Jindagi ek unsuljhi paheli

https://www.blogger.com/blogger.g?blogID=109319055420907736#pageelements

Thursday, 5 March 2020

एक नयी आशा 🤗🤗

एक नयी आशा 🤗🤗
थक गई वह अपनी जिंदगी से... वही बोरिंग रूटीन... रोज सुबह उठो...  बच्चों को स्कूल भेजो... खाना बनाओ... घर के काम करो! लाइफ में कोई एक्साइटमेंट नहीं बचा... कोई होप ... कोई आशा नहीं... यही सोच सोच कर सुमिता सुबह से चिड़चिड़ी हो रही थी... किसी काम में भी उसका मन नहीं लग रहा था... सब काम बेमन से कर रही थी !
तभी डोर बेल बजी... गेट खोला तो कामवाली बाई थी... आते ही वह अपने काम में लग गई... बर्तन साफ करते करते वह कुछ गुनगुना रही थी और तल्लीनता से अपने काम में व्यस्त थी! सुमिता  ने कहा... आज तो बड़ी खुश लग रही है... क्या बात है!
 मेम साहब आज मेरे आदमी ने मुझसे वादा किया है कि वह  अब कभी शराब के हाथ नहीं लगाएगा... और कुछ काम भी करेगा... बस इसी  आशा में मैं खुश हूं!
 अरे तो इसमें नया क्या है.. वो तो हर  थोड़े दिन में तुझसे वादा करता है... पर फिर वही ढाक के तीन पात और शराब पीकर कितना मारता है तुझको... कैसे तू उस पर विश्वास कर लेती है.. तू परेशान नहीं होती  रोज रोज के झूठे वादों से...और वो ही रूटीन  जिंदगी के साथ !
बाई बोली.. मेम साहब मुझे पता है मेरा आदमी कई बार मुझसे वादा कर चुका और तोड़  चुका.. पर वो भी हर  बार इसी आशा के साथ वादा करता है की अब इन बुरी आदतों को छोड़ देगा और मैं भी इसी  आशा के साथ उसके  ऊपर भरोसा करती हूं कि आज नहीं तो कल वो  सुधर जाएगा !इसी आशा में तो हम जिंदा हैं.. हमारी गृहस्ती की गाड़ी चल रही है... बिना आशा के कैसी जिंदगी...जिंदगी में कोई ना  कोई आशा रहनी चाहिए तभी जिंदगी हसीं ख़ुशी चलती है !कह कर बाई  वापस कुछ गुनगुनाते हुए अपने काम में लग गई! और उधर सुमिता सोच रही थी की  जब ये अनपढ़, मजबूर इतनी समझदारी की बातें कर रही है कि आशा से हम जिंदा हैं... हमारे जीवन में उत्साह है तो फिर मैं क्यों नहीं समझ पा रही... मेरे पास तो आशा के बहुत से कारण है... मेरे बच्चों का  सुनहरा भविष्य... मेरे पति की तरक्की और इन सब की खुशी के लिए ही तो मैं जी रही हूं... यही तो मेरी आशा की किरण है! इतना सोचते से ही सुमिता एक नए उत्साह से भर गई  और वापस अपने रोज के  रूटीन को एक नयी  आशा और नये उत्साह के साथ करने लगी..साथ ही साथ वो कुछ गुनगुना भी रही थी !🤗🤗

6 comments: