माँ तू अब मॉडर्न हो गयी हैँ,
घर भी तेरा डिज़ाइनर बन गया हैँ !
मॉडुलर किचन से लेकर चिमनी अब लगी,
रसोई भी तेरी सिस्टेमेटिक हुई!
कूलर की जगह A. C. ने लिए,
दरी की जगह अब सोफ़े हैँ बिछे !
सब कुछ आधुनिक हो गया हैँ,
हर जगह सुविधा जनक बन गयी हैँ !
पर जाने क्यों मुझे तो याद आती तेरी वही रसोई,
जहा तू प्यार से बनाती, प्यार से परोसती,
ज़मीन पर बैठ कर जो खाने का स्वाद था आता,
अब डाइनिंग टेबल के मैनर्स में छिप सा गया हैँ!
मेरे पसीने को तेरे साड़ी के पल्लू से पोंछती,
अब तेरे सलवार कुर्ते में वो पल्लू भी गायब हुआ हैँ !
A.C.में बंद कमरों की वो ठंडक में कहा वो सुकून हैँ आता,
जो खुले कमरों में तेरे कूलर से था मिलता,
कही पानी ख़तम तो नहीं हुआ, बार बार कूलर में झाकना !
एक दरवाजे के बंद होते ही तेरे घर में अब सिमटना,
पहले सारे दरवाजे खुले ही रहते,
चौक, जाल और मुंडेरा पर दिन भर हमारा उछलना और कूदना !
हर कमरे में बेड अब बिछे हुए हैँ,
पर ज़मीन पर गद्दो को डाल कर जो नींद थी आती,
बेड पर वो करवटो में ही जाती !
मना वो घर अब पुराना हो गया था, तेरी तरह ही जर्ज़र हो चुका था,
पर मुझे तो तेरा पुराना घर ही था भाता,
डिज़ाइनर घर में वो सुकून ना आता !
Wah well written....sach mey hamara jamana n hamari kitchen ...kuch aur hi baat thi un dino ki...bahut khub
ReplyDeleteThanku🙏
DeleteVery true....👌👌
ReplyDeleteThanku🙏
Deleteye un dino ki baat hai
ReplyDeleteReally bhabhi🙏🙏🤗🤗
ReplyDeleteBahut hi sahi likha hain bhabhi.... Sahi mein wo bhi kya din the
ReplyDeleteReally shikha🙏🙏🤗🤗
ReplyDeleteReally very true...👌👌👌👌
ReplyDelete🙏🙏🤗🤗👍👍
ReplyDelete👏👏👏
ReplyDelete🙏🙏😍😍😘😘
ReplyDeleteVery nice and heart touching di.👌👌.Ap ki to bat hi kuch aur h👌👌👌👌
ReplyDeleteThanku soooo much🤗🤗🤗🙏🙏🙏🙏
ReplyDeleteVery true di and very heart touching👌👌👌👌. Such mai aap bahut bahut accha likhte ho👏👏👏👏👏
ReplyDeleteThanku soooo much nidhi🙏🙏🙏🙏🙏🙏🤗🤗🤗🤗
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