Jindagi ek unsuljhi paheli

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Sunday, 26 January 2020

डबल स्टैण्डर्ड (दोहरी मानसिकता )A short story🤷‍♀️🤔

डबल स्टैण्डर्ड (दोहरी मानसिकता )A short story🤷‍♀️🤔
रोज की तरह सुमन  अपनी सास के लिए चाय ले  कर गई... उसकी  सास  फोन पर  अपनी किसी रिश्तेदार से बात कर रही  थी... जिसके  बेटे की वाइफ की कुछ टाइम पहले मौत  हुई थी...  उसके 15 साल की  एक बच्ची थी...  बेटे   कि माँ चाहती थी कि बेटा दूसरी शादी करले ... पर बेटा इस बात के लिए राजी नहीं था...सुमन की सास उसे  समझा रही थी... कि क्यों नहीं मान रहा तेरा बेटा.... अरे अभी उसकी उम्र ही क्या है और जब उसकी बेटी शादी करके दूसरे घर चली जाएगी तो वह किसके सहारे रहेगा... उसे सहारा देने वाला भी तो कोई चाहिए ना... तू चिंता मत कर मैं आकर उसको समझाउंगी... अरे सारी जिंदगी पड़ी है उसके सामने.
जैसे ही  सुमन की सास ने  फोन रखा...सुमन  ने अपनी सास को चाय का कप पकड़ाते हुए कहा...मम्मी मेरी फ्रेंड की भी ये ही  स्टोरी है... उसके हस्बैंड की  भी  कुछ  टाइम पहले  मौत हो गयी... उसका एक  बेटा  हैं जो 10th क्लास में पढ़ता हैं...में भी उसको दूसरी शादी के लिए समझाती हूँ .
 इतना सुनते ही सुमन की सास बोली अरे अब इस उम्र में दूसरी शादी करके क्या करेंगी ...  अपने बच्चे को पढाये, उसे बड़ा करें...  अब इन सब चीजों में ही उसको अपना मन लगाना चाहिए. इतना सुनते ही सुमन का मुंह खुला का खुला रह गया... लगा कि जैसे वो सुन्न हो गयी...  उसकी सास कुछ देर पहले इसी सिचुएशन में कुछ और कह रही थी और अब कुछ और...  क्यों... क्यूंकि फर्क सिर्फ इतना हैं की उधर एक आदमी है और इधर  एक औरत.
 सुमन बिना कुछ कहे चाय  के खाली कप लेकर किचन की ओर बढ़ गयी...  पर उसका दिमाग उन कप्स की तरह खाली नहीं था जिसमे भरे हुए थे सवाल... सवाल अपनी सास के या कह लो इस समाज के डबल स्टैण्डर्ड को लेकर.. जिनका उसके पास कोई जवाब नहीं था. 

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