कॉलेज लाइफ बंधनों को तोड़ खुलकर जीने की आजादी, यूनिफॉर्म छोड़ डिजाइनर कपड़े पहनने की मनमानी, एक से आठ पीरियड अटेंड करने का बंधन छोड़ क्लासेज बंक करने की मनमानी,पंखो को परवाज देने की ख़ुशी,अनुशासन, नियम सब छोड़ जिंदगी जिंदादिली से जीने की आजादी I
पर कल्पना कीजिए कॉलेज में आप को स्कूल से भी सख्त माहौल मिले,तो क्या हालात होगी, मानो आसमान से गिरे खजूर में अटके I
मेरे साथ कुछ ऐसा ही हुआ I बी एड कॉलेज में मेरा प्रवेश,जहाँ किसी जेल सा सख्त माहौल I वही स्कूल की तरह यूनिफॉर्म,सख्त अनुशासन, सब कुछ वही जो स्कूल में जिया I
एक बार लंच में मैंने मेरी सहेलियों से कहा,
' आइसक्रीम खाने चलते हैं',
कॉलेज से दो कदम की दूरी पर पार्लर था I सबने मना किया,किसी ने देख लिया तो फंस जाएंगे I पर मेरी जिद के आगे किसी की एक नहीं चली I हमने मजे से आइसक्रीम का स्वाद लिया I
पर हमें नहीं पता था हम आने वाले खतरे से अनजान थे I अगले दिन प्रार्थना सभा (जी हां स्कूल की जैसे प्रार्थना )में हमारी अध्यापिका ने कहा,
' कल कुछ लड़कियां आइसक्रीम का स्वाद ले रही थी,अपने आप हाथ खड़ा कर दो, नहीं तो मुझे नाम लेना पड़ेगा',
हमें काटो तो खून नहीं I मरते क्या ना करते,सबने हाथ ऊपर कर दिए I सबके सामने जो बेइज्जती महसूस हुई,लगा अभी जमीन धंस जाए और हम इस में समा जाए I
तब तो जो हुआ वो तो ठीक,उसके बाद सहेलियों से बाद में कितना कुछ सुनना पड़ा, सब तेरी वजह से हुआ I
सच वो अनुभव भुलाए नहीं भूलता I
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