Jindagi ek unsuljhi paheli

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Tuesday, 14 January 2020

स्पेस वर्सेज अकेलापन

स्पेस वर्सेज अकेलापन

हेलो फ्रेंड्स... i am back with my 2nd blog... आपके कमैंट्स ने  मुझे मोटिवेट किया मेरे नए ब्लॉग  के लिए... इसलिए आप कमेंट करने में बिलकुल भी hesitate मत होना यह मेरे लिए एनर्जी ड्रिंक के जैसे है.🥛🥛🤣
 जैसा कि फ्रेंड्स सब कहते हैं.. आई वांट स्पेस... प्लीज लेट me लीव.. तो मेरा न्यू ब्लॉग इसी  टॉपिक पर है.. मेरे को आशा है कि आपको यह पसंद आएगा नहीं भी आये तो bear  कर लेना.😀
 स्पेस .... ढाई अक्षर का छोटा सा शब्द... बट जिसका  मीनिंग बहुत बड़ा है... आज हर किसी को स्पेस,  खुलापन अच्छा लगता है... फिर चाहे  वो घर हो, सड़क हो और चाहे कमरे... सबको ज्यादा स्पेस  अच्छा लगता है. आजकल लोग ये स्पेस रिश्तो में भी लाने लगे हैं... वह चाहते हैं कि हर रिश्ते में खुलापन हो, एक स्पेस हो...  जहां वह किसी का इंटरफेयर पसंद नहीं करते.. फिर चाहे पेरेंट्स एंड बच्चे हो.. भाई बहन  हो.. यहां तक कि हसबैंड एंड वाइफ... वह अपने अकॉर्डिंग लाइफ जीना चाहते हैं.
पर सच में क्या ये स्पेस सही हैँ...  क्या मां पापा को  अपने बच्चों की जिंदगी में क्या चल रहा है... देखने का अधिकार नहीं है... हस्बैंड वाइफ को एक दूसरे की दुनिया में देखने का राइट नहीं है. कभी-कभी ऐसा लगता है कहीं ये  स्पेस हमें अकेला तो नहीं कर रहा.  हम इस space में इतने अकेले हो गए की चाह कर भी अपनी प्रॉब्लम किसी से शेयर नहीं कर पर रहे.. क्योंकि ये स्पेस हमने ही तो चाहा था.. तो कोई क्यों हमारी प्रॉब्लम पूछने आएगा .. क्यूंकि ये फ्रीडम ये अकेलापन हमने ही चाहा था... पता नहीं मुझे समझ  नहीं  आता guys.. अगर आपको आये तो कमेंट के साथ अपने ओपिनियन रखना.
 होप यू  लाइक इट..   मिलते हैं नेक्स्ट ब्लॉग  के साथ..till then bye and have a good day. 

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