Jindagi ek unsuljhi paheli

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Saturday, 13 December 2025

ठीक हूँ

ठीक हूँ (कविता)


जब तुम ठीक नहीं होते तो तुम्हारे आसपास के लोग तुमसे पूछते हैं,

"तुम ठीक हो,"

तुम कहते हो "नहीं,"

सामने से जवाब आता है "ध्यान रखो सब ठीक हो जाएगा,"

फिर दो बार...तीन बार या एक आध बार और पूछ लेते हैं "ठीक हो"

और तुम  कह देते हो "हां ठीक हूँ"

वास्तव में अब तुम वह कह रहे हो जो वह सुनना चाहते हैं,

जबकि वह भी जानते हैं कि तुम ठीक नहीं हो,

पर वह बस तुमसे ठीक है सुन खुद आश्वस्त  होना चाहते हैं,

ताकि तुम्हारा ख्याल रखने..तुम्हारा हाल पूछने की औपचारिकता से अब वो बरी  हो सके,

तुम्हारे ठीक नहीं होने पर भी तुम्हारा हाल ना पूछने के अपराध बोध से खुद को मुक्त कर सके,

और तुम  ठीक नहीं हो कर भी  उनको ठीक लगे,

इसलिए कहने भर को ठीक हो जाते हो l


रीशा गुप्ता ✍🏻✍🏻

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