Jindagi ek unsuljhi paheli

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Friday, 17 January 2020

मोटा पैकेज 💶💸💷💵💰

मोटा पैकेज💸💷💵💰
अरे क्या हुआ... आप कमरे में ऐसे  चुपचाप  क्यों बैठे हैं.. आप तो शर्मा  अंकल के गए थे ना मिठाई देने...  मैं तो तैयार हो गई की आप आओगे तो कॉलोनी में सबके चलेंगे मिठाई देने... आखिर हमारी बेटी का इतना अच्छा जॉब लगा हैं अमेरिका में... इतना मोटा पैकेज..बेटा पहले ही ऑस्ट्रेलिया में सेट है... अपने को और  क्या चाहिए... और आप  महाशय ऐसे हो कि मुंह लटका कर बैठे हो... संदीप की वाइफ बोले जा रही थी और संदीप चुपचाप सुन रहा था.
जब  उसकी वाइफ ने उसकी उदासी कारण पूछा तो संदीप बोला श्रेया तुम्हें पता है... मैंने हमेशा से सपना देखा था कि मेरे बच्चों का विदेश में जॉब लगे... अच्छा पैकेज मिले... पता है क्यों... क्यूंकि  हमारे पड़ोसी अंकल शर्मा जी को मैंने  देखा था जब उनके बच्चे.. जो मेरे फ्रेंड्स थे ... बाहर  मोटे पैकेज पर सेट हो गए थे तो शर्मा अंकल कितने खुश थे... पूरी कॉलोनी उनके बच्चों की तारीफ कर रही थी.. और शर्मा अंकल भी  सर ऊंचा करके घूम रहे थे.
तब से मेरा सपना था कि मैं तो कुछ नहीं बन पाया पर अपने बच्चों को जरूर इस मुकाम पर पहुँचाऊँगा.. और आज मेरा सपना भी पूरा हो गया. पर..... पर क्या संदीप की पत्नी बोली... तब संदीप बोला अभी शर्मा जी के घर मिठाई देने गया तो देखा  पूरा घर अस्त-व्यस्त था... मुझे देखते ही शर्मा अंकल बोले... बेटा कुछ खाने को ऑनलाइन मंगा दे... आज खाने वाली भी नहीं आई और बिखरे  घर को देख कर शर्मिंदा होते हुए बोले आज सफाई वाली भी नहीं आयी.... अब तुम्हारी आंटी तो इस दुनिया में रही नहीं .. मुझसे कहा ये  काम होता है.
 तब मैंने कहा अंकल आप अपने बच्चों के पास क्यों नहीं चले जाते... आराम से रहो.... तब अंकल बोले... बेटा शुरू में तो एक,  दो बार गया भी था पर मन नहीं लगा.... अपनी मिट्टी खींच लाई. बच्चे भी क्या करें ....वह भी अपनी जिम्मेदारी में  फस  चुके हैं... वैसे हर महीने अच्छी खासी रकम भेजते  हैं... उससे ही जिंदगी चल रही है.
 बेटा जरा मेरा खाना ऑनलाइन मंगा दो... अब हम बुड्ढों को तो ऑनलाइन मंगाना  आता नहीं.
ये सब देख सुन कर  मुझे समझ ही नहीं आया की अंकलजी को मिठाई खिलाता या नहीं... मुझे  तो उनके प्रेजेंट में अपना फ्यूचर नजर आने लगा और  समझ  ही नहीं आया की इस पल  को सेलिब्रेट करूं या नहीं... यह सब सुनकर श्रेया धम्म  से चेयर पर बैठ गयी  और  वो भी सोच के सागर में डूब गई.

12 comments:

  1. यही दुनिया की सच्चाई है बच्चों को भी अपना भविष्य बनाना है समय के अनुसार अपने को भी ढलना होता है🤔

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  2. जब माता पिता ही साथ न हो तो मोटा पैकेज भी किस काम का है। सब साथ हो तो कम पैकेज मे बहुत आन्नद है।

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  3. ये तो अपनी अपनी सोच है कि वो किसे चुनता है, मोटा पैकेज या परिवार।।

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  4. 👌👌👌👌👌👌👌👌👌

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