हाल ही आयी धुरंधर फिल्म ने अक्षय खन्ना की रातों-रात किस्मत पलट कर रख दी l जो नाम, शोहरत,पैसा, इज्जत आज तक वह हीरो बनकर नहीं कमा पाए आज विलेन बन कर कमा लिया l पिक्चर के हीरो रणवीर सिंह से ज्यादा चर्चे तो अक्षय खन्ना के है l उनके डायलॉग,उनकी एक्टिंग, उनकी डांस स्टाइल हर चीज की तारीफ हो रही है... हो भी क्यों ना अभी उनका वक्त अच्छा है... उनके सितारे बुलंद है तो उनके छूने से अभी पत्थर भी पारस बन रहा है l आज तक जो उनके नाम को जुबान पर लाना पसंद नहीं करते वही सब एक सुर में कह रहे हैं कि वह तो शुरू से ही टैलेंटेड थे बस उनके हुनर की कदर नहीं हुई या किस्मत का साथ नहीं मिला l सच इस जाते हुए साल ने अक्षय खन्ना के सितारे बदल कर रख दिए l वह ना किसी फ़िल्मी पार्टी में जाते...ना उनकी कोई पी आर टीम है बस वह अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पर जीते हैं और देखो आखिर वक्त ने उनके हुनर की कद्र कर उनको सफलता दिला ही दी वो कहावत है ना "देर आये दुरुस्त आये "l
पर कहते हैं ना नाम होता हैं तो साथ में और भी कई चीजे आती है अब जलने वालों की भी कोई कमी नहीं होती... अफवाहों का बाजार गर्म होता .. जितने मुंह उतनी बातें l अब मीडिया में खबर है कि अक्षय खन्ना को "दृश्यम 3" से निकाल दिया l वजह उन्होंने अपनी सफलता को भुनाते हुए अपनी फीस 21 करोड़ कर दी जो बंदा दो से तीन करोड लेता अचानक इतना अंतर l साथ में विग पहनने की शर्त भी रख दी l इसका हश्र क्या हुआ फ़िल्म के डायरेक्टर ने उन्हें पिक्चर से निकाल दिया और दूसरे एक्टर को ले लिया (किसी का नुकसान कब किसी का फायदा बन जाता है) उनके खिलाफ केस अलग कर दिया क्युकि उनको इस सफलता से पहले ही पुराने प्राइज में साइन कर लिया था l लोग तो यह भी कह रहे हैं उनके आसपास चापलूसों की भीड़ बढ़ गई जो उन्हें गलत नसीहत दे रही हैं.. उन्हें भ्रमित कर रहे है l
पता नहीं क्या सच है क्या नहीं बस हां इतना जानते हैं सफलता मिलना मुश्किल नहीं... मुश्किल है उस सफलता को कायम रखना... उसको बनाए रखना... आसमान में रह कर भी खुद को जमीन से जोड़े रखना l गर तुमने यह कर लिया तो तुम असल मायने में सफल हो l क्युकि सफलता मिलने के बाद जो सबसे मुश्किल होता है वो ये की हम आज तक जो काम सरल और सहज़ तरीके से करते आये थे वही सफलता हमारे दिमाग में घुस हमारी सहजता और सरलता के आड़े आ जाती है और जिस हुनर की बदौलत हम सफल हुए वही अब धुंधली सी पड़ जाती है l हम खुद ही खुद को इतना ऊँचा दर्जा दे देते है की नीचे झाकने की जुर्रत ही नहीं करते और उस ऊंचाई पर हम असल में खुद से ही कोसो दूर हो जाते है l इसलिए चार दिन की सफलता की चकाचौंध में अपनी काबिलियत, अपने हुनर, अपनी सहजता को कभी धुंधला मत पड़ने देना l इसे बस अपनी मंजिल का एक पड़ाव समझ फिर से सफर पर निकल पड़ना l
रीशा गुप्ता
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