Jindagi ek unsuljhi paheli

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Sunday, 11 July 2021

अंध श्रद्धा /अन्धविश्वास

 आज अमूमन हर घर में कामवालिया काम पर आती हैं I इनके बिना किसी घर का काम शायद ही पूरा होता हो I आज ये हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गयी I  सुबह-सुबह हर घर में इनका बेसब्री से इंतजार रहता है I इनको घर के कोने कोने की खबर रहती है I लंबे समय तक काम करते करते यह हमारे ही जीवन का हिस्सा बन जाते हैं I


फिर भी हम में से कितने लोग इन पर आंख बंद करके विश्वास करते हैं I शायद बहुत ही कम I घर में से एक चीज  इधर से उधर हुई नहीं कि सबसे पहला शक  इन पर ही जाता है I  ये शक इनके इतने सालो की मेहनत के आगे बेकार  चला जाता है I


 ऐसा ही एक वाक्या मेरे साथ हुआ I हमारे यहां कामवाली बहुत लम्बे समय से आ रही है I हालांकि हम उस पर शक तो नहीं करते पर हाँ आंख बंद करके यकीन करने में शायद झिझक तो होती है I


कल मैंने बाई को उसके महीने की तनख्वाह दीं, अच्छे से दो बार गिन कर I आज उसने मुझसे कहा कि आपने मुझे कल ₹100 ज्यादा दे दिए I क्या फर्क पड़ता अगर वह मुझे नहीं बताती, मुझे तो पता भी नहीं चलता और ना मैं उस पर कभी शक करती,क्योंकि मैंने उसे अच्छे से दो बार तीन बार पैसे गिन कर दिए थे I


पर यह बता कर उसने अपने प्रति विश्वास और मेरा भरोसा जीत लिया I  मेरे मन में उसकी इज्जत और बढ़ गयी I पर अगर वो 100 rs रख लेती नहीं बताती, तो अगर कभी कुछ घर से गायब होता तो मेरा शक उस पर ही जाता , पर शायद अब नहीं जाये I आज उसने 100 rs नहीं गवाएं,अपने प्रति बेशकीमती अंधश्रद्धा और मेरा विश्वास जीता I जो उन 100 rs से कही ज्यादा था I


  फंडा यह है कि आप अपना काम पूरी ईमानदारी से करोगे तो आपका सम्मान और भरोसा और बढ़ेगा और आपको आपकी ईमानदारी का फल एक ना एक दिन जरूर मिलेगा I

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