दोषी कौन🤔🤔?
कुछ दिन पहले मेरे शहर जयपुर में दोहरा हत्याकांड हुआ... एक महिला और उसके बेटे को उसके ही घर में मार दिया.. मरवाया भी उसके पति ने... पूरा शहर दहल गया.
महिला के घरवालों का रो रो कर बुरा हाल हो गया... लड़की की मां रोते हुए बोली की अरे मेरे दोहिते (बेटी का बेटा ) को तो छोड़ देते... उसे ही श्वेता समझकर पाल लेते. जिसने भी खबर पढ़ी, सुनी.. वह अंदर तक सहम गये और उस महिला की मां और परिजनों से सहानुभूति रखने लगा.
पर क्या इस हत्या मे केवल उसका पति ही दोषी था? ऐसा नहीं कि अचानक उसने अपनी पत्नी और बच्चे को मार दिया.... उन दोनों के बीच बहुत समय से झगड़ा हो रहा था... या यू कह ले कि शादी हुई जब से... लड़का किसी और लड़की से प्यार करता था... उसके घरवालों ने उसकी जबरदस्ती शादी करवाई... लड़का वापस अपनी गर्लफ्रेंड से शादी करना चाहता था... उसने कई बार लड़की के घरवालों को फोन किया कि मुझे इसके साथ नहीं रहना... इसे ले जाओ और मारने से कुछ दिन पहले भी उसने लड़की के भाई को फोन करके कहा था की इसको यहां से ले जाओ.... मुझे इसकी शक्ल से भी नफरत हैँ... नहीं तो मैं इसे मार दूंगा. 2 दिन पहले लड़की ने अपनी मम्मी को वीडियो कॉल करके अपना सूजा हुआ हाथ दिखाया जो की उसके हस्बैंड ने किया था.. उसको बहुत मारा था... अपनी फ्रेंड को भी लड़की ने बताया... पर उसकी मां ने उसको ही समझाया कि कोई नहीं.. हस्बैंड वाइफ में लड़ाई होती रहती हैं.. तू चुप रह, समझौता कर. हद तो तब हो गयी जब उस लड़की ने दिन भर कुछ नहीं खाया कि उसका हस्बैंड भूखा ही घर से चला गया था.
इन सब चीजों को देख कर दुख मुझे भी बहुत हुआ... उस लड़की के लिए , उसके बच्चे के लिए और उसकी मां और घरवालों से बहुत ही सहानुभूति हुई.. पर साथ ही गुस्सा भी बहुत आया कि आज तुम रो रहे उस बात के लिए जो तुम्हें बहुत पहले से ही दिख रही थी... आज तुम कह रहे हो कि अरे मेरे दोहिते को तो छोड़ देते... हम उसको ही श्वेता समझ कर पाल लेते... अरे अपनी श्वेता को तो रखा नहीं गया... उस आदमी ने तो पहले ही बोला था की मैं इसे जान से मार दूंगा... फिर क्या कर रहे थे.. किस चीज का वेट कर रहे थे. अब रोने से क्या फायदा है.
पर क्या दोष केवल लड़की के घरवालों का है.... उस समाज का नहीं जो हर उस लड़की को सवालिया नज़रों से देखती है जो शादी के बाद अपना ससुराल छोड़कर अपने मायके आ जाती है... और सीधे सीधे दोष लड़की को ही देते हैं.
मैंने खुद देखा... मेरे पहचान वालों की बेटी जब शादी के बाद ससुराल छोड़कर घर आ गई... पूरी दुनिया ने उसकी बात बनायीं... उसकी गलती बताई... पर बाद में पता चला कि लड़की की सास उसे किसी साधु के पास में जाने को और रहने को कहती थी. बिना सोचे समझे हमने उस लड़की को गलत ठहरा दिया.ऐसी औरत अगर ढंग से रह ले,हॅस ले, किसी लड़के से बात कर ले... सब उसे ही गलत समझते हैं.
और क्या लड़के के मां-बाप दोषी नहीं थे..जब उनको पता था कि हमारा लड़का किसी और लड़की से प्यार करता है तो क्यों इतनी जिंदगी बर्बाद करी.
आखिर हत्यारा क्या केवल लड़का हैँ... नहीं.. हत्या केवल उसी ने नहीं की है... लड़की के घरवाले, हम सब, और इस समाज... हम सब ने मिलकर उस लड़की को और उसके बच्चे को मारा, उसके सपनों को और उसके अरमानों को कुचला है. वह लड़की खुद भी दोषी है जिसने इतना होने पर भी उस लड़के का साथ नहीं छोड़ा.
प्लीज 🙏🙏🙏अब तो जागो, रोने से क्या होगा, लड़की को इंडिपेंडेंट ही नहीं बनाओ... उसे यह भी समझाओ की शादी करके तुझे धक्का नहीं दिया... तेरे को जब लगे कि कुछ गलत है... तू बिना किसी डर के सबको बता सके... नहीं तो पता नहीं ऐसी कितनी और श्वेता और उसके बच्चे का ये ही हश्र (रिजल्ट )होगा.
कुछ दिन पहले मेरे शहर जयपुर में दोहरा हत्याकांड हुआ... एक महिला और उसके बेटे को उसके ही घर में मार दिया.. मरवाया भी उसके पति ने... पूरा शहर दहल गया.
महिला के घरवालों का रो रो कर बुरा हाल हो गया... लड़की की मां रोते हुए बोली की अरे मेरे दोहिते (बेटी का बेटा ) को तो छोड़ देते... उसे ही श्वेता समझकर पाल लेते. जिसने भी खबर पढ़ी, सुनी.. वह अंदर तक सहम गये और उस महिला की मां और परिजनों से सहानुभूति रखने लगा.
पर क्या इस हत्या मे केवल उसका पति ही दोषी था? ऐसा नहीं कि अचानक उसने अपनी पत्नी और बच्चे को मार दिया.... उन दोनों के बीच बहुत समय से झगड़ा हो रहा था... या यू कह ले कि शादी हुई जब से... लड़का किसी और लड़की से प्यार करता था... उसके घरवालों ने उसकी जबरदस्ती शादी करवाई... लड़का वापस अपनी गर्लफ्रेंड से शादी करना चाहता था... उसने कई बार लड़की के घरवालों को फोन किया कि मुझे इसके साथ नहीं रहना... इसे ले जाओ और मारने से कुछ दिन पहले भी उसने लड़की के भाई को फोन करके कहा था की इसको यहां से ले जाओ.... मुझे इसकी शक्ल से भी नफरत हैँ... नहीं तो मैं इसे मार दूंगा. 2 दिन पहले लड़की ने अपनी मम्मी को वीडियो कॉल करके अपना सूजा हुआ हाथ दिखाया जो की उसके हस्बैंड ने किया था.. उसको बहुत मारा था... अपनी फ्रेंड को भी लड़की ने बताया... पर उसकी मां ने उसको ही समझाया कि कोई नहीं.. हस्बैंड वाइफ में लड़ाई होती रहती हैं.. तू चुप रह, समझौता कर. हद तो तब हो गयी जब उस लड़की ने दिन भर कुछ नहीं खाया कि उसका हस्बैंड भूखा ही घर से चला गया था.
इन सब चीजों को देख कर दुख मुझे भी बहुत हुआ... उस लड़की के लिए , उसके बच्चे के लिए और उसकी मां और घरवालों से बहुत ही सहानुभूति हुई.. पर साथ ही गुस्सा भी बहुत आया कि आज तुम रो रहे उस बात के लिए जो तुम्हें बहुत पहले से ही दिख रही थी... आज तुम कह रहे हो कि अरे मेरे दोहिते को तो छोड़ देते... हम उसको ही श्वेता समझ कर पाल लेते... अरे अपनी श्वेता को तो रखा नहीं गया... उस आदमी ने तो पहले ही बोला था की मैं इसे जान से मार दूंगा... फिर क्या कर रहे थे.. किस चीज का वेट कर रहे थे. अब रोने से क्या फायदा है.
पर क्या दोष केवल लड़की के घरवालों का है.... उस समाज का नहीं जो हर उस लड़की को सवालिया नज़रों से देखती है जो शादी के बाद अपना ससुराल छोड़कर अपने मायके आ जाती है... और सीधे सीधे दोष लड़की को ही देते हैं.
मैंने खुद देखा... मेरे पहचान वालों की बेटी जब शादी के बाद ससुराल छोड़कर घर आ गई... पूरी दुनिया ने उसकी बात बनायीं... उसकी गलती बताई... पर बाद में पता चला कि लड़की की सास उसे किसी साधु के पास में जाने को और रहने को कहती थी. बिना सोचे समझे हमने उस लड़की को गलत ठहरा दिया.ऐसी औरत अगर ढंग से रह ले,हॅस ले, किसी लड़के से बात कर ले... सब उसे ही गलत समझते हैं.
और क्या लड़के के मां-बाप दोषी नहीं थे..जब उनको पता था कि हमारा लड़का किसी और लड़की से प्यार करता है तो क्यों इतनी जिंदगी बर्बाद करी.
आखिर हत्यारा क्या केवल लड़का हैँ... नहीं.. हत्या केवल उसी ने नहीं की है... लड़की के घरवाले, हम सब, और इस समाज... हम सब ने मिलकर उस लड़की को और उसके बच्चे को मारा, उसके सपनों को और उसके अरमानों को कुचला है. वह लड़की खुद भी दोषी है जिसने इतना होने पर भी उस लड़के का साथ नहीं छोड़ा.
प्लीज 🙏🙏🙏अब तो जागो, रोने से क्या होगा, लड़की को इंडिपेंडेंट ही नहीं बनाओ... उसे यह भी समझाओ की शादी करके तुझे धक्का नहीं दिया... तेरे को जब लगे कि कुछ गलत है... तू बिना किसी डर के सबको बता सके... नहीं तो पता नहीं ऐसी कितनी और श्वेता और उसके बच्चे का ये ही हश्र (रिजल्ट )होगा.
This is the reality of our cruel society this is actually hypocrisy.
ReplyDeleteReally.very disgusting 😔
ReplyDeleteVery true and bitter truth of our society di.
ReplyDeleteReally😔
DeleteDoshi hamara samaz hai...but use koi saza nahi milti...kyu...is kyu ka koi zawab nahi kisi ke pass kyuki yahi kadvi sacchai hai...need change in society...
ReplyDeleteReally ...is kyun ka jawab kisi ke pas nahi hain😔
DeleteYes badi mummy
ReplyDeleteइन सब में पूरे समाज की गलती है
Really beta
ReplyDeleteHopefully time will change the mentality someday!!
ReplyDeleteHope ...aisa hi ho👍😌
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