गहना की आज आखिरी रात थी इस घर में I उसकी सुदीप से शादी हुए महज दो साल हुए थे I दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे, बराबर का कमाते थे I आपस मे मन मिले तो शादी कर ली I दोनों ने बड़े प्यार और अरमानो से इस घर को सजाया था I यह घर सपना था उन दोनों का I पर ना जाने कब गहना के मन मे ये बात बैठ गयी की जब मैं बराबर से सब करती हूं , कमाती हूँ,फिर घर का काम मै ही क्यों करू , हम दोनों को मिलकर करना चाहिए I खाने के मैन्यू से लेकर महीने के राशन का सब मैं ही क्यू सोचू I बस ये छोटी छोटी बातें कब उसके अहम तक पहुंच गयी, उसके मैं तक पहुंच गई और धीरे-धीरे दोनों का झगड़ा बढ़ता गया और बात तलाक तक पहुंच गई I हालांकि सुदीप इसके पक्ष में नहीं था, उसने बहुत समझाने की कोशिश की पर गहना तो कुछ सुनने को ही तैयार नहीं थी I
आज जब उसकी इस घर मे आखिरी रात थी कल से दोनो के रास्ते अलग अलग हो जायेंगे I ना जाने क्यों नींद उसकी आंखों से कोसों दूर थी I जब करवटे बदलते हुए थक गयी तो वह बाहर बरामदे में आकर झूले पर बैठ गयी,कितना पसंद था उसको झूला I जब सुदीप को पता चला,कितने अरमानो से उसके लिए झूला खरीद कर लाया था I इस पर बैठ सुदीप के साथ सुख दुख के ना जाने कितने ही पल साझा किये I
तभी उसकी नजर गई घर के हर एक कोने में, हर एक कोना चीख चीख कर मानो उन दोनों के प्यार की गवाही दे रहा, क्यूंकि दोनों ने मिलकर कितने प्यार से सजाया था I सुदीप ने एक-एक चीज मे गहना की पसंद का ध्यान रखा I
कभी ऑफिस का काम जब ज्यादा होता और रात को भी गहना को काम करना होता तो वह ना जाने कितने कप कॉफी पी जाती,जो सुधीर उसके लिए बिना उसके कहे बना कर लाता I और कितनी ही रातें जब उसको तकिये पर नींद नहीं आती, करवटे बदलती रहती तब सुदीप अपनी बाहों का तकिया बनाता और वह कब उस के आगोश में सो जाती पता ही नहीं चलता I
तो क्या वह गलत हैँ I क्या वो रह पायेगी सुदीप के बिन I नहीं नहीं सुदीप के बिना कैसे रह पाएगी वो,माफी मांग लेंगी उससे I वो पसोपेश मे थी की तभी उसके सामने सुदीप खड़ा था हाथ में कॉफी लिए I
अपने सामने सुदीप को देख गहना सकपका गयी, अपने आसुओ को छिपाते हुए बोली,
' तुम सोए नहीं अभी तक ',
सुदीप उसको कॉफ़ी पकड़ाता हुआ बोला,
' तुम भी तो कहा सोई I मुझे लगा आज हमारी साथ में आखिरी रात हैँ तो क्यों ना मेरे हाथ की कॉफ़ी के साथ गुजार ले ',
उसका दर्द उसकी आवाज से साफ झलक रहा था I ना जाने क्यू ऐसा सुन गहना का दिल भर आया,उसने झट सुदीप के मुँह पर हाथ रखा और कहा,
'सुदीप ऐसा भूल कर भी मत कहना I हां यह आखरी रात जरूर हैँ, पर हम दोनों की नहीं, आखिरी रात हैँ मेरे मैं को छोड़ने की,मेरे ईगो को खत्म करने की I सच कहू तो तुम्हारे बिना मेरा कोई वजूद नहीं, मैं 'मैं 'से नहीं तुमसे हूं, तुमसे मिलकर मैं को हम बनाऊंगी I आखिरी रात हैँ मेरी उस घटिया सोच की I
गहना रोए जा रही, ना जाने कितने आंसू उसके कॉफ़ी के मग में समा गए I सुजीत ने उसके हाथ से कॉफी का मग लिया और नम आवाज से कहा,
' शुक्रिया मेरी जिंदगी में दोबारा आने के लिए' I और दोनों ना जाने कब तक यूँ ही झूला झूलते रहे, गहना ने आज भी सुदीप की बाहों का तकिया बना रखा था I
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