Jindagi ek unsuljhi paheli

https://www.blogger.com/blogger.g?blogID=109319055420907736#pageelements

Wednesday, 11 December 2019

लंच बॉक्स 🍔🍟

लंच बॉक्स 🍟🍔
मम्मी हॉस्पिटल में एडमिट थी.... मैं उनके पास जा रही थी. मेरे पास दो-तीन लंचबॉक्स थे.... किसी में सूप,  किसी में खिचड़ी,  किसी में उनकी जरूरत के अकॉर्डिंग खाना. सामने गाड़ी में भी दो-तीन लंचबॉक्स दिखे... देखकर पता नहीं क्यों एक अजीब सा ख्याल आया... थे तो वह महज़ लंच बॉक्स पर उन लंच बॉक्स में खाने के साथ भरी  थी ढेर सारी फीलिंग्स.. मै जो खाना मम्मी के लिए ले जा रही थी  वो  उनकी हेल्थ के अकॉर्डिंग  था उसमे केवल  खाना नहीं... उनकी परवाह.. उनकी हेल्थ  को ध्यान में रख कर खाना था... सामने गाड़ी में जो लंच बॉक्स थे  उसमे भी खाने वाले की पसंद.. उसकी हेल्थ  के अकॉर्डिंग खाना होगा.
हम जब भी घर से निकलते हैं तो पीछे से आवाज आती है.... टिफिन लिया... खाना खा लेना और हम भी पूछते हैं कि टिफिन में क्या रखा है. लंच के टाइम घर से जरूर फोन आता है... खाना खाया और कभी  नहीं भी आता तो हम फ़ोन करके  पूछते हैं... खाने में क्या रखा है... यह होती है परवाह,  एक अधिकार.
सुबह-सुबह माँ अपने बच्चे का टिफिन नहीं तैयार करती... उसमें भरी होती है उसकी भावनाएं... बच्चे की हेल्थ का ध्यान... उसको अपने से इतनी देर तक दूर रखेगी तो खाने से  ही वो उसके पास रहेगी. वो लंच बॉक्स में रखती हैं अपनी  उसके लिए चिंता,  उसकी  परवाह... और भी बहुत कुछ होता है.👩‍👧‍👦
 एक पत्नी अपने पति के लिए खाना  नहीं रखती है... रखती हैं बहुत सारा प्यार.😍. एक बहन अपने भाई के लिए लंच बॉक्स के साथ रखती हैं अपना हक़  और उसी हक से कहती है खाना नहीं खाया तो देख लेना और भाई भी कहता है तेरे हाथ का बेस्वाद  खाना फिर झेलना पड़ेगा पर वह झेलता नहीं उसे स्वाद से खाता है.😊
 तो इस लंचबॉक्स को महज एक लंचबॉक्स मत समझो यह है आपकी अपनों की आपके लिए परवाह,  चिंता, हक, अपनापन और ढेर सारा प्यार. इसकी रिस्पेक्ट करना सीखो क्योंकि देने वालों ने केवल खाना नहीं दिया अपनी बहुत सारी फीलिंग्स  रखी है.
अगर तुम कभी खाना नहीं खाते तो खाना तो बेकार हुआ ही साथ ही हर्ट हुई रखने  वाले की फीलिंग्स... तो आज से रेस्पेक्ट योर लंच बॉक्स 🙏

32 comments:

  1. Very very nice di👌👌👌👌and thanx lunch box ke bare me itni sari valuable bate batane ke liye.👍👍Ham to simple "khane ka dibba"hi samajhte the.vese har chij ki do side hoti h aur jo insan dono side dekhta h vahi perfect tarike se situation handle kar sakta h.

    ReplyDelete
  2. Thanku soooo much ankita 🙏🙂

    ReplyDelete
  3. Very true bhabhi......very nicely written

    ReplyDelete
  4. It's true Badi mummy
    Log apni feeling ke sath lunch box pack kartein hai

    ReplyDelete
  5. Very true di. Aapne kitne beautiful words mai explain kiya hai hamari lunch box ki feelings ko 👍😊

    ReplyDelete
  6. Really Aapne Dil ki bat likh di
    Beautifully written 👌

    ReplyDelete
  7. Adbhud kya likha hai ek lunch box ke piche kitna kutch hota hai.is liye isko ignore nahi ker sakte bhiya.

    ReplyDelete
  8. Emotional kyun kar rahi hai Risha..Bhaut hi achcha likha..very touching..

    ReplyDelete
  9. Kya likhti ho risha ..kaha se Lati ho dimaag mey itne sare vichar ..adbhut. .

    ReplyDelete
  10. Lunch box me itna sab kuch hota hai me to sirf sabji roti khaker hi lunch band ker deta tha Aaj se felling samaj ker lunch karoonga thanx felling batene ke liya

    ReplyDelete