मैं (I)😎💃/🕺
आज मैं नहीं होता तो तुम एक कदम नहीं चल सकते थे... यह घर मुझसे चल रहा है... मैं नहीं होता तो तुम्हें इस दुनिया में कोई नहीं पूछता... मैं, मैं, मैं... ये एक शब्द हर आदमी के अंदर होता है... कोई इस मैं में ही जिंदगी गुजार देता है और सामने वाले को ऐसे जताता है की जैसे वो ही उसकी जिंदगी का मालिक है... वो ही उसका कर्ता धर्ता है.
पर क्या सच में ऐसा ही है... हम सब देखते आये हैं... कितना भी बड़ा आदमी हो... उसके होने पर हम सोचते हैं कि उसके बिना हम कदम नहीं चल सकते...we can't survive without him... पर ऐसा नहीं होता.. अगर वह किसी वजह से वहां नहीं है तो भी दुनिया चलती है... हां कुछ देर के लिए ठिठकती हैँ, अटकती हैँ पर चलना सीख ही लेती हैं. तो फिर क्यों हम इस मैं मे जीते हैं.... क्यों ना हम इस मैं को हम बना ले और सामने वाले को बताएं की you are also important in your place.... तुम्हारा भी अस्तित्व है... उसके विचारों की, भावनाओं की उतनी ही कदर है... फिर देखना अगर तुम उस जगह नहीं भी हुए तो तुम्हे मिस किया जाएगा... तुम्हारी इम्पोर्टेंस समझी जाएगी
पर अगर हम इस मैं में ही जीते रहे तो एक टाइम के बाद उस जगह पर सब घुटन महसूस करेंगे... वहां से निकलने को झटपटायेंगे.. एंड उसके ना होने पर आजाद महसूस करेंगे. इसलिए अगर हमें किसी की दुनिया में जगह बनानी है तो हम बनकर बनानी होगी मैं बन कर नहीं.
आज मैं नहीं होता तो तुम एक कदम नहीं चल सकते थे... यह घर मुझसे चल रहा है... मैं नहीं होता तो तुम्हें इस दुनिया में कोई नहीं पूछता... मैं, मैं, मैं... ये एक शब्द हर आदमी के अंदर होता है... कोई इस मैं में ही जिंदगी गुजार देता है और सामने वाले को ऐसे जताता है की जैसे वो ही उसकी जिंदगी का मालिक है... वो ही उसका कर्ता धर्ता है.
पर क्या सच में ऐसा ही है... हम सब देखते आये हैं... कितना भी बड़ा आदमी हो... उसके होने पर हम सोचते हैं कि उसके बिना हम कदम नहीं चल सकते...we can't survive without him... पर ऐसा नहीं होता.. अगर वह किसी वजह से वहां नहीं है तो भी दुनिया चलती है... हां कुछ देर के लिए ठिठकती हैँ, अटकती हैँ पर चलना सीख ही लेती हैं. तो फिर क्यों हम इस मैं मे जीते हैं.... क्यों ना हम इस मैं को हम बना ले और सामने वाले को बताएं की you are also important in your place.... तुम्हारा भी अस्तित्व है... उसके विचारों की, भावनाओं की उतनी ही कदर है... फिर देखना अगर तुम उस जगह नहीं भी हुए तो तुम्हे मिस किया जाएगा... तुम्हारी इम्पोर्टेंस समझी जाएगी
पर अगर हम इस मैं में ही जीते रहे तो एक टाइम के बाद उस जगह पर सब घुटन महसूस करेंगे... वहां से निकलने को झटपटायेंगे.. एंड उसके ना होने पर आजाद महसूस करेंगे. इसलिए अगर हमें किसी की दुनिया में जगह बनानी है तो हम बनकर बनानी होगी मैं बन कर नहीं.
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