Jindagi ek unsuljhi paheli

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Tuesday, 29 October 2019

दिवाली की भागदौड़ के बाद आओ... थोड़ा सुस्ता ले 😌😴😴😴

दिवाली की भागदौड़ के बाद आओ... थोड़ा सुस्ता ले 😊😴😴

महीनों से थे व्यस्त..
घर की सफाई में...🧹🧹
दिवाली पर थे व्यस्त... घर की सजावट में...✨✨
खुद की सजावट में.💆‍♀️💃
जमावड़ा था मेहमानों का...👨‍👩‍👧‍👦
पकवानो का...🎂🥞🍟🍔
यहाँ वहां आने जाने का....
अब सब कुछ जैसे थम सा गया.
भर दिए नाश्ते वापस डब्बो में...
समेट दी नयी चादरे वापस अलमारी में.
अब नहीं कोई चिंता...
घर थोड़ा बिखरा भी होगा...
नहीं कोई चिंता... बाल थोड़े बिखरे भी होंगे.
चलो ले लो अपना हमेशा का साथी...अपना अखबार 📰...
वो  भी आया मना कर दिवाली...  तीन दिन बाद...
आओ दोपहर में बैठ कर थोड़ा उसे पड़े...
और थोड़ा  सा सुस्ता ले.
अब नहीं कोई भाग दौड़.. आओ खुद से खुद को मिल ले.
आओ दिवाली की भाग दौड़ के  बाद... फिर से  थोड़ा सुस्ता ले 🙂😴😴😴


27 comments:

  1. Well written di👏👏
    Really Dil ki bat

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  2. Well written bhabhi.👏👏

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  3. Well said n well written bhabhi

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  4. Well written badi mummy👍👏👏👌

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  5. Wah Risha wah..Too to Kavi (Poet) bhi ho gayi hai...Maan gaye Ustaad..
    Well done..Bhaut badhiya..

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  6. 👌👌👌👌🍬🙏🙏🙏🙏🙏

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  7. lovely and beautifully written

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  8. एकांत "ईश्वर" का दिया सबसे,
    "नायाब" तोहफा है..

    और

    "अकेलापन" दुनिया की दी हुई
    सबसे बड़ी सजा है...
    so enjoy your rest

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