Jindagi ek unsuljhi paheli

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Wednesday, 1 April 2020

जिंदगी का सफरनामा

चले थे बहुत कुछ की चाह में,
आज सब कुछ लुटा दिया,

चले थे सबको अपना बनाने,
आज वक्त ने तन्हा बना दिया,

चले थे दुनिया को अपनी मुट्ठी में करने,
आज  उसी ने  हमें घुटनों पर ला दिया,

 उड़ना चाहते थे आसमानों में,
 आज पिंजरे का कैदी बना दिया,

ये जिंदगी का  कैसा सफरनामा है,
 जहां जिंदगी भर भागते रहे,  भागते रहे

और  आज  जिंदगी ने एक ऐसे मोड़ पर ला दिया,
जहां कहीं नहीं जाना,  कहीं नहीं भागना,
 एक ना  ख़तम होने वाला, अनचाहा सा ठहराव ला  दिया!

8 comments:

  1. 👌👌👌right Di...

    अभी तो ठहराव ही जिंदगी है ।

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  2. Very nice di👌👌👌👌.ab kavita me bhi.wov great poetess also.you are improving your art day by day.👏👏👏👏👏

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  3. Thanks a lot ankita🙏🙏🙏🙏your comments always inspire me so much🙏🙏🙏🙏thnx again

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  4. परंतु चलना जरूरी है क्योंकि रुक जाना हीमृत्यु है

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