Jindagi ek unsuljhi paheli

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Tuesday, 9 September 2025

परामर्श प्रदुषण

 ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण,वायु प्रदूषण इन सबसे कौन परिचित नहीं होगा l पर इन दिनों एक प्रदूषण और चलन में आया है वो है "परामर्श प्रदूषण" l पढ़ कर आप सोच रहे होंगे यह कैसा प्रदूषण है  और कुछ अटपटा भी लग रहा होगा l पर सच तो ये है इस प्रदूषण ने लोगों को उलझन में डाल रखा है.. उन्हें अब इस प्रदुषण से घुटन होने लगी है l वह अनिश्चितता की स्थिति में है कि क्या उनके लिए सही है और क्या नहीं l 


आप जब भी सोशल मीडिया पर जाते होंगे वहां बड़े-बड़े मोटिवेशनल स्पीकर्स को देखते और सुनते होंगे जो हर तरह की सलाह देते हैं l सकारात्मकता, सेहत,कैरियर,किस चीज की सलाह नहीं होती उनके पास l चलो यह तो विशेषज्ञ  हैं उनकी बात में फिर भी  दम होता है l पर आजकल हर कंटेंट क्रिएटर्स अपनी तरफ से आपको तमाम तरह की सलाह देता है l आपको क्या करना चाहिए क्या नहीं l आपके उठने से लेकर सोने तक कि...आपकी दिनचर्या से जुडी हर बात की सलाह l  छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी हर बात की सलाह l मानो उनके पास आपकी हर समस्या का समाधान है... कोई जादुई पिटारा हो जहाँ से हर समस्या का हल और सलाह मिल ही जाएगी और उनके बोलने का अंदाज भी कुछ ऐसा होता है जैसे यह बहुत बड़े विशेषज्ञ हो और हम उनकी बातों में आकर इनका अनुसरण करने लगते हैं l पर इससे लोग उलझन में भी है की किसकी सलाह माने और किसकी नहीं... क्या सही है हमारे लिए और क्या नहीं l क्योंकि अति हर चीज की बुरी होती है l जब हर दूसरा व्यक्ति आपको सलाह दे रहा हो तो जाहिर है उसके विचार,बातें, अनुभव सब अलग-अलग होंगे l एक ही समस्या के जब इतने अलग-अलग परामर्श मिलेंगे तो संशय होना जायज है l बस इसलिए लोग आजकल इस प्रदूषण से ऊब गए... उकता से गए वो l  ये ढेरो सलाह उनकी समस्या का हल सुलझा नहीं रही बल्कि बढ़ा रही है l और अब लोग इस प्रदुषण से दूरी बनाना चाह रहे हैं l 


तभी ख्याल आया पहले हम कहीं भी जाते तो हमारे अपने, नाते रिश्तेदार, हमारे दोस्त, अडोसी पडोसी हमें सलाह देने लगते... हर बात पर अपनी सलाह का पिटारा खोल कर हमारे सामने रख देते l भले हम उनसे सलाह मांगे या ना मांगे पर सलाह देना जैसे वह अपना फर्ज समझते और उस सलाह में एक हल्का दबाव भी होता  कि हमें यह मानना ही चाहिए l धीरे धीरे जब इस सलाह के ढेर ने हमें चारो और से घेर लिया तो हमने उससे बचने के लिए अकेलापन चुना... हम समाज से कटने लगे.. समाज छोड़ो घर में रहने वालों से भी दूरी बनाने लगे और आभासी दुनिया को दोस्त बना लिया l अपनों की बातें हमें बेकार लगती है और अनजानो की सलाह पर आँख मूँद अनुसरण करते है l पर अब यहां भी यही सब तो कहां तक भागेंगे और किस-किस से भागेंगे l और हमारा सामाजिक दायरा तो फिर भी हमारे दायरे में है पर आभासी दुनिया का दायरा तो असीमित है l इस स्थिति में हमें हमारे विवेक से काम लेना होगा l वो मुहावरा है ना "सुनो सबकी करो मन की", बस वही l क्योंकि "कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना"l सलाह देने वाले तुम्हारा जीवन नहीं जी रहे हैं... उन्हें नहीं पता तुम किन स्थितियों से गुजर रहे हैं l वो कहते हैं ना "दूसरों की गलती पर हम जज बन जाते हैं पर वही  गलती जब खुद करें तो  वकील बन  पैरवी करने लगते है l बस यही है  बिना किसी की जिंदगी जिए हम उसकी समस्या नहीं समझ सकते l तो जैसे वायु प्रदूषण में हम चेहरे पर मास्क लगा लेते हैं वैसे परामर्श प्रदूषण का इलाज यही है कि जो तुम्हारा विवेक कहे वही अपनी स्थिति के अनुसार करें l हाँ  जो सलाह तुम्हारे काम की हो उसे अपनाओ बाकी की जाने दो l जाते जाते बताइयेगा मेरी सलाह पर गौर किया 🙏🏻😁



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