Jindagi ek unsuljhi paheli

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Sunday, 29 December 2019

पुराने से नये का आगमन 🙂

पुराने से नये का आगमन🙂

हमेशा सब रहते  हैं तैयार ...पुराने से नए साल को अपनाने में...
 नयी नयी  प्रतिज्ञा,  नई शुरुआत,  बहुत कुछ नया अपनाने में ..
 पर मैं.. हमेशा छटपटाती  हूं.. जाते हुए साल को समेटने के लिए ,...
समेटना चाहती हूं ... जाते हुए हर साल को.. जो पता है अब कभी वापस नहीं आने वाला ...
कोशिश करती हूं साल के बचे हुए  दिनों के हर एक पल को खुल कर जिउँ...
 एक-एक पल का आनंद लू...
 क्यूंकि पता हैं...   अब कभी नहीं जी पाऊँगी इस साल को.. जो गुजरने ही वाला है कुछ ही पलों  में😔....
 सब उत्साहित हैं  नए को पकड़ने में...
मैं खुश हूं पुराने को समेटने  में...🙂
जो पता हैं  मुझे छोड़कर  बस अब जाने ही वाला है....😌
और तभी लगा कि जो अब नया साल आने वाला है....
 वह भी 1 साल बाद  पुराना होने वाला हैं....
 फिर  मैं उसको भी  समेटने वाली हूँ ..
पर वह  भी  मेरे हाथ से रेत की तरह फिसलने वाला हैं...
तो क्यों ना जी लू मैं हर एक पल..
क्यूंकि क्या पता..... हम रहे ना रहे कल 😊🤗

14 comments:

  1. कितना भी समेट लो, हाथों से फिसलता जरूर है! ये वक़्त है दोस्तो , बदलता जरूर है!!
    😊
    👌👌

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  2. Very beautifully written di👌👌👌👍👍

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  3. Time and tide waits for none!!
    Beautiful ❤️

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  4. So true👍...thanku so much😘

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  5. Jindgi ek safer hai suhana yaha kul kya ho kisne jana....ji lo aaj kul ho na ho...nice blog subse khaas hai risha tumari shabo pe pakad ...bahut hi khubsurti se apni feelings ko describe kiya hai...👍👍👌👌

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