मर्द को कभी दर्द नहीं होता🙎♂️
आप समझ ही गए होंगे आज मै किस टॉपिक पर बात करने वाली हूं.... मर्द, आदमी.. शुरू से हमारे मन में यही समाया है कि मर्द को कभी दर्द नहीं होता, वह कभी सबके सामने रोते नहीं, जो रोता है... वह मर्द नहीं होता.... पूरे समाज में यही धारणा है. इसलिए कभी कोई आदमी रोना भी चाहता है तो सबके सामने नहीं रोता... कहीं अकेले में जाकर. क्योंकि सबके सामने रोने से वह कमजोर समझा जाता है.... कायर समझा जाता है. उसे बुजदिल तक कह देते हैं.
आप मानेंगे नहीं... मैंने कई बार मेरे बड़े बेटे को जो कि अभी एडल्ट हुआ... कहा कि बेटा अपनी फीलिंग्स छुपाया मत कर... अगर रोने का मन हो तो खुल कर रो... तो वह मुझ पर हंसता है. जबकि यह बात मै आज से नहीं... तीन चार साल पहले से, जब से उसने रोना बंद किया तब से कह रही हूं क्योंकि मैं चाहती हूं वह अपनी भावनाएं छुपाए नहीं.. पर उसके मन में भी यही है कि अब मैं रोया तो कमजोर और कायर समझा जाऊंगा. अपने छोटे भाई पर भी हंसता है अगर वो रोता है तो.
इस इंटरनेशनल मैन्स वीक पर सचिन का पोस्ट पढ़ा तो मन को सुकून आया... उसने यही बोला कि हमें अपनी फीलिंग्स जाहिर करनी चाहिए... और अगर वजह है तो रोना चाहिए. रोने से हम कायर नहीं होते... क्योंकि हममे सबके सामने रोने की हिम्मत है... और मैं भी जब पूरी दुनिया के सामने... जब रिटायर हुआ... रोया.. तो मन बहुत हल्का हुआ... पूरी दुनिया भावनात्मक रूप से मेरे और पास आयी... वे मेरी इस घड़ी में मेरे साथ थे.
सच में हमें इस पुरानी रूढ़िवादिता को मिटाना होगा की आदमी कभी रोता नहीं.. क्यों... क्या वह किसी का बेटा, भाई, पति, पिता नहीं है और जब इस रिलेशन से जुड़ी कोई भी बात उसके जीवन में हो तो वह क्यों ना रोए... सारी रूढ़ियां नारी के साथ ही नहीं पुरुषों के साथ भी हैं और ये उनमें से ही एक है.बस फर्क इतना है की इन रूढ़ियों को कोई रूढ़ि कहने की भी हिम्मत नहीं करता.
मै इस इंटरनेशनल मेंस वीक पर हर आदमी से कहती हूं...अगर कोई वजह है तो खुलकर रो .... अपने आंसू तुम्हें कमजोर नहीं मजबूत बनाएंगे, हल्का करेंगे.
हैप्पी इंटरनेशनल मेंस वीक 🙏🙎♂️
आप समझ ही गए होंगे आज मै किस टॉपिक पर बात करने वाली हूं.... मर्द, आदमी.. शुरू से हमारे मन में यही समाया है कि मर्द को कभी दर्द नहीं होता, वह कभी सबके सामने रोते नहीं, जो रोता है... वह मर्द नहीं होता.... पूरे समाज में यही धारणा है. इसलिए कभी कोई आदमी रोना भी चाहता है तो सबके सामने नहीं रोता... कहीं अकेले में जाकर. क्योंकि सबके सामने रोने से वह कमजोर समझा जाता है.... कायर समझा जाता है. उसे बुजदिल तक कह देते हैं.
आप मानेंगे नहीं... मैंने कई बार मेरे बड़े बेटे को जो कि अभी एडल्ट हुआ... कहा कि बेटा अपनी फीलिंग्स छुपाया मत कर... अगर रोने का मन हो तो खुल कर रो... तो वह मुझ पर हंसता है. जबकि यह बात मै आज से नहीं... तीन चार साल पहले से, जब से उसने रोना बंद किया तब से कह रही हूं क्योंकि मैं चाहती हूं वह अपनी भावनाएं छुपाए नहीं.. पर उसके मन में भी यही है कि अब मैं रोया तो कमजोर और कायर समझा जाऊंगा. अपने छोटे भाई पर भी हंसता है अगर वो रोता है तो.
इस इंटरनेशनल मैन्स वीक पर सचिन का पोस्ट पढ़ा तो मन को सुकून आया... उसने यही बोला कि हमें अपनी फीलिंग्स जाहिर करनी चाहिए... और अगर वजह है तो रोना चाहिए. रोने से हम कायर नहीं होते... क्योंकि हममे सबके सामने रोने की हिम्मत है... और मैं भी जब पूरी दुनिया के सामने... जब रिटायर हुआ... रोया.. तो मन बहुत हल्का हुआ... पूरी दुनिया भावनात्मक रूप से मेरे और पास आयी... वे मेरी इस घड़ी में मेरे साथ थे.
सच में हमें इस पुरानी रूढ़िवादिता को मिटाना होगा की आदमी कभी रोता नहीं.. क्यों... क्या वह किसी का बेटा, भाई, पति, पिता नहीं है और जब इस रिलेशन से जुड़ी कोई भी बात उसके जीवन में हो तो वह क्यों ना रोए... सारी रूढ़ियां नारी के साथ ही नहीं पुरुषों के साथ भी हैं और ये उनमें से ही एक है.बस फर्क इतना है की इन रूढ़ियों को कोई रूढ़ि कहने की भी हिम्मत नहीं करता.
मै इस इंटरनेशनल मेंस वीक पर हर आदमी से कहती हूं...अगर कोई वजह है तो खुलकर रो .... अपने आंसू तुम्हें कमजोर नहीं मजबूत बनाएंगे, हल्का करेंगे.
हैप्पी इंटरनेशनल मेंस वीक 🙏🙎♂️
Aabsuluty right
ReplyDeleteThanku didi🤗🙏
ReplyDeleteWell written badi mummy
ReplyDeleteThanku beta
ReplyDelete😊🙏🙏🙏
ReplyDelete😘😘😘😘😘👍
DeleteGood one Risha..Thanks for supporting Mards..:)
ReplyDeleteMy pleasure naveen...and really it's a bitter truth🙂🙂
DeleteRight risha didi
DeleteThanku so much bhabhi 🙏🙏
DeleteWell written di👌
ReplyDeleteThanku so much cheenu 🙏🙂
ReplyDeleteBahut sahi....aurato ke bare mey bahut se blogs padhe... Mardo ki bari bhi aa hi gai akhir ...vaise tumara support subko baraber hai ...hats off dear ...well written
ReplyDeleteThanku dear...ye bhi hamare hi samaj ka ek kadwa such hain😔
ReplyDeleteHamri feelings likhne ke liya dhanyawad Mard ko bhi dard hota hai bilkul sahi
ReplyDeleteBilkul hota hain ..and they have also right to express their feelings
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