkul nahi...purane aur sache friends ka sath kabhi nahi chodna chahiye....and thanku sooo much

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  7. Bahut hi beautifully describe kiya hain bhabhi......old is gold

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  8. Really shikha..old is gold...and thanku sooo much😘😘

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