Jindagi ek unsuljhi paheli

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Tuesday, 3 August 2021

आजादी मेरी नजर में

 

सुबह से वो बहुत खुश थी I कितने दिन से वह प्रयासरत थी  उन बाल मजदूरों को उस कारखाने से आजाद कराने के लिए I जब से उसे उनके बारे में पता चला,वह हर पल तड़प रही,कोशिशे कर रही की उन बच्चों को उस क़ैद से कैसे मुक्त कराएं I

आखिर उस के अथक प्रयासों और मेहनत का ही नतीजा था कि आज वह बच्चे उस क़ैद से आजाद हो रहे थे I वह जल्द से जल्द उन बच्चों से मिलना चाह रही थे, उनकी आंखों में आजादी की चमक और खुशी देखना चाहती थी I पर ये क्या उनकी आंखों में कोई खुशी नहीं, कोई चमक नहीं  I सबके चेहरे पर एक तनाव, चिंता थी कि अब यहां से कहां जाएंगे I क्यूंकि किसी बच्चे को गरीबी की वजह से उनके मां बाप ने बेचा था, और कोई अनाथ था I कम से कम यहां पेट भरने को खाना और सिर ढकने को छत थी,अब कहां जाएंगे I

सहसा उसको एहसास हुआ कि केवल बेड़ियों से  मुक्त कराना ही आजादी नहीं I सही मायनों में आजादी का मतलब एक ऐसा जहां, एक ऐसा आसमान देना है जहा वो खुलकर अपनी उड़ान भर सके I  नहीं तो इतने बड़े आसाम में पँख फड़फड़ाते कही थक कर गिर नहीं जाये, उनको उनके हिस्से का आसमान देना ही होगा I


और वह एक एनजीओ के साथ मिलकर उनको खुला आसमान,मतलब सही मायने में उनकी आजादी दिलवाने के लिए फिर से लग  गई I

6 comments:

  1. Congratulations on your blog being printed in Parivar Patrika.��
    आज़ादी को बहुत सुंदर पेश किया आपने।����
    Is it the first time your blog got published in Parivar?

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  2. "आज़ादी" पर आधारित ब्लॉग पर मेरे विचार इस लिंक में हैं, आप ज़रूर पड़ना -
    https://dishaapandey.blogspot.com/?m=1

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  3. पढ़ती हूँ जल्द 👍😊

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  4. तन की आजादी के साथ-साथ मानसिक और आर्थिक आजादी भी उतनी ही आवश्यक है।
    सुंदर विचारों की अति सुंदर प्रस्तुति 👏👏👏👏

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