Jindagi ek unsuljhi paheli

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Sunday, 26 January 2020

एक बार सोचियेगा जरूर

एक बार सोचियेगा जरूर
गाड़ी को side नहीं देने पर लड़के ने 40 साल के आदमी पर गोली चला दी... स्टूडेंट ने अपने टीचर पर गन चला दी... बच्चे ने मोबाइल में खेलने से मना  करने पर अपने पापा को तलवार से मार दिया.
क्या हो रहा हैं ये.. किस तरह की न्यूज़ चल रही हैं.. यह हो क्या रहा है हम सबको... हम इतने अग्रेसिव कैसे होते जा रहे हैं... पेशंस कहां गया हम लोगों का.. ना सुनना तो हम लोग की आदत ही नहीं है... कोई हमको कुछ कह तो वह हम सुन नहीं सकते. कभी सोचा है ऐसा क्यों... आज हम किस पीरियड में है... जहां 2 मिनट मैग्गी है, इंस्टेंट कॉफी है,  30 मिनट पिज़्ज़ा डिलीवरी है, ऑनलाइन शॉपिंग है,
व्हाट्सएप मैसेजस भेजते से ही लोगों को मिल जाना... वीडियो डाउनलोड ना हो तो गुस्सा..
कही  लोगों को हर चीज इनस्टेंट मिल जाना ही तो उनके अग्रेशन का कारण नहीं है.
 एक टाइम था हम लेटर भेजकर हफ्तों उसके आने का वेट करते थे... उसका भी एक अलग मजा होता था...ट्रैन में जाते थे तो  लोगों से इतना घुलमिल जाते थे कि मंजिल पर पहुंचने की जल्दी ही नहीं होती थी.. बल्कि सफर में ज्यादा मजा आता था..
लोगों के पास टाइम होता था एक दूसरे की सुनने का... हर चीज तसल्ली से होती थी... इसलिए तब के लोगों में पेशेंस ज्यादा होता था... आज लोगों के पास में सब चीजें हैँ... तब भी  वो खुश नहीं है... उनकी ये असंतुष्टि ही  उनकी फ़्रस्टेशन में बदल जाती है और उनकी ये फ़्रस्टेशन  ही एक दिन newspaper की हैडलाइन बन जाती हैँ...  माना आज हम बहुत एडवांस हो गए हैं.... और टाइम के साथ चेंज होना भी चाहिए.... पर सोचिए हम खुश कब थे तब या अब..... संतुष्ट कब थे तब या अब....  बदलाव हो तो अच्छे के लिए... ऐसे बदलाव का क्या फायदा जिससे हम खुद को तो नुकसान पहुचाये ही.. दूसरों के लिए भी  खतरा बन जाए... एक बार सोचिएगा  जरूर. 

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