Jindagi ek unsuljhi paheli

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Saturday, 27 February 2021

आखिर क्यों

 आखिर क्यों ये रीत बनायीं,

अपनी ही बेटी बन जाये परायी!


सोच सोच आँखे भर आयी,

कैसे सह पाऊँगी मैं ये जुदाई!


दिल पे पत्थर भी रखना पड़ेगा,

तुझसे दूर अब रहना पड़ेगा!


पर ये दुआएं हमेशा तेरे साथ हैँ,
दूर ही सही,पर इस दिल के बहुत तू पास हैँ!

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