Jindagi ek unsuljhi paheli

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Sunday, 26 January 2020

ये उन दिनों की बात है 🤗🤗

ये उन दिनों की बात है 🤗🤗
 मम्मी मुझे लेट हो रहा है स्कूल के लिए...  मेरा टिफिन दो जल्दी... भैया तुझको कितनी बार बोला मेरे सामान के हाथ क्यों लगाया... मम्मी आप हमेशा दीदी का फेवर लिया करो... मैं तो फालतू हूं ना...  friends  चलो छुपन छुपाई खेलने.. नहीं पकड़म पकड़ाई खेलेंगे.
 आज तो बुधवार है... आज चित्रहार आएगा... गॉड शम्मी कपूर का गाना आ जाये.... और  उसी टाइम  लाइट चली गई तो... इस बार  रामायण में भगवान राम सीता को लेने लंका जायेंगे... मम्मी आप खाना जल्दी बना लेना.... नहीं तो आप रामायण नहीं देख पाओगे.... अरे कोई ऊपर जाकर एंटीना हिलाओ... पिक्चर साफ नहीं आ रही है.... मम्मी दादी हमेशा गुस्सा करती है कि रामायण के टाइम हाथ जोड़कर क्यों नहीं बैठते.

मम्मी इस बार गर्मियों की छुट्टी में मामा के यहां 1 महीने के लिए चलेंगे.... अरे बेटा स्कूल से आकर कपड़े तो बदल ले.... मम्मी भूल गई क्या कल संडे है.... मैं तो खेलने जा रहा हूं.
मम्मी पड़ोस से  अंकल आए थे..उनके यहाँ शादी है तो  गमले लेकर गए हैं घर सजाने को... मैं भी  उनकी हेल्प करने जा रहा हूं.
आज तू टिफिन में क्या लाई है... चल लंच करते हैं... अरे अभी तो सेकंड पीरियड है... टीचर डाँटेगी.... कोई नहीं चुपके से  खाते हैं.
 अरे क्या हुआ दोस्तों... कहां खो गए सब.... वापस आ जाइए... यह तो 'उन दिनों की बात है'.... 😊
यह बेफिक्री बेपरवाही  अब कहां नसीब अब तो तब की बेपरवाही ने कब जिम्मेदारी की चादर ओढ़ ली पता ही नहीं चला... तभी तो किसी ने क्या खूब कहा है...
'स्कूल का वो बैग
 फिर से थमा दे माँ
जिंदगी का बोझ उठाना मुश्किल है '
तभी तो हर इंसान को अपना बचपन इतना प्यारा होता है... इन यादों में जाकर  बाहर ही नहीं आना चाहता है... इन यादों में जाकर वापस बच्चा बन जाता है... सच बताइए आप भी बन गए थे ना बच्चा... आपके चेहरे पर भी एक मीठी मुस्कान थी ना.... क्यों नहीं होगी आखिर...ये ' उन दिनों की बात है'🤗🤗

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