आज का अकेलापन
भाभी ये आप डायरी में क्या लिखती रहती हो... महीने का हिसाब.... कामवाली बाई ने कविता से पूछा तो वह हंसकर बोली महीने का नहीं जिंदगी का हिसाब लिखती हूं.... बाई नीचे जमीन पर बैठ गयी और सवालिया नज़रों से कविता को देखने लगी... भाभी महीने का हिसाब मतलब🤔... कविता थोड़ी हंसी और फिर बोली ...मेरे साथ दिन भर क्या होता है... मैं क्या करती हूं.... मुझे किस बात पर गुस्सा आता है... कब मैं खुश होती हूं.... यह सब मैं इस डायरी में लिखती हूं... बाई चकित होकर बोली तो फिर आप भैया को और बच्चों को क्यों नहीं बताती हो यह सब.
कविता थोड़ी रुकी और गहरी सांस भर कर बोली तेरे भैया को और बच्चों को मेरे लिए टाइम ही कहां है... बेटा अपने फ्रेंड्स के साथ चैटिंग... बेटी फेसबुक फ्रेंड्स... और तेरे साहब वह दिनभर बिजनेस की टेंशन में रहते हैं..कहते हैं आते ही चिकचिक शुरू.... let me live my time... और वह अपने मोबाइल में बिजी.... पर हां इस डायरी के पास मेरे लिए टाइम ही टाइम है...ये मेरी सारी शिकायतें, गुस्सा, तकलीफ सब तसल्ली से सुनती है... इसके पास बहुत टाइम है मुझे समझने का... बाई कुछ समझी कुछ नहीं और अपने काम में लग गई.
अगले सब अपने अपने काम की भागदौड़ में बिजी थे और कविता सब की जरूरत के अकॉर्डिंग काम कर रही थी कि तभी वह चक्कर खाकर गिर गयी और बेहोश हो गई... सब घबरा गये और उसे डॉक्टर के लेकर भागे. डॉक्टर ने कहा कविता डिप्रेशन में है.... ट्रीटमेंट लंबा चलेगा... सबको बड़ा ताज्जुब हुआ कि किस बात का डिप्रेशन था... हमको तो पता ही नहीं चला.
तभी पीछे से बाई की आवाज आई... साहब आपको पता हो ना हो पर भाभी की डायरी को सब पता होगा... आप लोग के पास टाइम ही कहा था भाभी के लिए.... आप लोगों ने तो अपनी एक अलग ही दुनिया बना ली थी अपना अकेलापन दूर करने के लिए.
सबने एकदम से पीछे मुड़कर बाई को देखा कि ये क्या कह रही है और इसको इतना कुछ कैसे पता है.... जो हमको भी नहीं पता. सब बाई की बात सुनकर एक आत्मग्लानि से भर गए. इस टाइम सब कविता से बात करना चाहते थे पर कविता चुपचाप सो रही थी.
बाई सब को अचरज भरी नजरों से देख रही थी कि इस टाइम सब भाभी से बात करके अपना अकेलापन दूर करना चाहते हैं🤔....भाभी तो कब से यही चाहती थी.
भाभी ये आप डायरी में क्या लिखती रहती हो... महीने का हिसाब.... कामवाली बाई ने कविता से पूछा तो वह हंसकर बोली महीने का नहीं जिंदगी का हिसाब लिखती हूं.... बाई नीचे जमीन पर बैठ गयी और सवालिया नज़रों से कविता को देखने लगी... भाभी महीने का हिसाब मतलब🤔... कविता थोड़ी हंसी और फिर बोली ...मेरे साथ दिन भर क्या होता है... मैं क्या करती हूं.... मुझे किस बात पर गुस्सा आता है... कब मैं खुश होती हूं.... यह सब मैं इस डायरी में लिखती हूं... बाई चकित होकर बोली तो फिर आप भैया को और बच्चों को क्यों नहीं बताती हो यह सब.
कविता थोड़ी रुकी और गहरी सांस भर कर बोली तेरे भैया को और बच्चों को मेरे लिए टाइम ही कहां है... बेटा अपने फ्रेंड्स के साथ चैटिंग... बेटी फेसबुक फ्रेंड्स... और तेरे साहब वह दिनभर बिजनेस की टेंशन में रहते हैं..कहते हैं आते ही चिकचिक शुरू.... let me live my time... और वह अपने मोबाइल में बिजी.... पर हां इस डायरी के पास मेरे लिए टाइम ही टाइम है...ये मेरी सारी शिकायतें, गुस्सा, तकलीफ सब तसल्ली से सुनती है... इसके पास बहुत टाइम है मुझे समझने का... बाई कुछ समझी कुछ नहीं और अपने काम में लग गई.
अगले सब अपने अपने काम की भागदौड़ में बिजी थे और कविता सब की जरूरत के अकॉर्डिंग काम कर रही थी कि तभी वह चक्कर खाकर गिर गयी और बेहोश हो गई... सब घबरा गये और उसे डॉक्टर के लेकर भागे. डॉक्टर ने कहा कविता डिप्रेशन में है.... ट्रीटमेंट लंबा चलेगा... सबको बड़ा ताज्जुब हुआ कि किस बात का डिप्रेशन था... हमको तो पता ही नहीं चला.
तभी पीछे से बाई की आवाज आई... साहब आपको पता हो ना हो पर भाभी की डायरी को सब पता होगा... आप लोग के पास टाइम ही कहा था भाभी के लिए.... आप लोगों ने तो अपनी एक अलग ही दुनिया बना ली थी अपना अकेलापन दूर करने के लिए.
सबने एकदम से पीछे मुड़कर बाई को देखा कि ये क्या कह रही है और इसको इतना कुछ कैसे पता है.... जो हमको भी नहीं पता. सब बाई की बात सुनकर एक आत्मग्लानि से भर गए. इस टाइम सब कविता से बात करना चाहते थे पर कविता चुपचाप सो रही थी.
बाई सब को अचरज भरी नजरों से देख रही थी कि इस टाइम सब भाभी से बात करके अपना अकेलापन दूर करना चाहते हैं🤔....भाभी तो कब से यही चाहती थी.
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