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Sunday, 26 January 2020

हम बदलेंगे.... सिस्टम बदलेगा

हम बदलेंगे.... सिस्टम बदलेगा
कुछ दिन पहले अख़बार में न्यूज़  आयी की हमारी कोई भी यूनिवर्सिटी वर्ल्ड के टॉप 300 में भी स्टैंड नहीं करती... पढ़कर ही इतनी शर्म आई कि हम इतने पीछे हैं... इंडिया के बच्चे बाहर जाकर इतना नाम कर रहे हैं और हमारे देश में इनको सही एजुकेशन भी नहीं मिल रही.
जबकि ये  वही इंडिया है जहां का नालंदा विश्वविद्यालय सारे वर्ल्ड  में फेमस था.... पूरे वर्ल्ड से  यहां एजुकेशन लेने बच्चे आते थे.. क्योंकि तब हम बच्चों को एजुकेट करते थे... मोरल वैल्यूज देते थे... अब तो स्कूल कॉलेज बिजनेस बन गए... हमारा सिस्टम ही ऐसा है कि हम बच्चों को 5 स्टार होटल की सुविधाएं देते हैं पर एजुकेशन का ध्यान नहीं रखते... अपने इंस्टिट्यूट का रिजल्ट 100% जाये उसके लिए हर तरीका अपनाने को तैयार रहते हैं पर  बच्चों को क्या चाहिए... उसका क्या इंटरेस्ट हैं....किसी को परवाह नहीं.
टीचर बच्चों को स्कूल में कहते हैं... मेरी ट्यूशन क्लास ज्वाइन करो... क्यों..  तुम उन्हें  स्कूल में क्यों नहीं सही से पढ़ाते  हो... क्यों नहीं  हम उन बच्चों की एक्स्ट्रा क्लासेज arrange करते जिसको इसकी नीड हैं.... बट अगर ऐसा करेंगे तो ट्यूशन के नाम पर उनको जो बिजनेस है उसका क्या होगा.
आज कॉलेज में एडमिशन के लिए कटऑफ 90% जाती है...इसका मतलब जिनकी 80% आयी वो  बेकार है... तुम कटऑफ इतनी  हाई रखते  हो... व्हाट  अबाउट योर एजुकेशन स्टैंडर्ड... उसकी कटऑफ कौन डिसाइड करेगा.
तो क्या हम यह समझे कि सारा दोष सिस्टम का है नहीं इसमें हमारा...  हम पेरेंट्स का दोष ज्यादा है.... हमने बच्चों को मार्क्स की, परसेंटेज की फैक्ट्री बना दिया...  जहां  90% से नीचे तो एक्सेप्ट ही नहीं करते हैं... और बच्चों के मार्क्स के हिसाब  से  हम  हमारा  स्टैंडर्ड सोसाइटी में देखते हैं... चाहे इस मार्क्स की रेस में   उनका बचपन पीछे रह जाये....  वी डोंट केयर.
क्या हम लोग भी बचपन में 90% लेकर आए थे... चुप क्यों हो गए.. याद कीजिए... और वैसे भी क्या ये  मार्क्स  ही उनका फ्यूचर  डिसाइड करेंगे.
 हमने कभी सोचा कि हम उन्हें educate तो कर ही नहीं रहे  बस  उन्हें  मार्क्स  की रेस में दौड़  लगवा रहे हैं.
 प्लीज मेरी सभी पेरेंट्स  से रिक्वेस्ट है🙏.. अपने बच्चों को समझो... उनका इंटरेस्ट देखो... हर  बच्चा पढ़ाई में अच्छा हो... जरूरी नहीं...वो एवरेज  भी हो सकता है.. उसका कुछ और इंटरेस्ट हो सकता है... हमें वही देखना है.... हम नहीं देखेंगे तो कौन देखेगा.
हमें  हमारी एजुकेशन  पालिसी हर बच्चे को ध्यान में रखकर बनानी होगी और तभी हमारा देश भी वर्ल्ड में अपना  नाम करेगा और एजुकेशन सिस्टम ही सुधार जाये तो हमारी यूनिवर्सिटीज भी वर्ल्ड रैंक में आएंगी.

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