Jindagi ek unsuljhi paheli

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Monday, 6 January 2020

असली ख़ुशी 🤔🤔

असली ख़ुशी 🤔

 नीलम ने अपने बॉस को अपना रेजिग्नेशन लेटर दिया तो उसके  बॉस ने कहा नीलम एक बार फिर से सोच लो कहीं ऐसा ना हो बाद में तुम्हें अपने डिसीजन पर अफसोस हो... आज तुम इतनी अच्छी पोस्ट पर हो... तुम्हारी एजुकेशन तुम्हारे काम आ रही है... कहीं जल्दबाजी में लिए  गये डिसीजन से  बाद में तुम्हें पछताना ना पड़े और ऐसा लगे की  मैं भी और वूमेन की तरह जस्ट  हाउस वाइफ  बनकर  रह गयी.
पर नीलम ने कहा.. नहीं सर..  मैंने और मेरे हस्बैंड ने ये डिसिशन बहुत ही  सोच समझ कर लिया है और  ये मेरा रेसिग्नेशन लेटर नहीं मेरे बेटे को मेरी साइड से बर्थडे गिफ्ट हैं... ये सुन कर बॉस  सरप्राइज हुए और बोले.. बर्थडे गिफ्ट तुम्हारा रेसिग्नेशन लेटर... मैं कुछ समझा  नहीं ...तो  नीलम शून्य में देखती हुई बोली आज तक मुझे ये ही लगा कि मैंने और  मेरे हस्बैंड ने अपने बच्चे को सबसे अच्छी लाइफ दी हैं.. हमने उसको बड़े से बड़े स्कूल में एडमिशन कराया... सारे मॉडर्न गेजेट्स दिए... उसका  हाईटेक रूम है... और जितनी भी चीजें थी... उसको हमने किसी चीज की कमी नहीं होने दी... पर एक लेटर ने  मेरी आंखें खोल दी.
 बॉस थोड़ा और क्यूरियस हुए और बोले कौन सा लेटर ...
 तब नीलम ने बताया मेरे बेटे  को स्कूल में एक लेटर लिखने को कहा... जिसमें अपनी बेस्ट विशेज गॉड  से मांगनी थी... आपको सरप्राइज होगा उसने कुछ भी ऐसा नहीं मांगा जो आजकल के बच्चे मांगते... उसने भगवान से कहा प्लीज मेरी मम्मी मेरे फ्रेंड्स  की मम्मी की जैसे मेरे पास दिन भर घर पर रहे... मैं जब स्कूल जाऊं तो मुझे बाय बोलने को बाहर आये..  स्कूल बस से आउ तो मम्मी लेने आए  मेड  नहीं...  मेरे को होमवर्क कराएं... मेरे साथ खेले... मैंने स्कूल में क्या किया मैं उनके साथ शेयर कर सकूं...  शाम तक का वेट नहीं करना पड़े... मुझे बस मम्मी चाहिए वह मेड नहीं  जिसके साथ मुझे ना चाहते हुए भी दिन भर रहना पड़ता हैं...
मेरी मम्मी हर पीटीएम में  मेरे साथ आये  हर स्कूल फंक्शन में मेरे साथ रहे...
सच में सर जब मैंने लेटर  पड़ा तो मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया... मैंने तो आज तक यही सोचा था कि मेरा बेटा बहुत खुश होगा... मेरी एजुकेशन उसके काम आ रही है... पर नहीं एजुकेशन का मतलब यह नहीं कि बच्चों को आर्टिफिशियल खुशी दे...  एजुकेशन का मतलब उनको रियल  खुशी दे पाए..  उनको हर पल हमारा साथ मिले.. मेड्स का नहीं ... इसी मे उनकी सच्ची ख़ुशी हैं... इन आर्टिफिशल चीजों में नहीं..
और हाँ..  मेरे को मेरे डिसिशन पर  ना अभी अफसोस है और ना  आगे होगा... क्योंकि अब मेरे बेटे को मेरा साथ मिलेगा... अपनी मम्मी का... मेड  का नहीं... थैंक यू सर ..  और नीलम अपने बॉस के केबिन से बाहर निकल गई और उसके  बॉस कभी नीलम को जाते हुए देखते  और कभी उसके रेजिग्नेशन लेटर को.

18 comments:

  1. Wah well written...expert writer...nice thought

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  2. 😀thanx a lot dear😘😘🙏

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  3. Very well written bhabhi.....

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  4. Kya baat hai..bilkul expert ki tereh likha hai.very good keep it up👏👍

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  5. Good going Di...
    Very well written...👏👏👏👏😊

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  6. I want to resign and retire too and want to spend more time with my kids and family. I wish i had that choice :)
    Fabulous piece of writing..great going..

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  7. Oh yes is angle se to maine socha hi nahi tha....u men also have right to choose ur choice..coming blog mein I can write on this topic😘😘...anyways thanks a lot🙏🙂

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  8. Very well written di 👌👌👌👌👌

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