बचपन के वो दिन👧🍫🍬🍭🤗
श्वेता बहुत दिन बद अपने पीहर आयी सोचा इस बार तीन-चार दिन रुक कर जाऊंगी.... फ्रेश भी हो जाऊंगी और अपनी फ्रेंडस से भी मिल लूंगी.... एक- दो दिन तो यूं ही निकल गए... सब से मिलने..गप्पे लड़ाने... एक दिन दोपहर को सब सो रहे थे... पर उसको नींद नहीं आ रही थी... तो वो अपने कमरे में चली गई और अपनी सब चीजें सँभालने लगी.... उसने अपनी अलमारी खोली तो देखा उसके बचपन के खिलौने उसकी माँ ने बड़े प्यार से संभाल कर रखे थे... उनको देखकर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई.... टेडी को देखते से ही याद आया कि कैसे उसके bday से एक दिन पहले पापा चुपके से ले आए थे और जब वो रात को सो गई तो उसके बगल में रख कर चले गए...सुबह जैसे ही उठ कर देखा तो वो तो खुशी से पागल हो गई... फिर तो वो टेडी जैसे उसका साथी हो गया... कभी उसको अपने से दूर नहीं रखती थी... एक कोने में रखा उसका किचन सेट देखकर याद आया की जब भी मम्मी खाना बनाती तो वो कहती मम्मी बस एक छोटी सी रोटी बनाने दो तो मम्मी बड़े प्यार से कहती... अरे मेरी रानी बेटी जल जाएगी ... तो वो मुँह फुला कर बैठ जाती... तो मम्मी ने उसकी जिद पूरी करने के लिए उसको ये किचन सेट ला कर दिया था... जिसको देख कर कितना खुश हुई थी वो... और ये डॉल उसकी दीदी लेकर आई थी जब वह क्लास में फर्स्ट आई थी... और ये डॉक्टर सेट उसके भैया ने ला कर दिया था जब उसको डॉक्टर बनने का भूत सवार था.
और भी पता नहीं कितनी यादें थी... जितने खिलोने उतनी यादें... आज वो वापस बच्चा बनकर उनके साथ खेलना चाहती थी ... पर उसके साथ खेलने के लिए कोई भी नहीं था वो अकेली थी... तभी उसको याद आया कि आज वो बच्चा बनने के लिए बेचैन हो रही है... और बचपन में जब मम्मी पापा से किसी बात पर गुस्सा हो जाती... कोई उसकी बात नहीं मानता या उसकी जिद पूरी नहीं होती या exams का डर सताता तो वो सोचती की काश वो जल्दी से बड़ी हो जाए जिससे अपनी मनमानी चला सके... अपने हिसाब से रह सके और अपनी सारी जिद पूरी कर सकें पर उसको क्या पता था कि तब जितनी मनमानी चला सकती थी... चला ली.... अब तो बस उसको दुसरो की मनमानी के अनुसार रहना है... तभी जैसे उसको लगा कि अलमारी में रखे सारे खिलौने उसको चिढ़ा रहे हैं... और वह सोचने लगी....
अलमारी से निकले
बचपन के खिलोने🧸🎨
मुझे उदास देख कर बोले
तुम्हे ही
शौक था बड़े होने का😔😏
very true
ReplyDelete🙂👍
ReplyDeleteVery true bhabhi .....wo bachpan kash laut aaye.....beautifully written
ReplyDeleteSuch mein🤗🤗🤗....thanku so much🙂
ReplyDelete😊😊😊
ReplyDelete🙂🤗😘
ReplyDeleteVery true and nice di.Really bachpan ka time golden time hota h.shayad har koi chahta hoga ki uska bachpan dubara laut aye.👍👍👍👍
ReplyDeleteThnx dear😘🤗
ReplyDeleteThnx ankita...such mein bachpan ka samay golden hota hain aur koi aisa nahi hota hoga jo vapas apna bachpan nahi chahta ho🙂👍
ReplyDeleteTrue 👍👍
ReplyDeleteThnx bhabhi🙏🙂
ReplyDeleteNice written ...bachpan ke dino ko koi nahi bhula sakta...tum bhi nahi n mey bhi nahi
ReplyDeleteReally🤗🤗
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