सिर्फ औरतो के तरक्की करने से क्या होगा,
आदमी को भी कुछ तो आगे बढ़ना होगा,
औरत भले अपने चेहरे को ढके या उघाड़े,
पर तुम्हें अपनी नजरों और नीयत को साफ रखना होगा,
औरत तो सिर्फ देह से पुरुष से कमतर है,
पर पुरुष उस पर अपना जोर चला हर मायने में कमतर हो जाता है,
जमाना भले बहुत आगे बढ़ गया.. औरत ने चांद तारों तक के रहस्य को सुलझा लिया,
पर दिन पर दिन आदमी की गर्त में जाती सोच को कौन कभी सुलझा पायेगा,
औरत जब तक पुरुष की मां,बहन, पत्नी, पुत्री है तब तक उसकी इज्जत है,
रिश्तों से परे हर औरत की इज्जत को तार-तार इस पुरुष ने जाने कितनी दफा किया होगा,
यहां की सत्ता भले तुम्हारे हाथ में है इसलिए तुम बेखौफ हो,
पर वहां की सत्ता से जरा तो खौफ किया होता l
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